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केबल टीवी सब्सक्राइबरों को खींचने के लिए डिश टीवी ला रहा है अपना नया सब-ब्रांड ज़िंग

मुंबई: डिश टीवी केबल टीवी सब्सक्राइबरों को अपने घेरे मे लेने की तैयारी कर रहा है। भारत की सबसे बड़ी डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) कंपनी ने ज़िंग नाम से एक सब-ब्रांड बनाया है जो क्षेत्रीय बाज़ारों और डिजिटाइजेशन के फेज़-3 और फेज-4 में दाम के प्रति सचेत सब्सक्राइबरों को लक्षित करेगा।

इसी के साथ डिश टीवी देश का सबसे पहला ऐसा डीटीएच ऑपरेटर बन जाएगा जिसके दो ब्रांड होंगे। एक मुख्य डीटीएच सब्सक्राइबरों के लिए और दूसरा ब्रांड बाज़ार के निचले हिस्से के लिए होगा।

डिश टीवी का यह नया ब्रांड पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सबसे पहले काम करना शुरू करेगा। पूर्वी भारत के ये वो मार्केट हैं जहां अपनी भाषा में टीवी ज़्यादा देखा जाता है। इसके बाद महाराष्ट्र और गुजरात को लक्षित किया जाएगा।

जिंग के सब्सक्राइबरों को व्यापक श्रेणियों में स्थानीय भाषा के चैनल पेश किए जाएंगे। सैट टॉप बॉक्स (एसटीबी) कम दाम पर उपलब्ध होंगे।

ज़िंग ने आज पश्चिम बंगाल में 26 बांग्ला चैनलों और सेवाओं से शुरुआत की है। बहुत जल्द ज़िंग ओडिशा में प्रवेश करेगा और फिर दूसरे स्थानीय मार्केट में जाएगा।

RC-Venkateish-150x150डिश टीवी के सीईओ आर सी वेंकटेश ने कहा, “केबल के डिजिटाइजेशन ने देश में डीटीएच ऑपरेटरों के लिए विकास के द्वार खोल दिए हैं। अब ज़्यादा लोग डिजिटल सिस्टम को ले रहे हैं। उद्योग के अगुआ और प्रवर्तक होने के कारण हमें यह नया ब्रांड ज़िंग पश्चिम बंगाल के ग्राहकों के लाभ के लिए शुरू करते हुए खुशी है।”

डिश टीवी के सीओओ सलिल कपूर ने बताया कि ज़िंग का नया कनेक्शन 1099 रुपए (इनस्टॉल करने का शुल्क अलग) में उपलब्ध है जबकि डिश टीवी बॉक्स 2099 रुपए में मिलता है। ज़ाहिरा तौर पर यह फेज़-3 और फेज़-4 के दौरान डिजिटाइज़ किए जाने वाले 1 से 1.2 करोड़ एनालॉग केबल टीवी सब्सक्राइबरों के लिए हैं। लेकिन डिश टीवी अपने मौजूदा सब्सक्राइबरों को ज़िंग पर जाने के लिए प्रोत्साहित नहीं करेगा।

ज़िंग तीन पैकेज दे रहा है जिसमें 175 रूपए (149 रूपए का कर अतिरिक्त), 249 रूपए और 349 रूपए के पैक शामिल हैं। सभी पैकेज में स्थानीय चैनल मुख्य रहेंगे।

Salil-Kapoor-150x150कपूर ने टेलिविज़न पोस्ट को बताया, “ज़िंग बिल्कुल दूसरे तरह के दर्शकों के लिए है। फेज़-3 और फेज़-4 वाले परिवार छोटे शहरों और अंदरूनी इलाकों में पड़ते हैं और उनमें से ज़्यादातर अपनी भाषा में कंटेंट देखना चाहते हैं। डिश टीवी और अन्य डीटीएच प्लेयर्स राष्ट्रीय बेस पैक देते हैं और स्थानीय पैक साथ में जोड़े जाते हैं। ज़िंग ठीक इसके विपरीत काम करेगा। बेस पैक में सारे स्थानीय चैनल रहेंगे और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय चैनल जोड़े जा सकेंगे।”

ग्राहकों को प्राप्त करने में होने वाले खर्च के बारे में जानकारी देने से मना करते हुए कपूर ने माना कि इस मॉडल के तहत दिए जाने वाले एसटीबी अलग होंगे। कपूर ने कहा, “कम दाम के होने की वजह से ज़हिर है वे अलग तरह से बनाए जाएंगे। लेकिन उनके साथ एक अनोखा मूल्य जुड़ा रहेगा।”

ज़िंग सभी लोकप्रिय चैनल पेश करेगा। यह जानकारी देते हुए कपूर ने दावा किया, “हमें यहां मौका दिख रहा है। हमने हमेशा सबसे पहले कदम उठाएं है और बाद में उद्योग ने हमारा अनुकरण किया है।”

कंपनी ज़िंग को प्रमोट करने के लिए 5 करोड़ रूपए लगाएगी। संयोगवश ज़िंग के विज्ञापन, पैकेजिंग और बाकी की मार्केटिंग गतिविधियां भी स्थानीय भाषा में ही होगी।

यह पूछे जाने पर कि राज्य में मौजूद मज़बूत प्रतिद्वंद्वियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, कपूर ने कहा कि खास कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, “इससे मार्केट और बढ़ सकता है। दक्षिण के राज्यों को छोड़कर बाकी भारत में राष्ट्रीय हिंदी चैनलों की मांग है। बंगाली दर्शक भी लोकप्रिय चैनल देखना चाहते हैं जो हर डीटीएच प्लेयर देते ही हैं।”

डिश टीवी के मौजूदा और नए सब्सक्राइबर ज़िंग को सबस्क्राइब करना चाहेंगे इस बात का डर है।

Bibhu-Rath-150x150क्या केबल कंपनियों पर प्रभाव पड़ेगा? ऑरटेल कम्युनिकेशन के प्रमुख और सीईओ बिभु प्रसाद रथ ने बताया कि केबल नेटवर्क डीटीएच से ज़्यादा अच्छी स्थिति में है क्योंकि ज़्यादा स्थानीय चैनल उपलब्ध करवाने के लिए उनके पास बैंडविड्थ की कोई समस्या नहीं है। हेडएंड का विकेंद्रीकरण किया जा सकता है। उन्होंने दावे के साथ कहा कि यदि कोई स्थानीय चैनलों का बेहतर पैक दे सकता है तो वह केबल है न कि डीटीएच। मुझे आश्यर्य है कि डीटीएच ऑपरेटर केबल वालों द्वारा रोज़ खेले जाने वाले खेल में पड़ रहे हैं।

मार्केट क्या और कैसे बदलेगा, यह इस पर निर्भर है कि ज़िंग को कितने सब्सक्राइबर मिलते हैं।