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आईपीएल की देखादेखी उभरी तमाम स्पोर्ट्स लीग की सफलता की डगर आसान नहीं

मुंबई: इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की सफलता के बाद, कबड्डी से लेकर फुटबॉल और बैडमिंटन जैसी कई स्पोर्ट्स लीग कुकुरमुत्तों की तरह उग आई है। लेकिन ये लीग कायदे व मुनाफे के साथ काम कर सकें, इसके लिए कुछ बातें ज़रूरी हैं। मसलन, हितधारकों को समूचे पारिस्थितिकी तंत्र या परिवेश का निर्माण करने के लिए एक साथ काम करना है।

फिक्की फ्रेम्स के आखिरी दिन एक सत्र में खाका खींचा गया कि भारत को विविध खेलों का एक व्यवहार्य राष्ट्र कैसे बनाया जा सकता है। प्रतिभागियों में स्टार स्पोर्ट्स के प्रमुख नितिन कुकरेजा, यूस्पोर्ट्स के सीईओ सुप्रतीक सेन, इंटेक्स टेक्नोलॉजीज़ के डायरेक्टर केशव बंसल और एफसी गोवा के सीईओ सुखविंदर सिंह शामिल थे।

Nitin-Kukreja-150x150कुकरेजा ने उल्लेख किया कि जब तीन साल पहले ब्रॉडकास्टर ने कबड्डी लीग शुरू करने का फैसला किया तो मन में काफी शक-शुबहा था। उन्होंने कहा, “अब हम कुछ खास करने के मुहाने पर हैं। पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को साथ मिलकर काम करना है। जो लोग बाद में आए हैं, उन्हें और अधिक यक़ीन दिलाने की ज़रूरत है। कितनी अच्छी तरह से हितधारक एक साथ आते हैं इस पर लीग की सफलता निर्भर रहेगी।”

उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि स्पोर्ट्स लीग के काम करने के लिए हमें प्रशंसकों पर सबसे ज़्यादा ध्यान देना है। कुछ स्टेडियम प्रशंसकों के अनुकूल नहीं हैं। लेकिन मार्केटिंग से लेकर प्रोग्रामिंग सब कुछ में अगर प्रशंसक पहले रखे जाते हैं, तो चीजें पैनी और स्पष्ट होंगी। कबड्डी के लिए चुनौती यह थी कि लोग उसे खेल नहीं रहे थे। यह प्रेरणा के रूप में नहीं देखी गई थी। तो बारीकी से हर पहलू पर ध्यान दिया गया। स्टेडियम में भी एक महत्वाकांक्षा का तत्व रखने का प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा, “हमें देखना है कि ट्रॉफी पाने की इच्छा सब में उभरे। यात्रा पूरी नहीं हुई है। हम खेल के आकार का निर्माण कर रहे हैं।”

सेन ने कहा कि कबड्डी का आइडिया रोनी स्क्रूवाला का था। उन्होंने कहा, “हमारी पहली टीम थी। चुनौती खेल को आम जनता के सामने लाने था। हमने शुरू से ही विकास योजना रखी। हम स्कूलों और कॉलेजों में गए। छात्र खेलने लगे और हमें रॉक स्टार एथलीट मिल गए। दूसरे सत्र में यह बहुत बड़ी चीज़ में तब्दील होना शुरू हो गया। अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी खेलने आने लगे। हम अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी का दौरा कर रहे हैं।”

हॉकी और बैडमिंटन लीग

जब उनसे पूछा गया कि अगर अन्य स्थानीय लीग हॉकी और बैडमिंटन कम सफल रही या यह सिर्फ एक बाहरी व्यक्ति की धारणा है तो जवाब में कुकरेजा ने कहा कि यह एक बाहरी व्यक्ति की धारणा है। हॉकी रांची में मज़बूत है और वहां जुनून पैदा करता है।

Supratik-Senउन्होंने विस्तार से बताया, “खेल में यह गुण होता है कि वह एक निश्चित सीमा तक काम करता ही है। स्पोर्ट अधिक स्थानीय हो रहा है। चुनौती इसे राष्ट्रीय मंच पर लाने की है। कबड्डी सरल है और कई लोगों ने इसे अपने जीवन में कभी तो खेला है। कितने लोगों ने हॉकी खेली है? यह इस खेल की एक चुनौती है।”

रेटिंग महत्वपूर्ण हैं पर अन्य तत्व भी महत्वपूर्ण हैं। स्टार स्पोर्ट्स प्रशंसकों के लिए प्रोत्साहनों पर समय खर्च करता है, यही वजह है कि वह आइएसएल और पीकेएल का सह-मालिक है। पारिस्थितिकी तंत्र के स्थायी होने के लिए, क्लबों को उनके हिस्से का काम करना चाहिए। सारा ज़िम्मा ब्रॉडकास्टर पर नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि क्लबों को ज़मीनी स्तर पर गतिविधियां और प्रशंसक को जोड़ने की गतिविधियां करनी चाहिए। साथ ही संबंधित खेल महासंघ को भी लीग की डिजाइन, प्रतियोगिता के फॉर्मैट और कैसे प्रतिद्वंद्विता का निर्माण करें आदि में एक भूमिका निभानी पड़ती है।

ब्रांड बनाने के लिए आईपीएल का उपयोग

आईपीएल में दो साल के लिए अपनी कंपनी के प्रवेश बारे में बात करते हुए, इंटेक्स टेक्नोलॉजीज़ के बंसल ने कहा कि समय सीमा कम है, इसलिए लाभ के बारे में सोचा नहीं जा सकता। यह, आईपीएल का उपयोग कर ब्रांड बनाने के बारे में है। उन्होंने कहा कि 30 पार्टियों ने नई फ्रेंचाइज़ी के लिए टेंडर खरीदे, और प्रस्तुत करने के दिन पर छह उपस्थित थे।

उन्होंने कहा, “हम लाभ की ओर नहीं देख सकते। हम रिवर्स बोली लगाने पर चले गए। हमने नकारात्मक बोली लगाई। मुनाफा, संभव नहीं लग रहा है, हालांकि हो गया तो मुझे खुशी होगी। जबकि पारंपरिक विज्ञापन के रास्ते हैं, पर हमने जो आईपीएल के साथ किया है वह एक नया कदम है। हमारा उद्देश्य यह देखना है कि हमारे ब्रांड में उपभोक्ता का विश्वास कई गुना कैसे बढ़े। आईपीएल की तुलना में बड़ा और बेहतर कुछ भी नहीं है।”

फुटबॉल

एफसी गोवा के सीईओ सुखविंदर सिंह का मानना ​​है कि क्रिकेट के अलावा फुटबॉल की तरह अन्य खेल को अच्छी तरह से पैकेज किया जाए तो इसमें संभवनाएं है। उद्देश्य, और अधिक प्रशंसकों को पाना और यह देखना है कि सौदे वित्तीय और व्यावसायिक पार्टनर के लिए व्यवहार्य हैं।

sukhvinder-singh-CEO-FC-Goaसिंह ने कहा, “हमने कुछ अद्वितीय और गहन अनुभव किया। गोवा में फुटबॉल प्रशंसक फुटबॉल के जानकार हैं। हम उनके लिए नई सेवाएं लॉन्च करेंगे। अब तक हम अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल देखते रहे हैं। अब स्थानीय और क्षेत्रीय, समय की मांग है। प्रशंसक जुड़ाव आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम की आर्थिक सफलता टीम के मैदान में प्रदर्शन पर निर्भर है। मर्केंडाइजिंग प्रदर्शन से प्रेरित होगी।”

उन्होंने कहा कि कभी कभी सेलेब्रिटीज़ फ्रैंचाइज़ी के मालिक होते हैं और इसका सफलतापूर्वक उपयोग किया जा सकता है। फ्रैंचाइज़ी के लिए सब कुछ आतिथ्य तरह की प्लान करना होता है।

उन्होंने जनता तक पहुंचने की उनकी टीम की विभिन्न पहलों के बारे में कहा, “यह ब्रांड से अपनापन बनाने के बारे में है। हम ज़मीनी स्तर पर काम करते हैं। अक्टूबर से दिसंबर तक, हम हमारे ब्रांड को हाइलाइट करते हैं। हालांकि, यह उन नौ महीनों के लिए नहीं है, जब लीग नहीं होती है। हम नौ महीनों तक कम्युनिटी से जुड़ाव बनाते हैं। हमने उन अभिभावकों के साथ एक वर्कशॉप किया, जो हमारी टीम और लीग और अवसरों के बारे में अधिक जानना चाहते थे। हमने गोवा कार्निवल में भाग लिया।”

यह स्वीकार करते हुए कि आर्थिक रूप से यह कठिन होता है उन्होंने विराट कोहली जैसे टीम मालिकों की प्रशंसा की। वे आइडिया और पैकेज को 5-6 साल के दौरान मोनेटाइज़ करने की बात सोचते हैं। उन्होंने कहा कि लीग एक छोटी अवधि के लिए होती है, पर हर साल अन्य चीज़ें करने के लिए क्लब को पर्याप्त समय मिल जाता है। उसके लिए आइएसएल एक प्रयोग है जो काम कर गया है।