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ब्रॉडकास्टर, एमएसओ डैस के तीसरे चरण में एनालॉग सिग्नल को रोकने पर एकजुट

मुंबई: ब्रॉडकास्टरों और मल्टी-सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) ने दिल्ली हाई कोर्ट के ताज़ा आदेश का स्वागत किया है जिसमें डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) के तीसरे चरण की समय सीमा के विस्तार संबंधित याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं। यह समय सीमा 31 दिसंबर 2015 को समाप्त हो चुकी है।

इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन (आईबीएफ) और एमएसओ का प्रतिनिधित्व करनेवाला उद्योग संगठन ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (एआईडीसीएफ) यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय हो गया है कि एनालॉग सिग्नल कोर्ट द्वारा निर्धारित तारीख के अनुसार बंद कर दिए जाएं।

आईबीएफ ने अपने सभी संबद्ध एमएसओ और स्थानीय केबल ऑपरेटरों (एलसीओ) को अपने सदस्यों को सूचित करने के लिए कहा है कि इन क्षेत्रों में 24 नवंबर 2016 की समय सीमा तक सिस्टम को डिजिटल में बदल लें। यह भी स्पष्ट किया गया है कि समय सीमा खत्म होने पर केवल डिजिटल सेट-टॉप बॉक्स (एसटीबी) के माध्यम से ही चैनलों को प्राप्त किया जा सकता है।

एआईडीसीएफ ने अपने सभी सदस्यों को कहा है कि वे ब्रॉडकास्टर के साथ काम करने के लिए तुरंत डैस को तीसरे चरण के बाज़ारों में एनालॉग सिग्नल बंद करें और डिजिटलीकरण को लागू करें। आईबीएफ को भेजे गए एक अलग मेल में, एआईडीसीएफ ने कहा है कि एनालॉग सिग्नल को बंद कर सिर्फ डिजिटल सिग्नल को प्रसारित करें।

vd-wadhwa03-150x150एआईडीसीएफ के प्रमुख वीडी वाधवा ने टिप्पणी की, “दिल्ली हाई कोर्ट ने डैस तीसरे चरण के क्षेत्रों के डिजिटलीकरण से सभी बाधाओं को हटा दिया है और डैस चौथे चरण के क्षेत्रों में समय पर क्रियान्वयन के लिए मंज़ूरी दे दी है। एआईडीसीएफ डिजिटलीकरण को लागू करने के लिए कोर्ट और विभिन्न अन्य मंचों पर लड़ रहा है। हमने पहले से ही सभी सदस्य एमएसओ को सूचित कर दिया है कि वे ब्रॉडकास्टर के साथ बातचीत करें और तुरंत एनालॉग सिग्नल बंद कर देश भर में डिजिटलीकरण को लागू करने के लिए काम करें।

उन्होंने कहा, “एआईडीसीएफ की ओर से, मैं डिजिटलीकरण के लिए मार्ग प्रशस्त करने के लिए इस महत्वपूर्ण आदेश के लिए जस्टिस सचदेवा को धन्यवाद देना चाहूंगा। मैं सभी संबंधित पक्षों से अनुरोध करूंगा, जिसमें सरकारी निकाय भी शामिल हैं कि वे सारी बाधाएं खत्म कर डिजिटलीकरण पूरा करने में मदद करें और इससे सभी को लाभ होगा और ‘डिजिटल इंडिया’ सपने को साकार करने में मदद मिलेगी।”

जस्टिस संजीव सचदेवा की एकल सदस्यीय बेंच ने 3 नवंबर को पारित आदेश डैस तीसरे चरण के क्षेत्रों में एनालॉग सिग्नल को बंद करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

पीठ ने याचिकाकर्ताओं को यह निर्देश भी दिया कि 24 नवंबर तक तीन सप्ताह के भीतर डैस को अपना लें और डिजिटल में बदलने की समय सीमा के बारे में अपने नेटवर्क पर एक स्क्रॉल चलाकर ग्राहकों को सूचित करें।

जैसा कि टेलिविज़न पोस्ट ने पहले खबर दी है कि आठ याचिकाओं को पीठ ने खारिज कर दिया है। ये याचिकाकर्ता पांच राज्यों कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश से हैं।

विजय डिजिटल, श्री चौदेश्वरी केबल नेटवर्क, योगेश केबल नेटवर्क, अम्मा टीवी, अथुल्य इंफोमीडिया, पांचजन्य मीडिया, साई केबल टीवी नेटवर्क और सुनील कुमार सिंह की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, दो याचिकाओं को मामले से अलग कर दिया गया है, जबकि चार याचिकाओं पर 9 नवंबर को विचार होना है।

वर्ष की शुरुआत में विभिन्न राज्यों में कई हाई कोर्ट द्वारा पारित स्थगन आदेश ने डैस तीसरे चरण के कार्यान्वयन को ठप कर दिया था। सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट से निर्देश लिया कि डैस तीसरे चरण के मामलों को दिल्ली हाई कोर्ट में हस्तांतरित कर दिया जाए। हालांकि, मामलों के हस्तांतरण में काफी समय लग गया।

आदेश और अधिक उपयुक्त समय पर नहीं आ सकता था क्योंकि पूरा देश चौथे और अंतिम चरण में 31 दिसंबर को खत्म हो रही समय सीमा के साथ डिजिटल पर जाने की उम्मीद कर रहा है। हालांकि, चौथे चरण की प्रगति पर कम जानकारी है, जो काफी हद तक देश के ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करता है।

इन याचिकाओं की बर्खास्तगी के साथ, इन मामलों में विभिन्न हाई कोर्ट द्वारा दिया गया स्थगन आदेश रद्द हो गया है और अब लागू नहीं रहेगा।