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डीटीएच के लिए जारी ट्राई के सीपीई टैरिफ आदेश की हकीकत

।।आर पी सिंह।।

ज्यादा वक्त नहीं हुआ, जब भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 1 अप्रैल को एक संशोधित दूरसंचार (प्रसारण व केबल) सेवा (सातवां) (डायरेक्ट-टू-होम सेवा) टैरिफ आदेश, 2015 पेश किया। इसके ज़रिए उसने डीटीएच सेवा प्रदाताओं द्वारा लगाए गए ग्राहक परिसर उपकरण (सीपीई) के संदर्भ में टैरिफ का निर्धारण किया। यह टैरिफ आदेश अधिसूचित कर दिया गया है और 1 जून 2015 से प्रभाव में आएगा।

दिलचस्प बात यह है कि यह टैरिफ आदेश इसी तरह के पिछले सीपीई टैरिफ आदेश में किया गया संशोधन है जिसे डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा अपील में चुनौती दी गई थी। इसे स्वीकार करने के बाद दूरसंचार निपटान व अपीलीय ट्राइब्यूनल (टीडीसैट) ने ट्राई को कुछ महत्वपूर्ण और अहम लागत घटकों पर विचार करने का निर्देश दिया था जिस पर नियामक संस्था ने तब गौर नहीं किया था। लगता है कि नियामक संस्था ने एक बार फिर न केवल अहम लागत घटकों को अनदेखा किया है, बल्कि नए टैरिफ आदेश के लागू होने का दायरा बढ़ाकर उसमें हाई डेफिनिशन (एचडी) सीपीई को भी खींच लिया है, जिसकी टीडीसैट ने न तो मांग की थी और जो सामान्य सीपीई और एचडी सीपीई की लागत के भारी अंतर को देखते हुए कहीं से उचित भी नहीं है।

नए टैरिफ आदेश से दुखी डीटीएच ऑपरेटरों के पास इसे फिर से टीडीसैट के सामने ले जाने के अलावा कोई चारा नहीं था। डीटीएच ऑपरेटरों की अपील को स्वीकार कर लेने के बाद ट्राइब्यूनल पर इस मामले पर सुनवाई की तारीख 25 मई 2015 तय की है।

इस समय देश में छह डीटीएच ऑपरेटर सक्रिय हैं और उनके बीच में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा है। ऐसे में सवाल उठता है कि ट्राई सीपीई के मूल्य निर्धारण के पहलू में आखिर क्यों हस्तक्षेप करना चाहता है जो पहले से ही डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा ग्राहकों को बेहद रियायती मूल्य पर दिए जा रहे हैं। जब डीटीएच ऑपरेटर पहले से ही भारी नुकसान झेल रहे हैं और उन पर तमाम टैक्सों का बोझ है, तब ऐसा एकतरफा टैरिफ आदेश उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल देगा और उनके बिजनेस को अलाभकारी बना देगा। इसके विपरीत, देश में डिजिटलीकरण की सुस्त प्रगति के मद्देनज़र डीटीएच जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को अधिक से अधिक लचीला व माकूल माहौल दिया जाना चाहिए था ताकि वे संपूर्ण डिजिटलीकरण हासिल करने में सरकार की मदद करते। बजाय इसके आज़ादी के साथ व्यापार करने के उनके एकदम बुनियादी और संवैधानिक अधिकार को ही काट दिया गया।

डीटीएच ऑपरेटर ट्राई को जब वो सीपीई से संबंधित एक टैरिफ आदेश लाने जा रहा था, उससे पहले ही लागत के घटकों का पूरा ब्यौरा सौंप चुके थे। लेकिन सीपीई के लिए टैरिफ आदेश तैयार करते समय ट्राई ने इन महत्वपूर्ण लागत घटकों को नजरअंदाज कर दिया गया।

डीटीएच सेवा प्रदाताओं का कहना है कि ट्राई इस तथ्य को ध्यान में रखे बगौर सीपीई के मूल्य को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है कि आपूर्तिकर्ता/निर्माता जिस मूल्य पर सीपीई डीटीएच ऑपरेटरों को दे रहे हैं, उस पर पहले कभी भी कोई नियंत्रण नहीं था। इस प्रकार, सीपीई की इनपुट लागत पर किसी रोक या नियंत्रण के न होने और टैरिफ आदेश द्वारा रिटेल मूल्य निर्धारण पर थोप गए नियंत्रण ने एक विरोधाभासी और असंतुलित चित्र स्थिति बना दी है।

यह भी नोट करना दिलचस्प है कि प्राधिकरण की तरफ से आनेवाले सभी टैरिफ आदेश केवल डीटीएच ऑपरेटरों पर लागू होते हैं, जबकि केबल ऑपरेटरों के लिए ऐसे टैरिफ आदेश को लेकर एकदम सन्नाटा छाया हुआ है।

ट्राई ने टैरिफ आदेश लाते वक्त जिन लागत घटकों को नजरअंदाज़ किया है, उनके बारे में एक प्रमुख डीलर मोटामोटी इस तरह व्याख्या की।

यह डीलर हर महीने कम से कम 100 कनेक्शन इंस्टॉल करता है। उसका कहना है, “डिश एंटिना, तार, स्क्रू और कनेक्टर जैसे अन्य सामान वगैरह एक बार लगा दिए गए तो उन्हें नए ग्राहक द्वारा फिर से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि उसका कोई भी ग्राहक पुराना जंग लगा डिश एंटिना स्वीकार नहीं करेगा। ग्राहक हमेशा नया एसटीबी, नया एंटिना व नए तार मांगता है और वो इस बार पर ज़ोर देता है कि सेट-टॉप बॉक्स वाले पैकेज की ‘सील’ उसी के सामने खोली जाए।”

दूसरे शब्दों में, डीलर के लिए लौटाए गए डिश एंटिना, तारों, स्क्रू और कनेक्टर्स जैसी अन्य सामान्य कबाड़ के बराबर हैं। ट्राई जाहिरा तौर पर इस संबंध में ग्राहक की वरीयताओं पर विचार करना भूल गया है।
इस कॉलम को लिखने से पहले हमने कुछ ग्राहकों से जांच-परख की कि क्या वे ऐसे रिफर्निश किए गए एसटीबी के साथ रिफर्निश किए गए सीपीई को पूरा दाम देकर खरीदेंगे जिसे किसी दूसरे ग्राहक द्वारा लौटा दिया गया है। इसका ज़ोरदार जवाब था – नहीं।

डीटीएच ऑपरेटर 3050 रुपए की अनुमानित लागत में सीपीई खरीदता है जिसमें एसटीबी (आयात शुल्क / वैट सहित 2000 रुपए), एंटिना, तार, एलएनबीएफ, कनेक्टर्स व अन्य सामान समेत ओडीयू (700 रुपए) और स्मार्ट कार्ड (350 रुपए) शामिल हैं।

इस खरीद की लागत के अलावा डीटीएच ऑपरेटर को इंस्टॉलेशन और एक्टीवेशन पर लगभग 400 रुपए, डिस्ट्रीब्यूटर पर 100 रुपए और डीलर मार्जिन पर 400 से 450 रुपए का खर्च करना पड़ता है। इस प्रकार, डीटीएच ऑपरेटर के लिए नए ग्राहक पर कुल लागत लगभग 4000 रुपए की पड़ती है। लेकिन सीपीई को 1600 रुपए के काफी रियायती मूल्य पर डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा ग्राहकों को दिया जाता है। यह वास्तविक लागत पर 50 प्रतिशत से भी ज़्यादा की छूट हुई।

कहानी में एक और पेंच है बिज़नेस के आयाम का, जिसे प्राधिकरण समझने में नाकाम रहा है। हर छह महीने पर एक डीलर अधिक डीलर मार्जिन कमाने के लिए पुराने सीपीई को लौटाने और अन्य ब्रांड या डीटीएच ऑपरेटर का नया कनेक्शन लेने के लिए ग्राहकों को लुभाता है। यह स्वाभाविक रूप से डीलरों के बीच गलत तरीके की प्रैक्टिस पैदा कर, चक्रीय चर्न को बढ़ावा दे रहा है और इससे डीटीएच ऑपरेटरों को बहुत नुकसान होगा।

डीटीएच ऑपरेटर को ग्राहक को दी गई करीब 2000 रुपए की सब्सिडी को वसूलने में कुछ साल लग जाते हैं। इसलिए किसी ग्राहक का उसके प्लेटफॉर्म पर कम से कम 2 साल तक एक्टिव रहना ज़रूरी है। इस संदर्भ में डीटीएच ऑपरेटरों को ट्राई के ओपन एंडेड टैरिफ ऑर्डर से परेशानी है। प्राधिकरण ने ग्राहकों को पुराना सीपीई नए जैसा बनाकर उपलब्ध कराना डीटीएच ऑपरेटरों के लिए अनिवार्य कर दिया है। पर ट्राई ने डीटीएच ऑपरेटर को पड़ने वाली इस नवीनीकरण लागत को नहीं गिना है।

ग्राहक को दी गई 2000 रुपए या उससे ज़्यादा की सब्सिडी को वसूल करने के लिए डीटीएच ऑपरेटरों की राय है कि एक ग्राहक को लगातार उस विशेष डीटीएच प्लेटफॉर्म पर कम से कम दो साल तक एक्टिव रहना चाहिए। इस प्रतिस्पर्धी बाज़ार में डीटीएच ऑपरेटर, ग्राहकों को लाभकारी सेवाओं की पेशकश करने के लिए बाध्य हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि अगर ग्राहक खुश नहीं है तो वे ग्राहक को खो देंगे और अंत में उनको दी गई सब्सिडी वे वसूल नहीं पाएंगे। फिलहाल डीटीएच ऑपरेटर, ग्राहकों को सभी आवश्यक सेवाएं देकर बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रहे हैं तो व्यावसायिक इंटर-ऑपरेबिलिटी का सवाल कहां उठता है?

यह देखना दिलचस्प होगा कि मसला किस दिशा में जाता है और, क्या टीडीसैट एक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएगा और इन महत्वपूर्ण लागत घटकों को समझने की कोशिश करेगा।

(लेखक एक स्वतंत्र विशेषज्ञ हैं। उनके विचार व्यक्तिगत हैं, हमारे नहीं)