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समूचे देश में डैस को लागू करने में अदालती मामलों के चलते हो सकती है देर: राज्यवर्धन राठौड़

मुंबई: सूचना व प्रसारण मंत्रालय राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा है कि डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) को देश में पूरी तरह से लागू करने में, अदालती मामलों के कारण देरी हो सकती है और 31 दिसंबर 2016 तक इसे पूरा कर पाना मुश्किल है। इस देरी से टीवी ब्रॉडकास्ट क्षेत्र के तमाम समीकरण उलट-पलट हो सकते हैं।

Rajyavardhan-Singh-Rathoreराठौड़ ने सोमवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा, “केबल टीवी नियमन के अनुसार, पूरे डिजिटलीकरण के लिए अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2016 है। देश के सभी केबल उपभोक्ताओं को इस तारीख से पहले एसटीबी (सेट-टॉप बॉक्स) लगा लेने चाहिए ताकि केबल टीवी सेवाएं जारी रख सकें। लेकिन लंबित अदालती मामलों की वजह से इसके कार्यान्वयन में देरी हो सकती है।”

हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि राज्यमंत्री किस मामले की ओर इशारा कर रहे थे। जो माना जा रहा है, उसके अनुसार डैस के तीसरे चरण के कार्यान्वयन में विभिन्न हाई कोर्टों द्वारा दिए गए स्थगन आदेश के कारण देरी हुई है। इन सभी याचिकाओं को अब दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया है जिसने डैस तीसरे चरण की समय सीमा से संबंधित 12 याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। समय सीमा के विस्तार से संबंधित मामलों में से अधिकांश मामलों का इस प्रकार निपटारा कर दिया गया है।

समय सीमा के मामले के अलावा डैस तीसरे चरण और चौथे चरण की अधिसूचना को चुनौती देती कई अन्य याचिकाएं हाई कोर्ट में न्यायाधीन हैं।

प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, चौथे चरण में 1.98 करोड़ सेट-टॉप बॉक्स (एसटीबी) 26 अक्टूबर 2016 तक लगाए गए हैं। इस तरह चारों चरणों में कुल लगाए गए एसटीबी की संख्या 9.24 करोड़ हो गई है।

डैस के आखिरी और अंतिम चरण में 6.108 करोड़ टीवी वाले ग्रामीण परिवार हैं जो 28 राज्यों और छह केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हैं। यह आंकड़ा 2011 की जनगणना रिपोर्ट के आधार पर प्रसारण मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराया गया है।

ज़ाहिर है कि जिन टीवी वाले घरों को डिजिटल करना है और जो डिजिटल किए गए हैं, उनकी संख्या में बड़ा अंतर है। डैस चौथे चरण की समय सीमा 31 दिसंबर 2016 को समाप्त हो रही है।