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दिल्ली हाई कोर्ट ने डैस के तीसरे चरण का समय बढ़ाने के चार और मामले बेमानी करार दिए

मुंबई: दिल्ली हाई कोर्ट ने डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) के तीसरे चरण की समय सीमा बढ़ाने से संबंधित चार और मामलों को निरर्थक बताते हुए उनका निपटारा कर दिया है।

अब तक जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने कुल 12 मामलों का निपटारा कर दिया है। इसका मतलब यह है कि समय सीमा विस्तार से संबंधित सभी मामले अब निपट हो चुके हैं।

delhi_high_court1विभिन्न हाई कोर्ट द्वारा डिजिटलीकरण करने के लिए दिया गया अतिरिक्त समय भी खत्म चुका है है। इसलिए इन मामलों को निरर्थक करार दिया गया है।

डैस की अधिसूचना को ही चुनौती देने से संबंधित अन्य मामले अलग खंडपीठ के पास हैं। उन पर 17 और 23 नवंबर को सुनवाई होगी।

भीमा ऋद्धि डिजिटल सर्विसेज़, ऋद्धि विज़न, कोल्लम केबल्स और कोल्लम इंटरनेट केबल डिस्ट्रीब्यूशन की याचिका को खारिज करते हुए पीठ ने 24 नवंबर तक उन्हें डिजिटलीकरण अपनाने लेने का निर्देश दिया है।

इससे पहले, विजय डिजिटल, श्री चौदेश्वरी केबल नेटवर्क, योगेश केबल नेटवर्क, अम्मा टीवी, अतुल्य इंफोमीडिया, पांचजन्य मीडिया, साई केबल टीवी नेटवर्क और सुनील कुमार सिंह की याचिका को एकल पीठ ने खारिज कर दिया है।

इन याचिकाकर्ताओं को भी 24 नवंबर तक तीन सप्ताह के भीतर डैस अपनाने के लिए और डिजिटल पर जाने की समय सीमा के बारे में अपने नेटवर्क पर स्क्रॉल चलाकर ग्राहकों को सूचित करने के निर्देश दिए गए।

DASअदालत के आदेश के बाद इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन (आईबीएफ) ने अपने सदस्यों को सलाह दी है कि वे अपने सभी सहयोगी मल्टी-सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) और स्थानीय केबल ऑपरेटरों (एलसीओ) को अवगत कराएं कि इन क्षेत्रों में डिजिटल पर जाने की अंतिम तारीख 24 नवंबर 2016 है और इस तारीख के बाद चैनल केवल डिजिटल सेट-टॉप बॉक्स के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है।

ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (एआईडीसीएफ) ने भी अपने सभी सदस्यों से कहा कि डैस के तीसरे चरण के बाज़ारों में तुरंत एनालॉग सिग्नल को बंद करें और डिजिटलीकरण को लागू करने के लिए वे ब्रॉडकास्टरों के साथ मिलकर काम करें।

आईबीएफ को भेजे गए एक अलग मेल में, एआईडीसीएफ ने उसके सगस्यों से कहा कि वे एनालॉग को बंदकर केवल डिजिटल सिग्नल ही प्रसारित करें।

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