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एसटीबी लगाने और डैस के चौथे चरण की स्थिति पर प्रसारण मंत्रालय ने दिया अपडेट

मुंबई: भारत में केबल टीवी के डिजिटलीकरण के अंतिम चरण की समाप्ति में बस एक महीना ही बाकी रह गया है। लेकिन मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर (एमएसओ) अभी भी पर्याप्त सेट-टॉप बॉक्स (एसटीबी) के साथ तैयार नहीं हैं।

वैसे तो चौथे चरण में अब तक लगाए गए एसटीबी की कुल संख्या का कोई डेटा नहीं आया है। मगर संकेत हैं कि अभी भी बहुत सारा कवर करना बाकी है।

सूचना व प्रसारण मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 31 अगस्त और 25 अक्टूबर 2016 के बीच की अवधि में 19.66 लाख एसटीबी चौथे चरण में लगाए गए। इसी अवधि में तीसरे चरण के दौरान 8.76 लाख एसटीबी ही लगाए गए थे। दोनों चरणों को मिला दें कि इन दो महीनों में संयुक्त रूप से 28.43 लाख बॉक्स लगाए गए है।

भारत में लगाए गए एसटीबी की कुल संख्या 25 अक्टूबर 2016 तक प्रसारण मंत्रालय आंकड़ों के अनुसार, 9.24 करोड़ है।

सवाल उठता है कि डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) के चौथे चरण की क्या स्थिति है? 26 जुलाई 2016 तक के प्रसारण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 1.78 करोड़ एसटीबी चौथे चरण के इलाकों में लगाए जा चुके थे। नए आंकड़ों के साथ जोड़ने पर चौथे चरण के क्षेत्रों में यह आंकड़ा 1.977 करोड़ एसटीबी का होता है। इसमें कुछ और इजाफा होगा क्योंकि 26 जुलाई और 31 अगस्त के बीच के समय का डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थिति की गंभीरता तब भी इससे ज़्यादा अलग नहीं होगी।

प्रसारण मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 2011 की जनगणना रिपोर्ट के आधार पर, 28 राज्यों और छह केंद्र शासित प्रदेशों में डैस के आखिरी और अंतिम चरण में 6.108 करोड़ टीवी वाले ग्रामीण परिवारों को शामिल किया गया है। डैस के चौथे चरण के लिए समय सीमा 31 दिसंबर 2016 को समाप्त होती है।

प्रति यूज़र औसत आय (एआरपीयू) कम है और चौथे चरण के छोटे-छोटे क्षेत्रों में फाइबर नेटवर्क के विस्तार की लागत काफी ऊंची है तो कई मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (एमएसओ) की वहां विस्तार करने की आक्रामक योजनाएं हैं ही नहीं। आम राय यह है कि डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) ऑपरेटरों को चौथे चरण के क्षेत्रों में और अधिक सब्सक्राइबर जुटाने में फायदा मिलेगा।

इस बीच, प्रसारण मंत्रालय सलाहकार ने 26 अक्टूबर को आयोजित 18वीं टास्क फोर्स की डैस की बैठक में उल्लेख किया कि नोडल अधिकारियों को प्रबंधन सूचना प्रणाली से राज्यवार विशेष रिपोर्टों का उपयोग करने के लिए पासवर्ड दिए गए हैं।

टास्क फोर्स की अध्यक्षता कर रहे सूचना व प्रसारण संयुक्त सचिव (पी एंड ए) मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि मंत्रालय ज़िलेवार एसटीबी लगाए जाने के डेटा का विश्लेषण कर सकता है और आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित राज्यों को एसटीबी लगाए जाने की प्रगति की रिपॉर्ट भेज सकता है।

राष्ट्रीय एमएसओ के प्रतिनिधियों ने उल्लेख किया कि चौथे चरण के क्षेत्रों में एसटीबी लगाए जाने का काम, तीसरे चरण में आए विभिन्न अदालती मामलों के कारण संतोषजनक नहीं है और एक बार इन मामलों का दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा निपटारा कर दिया जाएगा तब स्थिति काफी बदल जाएगी।

यह भी उल्लेख किया गया कि चौथे चरण के क्षेत्रों में सेवा देने वाले हेडएंड तीसरे चरण के क्षेत्रों में स्थित हैं और इसलिए चौथे चरण के क्षेत्रों में डैस पर ट्रांज़िशन में कोई भी समस्या खड़ी नहीं होनी चाहिए।

सिंह ने अधिसूचित अंतिम तारीख तक डिजिटलीकरण के चौथे चरण को लागू करने के उपाय सुझाने के लिए सदस्यों से कहा था।

निम्नलिखित सुझाव हितधारकों द्वारा दिए गए:

  1. प्रसारण मंत्रालय को एक अग्रिम उपाय के रूप में निरंतर कैवियट दायर करने पर विचार करना चाहिए।
  2. मंत्रालय को ट्राई के संशोधित टैरिफ आदेश के मसौदे के साथ मेल बिठाते हुए मार्च 2017 तक तारीख का विस्तार करने पर विचार करना चाहिए।
  3. ट्राई के प्रतिनिधि ने उल्लेख किया कि नियमों और टैरिफ आदेश में संशोधन नियमित रूप से किए जाते हैं और अंतिम तारीख को मसौदा टैरिफ आदेश के मुद्दे के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। वे चौथे चरण की अंतिम तारीख के किसी भी तरह के विस्तार से सहमत नहीं थे और उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर उद्योग में गलत संकेत जाएगा।
  4. सीईएएमए और डीटीएच के प्रतिनिधियों ने भी अंतिम तारीख के किसी भी तरह के विस्तार का विरोध किया।

कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीईएएमए) के प्रतिनिधि ने उल्लेख किया कि कोई बड़ी खरीदारी ऑर्डर एमएसओ से स्वदेशी एसटीबी निर्माताओं को नहीं मिला है।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी एसटीबी निर्माताओं द्वारा आईकैस लगाए जाने का विशिष्ट डेटा उनके पास नहीं था पर उन्होंने बहुत जल्द ही प्रसारण मंत्रालय को इसे भेजने का आश्वासन दिया।

इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन (आईबीएफ) के प्रतिनिधि ने उल्लेख किया कि अब तक चौथे चरण के क्षेत्रों के लिए इंटरकनेक्ट समझौतों के लिए एमएसओ से उन्हें बहुत थोड़े अनुरोध मिले हैं।

केबल टीवी सेक्टर में डिजिटलीकरण के प्रभाव का आकलन करने के लिए, प्रसारण मंत्रालय ने 19 सितंबर को राज्य स्तर के अधिकारियों से मुलाकात की और पिछले चार सालों में अपने राज्यों में मनोरंजन टैक्स कलेक्शन पर ज़िलेवार डेटा भेजने का उन्हें अनुरोध किया था।

पहले से ही डेटा कुछ राज्यों से प्राप्त किए गए थे। ऐसा फैसला किया गया कि राज्यों को इन आंकड़ों को एक पखवाड़े के भीतर भेजने के लिए रिमांइडर भेजा जाए।

केबल के माध्यम से ब्रॉडबैंड उपलब्ध कराने के संबंध में एमएसओ द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा की गई। एमएसओ को सूचित किया गया कि एक समिति इन मुद्दों पर चर्चा करने के लिए दूरसंचार विभाग में गठित की गई है।