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हैथवे केबल का परिचालन लाभ वित्त वर्ष 2015 में 16% घटा, कैरेज़ आय 9% बढ़ी

मुंबई: भारत की सबसे बड़ी मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (एमएसओ) कंपनी, हैथवे केबल एंड डेटाकॉम का परिचालन लाभ वित्त वर्ष 2014-15 में डिजिटलीकरण में आई सुस्ती के बीच घट गया है, जबकि उसकी कैरेज़ आय इस दौरान 9 प्रतिशत बढ़ी है।

31 मार्च 2015 को समाप्त वित्त वर्ष में टेलिविज़न चैनलों को उसके द्वारा किया गया भुगतान 22.01 प्रतिशत बढ़ गया है और उसका समेकित शुद्ध घाटा पहले से कहीं ज्यादा हो गया है।

वित्त वर्ष 2015 में लगाए गए एसटीबी

कंपनी ने वित्त वर्ष के दौरान मात्र 4.3 लाख सेट-टॉप बॉक्स (एसटीबी) लगाए। इससे यही संकेत मिलता है कि डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) के तीसरे चरण की रफ्तार 31 दिसंबर 2015 की समय सीमा के नजदीक आने पर बढ़ेगी।

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इस एमएसओ के डिजिटल सब्सक्राइबर आधार में करीब 18 लाख सब्सक्राइबर तीसरे चरण के इलाकों में पड़ते हैं। इस समय हैथवे के कुल 1.18 करोड़ केबल टीवी सब्सक्राइबरों में 85 लाख डिजिटल सब्सक्राइबर हैं।

हैथवे के पास अभी स्टॉक में लगभग 5 लाख एसटीबी हैं। कंपनी का कहना है, “हमारा लगभग 72 प्रतिशत सब्सक्राइबर आधार अब डिजिटाइज़ हो चुका है। इस तरह हम भारत के सबसे बड़े डिजिटल एमएसओ बन गए हैं।”

वित्त वर्ष 2015 में परिचालन लाभ

हैथवे का समेकित परिचालन लाभ (ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास व अमोर्टिजेशन से पूर्व लाभ) 31 मार्च 2015 को समाप्त वित्त वर्ष में पिछले वित्त वर्ष 2013-14 के मुकाबले 16 प्रतिशत घटकर 259.9 करोड़ रुपए पर आ गया। हालांकि एक्टीवेशन के बिना उसका परिचालन लाभ इस दौरान पिछले वित्त वर्ष के 147 करोड़ रुपए से 21 प्रतिशत बढ़कर 177.5 करोड़ रुपए हो गया है।

कंपनी के स्टैंडएलोन (सब्सिडियरी संयुक्त उद्यम कंपनियों को छोड़कर) परिचालन लाभ में तेज़ गिरावट दर्ज की गई है। यह इस दौरान 27 प्रतिशत घटकर 139.4 करोड़ रुपए पर आ गया। हालांकि एक्टीवेशन के बिना उसका स्टैंडएलोन परिचालन लाभ पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 17 प्रतिशत बढ़कर 95.4 करोड़ रुपए हो गया है।

वित्त वर्ष 2015 में कैरेज़ व सब्सक्रिप्शन आय

हैथवे की प्लेसमेंट (कैरेज़) आय वित्त वर्ष 2014-15 में 9 प्रतिशत बढ़कर 629.9 करोड़ रुपए हो गई।

कंपनी का कहना है, “इस समय प्लेसमेंट आय की अहम भूमिका बनी हुई है और इसमें बहुत ही कम या कोई कमी नहीं आई है।”

वैसे, कंपनी की स्टैंडएलोन प्लेसमेंट आय 313.9 करोड़ रुपए पर स्थिर रही है।

वित्त वर्ष के दौरान कंपनी की केबल सब्सक्रिप्शन आय साल भर पहले के 583 करोड़ रुपए से 44 प्रतिशत बढ़कर 840.3 करोड़ रुपए हो गई है।

वहीं, वित्त वर्ष 2014-15 में उसकी स्टैंडएलोन सब्सक्रिप्शन आय 32 प्रतिशत बढ़कर 441.7 करोड़ रुपए पर पहुंच गई।

इस दौरान ब्रॉडबैंड से उसकी सब्सक्रिप्शन आय पिछले वित्त वर्ष के 169 करोड़ रुपए से 47 प्रतिशत बढ़कर 247.5 करोड़ रुपए हो गई।

स्टैंडएलोन स्तर पर ब्रॉडैबैंड से उसकी आय इस दौरान 37 प्रतिशत बढ़कर 196 करोड़ रुपए पर पहुंच गई।

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वित्त वर्ष 2014-15 में कंपनी की समेकित आय 16 प्रतिशत बढ़कर 1831.6 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। पिछले वित्त वर्ष में यह 1583.25 करोड़ रुपए रही थी।

वहीं उसका स्टैंडएलोन आय इस दौरान 4 प्रतिशत बढ़कर 1023.5 करोड़ रुपए हो गई।

वित्त वर्ष 2015 में पे-चैनल लागत और खर्च

कंपनी की पे-चैनल लागत साल भर पहले के 666.4 करोड़ रुपए से 22.01 प्रतिशत बढ़कर 813.1 करोड़ रुपए हो गई है।

स्टैंडएलोन स्तर पर उसकी पे-चैनल लागत वित्त वर्ष 2013-14 से 325.88 करोड़ रुपए से बढ़कर अब 383.99 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है।

वित्त वर्ष के दौरान हैथवे के खर्च में 23.4 प्रतिशत की बढोतरी दर्ज की गई। इसकी बड़ी वजह पे-चैनल लागत का बढ़ना है।

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कंपनी की प्रति यूज़र औसत आय (एआरपीयू) डैस के पहले व दूसरे चरण के बाज़ारों में बढ़ी है। इसमें केबल टीवी का एआरपीयू (टैक्स को छोड़कर) पहले चरण के बाज़ारों में औसतन 100 रुपए और दूसरे चरण के बाज़ारों में 67 रुपए रहा है।

शुद्ध घाटा

कंपनी का समेकित शुद्ध घाटा वित्त वर्ष 2014-15 में बढ़कर 180.45 करोड़ रुपए हो गया है। पिछले वित्त वर्ष में उसका शुद्ध घाटा 111.11 करोड़ रुपए था।

स्टैंडएलोन आधार पर उसका शुद्ध घाटा इस बार 175.22 करोड़ रुपए रहा है। साल भर पहले उसका शुद्ध घाटा 125.25 करोड़ रुपए रहा था।

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वित्त वर्ष के दौरान जुटाई गई पूंजी

हैथवे ने हाल ही में टाईबॉर्न कैपिटल को प्रेफरेंशियल इक्विटी शेयर जारी करके 150.4 करोड़ रुपए जुटाए हैं।

वित्त वर्ष की पहली तिमाही उसने 300.8 करोड़ रुपए जुटाए थे। इस तरह वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान कुल मिलाकर 451.2 करोड़ रुपए की पूंजी जुटाई है।

वित्त वर्ष 2015 के कामकाज़ की खास बातें

हैथवे ने वित्त वर्ष में एक सेमी प्रीपेड बिज़नेस मॉडल पेश किया। इसके तहत स्थानीय केबल ऑपरेटर (एलसीओ) अ ला कार्टे आधार पर विशेष पैकेज या चैनलों के सब्सक्राइबरों के अनुरोध पर और अधिक तेज़ी दिखा पाते हैं। कंपनी ने कहा कि उसकी इस पहल पर उसके एलसीओ वाले बिज़नेस भागीदारों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है और भविष्य में यह राष्ट्रीय स्तर पर एक मानक मॉडल बन जाएगा।

कंपनी ने कहा, “एलसीओ को बेहतर ग्राहक प्रबंधन सुनिश्चित करने में मदद करने के लिए एक पोर्टल और एंड्रॉयड एप्प दिया गया है। हम आशा करते हैं कि बेहतर पैकेजिंग के साथ कंपनी अधिक एआरपीयू कमाने में सक्षम हो जाएगी।”

वर्ष के दौरान ब्रॉडकास्टरों को रॉयल्टी भुगतान के अनुबंध पर भी कंपनी को संतोषजनक प्रतिक्रिया मिली। कंपनी ने कहा, “कुछ ब्रॉडकास्टर ने रियो आधार अपनाया है और यह प्रारूप कंपनी के लिए अच्छी तरह से काम कर रहा है।”

मूल्य वर्धित सेवाएं – वास और अभिनव कंटेंट से भविष्य में एआरपीयू और बढ़ सकता है। हैथवे ने कहा, “हम अपने प्लेटफॉर्मों (4-5 चैनल) के लिए विशेष रूप से मूल प्रोग्रामिंग लाने वालों में उद्योग में अद्वितीय हैं। कंपनी के पास खास समुदायों को फोकस कर विज्ञापन के माध्यम से इन ब्रांडों को मोनेटाइज़ करने के ज़बरदस्त अवसर हैं।”

ब्रॉडबैंड बिजनेस

हैथवे का ब्रॉडबैंड एआरपीयू 310 रुपए से 530 रुपए (वित्त वर्ष 2015 के अंत में) तक बढ़ा। एमएसओ के 140,000 डॉकसिस 3.0 के सब्सक्राइबर हैं और इनसे मिलने वाला एआरपीयू अंतिम तिमाही में 750 रुपए रहा।

हैथवे के कुल ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबरों की संख्या 4.5 लाख है। यह दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद और सूरत के 23 लाख घरों में तेज़ गति वाली 50 एमबीपीएस ब्रॉडबैंड की सेवाएं प्रदान करता है।
ब्रॉडबैंड आय पिछले साल के मुकाबले 47 प्रतिशत बढ़कर वित्तवर्ष 15 में 247.5 करोड़ रुपए रही।

चौथी तिमाही की खास बातें

कंपनी ने समेकित आंकड़े अभी तक उपलब्ध नहीं कराए हैं। फिलहाल स्टैंडएलोन आधार पर हैथवे का शुद्ध घाचा वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में बढ़कर 76.99 करोड़ रुपए हो गया है। ठीक पहले की तीसरी तिमाही में यह 58.05 करोड़ रुपए रहा था। वहीं पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में उसका शुद्ध घाटा 49.27 करोड़ रुपए दर्ज किया गया था।

मार्च 2015 की तिमाही में कंपनी की परिचालन आय ठीक पिछली तिमाही के 239.1 करोड़ रुपए से 12.91 प्रतिशत बढ़कर 270.03 करोड़ रुपए हो गई। वित्त वर्ष 2013-14 की चौथी तिमाही में उसकी परिचालन आय 292.72 करोड़ रुपए रही थी।

वहीं अगर एक्टीवेशन को छोड़ दें तो कंपनी का परिचालन लाभ ठीक पिछली तिमाही के 17 करोड़ रुपए से 47 प्रतिशत बढ़कर 25 करोड़ रुपए हो गया है।

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कंपनी पर चढ़ा ऋण

कंपनी पर समेकित रूप से अभी कुल 1483.1 करोड़ रुपए का ऋण है, जबकि उसका शुद्ध ऋण 1256.2 करोड़ रुपए का है। वहीं स्टैंडएलोन रूप से कंपनी पर चढ़ा सकल ऋण 1084 करोड़ रुपए और शुद्ध ऋण 914.3 करोड़ रुपए का है।