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दिल्ली हाई कोर्ट डैस के तीसरे चरण के मामलों पर 3 नवंबर को करेगा गौर

मुंबई: दिल्ली हाई कोर्ट ने डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) के तीसरे चरण की अधिसूचना व समय सीमा को चुनौती देनेवाले दो मामलों को चीफ जस्टिस रोहिणी जी. और जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ को ट्रांसफर कर दिया है।

डैस के तीसरे चरण की समय सीमा से संबंधित बाकी मामले, जिनमें अधिसूचना को चुनौती नहीं दी गई है, उन पर जस्टिस संजीव सचदेवा दिवाली के बाद 3 नवंबर को सुनवाई करेंगे। इनमें से बहुत से मामलों में हाई कोर्ट द्वारा दी गई राहत की मीयाद खत्म हो चुकी है।

DASजस्टिस सचदेवा की बेंच ने कहा है कि डैस के तीसरे चरण के ऐसे मामले, जिनमें हाई कोर्टों द्वारा बढ़ाया गया समय खत्म हो चुका है, उन सभी को खारिज कर दिया जाएगा। इसमें 11 ऐसे मामले हैं जिनका ताल्लुक डैसे के तीसरे चरण की समय सीमा बढ़ाने से है।

बेंच ने 6 अक्टूबर को सभी पक्षों को निर्देश दिया था कि वे डैस के तीसरे चरण से संबंधित ऐसे मामलों को अलग-अलग कर लें जो उसकी अधिसूचना व समय सीमा को चुनौती देते हैं और जो केवल समय सीमा को चुनौती देते हैं।

बुधवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बेंच के सामने एक सूची प्रस्तुत की जिसमें स्पष्ट रूप से मामलों को दो श्रेणियों में अलग-अलग कर दिया गया है।

मंत्रालय की सूची के मुताबिक में, सभी मामलों में से 22 में जैस के तीसरे चरण की अधिसूचना व समय सीमा को चुनौती दी गई है, जबकि 11 मामलों का वास्ता केवल समय सीमा से है।

तदनुसार, बेंच ने ऐसे सभी मामलों को खंडपीठ को ट्रांसफर कर दिया जिनका ताल्लुक तीसरे चरण की समय सीमा से नहीं है। इन मामलों पर सुनवाई 3 नवंबर को रखी गई है। बेंच ने सूचना व प्रसारण मंत्रालय से यह भी कहा है कि वो इन मामलों के याचिकाकर्ताओं को दस्ती नोटिस जारी कर दे।

delhi_high_court1इस बीच नासिक ज़िला केबल ऑपरेटर्स फेडरेशन और रेडिएंट डिजिटेक की याचिकाओं की सुनवाई कर रही खंडपीठ ने अन्य मामलों के साथ इन पर भी गौर करने की तारीख 3 नवंबर मुकर्रर की है। इन दो मामलों को उन 22 मामलों के साथ संयुक्त कर दिया गया है जिनमें से कुछ में केबल टीवी के डिजिटलीकरण के संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि कुछ का ताल्लुक मनोरंजन टैक्स से है।

मालूम हो कि दिल्ली हाई कोर्ट डैस के तीसरे चरण से जुड़े सभी मामलों की निर्धारित अदालत है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने देश की विभिन्न अदालतों द्वारा डैस के तीसरे चरण की समय सीमा पर दिए गए स्टे ऑर्डरों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चला गया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी मामलों को दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया और उसे ही ऐसे सभी मामलों की निर्दिष्ट अदालत भी बना दिया।