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टीवी वितरण क्षेत्र कैसे बना सकता है कारगर डिजिटल अर्थव्यवस्था

मुंबई: टेलिविज़न डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में प्रभावी डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने के लिए ज़रूरी है कि इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करने का विनियमन लाया जाए, एक राष्ट्रीय कंडीशनल एक्सेस सिस्टम (कैस) हो और इस समूचे काम में मदद करनेवाली टैक्स व्यवस्था पेश की जाए।

फिक्की फ्रेम्स 2016 में एक चर्चा सत्र के दौरान उद्योग के विशेषज्ञों ने इसके साथ यह भी कहा कि डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) के तीसरे व चौथे चरण का नज़रिया पहले दो चरणों से भिन्न होना चाहिए।

Mr-Anthony-DSilva-MD-Grant-Investrade-Ltd-2-150x150मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर (एमएसओ) इंडसइंड मीडिया एंड कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आईएमसीएल) के साथ-साथ हेडएंड-इन-द-स्काई (हिट्स) प्लेटफॉर्म नेक्स्ट डिजिटल के भी प्रमुख एंथनी डीसिल्वा ने कहा कि अगर सरकार चाहती है कि अभी चल रहा केबल टीवी डिजिटलीकरण अभियान कामयाब हो तो टेक्नोलॉज़ी में आ रही अभिनव चीज़ों के साथ नियमन को दुरुस्त करते रखना पड़ेगा।

डीसिल्वा ने यह भी कहा कि सरकार को एमएसओ और हिट्स ऑपरेटरों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर को साझा करने की अनुमति देनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि कैसे मुठ्ठी भर एमएसओ को डैस का लाइसेंस मिल गया, जबकि दूसरे लाइन में लगे इंतज़ार करते रह गए। उनका कहना था कि यह बात इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करने के मसले को और भी ज्यादा महत्वपूर्ण बना देती है।

डीसिल्वा ने कहा, “जहां टेक्नोलॉज़ी तेजी से बदल रही है, वहीं नियमन नहीं बदल रहा। इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करना अहम मुद्दा है। एमएसओ और हिट्स प्लेटफॉर्मों को इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करने की अनुमति दी जानी चाहिए। देश में 6000 एमएसओ हैं, लेकिन इसमें से हज़ार के पास भी लाइसेंस नहीं है। बाकी 5000 को अपनी दुकान बंद करनी पड़ेगी, बशर्ते उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करने की इजाज़त नहीं दी जाती।

टेक्नोलॉज़ी और विनियमन को हाथ में हाथ डालकर चलाना चाहिए। अगर विनियमन टेक्नोलॉज़ी के विकास में बाधक बनता है तो वो निश्चित रूप से डिजिटलीकरण को प्रभावित करेगा।”

संयोग से, इस मुद्दे को हाल ही में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के चेयरमैन आर एस शर्मा ने भी उठाया था। शर्मा ने कहा था, “आज 5-6 टेलिकॉम कंपनियां एक ही मोबाइल टावर साझा करने के लिए तैयार हैं। यह दिखाता है कि कैसे आपसी सहयोग और प्रतिस्पर्धा साथ-साथ चल सकती है। ऐसा ब्रॉडकास्टिंग क्षेत्र में भी किया जा सकता है। वैसे तो ट्राई की कोई योजना इंफ्रास्ट्रक्चर को साझा करना अनिवार्य बनाने की नहीं है, लेकिन जो हितधारक इस विचार में रुचि रखते हैं, उन्हें समर्थन देने के लिए वो मौजूदा लाइसेंस प्रणाली में फेरबदल कर सकती है।”

Bibhu-Prasad-Rath-150x150डीसिल्वा के साथ पैनल चर्चा में शामिल ऑरटेल कम्युनिकेशंस के प्रेसिडेंट व सीईओ बिभु प्रसाद रथ ने कहा कि सरकार को डैस के तीसरे व चौथे चरण के साथ अलग तरीके से पेश आना चाहिए क्योंकि इन दो चरणों छोटे केबल टीवी ऑपरेटरों की भरमार है जिनके पास सेट-टॉप बॉक्स (एसटीबी) खरीदने और डिजिटल हेडएंड लगाने के लिए निवेश करने का माद्दा नहीं है।

रथ ने कहा, “डिजिटाइजेशन ने वांछित एड्रेसेबिलिटी का अपना उद्देश्य हासिल नहीं किया है। तीसरा चरण कानूनी मुद्दों में जकड़ गया है, क्योंकि इस चरण में छोटे ऑपरेटर हैं जो एसटीबी में निवेश करने में सक्षम नहीं हैं। उन्हें समय सीमा के अंदर डिजिटलीकरण पूरा करने के लिए मज़बूर करने से आप उन्हें एक निराशाजनक स्थिति में धकेल रहे हो। हम देख रहे हैं कि सभी अदालत के आदेश इसी का परिणाम हैं।

डैस के तीसरे और चौथे चरण को अलग-अलग ढंग से संभाले जाने की ज़रुरत है और यहीं पर सरकार और डैस टास्क फोर्स को काम करने की ज़रुरत है।”

डी सिल्वा ने यह भी कहा कि चौथे चरण में कई छोटे केबल ऑपरेटर हैं जो खत्म हो जाएंगे क्योंकि वे अपने दम पर डिजिटाइज़ करने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नेक्स्ट डिजिटल को इसी तरह के ऑपरेटरों की मदद के लिए शुरू किया गया है। हिट्स ऑपरेटर चौथे चरण के क्षेत्रों में ऑपरेटरों के लिए एक किफायती केबल ऑपरेटर प्रिमाइस इक्विपमेंट (सीओपीई) लॉन्च करेगा।

MK-Anand1दोनों ‘फ्यूचर प्रूफिंग ब्रॉडकास्ट डिस्ट्रीब्यूशन’ पर एक पैनल चर्चा में भाग ले रहे थे। इस चर्चा में टाइम्स नेटवर्क के एमडी व सीईओ एम के आनंद और माइक्रोसॉफ्ट इंडिया से एक प्रतिनिधि ने भी भाग लिया।

आनंद ने कहा कि प्रसारण क्षेत्र में डिजिटलीकरण की तब शुरुआत हुई जब पहले डीटीएच ऑपरेटर डिश टीवी ने परिचालन शुरू किया था। उन्होंने कहा कि डीटीएच और केबल दोनों का डिजिटलीकरण, अंग्रेज़ी भाषा के टीवी चैनलों के लिए वरदान साबित हुआ है।

आनंद ने कहा,”जब आप ब्रॉडकास्टिंग की ओर देखते हो तो अंग्रेज़ी को एक बाहर वाले के रूप में देखते हो। प्रसारण के कारोबार में इस बाहर वाले के 2000 से 2003 में 6.5 करोड़ दर्शक हुआ करते थे। उन दिनों 40 करोड़ घरों में टीवी थे। वह 6.5 करोड़ का आंकड़ा 20 करोड़ तक पहुंच गया है। यह कैसे हुआ? यह डिजिटलीकरण की वजह से हुआ है।”

एनालॉग युग में जब एनालॉग केबल टीवी केवल 40 से 100 चैनलों को कैरी कर सकते थे। अंग्रेज़ी टीवी चैनल, सबसे असफल थे। पर डिजिटलीकरण के आगमन के बाद से बैंडविड्थ की समस्या खत्म हो जाने से स्थितियां बदल गईं।

आनंद ने कहा कि अंग्रेज़ी जॉनर के अगले 5 से 10 सालों में लगभग 30 करोड़ दर्शक हो जाएंगे जो हिंदी मनोरंजन चैनलों के दर्शक संख्या के करीब हैं। उन्होंने कहा यह डिजिटलीकरण के कारण ही संभव होगा।

माइक्रोसॉफ्ट के प्रतिनिधि ने कहा कि दुनिया में दो प्रमुख खरमंडल इस समय काम कर रहे हैं। एक क्लाउड टेक्नोलॉजी है, जिसने कंटेंट प्रदाता जिस तरह से कंटेंट यूज़र को दे सकते हैं उसका लोकतंत्रीकरण कर दिया है। अगला बड़ा खरमंडल स्मार्ट फोन की पैठ है।

उन्होंने कहा कि एक प्लेटफॉर्म के रूप में मोबाइल, टीवी का पूरक होगा क्योंकि यह बांधने वाले कंटेंट का अनुभव देता है और अधिक व्यक्तिगत है। उन्होंने कहा, “पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल पूरक प्लेटफॉर्म के साथ मौजूद रहेंगे। यह न केवल नए प्लेयर के भाग लेने के तरीकों को बदलेगा बल्कि नए बिज़नेस मॉडल के लिए नेतृत्व में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।”

भारत को डिजिटलीकरण क्रांति की दहलीज पर बताते हुए डी सिल्वा ने उल्लेख किया कि डिजिटलीकरण की कोई सुसंगत परिभाषा नहीं है। इस कवायद के पीछे का मूल उद्देश्य गायब है।

डिजिटाइजेशन के सरकार, ब्रॉडकास्टर, एमएसओ और स्थानीय केबल ऑपरेटरों (एलसीओ) सहित चार हितधारक हैं। पहले दो को पैसों का फायदा हुआ है, जबकि शेष दो सबसे ज़्यादा निवेश करने के बावजूद परेशान हैं।

डी सिल्वा ने कहा, “मुंबई में, आप पर 45 रुपए का मनोरंजन टैक्स है। उस पर 15 रुपए का सर्विस टैक्स है, तो यह कुल 60 रुपए हो जाता है। मुंबई में लगभग 50 प्रतिशत झुग्गी-बस्तियां हैं। वे 100-200 रुपए से ज़्यादा नहीं दे सकते। इस पर और 60 रुपए उनसे भुगतान की उम्मीद करते हो क्योंकि सरकार डिजिटलीकरण करना चाहती है?”

उनके अनुसार, एक स्पष्ट राष्ट्रीय उद्देश्य, एक उन्नत विनियामक ढांचे के साथ एक तर्कसंगत और संतुलित टैक्स व्यवस्था डैस की सफलता को सुनिश्चित करेंगे।

उन्होंने कहा कि डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफार्मों के लिए ब्रॉकास्टिंग नहीं बल्कि मूल्य वर्धित सेवाए (वास), वास्तविक आय कमाने वाली साबित होगी।

डी सिल्वा ने फरियाद की कि जब दुनिया एचडी टेक्नोलॉजी की दिशा में आगे बढ़ रही है तो हमारे यहां केबल टीवी उद्योग अभी भी एसडी में फंसा है। उन्होंने कहा, “पहले और दूसरे चरण के क्षेत्रों में 3.2 से 3.3 करोड़ घर हैं जिसमें से 2.7 से 2.8 करोड़ घरों में आज एसडी एसटीबी है।”

एसटीबी की अदला-बदली को रोकना चाहिए यह तर्क धरते हुए डी सिल्वा ने सरकार से आग्रह किया कि वह एक राष्ट्रीय कंडीशनल एक्सेस सिस्टम (कैस) लेकर आए जो साइमलक्र्पिट (एक ही सिस्टम में दो तरह के कैस) हो ताकि एक एमएसओ से दूसरे पर माइग्रेशन आसान हो।

रथ ने कहा कि केबल टीवी वीडियो के अलावा इंटरैक्टिव सेवाएं देने के लिए सबसे अनुकूल है। हालांकि, केबल टीवी उद्योग का बी2बी मॉडल क्षेत्र के विकास में बाधा पैदा कर रहा है। हर जगह दुनिया में बड़े ऑपरेटर अंतिम कड़ी के मालिक हैं। इससे अंतिम कड़ी के नेटवर्क की गुणवत्ता में गिरावट आई है।

उन्होंने कहा, “मौजूदा नेटवर्क ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करने में सक्षम नहीं है। इसे अपग्रेड करना और फिर से बनाया जाना चाहिए। अंतिम कड़ी में ज़बरदस्त निवेश और समेकन की ज़रुरत है तभी यह इंटरैक्टिव सेवाएं देने में सक्षम बनेगा।”

आनंद ने कहा कि को-एक्सियल केबल का रिटर्न पाथ कैपेबिलिटी ब्रॉडकास्टरों के लिए बड़ा अवसर है। टाइम्स नेटवर्क इस साल अपने टीवी चैनलों के मोबाइल एप्स लॉन्च करने की योजना बना रहा है।

उन्होंने कहा कि टाइम्स नाऊ परंपरागत प्लेटफॉर्म की तुलना में डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ज़्यादा उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। डिजिटल खपत बढ़ रही है तो ऐसे में बड़ी चुनौती यह है कि कमाई कैसे की जाए।

उन्होंने कहा, “टाइम्स नाऊ का निष्ठावान दर्शक आधार है। यह प्रसारण से लगभग 2.5 करोड़ दर्शकों तक पहुंचता है। लोगों को पता नहीं है कि हमारे लगभग 13 करोड़ दर्शक नए मीडिया पर हैं जिसमें, हमारा सोशल मीडिया, हमारे एप्प और विभिन्न ओटीटी प्लेटफार्म जिन पर हमारा चैनल मौजूद है, शामिल है। नए मीडिया के दर्शक टीवी से 3-4 गुना हैं।”

इस सब के बावजूद लीनियर टीवी की अपनी उपयोगिता है और आने वाले समय में वह बना रहेगा। उन्होंने कहा, “वीओडी के मामले में, मुझे सोचना पड़ता है कि मुझे क्या देखना है। लिनियर मेरे सामने हर तरह का कंटेंट परोस देता है कि जो हाथ लग जाए। मुझे लगता है कि हरेक मीडिया में छिपा मूल्य है। लीनियर प्रोडक्ट कभी भी चलन से बाहर नहीं होंगे।”