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ट्राई नियमन को उदार बनाने को तैयार, लेकिन उद्योग परिपक्वता तो दिखाए: एस के सिंघल

मुंबई: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ब्रॉडकास्टिंग क्षेत्र के नियामक ढांचे को उदार बनाने के लिए तैयार है बशर्ते इस क्षेत्र के हितधारक मिल-जुलकर साथ करने को तैयार हों। यह कहना है कि ट्राई में ब्रॉडकास्टिंग व केबल सेवाओं (बी एंड सीएस) के सलाहकार एस के सिंघल का।

सिंघल ने दिल्ली में आयोजित टेलिविज़न पोस्ट के सम्मेलन ‘डिजिटाइज़ इंडिया’ के एक सेमिनार में कहा, ” नियामक ढांचे को और उदार बनाने में हमारी गंभीर दिलचस्पी है, लेकिन ऐसा करना उद्योग के व्यवहार पर निर्भर करता है। कोई अन्य कारक इसका फैसला नहीं करेगा।”

सिंघल ने हितधारकों का आह्वान किया कि वे आत्मविश्लेषण करके देखें कि वे आपसी झगड़ों को सुलझा क्यों नहीं पा रहे और इसके बजाय सरकार व नियामक को दोष दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियामक संस्था को मिला जनादेश उपभोक्ता और उद्योग के हित के बीच संतुलन बैठाना है।

उनसे पूछा गया कि जब खाद्यान्नों व सब्ज़ियों जैसी आवश्यक वस्तुओं तक के दाम पूरी तरह बाज़ार पर छोड़ दिए गए हैं, तब ट्राई टीवी चैनलों के दाम क्यों नियंत्रित कर रहा है? इस पर सिंघल का कहना था कि चैनलों के केवल थोक मूल्य पर नियंत्रण है, जबकि रिटेल मूल्य को, जहां असली प्रतिस्पर्धा है, खुला छोड़ दिया गया है।

उन्होंने कहा है कि थोक मूल्य के मामले में भी उद्योग ऊपरी सीमा के 8-10 प्रतिशत पर काम कर रहा है, जबकि इसे एनालॉग मूल्य का 42 प्रतिशत तय किया गया है।

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उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “थोक मूल्य के मामले में लोग दावा करते हैं कि इसका स्तर 2004 के हिसाब से नियंत्रित हो रहा है। लेकिन आप किसी ब्रॉडकास्टर या डिस्ट्रीब्यूटर से पूछें तो सही कि उनमें से कितने उस सीमा को छू पा रहे हैं। हम आखिर किस तरह की बंदिशों की बात कर रहे हैं?”

सिंघल ने दलील दी कि कंटेंट के मूल्य के मामले में भारतीय बाज़ार की तुलना विकसित बाज़ारों से नहीं की जानी चाहिए क्योंकि दोनों जगह लोगों की क्रयशक्ति समान नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मूल्य के नियमन के बावजूद नियामक संस्था ने आय को बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश दे रखी है।

उन्होंने दमदार तरीके से कहा, “हम मूल्य को दबा नहीं रहे हैं। हमने बाज़ार मूल्य को उभरने के लिए पर्याप्त मौका दे रखा है। लेकिन इसके साथ ही हमें बहुत साफ-साफ समझना पड़ेगा कि रिटेल स्तर पर भारतीय बाज़ार की स्थिति विकसित बाज़ारों से एकदम भिन्न है। न तो लोगों की उतनी कमाई है और न ही डिस्ट्रीब्यूटरों व ब्रॉडकास्टरों की सीमित पहुंच है। चैनलों के मूल्य पहुंच और ग्राहकों की संख्या पर भी निर्भर करते हैं।”

उन्होंने थोक मूल्य के विनियमन को उपभोक्ता हितों का सही संरक्षण करार दिया। डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) के विनियमन के तहत, एक उपभोक्ता को किसी पे-चैनल के लिए कम से कम 150 रुपए का भुगतान करना होता है क्योंकि लागत ग्राहक को हासिल करने और उपभोक्ताओं की सर्विसिंग के साथ जुड़ी है।

उन्होंने कहा कि गैर-भेदभाव और गैर-अनन्यता, विनियमन के मौलिक सिद्धांत हैं। उन्होंने पूछा कि क्यों हितधारक अपने रोज़-ब-रोज़ के समझौतों में इन सिद्धांतो को प्रदर्शित नहीं कर पाते हैं।

उन्होंने बैठक को बताया, “मैं आपको आश्वासन दे सकता हूं कि विनियमन के मौलिक सिद्धांत बरकरार हैं और रहेंगे। हम गैर-अनन्यता, गैर-भेदभाव और मस्ट कैरी के सिद्धांतो को नहीं छूएंगे।”

उन्होंने ट्राई के हाल के परामर्श पत्र की ओर ध्यान खींचा जिसमें टैरिफ और कैरिज से संबंधित मुद्दों पर समग्र रूप से सोच-विचार किया गया है।

सिंघल ने कहा, “हम नवाचार को प्रोत्साहित करना चाहते हैं और सबके लिए समान अवसर सुनिश्चित करने चाहते हैं। इसीलिए हमारे नए परामर्श पत्र में हम न सिर्फ टैरिफ के विनियमन बल्कि कैरिज शुल्क के विनियमन के बारे में भी बात कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि परामर्श पत्र का नतीजा हितधारकों की राय पर निर्भर करेगा।

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परामर्श पत्र को ब्रॉडकास्ट के क्षेत्र के साथ ही डिस्ट्रीब्यूशन के स्तर पर निवेश को आकर्षित करने के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा है कि डिस्ट्रीब्यूशन प्लेयर के लिए एक बड़ा अवसर है जिससे एक टिकाऊ मॉडल बन सके जिसमें वीडियो सेवाओं पर निर्भरता के बजाय ब्रॉडबैंड जैसे अन्य सेवाएं शामिल हों।

ट्राई एक विनियामक ढांचा बनाने में पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन सुनिश्चित करने पर काम कर रहा है, अब विनियामक उन विनियमों को लागू करने में अपनी ऊर्जा लगाएगा। उन्होंने ब्रॉडकास्टरों और मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) के बीच इंटरकनेक्ट समझौते के मुद्दे का उदाहरण दिया जहां प्राधिकरण ने विनियमों में संशोधन किया है और अंतराल को भरा है ताकि कोई भी ब्रॉडकास्टर समझौता किए बिना एमएसओ को सिग्नल न दे।

इसी तरह, प्राधिकरण एमएसओ-एलसीओ के इंटरकनेक्शन मुद्दे पर काम कर रहा है। उसने दोनों द्वारा समझोता नहीं किए जाने के मुद्दे को सुलझाने के लिए एक मसौदा मानक इंटरकनेक्ट समझौता (एसआईए) और मॉडल इंटरकनेक्शन समझौता (एमआईए) पर परामर्श पत्र जारी किए हैं।

उन्होंने कहा, “आने वाले समय में, आपको अमल करने पर बहुत अधिक ज़ोर देखने को मिलेगा।”
विनियामक मुद्दों का समाधान केवल एक स्वस्थ वातावरण में किया जा सकता है यह उल्लेख करते हुए सिंघल ने एमएसओ और एलसीओ को आग्रह किया कि वे एमआईए अपनाएं न कि एसआईए। क्योंकि हर एमएसओ और एलसीओ की क्षमताएं अलग-अलग हैं और वे केवल एमआईए के माध्यम से इस्तेमाल की जा सकती हैं, क्योंकि हर कोई एक ही तरह की सेवाएं नहीं प्रदान कर सकता।

सिंघल ने वादा किया कि प्राधिकरण भेदभाव से संबंधित मुद्दों में समान रूप से सक्रियता दिखाएगा। उन्होंने कहा, “भविष्य में, आप गैर-भेदभाव के मुद्दे पर इसी तरह के प्रयासों को देखेंगे, जहां प्लेटफार्मों की परवाह किए बगैर समान विनियमन, एड्रेसेबल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा।”

उद्योग में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए विनियामक चर्चा के रूप में यह पहल कर रहा था, इसके साथ ही सिंघल ने कहा कि विनियामक चाहता है कि उद्योग ये मुद्दे सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करे।

उद्योग में परिपक्वता के स्तर की मांग करते हुए उन्होंने कहा, “एक विशेष मुद्दा जिसपर एक विनियामक के रूप में हमें चिंता है वह उस स्तर की बात है जहां विनियामक को रुक जाना होता है और उद्योग को काम करना होता है।”

उन्होंने व्याख्या करते हुए कहा, “हमें किसी भी मुद्दे पर आगे जाने में विनियामक शक्ति का प्रयोग करने में परेशानी नहीं है। लेकिन जिस पल हम उस मार्ग से जाएंगे, उद्योग पर विनियामक बुनियादी ढांचे की लागत बढ़ जाएगी जो अंतत: उपभोक्ताओं के माथे पर डाल दी जाएगी। तो उद्योग को उस तरह के व्यवहार का प्रदर्शन करना चाहिए जिससे विनियमन बल ज़रा-सा लगाना पड़े और किसी ज़ोर-जबरदस्ती की गुंजाइश न रहे।”

हालांकि विनियमन समीक्षा एक निरंतर कवायद है, सिंघल ने ज़ोर देकर कहा कि विनियामक को स्थिरता और विनियामक ज़रुरतों के बीच संतुलन बनाना होता है। उन्होंने बताया, “हर बिज़नेस को स्थिरता की आवश्यकता है। हम विनियमों की समीक्षा हर दो साल में नहीं कर सकते।”

उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यदि उद्योग अपने-आप समाधान नहीं ढूंढेगा तो विनियामक हस्तक्षेप करेगा। उन्होंने कहा, “अगर उद्योग स्वयं या बाज़ार विनियमन की तरफ विकसित नहीं होता तो एसआईए निर्धारित विनियामक हस्तक्षेप का अगला स्तर लागू होगा।”

सिंघल के मुताबिक, विनियामक के पास हर सवाल का जवाब नहीं होता जब तक कि उद्योग सह संचालन शुरू नहीं करता और उद्योग के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए समय पर इनपुट उपलब्ध नहीं कराता।

उन्होंने कहा कि चैनलों का पुल फैक्टर होना चाहिए न कि उपभोक्ताओं के गले अधिक से अधिक चैनल मढ़ने चाहिए। फिलहाल 50 प्रतिशत से अधिक ग्राहक डिजिटल और एड्रेसेबल फॉर्म में सेवा प्राप्त कर रहे हैं।

उन्होंने पुष्टि करते हुए कहा, “हमें एक ऐसा वातावरण बनाना है जहां उपभोक्ता के पास विकल्प हों और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफार्म ब्रॉडकास्टरों से उसके सभी चैनलों को कैरी करने के बाध्यकारी नियम के बिना उपभोक्ताओं की सेवा कर सकते हैं।”