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रिलायंस जियो की क्या है योजना केबल टीवी बाज़ार को हिलाने की!

मुंबई: केबल टीवी कंपनियां अपने हलकों की हिफाजत करती हैं और शायद ही कभी अपने गेट से बाहर चल रही हरकतों की परवाह करती हैं। हां, उनके पैर तब ज़रूर थोड़ा थरथराते हैं और वे दौड़कर बचाव में जुट जाती हैं, जब डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) ऑपरेटर हमला करने की धमकी देते हैं। लेकिन उनके कभी डर नहीं लगा कि उन्हें मिटा दिया जाएगा। अब उनका साबका रिलायंस जियो नाम के एक बाहरी जीव से होने जा रहा है जो अभी पहुंचा नहीं है, जिसके स्वरूप की कल्पना तो वे कर सकते हैं, मगर सटीक खाका नहीं बना सकते।

एनालॉग केबल के मिटने के दिनों में, अरबपति मुकेश अंबानी ने भारत में कॉमकास्ट और वेरिज़ॉन का मिश्रण बनाने की महत्वाकांक्षा पाल रखी है। अभी तक यहां कोई क्वैड-प्ले सेवाप्रदाता नहीं है और न ही किसी निजी कंपनी की इंटरनेट, टीवी, लैंडलाइन व वायरलेस सेवाएं साथ लाने की कोई फौरी योजना है।

K-Jayaraman-150x150इस बीच अंबानी की रिलायंस जियो 70,000 करोड़ रुपए क भारी-भरकम निवेश के साथ ऐसी व्यावसायिक पेशकश लाने की तैयारी में जो भारतीय बाजार में क्वैड-प्ले का झंझावात ला सकता है। संघनित डिजिटल मीडिया की इस तेजी से बदलती दुनिया में उसकी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है दाम को बहुत आकर्षक रखना।

रिलायंस जियो के बिजनेस तंत्र के एक हिस्से का वास्ता डिजिटल केबल टीवी से है। रिलायंस की अपने खास शैली में, प्रमुख केबल कंपनियों के दो पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को यह खेल जीतने के काम पर लगा दिया गया है। हैथवे केबल एंड डाटाकॉम को देश का सबसे बड़ी मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (एमएसओ) बनाने में नेतृत्व करनेवाले के. जयरामन, रिलायंस जियो में एमएसओ बिजनेस के सीईओ हैं। वहीं, डेन नेटवर्क्स को खटाखट देश का दूसरा सबसे बड़ा एमएसओ बनाने के दौरान सीईओ की कमान संभालने वाले एस एन शर्मा भी रिलायंस जियो की नेतृत्व टीम हैं और जयरामन को रिपोर्ट करेंगे। दोनों ही अपनी पिछली कंपनियों से कुछ खास लोगों को तोड़कर ला चुके हैं और अभी कुछ और को भी खींचा जा सकता है।

इन सारी चीज़ों ने मौजूदा एमएसओ को कहीं न कहीं हिलाकर रख दिया है। एक प्रमुख एमएसओ के पूर्व सीईओ ने नाम न खोलने की शर्त पर बताया, “जयरामन और शर्मा के एक साथ जाने से एक अजेय टीम बनने जा रही है। यह डेन के पहले के उस दौर की याद दिलाता है, जब हैथवे में दोनों साथ-साथ काम करते थे। अब रिलायंस के हाथ और विपुल पूंजी के साथ वे फौलादी शक्ति बन चुके हैं।”

हालांकि एकदम नए सिरे से शुरुआत करना कोई आसान काम नहीं है और इसमें समय लगेगा। रिलायंस जियो की सब्सिडियरी, रिलायंस जियो मीडिया में सूचना व प्रसारण के मंत्रालय के पास एमएसओ के लाइसेंस का आवेदन डाला है। एमएसओ लाइसेंस के इस आवेदन को फिलहाल केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है।

SN-Sharmaरिलायंस जियो मीडिया अभी धंधे में उतरने का इंतज़ार कर रहा है, जबकि हैथवे, डेन व सिटी केबल नेटवर्क जैसे राष्ट्रीय एमएसओ ने अपना आकार काफी बढ़ा लिया है और डिजिटल केबल में अच्छा-खास विस्तार कर लिया है। उन्होंने दिल्ली व मुंबई जैसे महानगरों समेत देश के 41 शीर्ष शहरों को समेटनेवाले डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) के पहले व दूसरे चरण में भी अपनी जगह बना ली है।

31 दिसम्बर 2014 तक के आंकड़ों के अनुसार 85 लाख के डिजिटल केबल टीवी सब्सक्राइबर आधार के साथ हैथवे इन सबमें सबसे आगे है। इस एमएसओ की घरेलू ब्रॉडबैंड सेवा 20 लाख सब्सक्राइबरों के पार जा चुकी है, जबकि उसके ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर फिलहाल 4.3 लाख हैं।

31 दिसम्बर 2014 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, डेन नेटवर्क्स 68 लाख डिजिटल केबल टीवी उपभोक्ताओं तक पहुंच चुका है, जबकि सिटी केबल का आधार 48.5 लाख सब्सक्राइबरों का है।

केबल टीवी उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपनी पहचान न जाहिर करते हुए कहा, “पहले व दूसरे चरण के शहरों में बिजनेस काफी हद तक जम चुका है। अगर रिलायंस वहां घुसना चाहता है तो उसे काफी खरमंडल मचाना होगा।”

सारा कुछ मिलाकर लगता है कि रिलायंस जियो मीडिया पहले डैस के तीसरे व चौथे चरण के शहरों में जाएगा। डैस के पहले व दूसरे चरण के शहरों में डिजीटलकरण हो चुका है तो वहां मुफ्त सेट-टॉप बॉक्स (एसटीबी) देना और सब्सक्रिप्शन दरों को कम करने का मतलब है नई लड़ाई छेड़कर बाज़ार को खराब करना।

रिलायंस शुरुआत में डैस के पहले व दूसरे चरण के शहरों में उतरने से परहेज कर सकता है। इसका एक और कारण है। सरकार 31 दिसंबर, 2015 से तीसरे चरण के डैस वाले शहरों में एनालॉग केबल टीवी अनिवार्य रूप से खत्म कर रही है तो रिलायंस को अच्छी शुरुआत के लिए और बाज़ार में हिस्सेदारी हड़पने के लिए इन क्षेत्रों में बहुत कम समय मिलेगा।

तीसरे और चौथे चरण के डैस शहर भी प्रतियोगिता के लिए खुले हैं। अनुमानित 7 करोड़ घरों को डिजिटल बनाए जाने के आंकड़े के साथ यहां बाज़ार का आकार लुभाता है।

एक प्रमुख एमएसओ के सीईओ ने कहा, “बाज़ार के आकार और समय सीमा के कारण रिलायंस जियो मीडिया यहीं से शुरुआत करेगा, यह तार्किक लग रहा है। तीसरे चरण के लिए समय सीमा में कोई बदलाव नहीं होगा तो हो सकता है कि वे दबाव महसूस करें और समय सीमा आगे बढ़ाने के लिए लॉबीइंग करें।”

Reliance_Jio-cover_logoस्थानीय केबल ऑपरेटर (एलसीओ), रिलायंस जियो से क्या उम्मीद करें, यह समझ नहीं पा रहे हैं। उन्हें लाभ होगा या नुकसान, उनके लिए यह स्पष्ट नहीं है। डैस शहरों में उनमें से कईयों को एक निश्चित समय के लिए फ्री एसटीबी और फ्री सब्सक्रिप्शन दरें चाहिए। यहां एमएसओ को भुगतान नहीं करने की मिसाल स्थापित कर बाज़ार खराब हो सकता है।

एक उद्योग विशेषज्ञ ने कहा, “इससे केबल टीवी उद्योग में एक नकारात्मक संदेश पहुंचेगा और एलसीओ, आय प्रवाह डिस्ट्रीब्यूशन का गला घोंट दे सकते हैं। हालांकि ऐसी संभावना नहीं है।”

वैसे कोई भी रिलायंस जियो मीडिया की रणनीतियों पर भविष्यवाणी नहीं कर सकता। सबसे अधिक संभावना यही है कि वे तीसरे और चौथे चरण के डैस कस्बों के बाज़ार में हिस्सेदारी हासिल करे और फिर डिजिटलीकरण किए जा चुके शहरों में जाएं। अगर कोई अवसर बीच में आते हैं, तो रिलायंस उन्हें झपट सकता है।

पहले और दूसरे चरणों के बड़े शहरों जैसे और दिल्ली और मुंबई में ब्रॉडबैंड के लिए रिलायंस जियो आवश्यक हो तो एलसीओ के साथ गठबंधन कर सकता है। एलसीओ का अधिग्रहण लाभदायक रहेगा।
उद्योग के एक पर्यवेक्षक ने कहा कि रिलायंस, एमएसओ के अधिग्रहण के पीछे नहीं भागेगा। उन्होंने कहा, “वे एलसीओ को अधिग्रहित करेंगे क्योंकि वे उन्हें उपभोक्ता के घरों तक सीधी पहुंच देंगे।”

रिलायंस जियो ने उपभोक्ता घरों में टेलिविजन चैनलों की पेशकश के लिए फाइबर-टू-होम व्यवस्था की योजना बनाई है। इस बिज़नेस की रणनीति का पूरा खुलासा नहीं किया गया है पर सब यही मानते हैं कि वे क्वाड-प्ले सेवा प्रदाता की भूमिका में रहेंगे।

जयरामन और शर्मा को नियुक्त कर रिलायंस एक बहुत मज़बूत राष्ट्रीय एमएसओ होने की महत्वाकांक्षा पाल रहा है। एक सूत्र ने कहा, “नई टीम से कहा गया है कि वे डिजिटल केबल का पैमाना बढ़ाएं और ब्रॉडबैंड की शुरुआत में शामिल हों।”

जयरामन केबल टीवी बिज़नेस की गहरी समझ रखते हैं। उद्योग में लंबे समय से होने के कारण वे केबल टीवी संस्कृति की रग-रग पहचानते हैं। उन्होंने चार्टर्ड एकाउंटेंसी की पढ़ाई की है।

शर्मा ने डेन नेटवर्क्स की शुरुआत से ही इसके गठन में एक बड़ी अहम भूमिका निभाई है। रिलायंस जियो को खासकर उत्तर भारत में प्रवेश के लिए उनकी मदद की उम्मीद होगी।

डैस के तीसरे व चौथे चरण में यह लड़ाई दिलचस्प होगी। इस युद्ध क्षेत्र में नौसिखिया रिलायंस जियो प्रवेश करेगा। इसके अलावा, हिंदुजा ग्रुप जैनहिट्स के साथ प्रतियोगिता में हेडएंड-इन-द-स्काई (हिट्स) सेवा लाने की योजना बना रहा है और डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) ऑपरेटर बाज़ार में अच्छी हिस्सेदारी हथियाने की उम्मीद कर रहे हैं।

बाज़ार काफी बड़ा है और सभी राष्ट्रीय एमएसओ के विकास की गुंजाइश है। डेन अपना आधार 1.3 करोड़ करना चाहता है। सिटी केबल अपने डिजिटल सब्सक्राइबर आधार को दोगुना कर 1 करोड़ तक पहुंचाना चाहता है। हैथवे ने अपने ग्राहक आधार का 73 प्रतिशत पहले ही डिजिटाइज कर दिया है तो उसे सबसे कम काम करना बाकी है।

राष्ट्रीय एमएसओ के घेरे से बाहर, रिलायंस जियो के लिए काफी जगह है। देश भर में कई स्वतंत्र ऑपरेटर फैले हुए हैं जिनके पास पूंजी नहीं है और जो प्रतियोगिता से डरते हैं। लेकिन यह इतनी भी सरल लड़ाई नहीं होगी।

हिट्स ऑपरेटरों के लिए चुनौती पैमाना बढ़ाने की होगी। बाज़ार में रिलायंस जियो के आक्रामक तरीके से आने की वजह से उन्हें नुकसान हो सकता है। पहले और दूसरे चरण के डैस शहरों में उनका कोई आधार नहीं है तो अब डिजिटलीकरण के आखिरी दो दौर में उन्हें सफल होना ही होगा।

मीडिया विश्लेषकों के मुताबिक, ऑरटेल कम्यूनिकेशंस और एशियानेट सेटेलाइट कम्यूनिकेशंस जैसे अंतिम कड़ी के मालिक एमएसओ के लिए कोई खतरा नहीं है। वास्तव में, क्षेत्रीय एमएसओ का जिन क्षेत्रों में वर्चस्व है जैसे ओडिशा, केरल और पंजाब, रिलायंस वहां से शुरू में दूर रहने का फैसला कर सकता है।
रिलायंस जियो के लिए भी यह काम कोई आसान नहीं होगा। एमएसओ लाइसेंस प्राप्त करना होगा और तीसरे चरण के डिजिटलीकरण के लिए अब सीमित समय बचा है। एक एमएसओ के प्रमुख ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “अगर समय सीमा बढ़ा दी जाती है तो यह उनके हित में होगा। उनके द्वारा लॉबिइंग किए जाने की उम्मीद है।”

देर से बाज़ार में प्रवेश की चुनौतियां भी है। एक केबल टीवी के कार्यकारी अधिकारी ने कहा, “यह एक क्रिकेट मैच की तरह है। मौजूदा एमएसओ स्कोर बनाकर बैठे हैं। रिलायंस जियो को मैदान में प्रवेश करते ही स्कोर करना होगा।”

हम लोग जो बाड़ की दूसरी तरफ बैठे हैं, हमें लग रहा है कि हम जल्दी ही डिजिटल मीडिया क्षेत्र में इतिहास का एक नया अध्याय लिखा जाता देखेंगे।