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‘संदेह है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म वाले भारतीय ब्रॉडकास्टर नेटफ्लिक्स से कंटेंट सौदे करेंगे’

Jonathan-Friedland2नेटफ्लिक्स ने भारत में बुनियादी मासिक प्लान पेश कर दिया है। एसडी में देखने के लिए 500 रुपए, एचडी के लिए 650 रुपए और 4के के लिए यह प्लान 800 रुपए का है। ओटीटी प्लेटफॉर्मों से जुड़े तमाम अधिकारी मानते हैं कि यह मूल्य दाम को लेकर सचेत उस भारतीय बाज़ार के लिए बहुत ज्यादा है जहां केबल टीवी व डीटीएच कनेक्शन अभी भी काफी सस्ते हैं।

ऐसे में क्या नेटफ्लिक्स का प्रवेश पिछले साल से बेहद सक्रिय रहे भारत के ओवर-द-टॉप (ओटीटी) बाज़ार को खिला कर रख देगा?

टेलिविज़न पोस्ट के आश्विन पिंटो को दिए गए इस इंटरव्यू में नेटफ्लिक्स के मुख्य संप्रेषण अधिकारी, जोनाथन फ्रीडलैंड ने नेटफ्लिक्स की भारत संबंधी योजना खुलकर बताई है।

पेश हैं संपादित अंश:

भारत में केबल टेलिविज़न और डीटीएच बिजनेस में प्रति यूज़र औसत आय (एआरपीयू) अपेक्षाकृत कम है। इस परिदृश्य में आपको कैसे लगता है कि नेटफ्लिक्स यहां चल पाएगा?

हम एक ही बिजनेस में नहीं हैं। हमारा बिजनेस मॉडल केबल टेलिविज़न से एकदम अलग है। हमारे यहां विज्ञापन नहीं हैं। हम केवल सब्सक्रिप्शन पर चलते हैं। हम केबल तंत्र का हिस्सा नहीं हैं। हमें केबल कैरेज़ की फीस के लिए मोलतोल नहीं करना है।

दुनिया भर में हमारे 7.5 करोड़ सदस्य हैं जिनमें से 3 करोड़ अमेरिका से बाहर के हैं। हमने जनवरी में मुठ्ठी भर नए बाज़ारों से शुरू किया है और हमें यकीन है कि हम मार्च 2016 तक 60 लाख नए सब्सक्राइबर जोड़ लेंगे।

आप भारत से कितने सब्सक्राइबर जोड़ेंगे?

हमें कुछ नहीं पता! अभी तो कोई भुगतान नहीं कर रहा। हम जल्दी ही देखेंगे कि हम अच्छा काम कर रहे हैं या नहीं और आशा के अनुरूप यूजर्स के फीडबैक मिल रहा है या नहीं। आगे बढ़ने के साथ हम अभीष्टतम प्रयार करते जाएंगे। हम पता लगाएंगे कि लोग क्या देखते हैं और तब हम उसमें नया कंटेंट जोड़ देंगे।

लोग वास्तव में क्या देखते हैं, हम इसके आधार पर अपनी सेवा को प्रोग्राम करते हैं। हो सकता है कि यहां लोग नेटफ्लिक्स पर बड़ी बॉलीवुड फिल्में देखने की अपेक्षा न रखते हों। वे हमारे पास इंडी फिल्मों के लिए आ सकते हैं। हम अब तक यह सब नहीं जानते। समय के साथ हम इसका पता लगाएंगे।

आपके शोज़ ज़ी कैफे जैसे भारतीय चैनलों पर उपलब्ध हैं। क्या यह क्रम आगे भी बना रहेगा?

नेटफ्लिक्स के बाहर विश्व स्तर पर हमारे जो चंद शोज़ लाइसेंस किए गए हैं, वे हमारे पहले मौलिक शोज़ ‘हाउस ऑफ कार्ड्स’ और ‘ऑरेंज इज़ द न्यू ब्लैक’ थे।

2013 में जब हमने अपने खुद के शोज़ बनाने शुरू किए, तब हम केवल अमेरिकी देशों व ब्रिटेन में थे। इसलिए हम जिन देशों में नहीं थे, उनके राइट्स नहीं खरीद सकते थे। लेकिन उसके बाद के अपने सभी शोज़ पर हमारे वैश्विक अधिकार हैं।

वे आगे किसी और को लाइसेंस नहीं किए जाएंगे। वे केवल नेटफ्लिक्स पर ही उपलब्ध होंगे। जिन शोज़ को पहले लाइसेंस कर दिया गया था, हमने तमाम देशों में वापस जाकर लोकल ब्रॉडकास्टरों के साथ उनके राइट्स खरीद लिए हैं।

‘नेटफ्लिक्स के बाहर विश्व स्तर पर हमारे जो चंद शोज़ लाइसेंस किए गए हैं, वे हमारे पहले मौलिक शोज़ ‘हाउस ऑफ कार्ड्स’ और ‘ऑरेंज इज़ द न्यू ब्लैक’ थे। 2013 में जब हमने अपने खुद के शोज़ बनाने शुरू किए, तब हम केवल अमेरिकी देशों व ब्रिटेन में थे। इसलिए हम जिन देशों में नहीं थे, उनके राइट्स नहीं खरीद सकते थे। लेकिन उसके बाद के अपने सभी शोज़ पर हमारे वैश्विक अधिकार हैं। वे आगे किसी और को लाइसेंस नहीं किए जाएंगे। वे केवल नेटफ्लिक्स पर ही उपलब्ध होंगे।’

विदेश में नेटफ्लिक्स ने अपने शोज़ एक्सबॉक्स 360, ब्लू-रे डिस्क और टीवी सेट-टॉप बॉक्सों पर स्ट्रीम करने के लिए कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर रखी है। क्या आप भारत में भी यही रणनीति अपनाएंगे?

हां, हम व्यावहारिक रूप से हम स्मार्ट टीवी पर उपलब्ध हैं। सैमसंग, सोनी व एलजी स्मार्ट टीवी के साथ ही व्यू ने भी अब नेटफ्लिक्स का एप्प लगा लिया है। वो सभी विभिन्न गेम प्लेटफॉर्मों पर भी उपलब्ध है।

भारत में हम सभी प्रमुख टेलिकॉम कंपनियों और ब्रॉडबैंड सेवा प्रदाताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं।

क्या आप स्टार और ज़ी जैसे भारतीय ब्रॉडकास्टरों के साथ कंटेंट सौद करेंगे?

नहीं, क्योंकि उनके पास अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म हैं। मुझे संदेह है कि वे हमारे साथ बिजनेस करना चाहेंगे।

अभी आपके लिए पास भारत का कितना लोकल कंटेंट है?

इस समय हमारे पास थोड़ा-सा भारतीय कंटेंट है। आगे बढ़ने के साथ हम इसे बढ़ा देंगे। लोग जो नहीं देखना चाहते, हम उन चीजों को पेश करने की गलती नहीं करना चाहते। हमने अभी-अभी अपनी पहली भारतीय फिल्म का अनन्य लाइसेंस हासिल किया है।

हमने जिन भारतीय फिल्मों का लाइसेंस लिया है, वे हर जगह पहले नेटफ्लिक्स के यूजर्स को उपलब्ध होनी चाहिए। पहला काम इस मामले में हमने यह किया है कि बंगाली निर्देशक क्यू द्वारा निर्देशित फिल्म ‘ब्राह्मण नमन’ नाम की फिल्म के अनन्य वैश्विक अधिकार हासिल कर लिए है। यह कुछ महीनों में नेटफ्लिक्स और दुनिया में हर जगह आ जाएगी।

आप भारत में कब लोकल शोज़ या फिल्में बनाना शुरू करेंगे?

हमने कभी कोई समय रेखा नहीं खींची है। हमारा काम है बड़े कथाकारों को चुनना और उनके साथ प्रकल्पों को विकसित करना। हमें कितने कंटेंट की ज़रूरत होगी, इसको लेकर हम समय सीमा नहीं तय करते। इससे अच्छी सृजनात्मकता नहीं मिलती। दरअलस, इससे बुरा टीवी कंटेंट बनता है। हमने ‘सेन्स8’ नाम का एक नया शो शूट कर लिया है। इसे मुंबई समेत कई शहरों में शूट किया गया।

मेक्सिको में हमें अपना पहला लोकल शो ‘नारकोस’ करने में चार साल लग गए थे। फ्रांस में हमने वहां पैर रखते ही ‘मक्सेल’ पर काम करना शुरू कर दिया था। हमने पहली जापानी मौलिक सीरीज़ बहुत जल्दी लॉन्च कर दी क्योंकि उसका प्रोडक्शन पार्टनरशिप में किया गया था।

नेटफ्लिक्स का कितना अमेरिकी कंटेंट भारत में उपलब्ध होगा?

अमेरिका में नेटफ्लिक्स की सेवा काफी बड़ी है क्योंकि हम वहां दस सालों से सक्रिय हैं। वहां हमारे 4.5 करोड़ सब्सक्राइबर हैं।

जब लोग कहते हैं कि हमारे केवल 7 प्रतिशत कंटेंट ही भारत में है तो वे टाइटल की गिनती के आधार अमेरिका और भारत की सेवा की तुलना कर रहे होते हैं। इस तुलना का कोई मतलब नही है।

हमने अमेरिका में बहुत ही दीनहीन लाइब्रेरी से शुरुआत की थी। उसकी हालत भारत में उपलब्ध लाइब्रेरी से भी बदतर थी। हम जिस भी देश में जाते हैं, हम छोटे कंटेंट चयन से शुरू करते हैं और वहां से उसे बनाते-बढ़ाते जाते हैं।

‘हम स्टार और ज़ी जैसे भारतीय ब्रॉडकास्टरों के साथ कंटेंट सौदे नहीं करेंगे क्योंकि उनके अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म हैं। मुझे संदेह है कि वे हमारे साथ बिजनेस करना चाहेंगे।’

क्या आप स्थानीय कंटेंट जोड़ने के बारे में बात कर सकते हैं?

नेटफ्लिक्स धीरे-धीरे पंजाबी, तेलुगू, आदि स्थानीय भाषा की फिल्में जोड़ेगा। हम इस पर नज़र रखेंगे कि लोग क्या देखते हैं और तदनुसार कंटेंट जोड़ेंगे।

हमारी प्रोग्रामिंग सेवा वास्तव में इस पर आधारित है कि लोग क्या देखते हैं। हम उन टाइटल को लेने की गलती नहीं करना चाहते जिसे लोग देखना नहीं चाहते।

अमेरिका में आपने एडम सैंडलर के साथ एक सौदा किया है। क्या आप भारत में भी इसी तरह कुछ करेंगे?

हां हम साथ काम करने के लिए किसी को ले सकते हैं। एडम सैंडलर एक जमेजमाए फिल्म स्टार हैं। हमने उनसे कहा था कि वह हमारे साथ फिल्में बना सकते हैं।

हाउस ऑफ कार्ड्स कैसे बना?

निर्देशक डेविड फिन्चर हमारे पास आए और कहा कि वह इस टीवी शो को बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि 26 एपिसोड के लिए 10 करोड़ डॉलर का खर्च आएगा। हमारी एक ही शर्त थी कि वे इसके साथ अपना नाम जोड़ेंगे। हम जानते थे कि डेविड एक पूर्णतावादी हैं और वह ऐसा कुछ भी प्रसारित नहीं होने देंगे जो उनके मानकों पर खरा नहीं उतरता। हम भारत में भी ऐसा कुछ कर सकते हैं।

क्या आप भारत में डीवीडी किराए पर लेने की सेवा चालू करेंगे?

नहीं! यह अमेरिका में ही मौजूद है। भविष्य इंटरनेट का है। भौतिक फॉर्मैट मर रहा है।

भारत में भुगतान के क्या विकल्प हैं?

फिलहाल हमारे भुगतान विकल्प अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड, आईट्यूंस और पेपाल तक सीमित हैं। लेकिन हम समय के साथ इसमें और विक्लप जोड़ेंगे। मैक्सिको जैसे देशों में हमने प्री-पेड कार्ड शुरुआत के तीन साल बाद शुरू किए। हम भारत में भुगतान के विकल्पों पर काम करेंगे।

क्या आपका भारत में कार्यालय है?

नहीं, हमारा ऑफिस यहां नहीं है। हमारे पास लोगों की टीमें हैं जो लाइसेंस कंटेंट के लिए जाती है, मार्केंटिंग करती है, इंजीनियरिंग और प्रचार का काम करती हैं। ये टीमें कैलिफोर्निया में हैं। सिंगापुर में हमारा एक छोटा-सा कार्यालय है। नेटफ्लिक्स अगर भारत में मूल कंटेंट का पैमाना बढ़ाता है तो हम यहां भी एक कार्यालय स्थापित कर सकते हैं। लेकिन मैं नहीं जानता कि यह कब होने जा रहा है।

नेटफ्लिक्स क्यों एक ही समय 130 देशों में लॉन्च किया गया?

पांच साल तक एक के बाद एक देश में लॉन्च करके हमने तीन चीजें सीखी। एक यह है कि लोग वास्तव में क्या देखना चाहते हैं इसका पता हमें लॉन्च के दिन से ही होता है न कि महीनों के रीसर्च के बाद। दूसरे, हमारे पास पर्याप्त मूल प्रोग्रामिंग का बुनियादी कंटेंट सेट है जो स्थानीय स्तर पर भी काम करता है।
तीसरा यह कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोग चीजों को देखने के लिए इंतज़ार नहीं करते। हमारे पास मौका है कि हम हमारी मूल प्रोग्रामिंग एक ही साथ भारत, कनाडा, ब्राज़ील और जर्मनी में लोगों के लिए ला सकते हैं। जो नेटप्लिक्स पर प्रीमियर होता है वह एक ही समय में विश्व स्तर पर प्रीमियर होगा।

संभावनाओं के मामले में भारत कहां फिट बैठता है?

भारत संभावनाओं के मामले में नंबर वन बाज़ार है। उसके बाद जापान और कोरिया हैं।

भारत हमारे लिए एक महत्वपूर्ण बाज़ार है क्योंकि यह बहुत बड़ा है। हम बहुत उत्साहित हैं। बहुत सारे लोग इसकी जांच कर रहे हैं और बहुत से लोगों इसे देख रहे हैं।

क्या आप महानगरों को पहले लक्षित करेंगे?

हम अभी अंग्रेज़ी में ही उपलब्ध हैं। हम फिलहाल मुख्य रूप से बड़े शहरों में रहने वाले लोगों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, उन लोगों पर जो टेक्नोलॉजी अपनाने के मामले में आगे हैं। हमारे पास अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड हैं। ये वे लोग हैं, जिन्होंने हमारे शो के बारे में सुना है और जो आमतौर पर चीजों को पहले परखते हैं।

जब हम एक नए बाज़ार में प्रवेश करते हैं तो हमारे अनुभव से हम कह सकते हैं कि युवा पुरुष सबसे पहले नेटफ्लिक्स देखते हैं। उनके पास आईफ़ोन हैं और उन्होंने हमारे शो के बारे में सुना है। उसके बाद फिर महिलाएं, बच्चों द्वारा बहुत जल्दी से इसे देखा जाना शुरू होता है और धीरे-धीरे यह दादीमां तक पहुंचता है।

देश में अपनी उपस्थिति को विकसित करने की कोशिश में नेटफ्ल्किस के लिए बड़ी चुनौती क्या है?

चुनौती यूज़र के साथ जुड़ाव बनाने की है। ज़्यादा से ज़्यादा लोग इसका उपयोग करेंगे और देखेंगे तो वे हमारे साथ बने रहेंगे और भुगतान करेंगे। यह महत्वपूर्ण है।

केबल टेलिविज़न के विपरीत, हम यूज़र को कभी भी छोड़ कर जाने से नहीं रोक सकते। लोग एक बटन पर क्लिक करके किसी भी समय नेटफ्लिक्स छोड़ सकते हैं। अगर वे चाहें तो वापस भी आ सकते हैं। यहां कोई करार नहीं हैं।

हम भारत में एक ऐसी सेवा चलाना चाहते हैं जो भारतीय उपभोक्ताओं को बेहद पसंद आए। इसके कई आयाम हैं जैसे कंटेंट, सही भाषाई प्रॉपर्टी, सही स्ट्रीमिंग क्षमताएं, सही भागीदारी और सही भुगतान विकल्प आदि। कई चीजों पर हम काम कर रहे हैं ताकि भारत में बेहतर सेवा दे सकें।

भारत में ब्रेक-इवेन के लिए समय-सीमा क्या है?

हम अपने पहले ग्रुप के अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों लैटिन अमेरिका, स्कैंडेनेविया, ब्रिटेन, नेदरलैंड और कनाडा में साढ़े तीन साल में ब्रेक-इवन करने में कामयाब रहे। लेकिन मैं नहीं जानता कि भारत में ब्रेक-इवेन करने में कितना समय लगेगा।

नेटफ्लिक्स पर किस प्रकार की खपत पैटर्न विश्व स्तर पर देखी जाती है? क्या ऐसा कोई कंटेंट है जो लोगों को ज़्यादा पसंद आता है?

हमारी मूल सीरीज़ अब तक सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले शो में शामिल हैं। ‘नार्कोज़’, ‘डेयरडेविल’, ‘जेसिका जोन्स’ और ‘हाउस ऑफ कार्ड्स’ जैसी सीरीज़ लोकप्रिय है। अमेरिका में 30 प्रतिशत आज हमारा मूल कंटेंट देखा जाता है। मुझे लगता है कि भारत में और अंतरराष्ट्रीय स्तर यह अनुपात हमारे मूल कंटेंट के प्रति और अधिक होगा।

नेटफ्लिक्स कैसे सीखता है, इसके बारे में क्या आप बताएंगे?

एक इंटरनेट कंपनी के रूप में, हमारा उपभोक्ताओं के साथ सीधा संबंध है। हम यह देखते हैं कि लोग क्या देख रहे हैं, उन्हें क्या पसंद है और उनके पसंदीदा पेमेंट गेटवे कौन-से हैं।

भारतीय आईएसपी के साथ हमने तेज़ गति ब्रॉडबैंड पैकेज की बिक्री के साथ नेटफ्लिक्स कुछ महीनों तक उनके ग्राहकों को मुफ्त में देने के बारे में संभावनाओं पर चर्चा की है।

नेटफ्लिक्स एक सीखने की मशीन है। हम जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, हम बाज़ार के बारे में सीखेंगे और भारत के लिए सही प्रोडक्ट का निर्माण होगा।

नेटफ्लिक्स व्यक्तिगत कैसे है?

हर किसी का अलग नेटफ्लिक्स है। यह देखता है कि आप क्या देख रहे हो और यह आपको वैसा ही और कंटेंट पेश करता है। आपके घर में अगर एक चार साल का बच्चा है तो वह बच्चा किड्स सैक्शन में समय खर्च करेगा और सच में बहुत अच्छा समय बिताएगा। पर यही सैक्शन पिता या माता के प्रोफाइल में नहीं होगा।

एचबीओ गो जैसे अन्य सेवा प्रदाताओं के बारे में आपकी क्या राय है?

हमें एचबीओ गो बेहद पसंद है। लेकिन यह व्यक्तिगत नहीं है और इसके पास अपनी तकनीक भी नहीं है। इसके पास सिर्फ शानदार टीवी शो हैं।

हम मानते हैं कि लिनियर चैनल एप्स के माध्यम से इंटरनेट अनुकूल बन जाएंगे। बीबीसी आईप्लेयर एक शानदार उदाहरण है और एचबीओ गो और अमेज़ॉन प्राइम भी बहुत अच्छे उदाहरण हैं। हम मानते हैं कि विभिन्न टीवी नेटवर्क एप्स पर माइग्रेट करेंगे।

क्या आप इस प्रतियोगिता से चिंतित हैं?

मुझे लगता है कि प्रतियोगिता महत्वपूर्ण है। यह उपभोक्ता को और अधिक विकल्प देती है। यह एक ज़ीरो सम गेम नहीं है। हरेक एप्प का दूसरे से अलग कंटेंट होगा। यह टीवी की तरह हो जाएगा। स्टार के पास जो कंटेंट है वह हमारे पास नहीं होगा।

नेटफ्लिक्स और एचबीओ के बीच क्या अंतर है?

एचबीओ ने अन्य लोगों के कंटेंट के साथ शुरू किया और फिर अपना कंटेंट बनाया। अब उनके पास वे शो हैं जो किसी के पास नहीं है।

लोग उनके शो के लिए आज एचबीओ देखते हैं। नेटफ्लिक्स के लिए भी यही सच है। अंतर यह है कि नेटफ्लिक्स इंटरनेट आधारित है। तो हम चीजों को विश्व स्तर पर करते हैं। हम ब्राज़ील में भारतीय कहानियां ला सकते हैं। हम टेलिविज़न को भयंकर बनाए बिना इसका वैश्वीकरण कर सकते हैं यह अद्भुत अवसर है।

अमेज़ॉन के कंटेंट निर्माण कारोबार के बारे में आपकी क्या राय है?

वे हमारी नकल कर रहे हैं। लेकिन वे डायपर और अन्य प्रोडक्ट की बिक्री के बारे में अधिक ध्यान रखते हैं न कि कंटेंट बनाने पर।

वे अमेज़ॉन प्राइम की सेवा के रूप में मुफ्त कंटेंट देते हैं। अमेज़ॉन प्राइम उनकी शीपींग सर्विस है। अमेज़ॉन प्राइम के यूज़र, अमेज़ॉन के अन्य यूज़र की तुलना में अमेज़ॉन पर ज़्यादा पैसा खर्च करते हैं। अमेज़ॉन का मूल कंटेंट लोगों के लिए अमेज़ॉन प्राइम में शामिल होने के लिए एक प्रोत्साहन है ताकि वे और अधिक सामान खरीदें। मैं पूरी उम्मीद है कि अमेज़ॉन जल्द ही भारत में अपना ऑनलाइन कंटेंट की पेशकश करेगा।

आपने टीवी चैनलों द्वारा खुद के एप्स की शुरुआत की बात कही। क्या इससे टीवी चैनलों के साथ आपके कंटेंट सौदे प्रभावित नहीं होंगे?

यह अमेरिका में हो रहा है, इसीलिए हमने अपना स्वयं का कंटेंट बनाना शुरू कर दिया है। चैनलों को खुद के लिए और अधिक कंटेंट चाहिए। हमने अन्य लोगों के कंटेंट के साथ शुरुआत की और अब हम अपना स्वयं का कंटेंट दे रहे हैं। हम अपना स्वयं का और अधिक कंटेंट का निर्माण कर रहे हैं और उनका कम कंटेंट खरीद रहे हैं।

आपकी लाइसेंस रणनीति कैसे विकसित हुई है?

आप अगर स्ट्रीमिंग के इतिहास के बारे में बात करना चाहते हैं तो हमने नौ साल पहले स्ट्रीमिंग शुरू कर दी थी। 2007 से 2010 तक, हम मूल रूप से कंटेंट के खरीदार थे।

2010 में हम वापस चैनलों के पास गए और उनसे कहा कि हमें वो चीजें नहीं चाहिए जो कोई भी नहीं देख रहा है। हम ‘ब्रेकिंग बैड’ जैसे शो के लिए प्रीमियम भुगतान करेंगे पर हमें बाकी सभी शो नहीं चाहिए। उन्होंने इस पर हामी भरी थी।

2014 के बाद से, वे सौदे किए गए जिन शो को लोग वास्तव में देख रहे थे न कि हमने सब कुछ लिया। 2013 से हमने मूल प्रोग्रामिंग शुरू कर दी।

आप कंटेंट पर कितना खर्च करते हैं?

नेटफ्लिक्स का इस साल का 5 अरब डॉलर का कंटेंट बजट है। उसमें से एक बहुत छोटा हिस्सा मूल कंटेंट पर खर्च किया जाता है। हम इसे तेज़ी से बढ़ा रहे हैं, लेकिन यह हमारी लाइसेंसिंग प्रतिबद्धताओं के हिसाब से फिर भी कम है।

हम नई और वापस आनेवाली सीरीज़ के साथ 75 फिल्में, डॉक्यूमेंटरिज़, बच्चों के शो का निर्माण करेंगे।

क्या आप अनन्य आधार पर वैश्विक बाज़ार के लिए लाइसेंसिंग सौदे करते हैं?

हां, हम गैर अनन्य सौदे नहीं करने का प्रयास करते हैं। ‘ब्लैक लिस्ट’ ऑनलाइन पर आप एक ही जगह इसे नेटफ्लिक्स पर पा सकते हैं। सीबीएस के शो ‘जेन द वर्जिन’ को ऑनलाइन दर्शक एक ही जगह नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं।

आपने अपने सब्सक्रिप्शन की कीमत 7 से 9 डॉलर बनाए रखी है। क्या यह एक चुनौती नहीं बन जाती जबकि स्टूडियो को उनके कंटेंट के लिए और अधिक मूल्य चाहिए होता है?

नहीं! जब तक हम अपने ग्राहक आधार को विकसित करना जारी रख रहे हैं, हम और अधिक कंटेंट का खर्च बर्दाश्त कर सकते हैं। हमें अपने पैसे का उपयोग अच्छी तरह से और कुशलता से करना है। ज़ाहिर है स्टूडियो और अधिक पैसा चाहते हैं, लेकिन हम भी अच्छे भाव-तोल करने वाले हैं। यह एक शादी की तरह है।

नेटफ्लिक्स के कंटेंट अधिग्रहण ग्रुप को फिर से संगठित करने की क्या ज़रूरत थी?

हम चाहते हैं कि हमारी टीम एक वैश्विक बाज़ार के लिए कंटेंट खरीदे। इससे पहले, वे एक विशेष क्षेत्र के लिए फिल्में खरीदते थे। अब हम एक विशेष बाज़ार के लिए कंटेंट नहीं खरीदते। यह हर जगह उपलब्ध होना चाहिए।

हमें पता चला कि सारा कंटेंट दूर तलक नहीं चलेगा। यह सब कीमत पर निर्भर करता है।

चीन और सिंगापुर के लिए आपकी क्या योजनाएं हैं?

हम पहले ही सिंगापुर में हैं। हमने जब भारत में शुरुआत की तभी वहां भी शुरुआत की। सिंगापुर में वे ओटीटी सेवाओं के आदी हो रहे हैं। चीन में आपको एक स्थानीय साथी खोजना होगा। मैं पहले भारत में सही स्थिति प्राप्त करना चाहता हूं। अगर हम ऐसा कर लेते हैं, तो हमने बड़ी प्रगति की है ऐसा मैं मानूंगा और मैं खुशी से (हंसते हुए उन्होंने कहा) रिटायर हो सकता हूं।

नेटफ्लिक्स अमेरिका में कोर्ड कटिंग में क्या भूमिका निभा रहा है?

हम कोर्ड कटिंग को प्रमोट नहीं कर रहे हैं। कम कीमत पर शानदार कंटेंट उपलब्ध कराकर, हम उपभोक्ताओं को जो वे देखना चाहते हैं वह देकर इंटरनेट का लाभ उठा रहे हैं। यह एक बुरी बात नहीं है। केबल बंडलिंग एक बुरा बिज़नेस है, उपभोक्ताओं को उससे नफरत है।

आपको उम्मीद है कि अधिकांश टीवी कंटेंट इंटरनेट पर आ जाएगा। इससे पारंपरिक मीडिया के बिजनेस मॉडल पर क्या असर पड़ेगा?

उन्हें इसका पता अखबारों की तरह ही निकालना पड़ेगा। मुझे लगता कि मीडिया कंपनियों ने अखबारों के बजाय डिजिटल का हिसाब-किताब लगाकर बेहतर काम किया है। यह संक्रमण काल है। हमने तो अपना एक मॉडल चुन लिया है।

क्या अलग-अलग बिजनेस मॉडलों के साथ बने रहने की गुंजाइश है?

हां! विभिन्न बिजनेस मॉडल बने रहेंगे। हमारा सब्सक्रिप्शन का बिजनेस मॉडल है और यूट्यूब का विज्ञापन का का, जबकि अमेरज़ॉन प्राइम का अलग मॉडल है जो ई-कॉमर्स को आगे बढ़ाने के लिए मुफ्त में कंटेंट देता है। अमेरिका में हुलु विज्ञापनों पर चलता है।

हर कोई अलग चीज़ को आजमाएगा। जब तक आप कंज्यूमर को अच्छा कंटेंट देते हैं और उन्हें अपने दाम की पूरी कीमत मिल जाती है, तब तक विभिन्न मॉडलों के काम करने की पूरी गुंजाइश है। हमारा सारा फोकस उपभोक्ता पर है क्योंकि वे महज बटन क्लिक करने छोड़ सकते हैं। यह हमारे ऊपर है कि हम उन्हें इतना दें कि वे हमें खुशी-खुशी 7 से 9 डॉलर दे दें।