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बिलिंग पर अमल हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: परमेश्वरन, प्रमुख सलाहकार, ट्राई

पुणे: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के प्रमुख सलाहकार एन परमेश्वरन के अनुसार उपभोक्ता बिलिंग को लागू करना नियामक संस्था की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

परमेश्वरन ने आग्रह किया, “एमएसओ और एलसीओ को कम से कम बिलिंग पर काम शुरू कर देना चाहिए। आप छह महीनों के लिए एक मॉडल बनाकर देखो कि वो बिलिंग के लिए काम कर रहा है या नहीं। लेकिन काम तो शुरू करो।”

5S9A1718परमेश्वरन ने उद्योग को आगाह किया कि डिजिटल एड्रैसेबल सिस्टम (डैस) का पूरा लाभ तब तक मिलना शुरू नहीं होगा, जब तक इसे सही अर्थों में लागू नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि नियामक संस्था डैस के पहले और दूसरे चरण के शहरों में सकल बिलिंग पर अमल न होने से चिंतित है।

उन्होंने कहा, “सकल बिलिंग को अभी भी लागू नहीं किया गया है। यह चिंता का कारण है। उद्योग को यह समझना होगा कि डैस के वास्तविक लाभ तब तक नहीं मिलेंगे, जब तक इसे पूरी तरह से लागू नहीं किया जाता है।”

बिलिंग का मुद्दा मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) और स्थानीय केबल ऑपरेटरों (एलसीओ) के बीच आय में हिस्सेदारी के विवाद के कारण अटका हुआ है।

पुणे में टेलिविज़न पोस्ट द्वारा आयोजित डिजिटल सम्मेलन, ग्राउंडपोस्ट में 300 से अधिक केबल ऑपरेटरों के साथ बात करते हुए परमेश्वरन ने कहा कि ट्राई एक समन्वयक की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। पर वह सब कुछ तय नहीं कर सकता है।

परमेश्वरन ने केबल ऑपरेटरों को बताया, “हमारे दरवाजे आपके लिए खुले हैं। लेकिन उद्योग के लिए सबसे अच्छा तरीका आपस में सभी मुद्दों को हल करना है। अगर ज़रूरत पड़ी तो हम एक समन्वयक की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।”

उद्योग को आपसी बातचीत शुरू करने और एक साथ काम करने के लिए तैयार होना चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक उपभोक्ताओं की बिलिंग नहीं हो पाएगी।

आय हिस्सेदारी के फॉर्मूले के मुद्दे पर परमेश्वरन ने कहा कि एमएसओ और एलसीओ को आमने-सामने बैठकर आय हिस्सेदारी के मुद्दे को हल करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों के बीच यदि वार्ता विफल रहती है, तभी प्राधिकरण के आय हिस्सेदारी वाले फॉर्मूले का विकल्प अपनाना चाहिए।
परमेश्वरन ने कहा, “हर किसी के लिए लाभकारी स्थिति बननी चाहिए। अन्यथा यह स्थायी नहीं होगा। और हम व्यवस्था को गिरने नहीं देंगे।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि नियामक संस्था ने केवल बिल बनाने के लिए एमएसओ को कहा है। पर उसने अपने नाम से बिल बनाने से एलसीओ को मना भी नहीं किया है।

परमेश्वरन ने डैस के पहले दो चरणों के तहत 41 शहरों में 3 करोड़ सेट टॉप बॉक्स (एसटीबी) लगाने के विशाल काम को पूरा करने के लिए एमएसओ और एलसीओ की सराहना की। उन्होंने कहा, “पहले और दूसरे चरण में इतने सारे एसटीबी लगा देने का काम अद्वितीय है। कोई अन्य देश इतने कम समय में यह हासिल नहीं कर सका है।”

परमेश्वरन ने नई तकनीक लाने और स्वीकार करने के लिए केबल टीवी ऑपरेटरों से आग्रह किया। परमेश्वरन ने कहा, “मैं हाल ही में लॉस एंजेल्स गया था। वहां केबल ऑपरेटर ब्रॉडबैंड और लक्षित विज्ञापन जैसी बहुत-सी सेवाएं प्रदान करते हैं। उन्हें देखकर मुझे लगा कि हम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कितने पीछे हैं।”
क्यों नहीं विनियामक एक मान्य आपसी समझौता बनाए, जिसे एलसीओ एमएसओ के साथ सौदे करने में एक बेंचमार्क के रूप में उपयोग कर सकते हैं? परमेश्वरन ने कहा, “किसी भी आपसी मानक समझौते का एक महत्वपूर्ण घटक आय में हिस्सेदारी होगा। यह उद्योग के हक में होगा कि वह इन व्यावसायिक सौदों को ठीक तरह से कर ले।”

उन्होंने कहा कि दूरसंचार, मीडिया और टेक्नोलॉजी के संगम वाली इस दुनिया में बने रहने के लिए केबल ऑपरेटरों को ब्रॉडबैंड को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बना देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रॉडबैंड कई अन्य सेवाओं को प्रदान करने का माध्यम बन जाएगा।

उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा, “मेरा ज़ोर ब्रॉडबैंड पर है क्योंकि वही भविष्य है। केबल ऑपरेटर एक सोने की खान (केबल टीवी नेटवर्क) पर बैठे हैं जिसे वे लाखों परिवारों को ब्रॉडबैंड सेवा प्रदान करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। यहां तक कि राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड नीति में हमने कहा भी है कि ब्रॉडबैंड क्रांति केबल नेटवर्क के ज़रिए आएगी, फिक्स्ड लाइन नेटवर्क से नहीं, जिसकी संख्या घट रही है।”

ट्राई के प्रमुख सलाहकार ने बताया कि विनियामक उद्योग के गले किसी विशेष टेक्नोलॉजी को मढ़ने के बजाए एक टेक्नोलॉजी-निरपेक्ष नीति अपना रहा है। उन्होंने इस बात का खंडन किया कि केबल टीवी प्लेटफार्म, ब्रॉडकास्ट प्लेटफार्मों से अधिक विनियमित किए गए हैं।