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केबल नेटवर्क स्थानीय मसलों के चैनल चला सकते हैं, एफडीआई घटाने की ज़रूरत नहीं: ट्राई

मुंबई: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) की ‘प्लेटफॉर्म सेवाओं (पीएस) के लिए नियामक ढांचा’ संबंधी सिफारिशों के अनुसार, मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (एमएसओ) सैटेलाइट न्यूज़ ब्रॉडकास्टरों की तरह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को घटाकर 26 प्रतिशत की सीमा में लाए बिना स्थानीय मसलों पर केबल चैनल चला सकते हैं।

केबल ऑपरेटरों को स्थानीय मामलों के चैनल चलाने के लिए अनुमति देते हुए नियामक संस्था ने स्पष्ट किया है कि वे राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ का ट्रांसमिशन नहीं कर सकते। ट्राई ने सिफारिश की है कि केबल ऑपरेटर द्वारा चलाए जानेवाले पीएस चैनल पर केवल स्थानीय मामले व सूचना बुलेटिन होनी चाहिए जो पूरी तरह स्थानीय स्रोत से जुटाए गए हों।

विनियामक ने यह भी कहा कि डिस्ट्रीब्यूटर प्लेटफॉर्म ऑपरेटरों (डीपीओ) को अपनी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को कम करने की आवश्यकता नहीं है। ट्राई ने कहा, “एक मसला जिस पर विचार की ज़रूरत है वह है न्यूज़ और समसामयिक मामलों (सैटेलाइट न्यूज़ चैनल) को प्रसारित करने वाले ब्रॉडकास्टरों को कम प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है, न्यूज़ और समसामयिक मामले पी एस प्रसारित नहीं कर सकते तो इस संबंध में उन पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा कम करने वाला नियम लागू नहीं होना चाहिए।”

केबल चैनलों के ‘स्थानीय मामलों पर बुलेटिन’ की लोकप्रियता को स्वीकार करते हुए प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि डीपीओ को उनके चैनल पर न्यूज़ कंटेंट के प्रसारण की अनुमति देना न तो सैटेलाइट न्यूज ब्रॉडकास्टरों के प्रति निष्पक्ष रहेगा जिन्हें न्यूज़ प्रसारण के लिए भारत में कड़े विनियामक मानदंडों को मानना पड़ता है और न ही यह उचित सलाह है क्योंकि खबरों का अनियमित प्रसार सुरक्षा कारणों से उचित नहीं है।

ट्राई ने कहा, “न्यूज़ एजेंसी सूत्रों से न्यूज़ या टीवी चैनलों से ली गई राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ पीएस के लिए प्रसारण का कंटेंट नहीं हो सकती।”

जहां तक पीएस पर स्थानीय न्यूज़ और समसामयिक मामलों के बुलेटिन के प्रसारण का संबंध है, ट्राई ने गैर-खबरों के रूप में निम्नलिखित श्रेणियों को रखा है और इसके प्रसारण की अनुमति है:

(i) स्थानीय घटनाओं और अन्य स्थानीय मामलों के बारे में सूचना जो स्थानीय स्तर पर और स्थानीय स्रोत से जुटाई गई हों और जो न्यूज़ एजेंसियों से या न्यूज़ चैनलों/सूत्रों के प्रसारण से प्राप्त न हों;

(ii) खेल की इवेंट्स से संबंधित सूचना लाइव कवरेज को छोड़कर। हालांकि, स्थानीय खेल इवेंट्स की लाइव कमेंट्री की अनुमति दी जाती है इस शर्त पर कि उसके लिए प्रसारण अधिकार किसी और के पास नहीं हो;

(iii) यातायात और मौसम से संबंधित सूचना;

(iv) सूचना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों, उत्सवों की कवरेज;

(v) परीक्षाओं, रिज़ल्ट, एडमिशन, कैरियर परामर्श से संबंधित विषयों की कवरेज;

(vi) रोजगार के अवसरों की उपलब्धता; और,

(vii) स्थानीय प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए बिजली, पानी की आपूर्ति, प्राकृतिक आपदाओं, स्वास्थ्य अलर्ट आदि जैसी नागरिक सुविधाओं से संबंधित सार्वजनिक घोषणाएं।

स्थानीय बुलेटिनों से उत्पन्न होने वाली संभावित कानून और व्यवस्था की समस्या के लिए डीपीओ को पहले से इस संबंध में अधिकृत अधिकारी से पूर्व अनुमति प्राप्त करने की ट्राई ने सिफारिश की। राज्य सरकार को इस तरह की अनुमति देने के लिए कोई शुल्क नहीं लेना चाहिए।

ट्राई ने पीएस सेवाएं देने वाले डीपीओ से केबल टेलिविजन नेटवर्क नियम, 1994 के तहत निर्धारित कार्यक्रम और विज्ञापन संहिता का पूरा पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है।

ट्राई ने उल्लेख किया कि विभिन्न प्रकार के डीपीओ के लिए एफडीआई सीमा और नेटवर्थ आवश्यकता पहले से ही ज़रूरी हद तक, विभिन्न नियमों में लागू की गई हैं।

इसके अलावा ट्राई ने यह भी कहा कि लगभग सारे डीपीओ पहले से ही अपने नेटवर्क पर पीएस प्रदान कर रहे हैं; इसलिए, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि वर्तमान सीमा/आवश्यकताएं डीपीओ द्वारा पीएस की पेशकश करने के लिए पर्याप्त हैं।

ट्राई ने कहा कि मौजूदा एफडीआई सीमा या नेटवर्थ आवश्यकता में कोई परिवर्तन ज़रूरी नहीं है, इसलिए इसे पीएस के लिए प्रस्तावित माना जाना चाहिए।

ट्राई ने पीएस की परिभाषा की सिफारिश निम्नानुसार की है: “डिस्टरीब्यूशन मंच ऑपरेटरों द्वारा प्लेटफार्म सेवाएं विशेष रूप से उसके अपने उपभोक्ताओं के लिए प्रसारित की जानेवाली सेवाएं हैं और इसमें दूरदर्शन चैनल व पंजीकृत टीवी चैनल शामिल नहीं। पीएस में विदेशी टीवी चैनलों को शामिल नहीं किया जाएगा जो भारत में पंजीकृत नहीं हैं।”

इस विनियमन की उत्पत्ति, सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति (2011-12) की 36वीं रिपोर्ट में व्यक्त चिंताओं से हुई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि डीपीओ अपने पीएस नेटवर्क पर कुछ भी गैरकानूनी प्रसारित नहीं कर रहे हैं और वे ब्रॉडकास्टरों की तरह ही लागू नियम-कायदों के पालन के लिए ज़िम्मेदार हैं।