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सिटी नेटवर्क्स का परिचालन लाभ दूसरी तिमाही में 5% बढ़ा, लगाए इस बार भी 4 लाख एसटीबी

मुंबई: एस्सेल समूह के स्वामित्व वाली मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर (एमएसओ) कंपनी, सिटी नेटवर्क्स (पहले का नाम सिटी केबल नेटवर्क) ने चालू वित्त वर्ष 2016-17 की दूसरी तिमाही के अपना परिचालन लाभ 4.85 प्रतिशत बढ़ा लिया है। 30 सितंबर 2016 को समाप्त तिमाही में उसने 4 लाख नए सेट-टॉप बॉक्स (एसटीबी) लगाए हैं जिससे उसका डिजिटल सब्सक्राइबर आधार बढ़कर 87 लाख पर पहुंच गया है।

कंपनी की कैरेज़ आय में तिमाही-दर-तिमाही आधार पर मामूली बढ़त हुई है, जबकि उसकी एक्टिवेशन आय 4.64 प्रतिशत बढ़ी है।

एमएसओ सितंबर 2016 की तिमाही में अपना शुद्ध घाटा ठीक पिछली तिमाही के 43.5 करोड़ रुपए से 13.33 प्रतिशत घटाकर 37.7 करोड़ रुपए पर ले आया है। साल भर पहले की समान अवधि में उसका शुद्ध घाटा 26.6 करोड़ रुपए रहा था।

इस दौरान कंपनी का परिचालन लाभ (ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास व अमोर्टाइजेशन से पूर्व लाभ) ठीक पिछली तिमाही के 47.4 करोड़ रुपए से बढ़कर 49.7 करोड़ रुपए हो गया। पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में उसका परिचालन लाभ 48.3 करोड़ रुपए रहा था।

इस बार दूसरी तिमाही में कंपनी की आय ठीक पिछली तिमाही के 282 करोड़ रुपए से 2.48 प्रतिशत बढ़कर 289 करोड़ रुपए हो गई। वित्त वर्ष 2015-16 की दूसरी तिमाही में उसकी आय 233.9 करोड़ रुपए थी। इस तरह सालाना आधार पर उसकी आय 20 प्रतिशत बढ़ी है।

आलोच्य अवधि में कंपनी का खर्च 241.6 करोड़ रुपए पर लगभग ठहरा रहा है। यह ठीक पिछली तिमाही में 239.5 करोड़ रुपए रहा था, जबकि साल भर पहले की समान तिमाही में 194.3 करोड़ रुपए दर्ज किया गया था।

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सब्सक्रिप्शन आय

सिटी केबल की सब्सक्रिप्शन आय (शुद्ध बिलिंग के आधार पर) सितंबर तिमाही में जून तिमाही के मुकाबले 7.12 प्रतिशत बढ़कर 126.3 करोड़ रुपए से 135.3 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 101.5 करोड़ रुपए रही थी।

बता दें कि एमएसओ ने मॉडल इंटरकनेक्शन समझौते (एमआईए) का पालन करते हुए दिल्ली व मुंबई में अगस्त 2016 से शुद्ध बिलिंग का तरीका अपना लिया है।

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कैरेज़ आय

कंपनी की कैरेज़ आय पिछली तिमाही के 72 करोड़ रुपए से मामूली बढ़त के साथ 75.7 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में उसकी कैरेज़ आय 60.3 करोड़ रुपए रही थी।

एक्टिवेशन आय

सितंबर 2016 की तिमाही में सिटी नेटवर्क्स की एक्टिवेशन आय पिछली तिमाही के 36.6 करोड़ रुपए से 4.64 प्रतिशत बढ़कर 38.3 करोड़ रुपए हो गई है। उसकी एक्टिवेशन आय पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 19.1 करोड़ रुपए रही थी।

लगाए गए एसटीबी

एमएसओ ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 4 लाख एसटीबी लगाए हैं। उसने पहली तिमाही में भी इतने ही एसटीबी लगाए थे। कंपनी का डिजिटल सबसक्राइबर आधार अब 83 लाख से बढ़कर 87 लाख पर पहुंच गया है। कंपनी के केबल तंत्र में कुल 1.22 करोड़ सब्सक्राइबर शामिल हैं। इसका मतलब यह हुआ है कि संपूर्ण डिजिटलीकरण हासिल करने के लिए उसे अभी चल रही तीसरी तिमाही में 35 लाख एसटीबी लगाने होंगे।

डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) के चौथे व आखिरी चरण की समय सीमा 31 दिसंबर 2016 को खत्म हो रही है।

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एचडी सेवा

सितंबर 2016 की तिमाही के दौरान सिटी नेटवर्क्स ने 26,000 नए एचडी (हाई डेफिनिशन) सब्सक्राइबर जोड़े हैं जिससे उसका कुल एचडी सब्सक्राइबर आधार 91,000 तक पहुंच गया है। अपने एचडी आधार को बढ़ाने के लिए कंपनी ने अपनी बिक्री रणनीति को नए सिरे से ढाला है और मौजूदा एसडी (स्टैंडर्ड डेफिनिशन) सब्सक्राइबरों को अपग्रेड करने के लिए एचडी सेवाओं को बंडल करके पेश किया है।

ब्रॉडबैंड बिजनेस

दूसरी तिमाही को कंपनी को ब्रॉडबैंड बिजनेस से हुई आय ठीक पिछली तिमाही के 19.5 करोड़ रुपए से 27.69 प्रतिशत बढ़कर 24.9 करोड़ रुपए हो गई। पिछेल वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में उसे इस बिजनेस से 9.3 करोड़ रुपए की आय हुई थी।

इस अवधि में कंपनी ने अपने ब्रॉडबैंड परिचालन में 2.70 लाख घर जोड़े हैं जिससे उसका दायरा कुल 14.6 लाख घरों तक पहुंच गया है। वहीं, उसके ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबरों की संख्या पिछली तिमाही से 17 प्रतिशत बढ़कर 30 सितंबर 2016 तक 1.95 लाख हो चुकी है।

सिटी के डॉक्सिस नेटवर्क की औसत स्पीड इस समय 14.3 एमबीपीएस चल रही है और उसमें प्रति सब्सक्राइबर प्रति माह डेटा की खपत का स्तर 59 जीबी चल रहा है।

vd-wadhwa03-150x150वित्तीय नतीजों पर टिप्पणी करते हुए सिटी नेटवर्क्स क कार्यपालक निदेशक व सीईओ वी.डी. वाधवा का कहना था, “हम बराबर अपना डिजिटल सब्सक्राइबर आधार बढ़ा रहे हैं। निश्चित चरणों में हमारा मुद्रीकरण निरंतर बढ़ रहा है। अदालत में चल रहे मामलों के चलते डिजिटलीकरण में देरी हुई है। इससे तीसरे चरण के इलाकों में मुद्रीकरण पर असर पड़ा है। अन्यथा हम काफी बेहतर काम करते।”

उनका यह भी कहना था, “अब अधिकांश स्टे ऑर्डर दिल्ली हाई कोर्ट ने निरस्त कर दिए हैं। बाकी मचे मामलों के भि निपटने से एनालॉग सिग्नल पूरी तरह समाप्त हो जाएगे। इससे मोनेटाइजेशन बढ़ेगा और उद्योग के विकास को काफी गति मिलेगी। नए प्रारूप टैरिफ आदेश पर अपेक्षित अमल सारा खेल बदल देगा और वो डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्मों के लिए ज्यादा लाभप्रद होगा। हालांकि उसकी सफलता इस पर निर्भर करती है कि उस पर कितना कारगर अमल होता है।”

पहल सिटी केयर्स की

तिमाही के दौरान कंपनी ने ‘सिटी केयर्स’ नाम की एक पहल शुरू की है जिसका मकसद ब्रॉडबैंड और वीडियो, दोनों ही तरह के ग्राहकों के बीच सेवाओं में सक्रिय मदद व परवाह करने का भाव पैदा करना है।

बीएसएनएल से गठजोड़

सिटी नेटवर्क्स ने ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ज़ेडईईएल) की ओवर-द-टॉप (ओटीटी) सेवा को डिस्ट्रीब्यूट करने के लिए बीएसएनएल के साथ समझौता किया है। इन सेवाओं को बीएसएनएल के समूचे ग्राहक आधार को बंडल किए गए डेटा वाउचर और मूल्य-वर्धित (वैस) सेवाओं के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा।

प्रॉपराइटरी चैनल

एमएसओ ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में The MSO also launched ‘माई सिटी’ के नाम से प्रॉपराइटरी चैनल लॉन्च किए हैं। इनमें कंपनी का फोकस दर्शकों को एकदम स्थानीय और समुदायों के लिए प्रासंगिक कंटेंट उपलब्ध कराने पर है।

ऋण की स्थिति

30 सितंबर 2016 तक की स्थिति के अनुसार कंपनी पर समेकित स्तर पर चढ़ा सकल ऋण 1196 करोड़ रुपए का है, जबकि शुद्ध ऋण की मात्रा 1089 करोड़ रुपए की है।