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तीसरे चरण का समय बढ़ाने के आठ मामले खारिज, तीन हफ्ते में डैस पर अमल का निर्देश

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट की एकल पीठ ने डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) के तीसरे चरण को लागू करने के लिए समय बढ़ाने की मांग करनेवाले आठ मामलों को खारिज कर दिया है। तीसरे चरण के लिए निर्धारित समय सीमा 31 दिसंबर 2015 को समाप्त हो चुकी है।

जस्टिस संजीव सचदेवा की एक सदस्यीय बेंच ने याचिकाकर्ताओं को तीन सप्ताह के भीतर डिजिटलीकरण पर अमल करने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ताओं को डिजिटल हो जाने के बारे में, अपने नेटवर्क पर एक स्क्रॉल चलाने का भी निर्देश दिया गया है।

इसका मतलब यह है कि विभिन्न हाई कोर्ट द्वारा दिए गए स्टे ऑर्डर अब लागू नहीं रहेंगे क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट ही डैस के तीसरे चरण से संबंधित सभी मामलों के लिए निर्दिष्ट अदालत है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब डैस के चौथे चरण की समय सीमा 31 दिसंबर 2016 को खत्म हो रही है।

बेंच ने कहा कि ये मामले अब बेकार हो चुके हैं, क्योंकि समय विस्तार की मांग पहले ही पूरी हो चुकी है और समय सीमा का विस्तार उन तारीखों के बाद तक भी रहा है।

चार मामलों को 9 नवंबर को सुनवाई के लिए रखा गया है क्योंकि याचिकाकर्ताओं के वकील तैयार नहीं थे, जबकि दो मामलों को इस विषय से अलग कर दिया गया है।

बेंच के सामने डैस के तीसरे चरण के विस्तार से संबंधित कुल 14 मामले रखे गए हैं। इनमें साई केबल टीवी नेटवर्क, विक्टरी डिजिटल, सुनील कुमार सिंह, श्री चौदेश्वरी केबल नेटवर्क, पांचजन्य मीडिया, भारत डिजिटल केबल नेटवर्क, नासिक ज़िला केबल ऑपरेटर्स एसोसिएशन, भीम ऋद्धि डिजिटल सर्विसेज़, योगेश केबल नेटवर्क, ऋद्धि विज़न, अम्मा टीवी, कोल्लम केबल्स, कोल्लम इंटरनेट केबल डिस्ट्रीब्यूशन और अतुल्य इन्फोमीडिया के मामले शामिल हैं।

इस बीच चीफ जस्टिस रोहिणी जी. और जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल की डिवीज़न बेंच ने नासिक ज़िला केबल ऑपरेटर्स एसोसिएशन और रेडिएंट डिजिटेक नेटवर्क के मामले को 17 नवंबर को सुनवाई के लिए रखा है। इन मामलों में आदेश पहले सुरक्षित रखे गए थे। यह सुनवाई इसलिए रखी गई है क्योंकि बेंच को इन दो मामलों में आदेश को रिकॉर्ड पर रखे जाने के लिए कुछ स्पष्टीकरण चाहिए।

2011 की डैस अधिसूचना को चुनौती देने वाली अन्य मामलों को 23 नवंबर को सुनवाई के लिए रखा गया है। बेंच ने अपने सामने उपस्थित हुए पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए एक मौका और दिया है।

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने डैस के तीसरे चरण से संबंधित ऐसे मामलों को अलग-अलग कर दिया था जो उसकी अधिसूचना व समय सीमा को चुनौती देते हैं और जो केवल समय सीमा को चुनौती देते हैं। समय सीमा बढ़ाने के मामलों पर सुनवाई अब जस्टिस सचदेवा की बेंच कर रही है, जबकि बाकी मामलों की सुनवाई डिवीज़न बेंच कर रही है।

मालूम हो कि देश के विभिन्न हिस्सों में हाई कोर्टों ने डैस के तीसरे चरण की समय सीमा पर स्टे दे दिया था। इन स्टे ऑर्डरों से डैस के तीसरे चरण पर अमल रुक गया। इससे निजात पाने के लिए सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में जाकर गुहार लगाई कि सारे मामले वो अपने यहां या दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने डैस के तीसरे चरण से संबंधित सभी मामलों को दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया और उसे ही इन मामलों की निर्दिष्ट अदालत बना दिया।

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