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एमएसओ-एलसीओ का शक्ति संतुलन टूटने की कगार पर

मुंबई: एमएसओ-एलसीओ का शक्ति संतुलन टूटने की कगार पर पहुंच गया है। कुछ महीने तक ऐसा होने की आशंका कम थी। लेकिन अब हैथवे केबल एंड डाटाकॉम की तरफ से बेंगलुरु में दो लाख सेट-टॉप बॉक्सों (एसटीबी) को स्विच ऑफ किए जाने के बाद यही लगता है कि यह संतुलन कभी भी टूट सकता है।

मल्टी-सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) की एकता मंगलवार को तब दिखाई दी, जब उनके शीर्ष अधिकारियों ने बड़ी तादाद में हो रहे एलसीओ के विरोध प्रदर्शनों को निष्क्रिय करने के लिए बेंगलुरु में अपनी बैठक की। 12 राष्ट्रीय व स्वतंत्र एमएसओ के बीच साझा सहमति इस बात पर बनी है कि सब्सक्राइबर बिलिंग का काम खिसकाकर अप्रैल तक ले जाया जाए।

हैथवे केबल एंड डाटाकॉम के एमडी व सीईओ जगदीश कुमार का कहना है, “यह हम सभी के लिए बड़े अहम बदलावों का दौर है। हम बेंगलुरू मॉडल को देश के दूसरे हिस्सों में भी लागू कर सकते हैं। दिल्ली व मुंबई में भी हम आगे बढ़ रहे हैं। एमएसओ को हाथ से हाथ मिलाकर चलना होगा और बिलिंग के नियम पर अमल के लिए एलसीओ (लोकल केबल ऑपरेटर) को साथ लेना होगा।”

एमएसओ को महसूस हो रहा है कि अगर समझाने-बुझाने से बात नहीं बनती तो उन्हें एलसीओ के साथ कड़ाई से पेश आना होगा। इस वक्त तो हालत यह है कि एलसीओ झुकने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में कंज्यूमर बिलिंग के मुद्दे पर उनके सामने दबाव डालने का ही रास्ता बच गया है। उन्हें यह भी समझना होगा कि मुंबई की तरह उनको आय में हिस्सेदारी का ज्यादा स्वीकृत मॉडल पेश करना होगा।

बेंगलुरु में आमतौर पर सभी एमएसओ और खासतौर पर हैथवे केबल एंड डाटाकॉम ने कड़ा रुख दिखाया। जहां भी उन्हें एलसीओ से सीएएएफ (कस्टमर आवेदन फॉर्म) नहीं मिले, वहां उन्होंने सेट-टॉप बॉक्स स्विच ऑफ कर दिए, यह जानते हुए भी इसकी कठोर प्रतिक्रिया हो सकती है।

कुमार ने बताया कि इस मसले पर फौरी रास्ता यह निकाला गया है कि जो 2,00,000 एसटीबी डि-एक्टीवेट किए गए हैं, उनमें से कुछ रविवार तक स्विच ऑन कर दिए जाएंगे। उनका स्पष्ट किया, “हम एसटीबी तो स्विच ऑन कर देंगे, लेकिन उन्हें डाउनग्रेड कर बेस पैक में डाल दिया जाएगा। हमने एलसीओ को सीएएफ जमा कराने के लिए रविवार तक का समय दिया है।”

बेंगलुरु में हुई एमएसओ एलायंस की को-ऑर्डिनेशन कमिटी की बैठक में बिलिंग के मसले पर आगे क्या करना है, इस पर भी बात हुई। एलायंस के सचिव और डेन नेटवर्क्स के सीईओ एसएन शर्मा ने बताया,“हर किसी ने पक्का किया है कि मार्च से बिलिंग शुरू हो जानी चाहिए। अगर किसी वजह से ऐसा नही हो पाया तो अप्रैल से इसे हर हाल में शुरू कर देना होगा।” उन्होंने बताया कि बिलिंग के बारे में जागरूकता लाने के लिए कुछ दिनों में संयुक्त विज्ञापन जारी किए जाएंगे।

एसटीबी के डि-एक्टीवेशन के मुद्दे पर शर्मा ने कहा कि एमएसओ की राय में एसटीबी को पूरी तरह डि-एक्टीवेट नहीं करना चाहिए। उनका कहना था, “बैठक में यह बात आई कि एसटीबी को पूरी तरह स्विच ऑफ करने के बजाय फ्री-टू-एयर (एफटीए) चैनलों को चलने देना चाहिए। हम एफटीए चैनलों को कुछ समय चालू रखने की प्रक्रिया पर गौर कर रहे हैं।”

कर्नाटक केबल ऑपरेटर्स एसोसिएशन (केसीओए) ने प्रेसिडेंट पैट्रिक राजू का कहना है कि हैथवे ने गलती से ऐसे एसटीबी भी डि-एक्टीवेट कर दिए हैं, जिनके सीएएफ समय रहते मिल गए थे। उन्होंने बताया कि एलसीओ के विरोध प्रदर्शनों के बाद एमएसओ ने उनके संगठन के साथ एक बैठक की। राजू ने दावा किया कि, “बैठक में हैथवे के अधिकारियों ने माना कि उनकी अनदेखी के चलते कुछ ऐसे एसटीबी भी स्विच ऑफ कर दिए गए, जिनके कस्टमर आवेजन फॉर्म मिल चुके थे।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या बेंगलुरु बिलिंग के तैयार है तो राजू का कहना था कि यह आज की हालात में कठिन लगता है। उन्होंने कहा, “अभी तो ऐसा कर पाना कठिन लगता है क्योंकि कोई भी एमएसओ तैयार नहीं है। अगर हैथवे जैसा एमएसओ सीएएफ नही जमा करवा सका तो क्या आपको लगता है कि दूसरे एमएसओ बिलिंग शुरू कर पाएंगे?”

इधर ज़मीनी स्तर पर तनातनी मची हुई है, उधर एमएसओ महीने का भुगतान बढ़ाने किए एलसीओ की चूड़ी कस रहे हैं। हैथवे तो पहले ही अपने तमाम एलसीओ से कह चुका है कि उन्हें जनवरी से हर महीने 90 रुपए प्रति सब्सक्राइबर देना होगा। राजू बताते हैं कि इस मसले पर भी खींचतान है। कोई महीने का 50 मांग रहा तो कोई 80 रुपए। वहीं हैथवे 90 रुपए पर डटा हुआ है। दरों में समानता लानी होगी। नहीं तो एलसीओ के लिए इन्हें दे पाना संभव नहीं होगा।

एमएसओ एकजुट होने की कोशिश में लगे हैं ताकि सीएएफ व बिलिंग के मुददों को सुलझाया जा सके। दिल्ली में एमएसओ अच्छी बिलिंग प्रक्रिया पेश करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सलाहकार फर्म मैकेंज़ी की सेवा ले रहे हैं।