लाइव पोस्ट

‘मैं टीवीटी का समर्थन करता हूं, लेकिन टीवीआर की कीमत पर नहीं’

Vikram_Sakhuja_टीवी रेटिंग एजेंसी बीएआरसी अब ग्रामीण डेटा भी पकड़ने लग गई है तो क्या टेलिविज़न चैनल विज्ञापन देनेवालों से ज्यादा कमाने लग जाएंगे? क्या और ज्यादा फ्री-टू-एयर (एफटीए) चैनलों का लॉन्च टीवी पर ग्रामीण विज्ञापन खर्च बढ़ा देगा या दर्शकों के विखंडन से उतने ही विज्ञापन ज्यादा चैनलों के बीच बंट जाएंगे?

टेलिविज़न पोस्ट के आश्विन पिंटों को दिए गए इंटरव्यू के अंतिम भाग में मैडिसन मीडिया में ओओएच के सीईओ विक्रम सखूजा ने टीवीटी बनाम टीवीआर, विज्ञापन खर्च पर एफटीए चैनलों के प्रभाव, टीवी पर भू-लक्षित विज्ञापन, शीर्ष पांच विज्ञापन संपत्तियों में आईपीएल की स्थिति और हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्मों के बारे में बात की है।

बीएआरसी अब ग्रामीण डेटा देने लगा है तो चैनलों को ज्यादा आय के रूप में कब इसका लाभ देखने को मिलेगा? क्या क्लाएंट और अधिक खर्च करने को तैयार होंगे?

बीएआरसी का डेटा आने से पहले भी बाज़ार हमेशा ग्रामीण क्षेत्र पर खर्च कर रहा था। एफटीए चैनल पहले भी थे। अब लोग अचानक जाग गए हैं और ग्रामीण डेटा का उपयोग मीडिया खरीदारी के लिए करने लगे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों की पैमाइश हासिल करना हमेशा अच्छा होता है। आपको वह पहुंच और फ्रीक्वेंसी मिलती है जो आप पहले पाने में सक्षम नहीं थे। फर्क सिर्फ इतना है कि टीवी पैमाइश अब होने लगी है। क्या इससे खर्च बढ़ेगा? हां, यह विकास का एक छोटा कारक हो सकता है, लेकिन यह एकदम नया सिलसिला नहीं होगा क्योंकि लोगो पहले से इसमें लगे हुए हैं।

क्या ज़्यादा एफटीए चैनल इस लिहाज से असर डाल रहे हैं कि हिंदी जॉनर की कमाई कितनी होगी?

एफटीए चैनल ग्रामीण इलाकों में अच्छा काम कर रहे हैं, जहां पे-टीवी का व्यापक प्रसार नहीं है। मुख्य रूप से ग्रामीण फोकस वाले ब्रांड अतीत में एफटीए का उपयोग करते रहे हैं और ऐसा करना जारी रखेंगे। शायद खर्च नहीं बढ़ेगा, बल्कि विखंडन के कारण एफटीए के बीच बंट जाएगा।

क्या सौदे अब बीएआरसी की रेटिंग के आधार पर किए जा रहे हैं? क्या चीज़ें बीएआरसी के तहत अब टैम की तुलना में बेहतर है?

सौदे बीएआरसी के डेटा के आधार पर किए जा रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में अभी भी कुछ चीज़ें सही करनी बाकी है जिससे लेनदेन का स्थिर आधार बन सकेगा। उद्योग इस पर सामूहिक रूप से काम कर रहा है।

‘लोगों को लगता है कि टीवीआर और टीवीटी अलग हैं। वे अलग नहीं हैं। किसी मीडिया प्लान को बनाते हुए मार्केटिंग करनेवालों के लिए यह देखना अच्छा रहता है कि उस प्रॉपर्टी को कितने लोगों ने देखा। प्रतिशत से मदद मिलती है लेकिन यह संख्या चीज़ों पर एक स्तर डाल देती है। मैं टीवीटी का समर्थन करता हूं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि ऐसा मैं टीवीआर की कीमत पर कर रहा हूं।’

क्या सीपीआरपी (प्रति रेटिंग प्वॉइंट लागत) टीवी पर सबसे किफायती पैमाइश है या इसका कोई बेहतर विकल्प है?

सीपीआरपी टीवी पर दक्षमता की पैमाइश का पुराना मेट्रिक है और उसके साथ कुछ भी गलत नहीं है। हम जब मीडिया से परे प्लानिंग के दौर में प्रवेश कर रहे हैं तो सीपीआरपी व्यक्त करने का एक और तरीका है सीपीएम (प्रति हज़ार लागत), जिससे माध्यमों से परे और अधिक मानकीय तुलना मिलती है।

मेरा मानना है कि और अधिक परिणाम आधारित मैट्रिक्स जैसे लागत प्रति लीड, प्रति अधिग्रहण लागत, आदि की परतें रखें तो भी दर्शक संख्या (सीपीआरपी/सीपीएम) हमेशा कुशलता का एक मेट्रिक होगा।

क्या आप टीवीटी (हज़ारों की संख्या में टेलिविज़न दर्शकों की संख्या) पर आगे बढ़ेंगे?

यह अलग मेट्रिक नहीं है। लोगों को लगता है कि टीवीआर (टेलिविज़न दर्शक रेटिंग) और टीवीटी अलग हैं। वे अलग नहीं हैं। किसी मीडिया प्लान को बनाते हुए मार्केटिंग करनेवालों के लिए यह देखना अच्छा रहता है कि उस प्रॉपर्टी को कितने लोगों ने देखा। प्रतिशत से मदद मिलती है लेकिन यह संख्या चीज़ों पर एक स्तर डाल देती है। अमेरिका में, वे कहते हैं कि 5 या 10 करोड़ लोग सुपरबाउल देखने को जुटे। तो यहां आईपीएल की पहुंच 60 प्रतिशत थी, यह कहने के बजाय यह कहें कि वास्तव में 15 करोड़ (काल्पनिक आंकड़ा) लोगों ने इसे देखा था तो इससे ज़्यादा मदद मिलती है। मैं टीवीटी का समर्थन करता हूं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि ऐसा मैं टीवीआर की कीमत पर कर रहा हूं।

आप टीवी पर जियो-टारगेटिंग या भू-लक्षित विज्ञापनों के बारे में क्या सोचते हैं?

यह एक अच्छी पहल है, लेकिन इसके लिए गुणवत्ता वाली इनवेंटरी और मज़बूत पैमाइश की ज़रूरत है। अमागी, श्योरवेव्ज़ और स्टार के एडशार्प जैसे प्लेटफार्म स्थानीय विकल्प दे रहे हैं और हम निश्चित रूप से उन पर विचार कर रहे हैं। लेकिन हमारे पास अभी भी व्यापक स्तर का सोल्यूशन या विकल्प नहीं है। जिस क्षण आप उसे पैमाइश के ज़रिए या इनवेंटरी की गुणवत्ता के माध्यम से पाना शुरू करते हैं, यह दिलचस्प हो जाता है। स्थानीय विकल्प इस समय सबसे अच्छे प्रयोग हैं न कि सही सोल्यूशन।

आप अमेरिका को देखें कि नेटवर्क से केबल की तरफ लोग क्यों आए हैं तो पता चलेगा कि कि वे बोस्टन और सैन फ्रांसिस्को जैसे शहरों को एक प्लेटफॉर्म के माध्यम से अलग-अलग लक्षित करने में सक्षम थे। तो आपको उन बाज़ारों में विज्ञापन में स्थानीय प्लेयर भी मिल जाते हैं। आपको उस समय स्थानीय डिलीवरी मिलती है। उस तरह की चीज़ यहां भी होने की ज़रूरत है।

विज्ञापनदाता आमतौर पर क्या पसंद करते हैं रनऑफडेपार्ट (आरओडीपी) या टेंट पोल प्रॉपर्टीज़ यानी प्रमुखतम शोज़?

इन दोनों की अपनी भूमिका है। यह मीडिया के उद्देश्यों पर निर्भर करता है। अगर कुशल पहुंच बनानी है तो गैर-टेंट पोल और यहां तक कि आरओडीपी भी बेहतर भूमिका निभा सकते हैं।

‘एफटीए चैनल ग्रामीण इलाकों में अच्छा काम कर रहे हैं, जहां पे-टीवी का व्यापक प्रसार नहीं है। मुख्य रूप से ग्रामीण फोकस वाले ब्रांड अतीत में एफटीए का उपयोग करते रहे हैं और ऐसा करना जारी रखेंगे। शायद खर्च नहीं बढ़ेगा, बल्कि विखंडन के कारण एफटीए के बीच बंट जाएगा।’

क्या आईपीएल टीवी पर शीर्ष पांच विज्ञापन प्रॉपर्टीज़ में से एक है?

बेशक! इसे जो चीज़ खास बनाती है वह है चीजों का संयोजन। यह एक ऊंचे जुनून वाली प्रॉपर्टी है। आप अगर इस जुनून के साथ अच्छी तरह से जुड़ सकते हैं, तो फिर यह ब्रांड के लिए अच्छी तरह काम करता है। यह समझदारी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। आपको इसे सक्रिय करने की ज़रुरत है। आईपीएल एक बहुत अच्छी प्रॉपर्टी है, इसके कई कारण हैं – प्रॉपर्टी के साथ जुनून जुड़ा हुआ है, लगातार अच्छी रेटिंग मिलती है, क्रिकेट का फॉर्मैट कोलाहल से परे विज्ञापन को जगह देता है, ओवर के बीच पूरा 30 सेकंड का अंतर और पहुंच का निर्माण। क्रिकेट के लिए अच्छा पैसा आना जारी है।

कुछ क्लाएंट और एजेंसियों को सबसे सस्ती दर चाहिए। एक मीडिया खरीदार यह सोच सकता है कि उसका काम सस्ती दर प्राप्त करने के बाद पूरा हो गया है। दरों पर मैडिसन का फलसफा क्या है?

दर, पहुंच और अनुकूलन ये तीन स्तंभ हैं जिसे लेकर योजना बनानेवाले सबसे कम कीमत पर दर्शकों को डिलीवर करने का लक्ष्य रखते हैं। यह जिस उद्देश्य को अनुकूलित किया जा रहा है उस पर निर्भर करता है।

लेकिन, कुछ क्लाएंटों को जीआरपी (ग्रॉस रेटिंग पॉइंट) का खेल खेलना होता है और वे इसे सबसे कम सीपीआरपी पर प्राप्त करना चाहते हैं। वे चैनल पर उपलब्ध प्राइमटाइम और गैर-प्राइमटाइम के बीच संतुलन रखने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। तब आप सबसे कम कीमत पर उच्चतम पहुंच पाने के लिए अनुकूलन करते हैं। कभी-कभी पहुंच 1+ पर नहीं होकर 2+ या 3+ पर होती है। यह इस पर निर्भर करता है कि आप कौन से उद्देश्य के लिए अनुकूलन कर रहे हैं और इससे अलग-अलग चीजों की भूमिका निर्धारित होती है। प्लान को बड़ी समझदारी से बनाना पड़ता है। कम दर हमेशा सही सोल्यूशन नहीं होती।

रेटिंग के अलावा, टीवी पर मीडिया खरीदारी के लिए मैडिसन कौन-से अन्य टूल्स का उपयोग करता है?

हमारे पास एक एमस्पेक्ट्रा नामक टूल है जो कई माध्यमों पर पहुंच की प्लानिंग बनाता है। हम कुछ टेक्नोलॉज़ी कंपनियों के साथ भी काम कर रहे हैं जो टीवी देखने का विकल्प स्मार्टफोन डेटा के माध्यम से टीवी कार्यक्रमों को देखे जाने का डेटा देती हैं।

एक विज्ञापन के माध्यम के रूप में टीवी की लागत कुशलता की तुलना प्रिंट, रेडियो व आउटडोर के साथ तुलना कैसे की जाती है?

यह लक्षित ग्रुप और बाज़ारों की दिलचस्पी पर निर्भर करता है। बड़े पैमाने पर आम जनता को लक्षित ग्रुप और मार्केटिंग, टीवी पर सबसे कारगर रहती है।

‘जियो-टारगेटिंग एक अच्छी पहल है, लेकिन इसके लिए गुणवत्ता वाली इनवेंटरी और मज़बूत पैमाइश की ज़रूरत है। अमागी, श्योरवेव्ज़ और स्टार के एडशार्प जैसे प्लेटफार्म स्थानीय विकल्प दे रहे हैं और हम निश्चित रूप से उन पर विचार कर रहे हैं। लेकिन हमारे पास अभी भी व्यापक स्तर का सोल्यूशन या विकल्प नहीं है। जिस क्षण आप उसे पैमाइश के ज़रिए या इनवेंटरी की गुणवत्ता के माध्यम से पाना शुरू करते हैं, यह दिलचस्प हो जाता है। स्थानीय विकल्प इस समय सबसे अच्छे प्रयोग हैं न कि सही सोल्यूशन।’

धारणा बनाम रेटिंग। एजेंसियों और क्लाएंट के लिए क्या दोनों बराबर रूप में महत्वपूर्ण है?

धारणा के बजाय, मैं कहूंगा कि मीडिया की भूमिका से जिन चीज़ों की उम्मीद की जाती है वह हैं: वहां संदेश (पहुंच और फ्रीक्वेंसी) पहुंचाना, जहां आप लोगों को सबसे कम लागत पर एक अच्छा विज्ञापन दिखाने की कोशिश करते हैं और यही किसी मीडिया एजेंसी की रोजी-रोटी है। कोई क्लाएंट आता है और कहता है कि उसे कोलाहल से परे हटकर बड़ा लॉन्च करना है या वह एक बड़ी खबर की घोषणा करना चाहता है। वहां अखबार का जैकेट का उपयोग किया जाता है। टीवी पर, वोडाफोन ने एक बार एक 24 घंटे का रोड ब्लॉक अभियान किया था। लोग उसके लिए मीडिया चुन सकते हैं। मीडिया का उपयोग करने के लिए तीसरा रास्ता जुड़ाव (माहौल की भूमिका, एकीकरण, आदि) का निर्माण करने का है। सही माहौल ब्रांड के लिए काम करता है।

उसके बाद खासियत (टैग, स्टिंग, बीबी जैसी गैर-एफसीटी इनवेंटरी का उपयोग) का नंबर आता है। इससे हकीकत में आपको एफसीटी के अलावा और इतर ब्रांडिंग मिलती है। फिर स्पॉन्सरशिप के माध्यम से मूल्य स्थानांतरण भी मौजूद है। इन उद्देश्यों से यह निर्धारित होता है कि आप इनवेंटरी को महत्व देते हैं। तो यह केवल रेटिंग्स की बात नहीं है।

क्यों हीरो ओलम्पिक का स्पॉन्सर है? यह एक बहुत दक्ष खरीद नहीं है। सीपीआरपी बहुत ही ज़्यादा है। कारण यह है कि हीरो ‘देश की धड़कन’ जैसी बातों के लिए जाना जाता है। इसकी पोजिशन में ही देश के दिल की धड़कन की बात कही गई है। ओलम्पिक राष्ट्र के गौरव के लिए सबसे अच्छा मंच है। यह एक शानदार स्पॉन्सरशिप अवसर बन गया।

एजेंसियां और विज्ञापनदाता क्या डिजिटल माध्यम को ज़्यादा गंभीरता से ले रहे हैं और क्या इस पर अधिक पैसा खर्च कर रहे हैं, या लोग अभी भी नए माध्यम के ज़रिए उपभोक्ताओं तक पहुंचने के मामले में चीजों को समझने की कोशिश कर रहे हैं?

निश्चित रूप से बढ़ रहा है! यह तब समझ में आता है जब हम 30 प्रतिशत के डिजिटल विकास से भी आगे बढ़ जाते हैं। मुख्य विकास का कारक सर्च नहीं है, बल्कि अन्य डिजिटल फॉर्मैट हैं।

क्या हॉटस्टार जैसे एवीओडी (ऑडियो / वीडियो ऑन डिमांड) प्लेटफॉर्म ने प्रभाव पैदा किया है और क्या रिलायंस जियो बदलाव लाएगा?

यह देखो और इंतज़ार करो वाली बात है। लेकिन इस क्षेत्र में आशा है। हमने हॉटस्टार के साथ प्रयोग किया है। यह बहुत दिलचस्प हो जाएगा जब जियो आएगा। हम देख रहे हैं कि कैसे चीजें हो रही हैं और प्रयोग किए जा रहे हैं।

डिजिटल की पैमाइश में क्या चुनौतियां हैं?

टैम पैमाइश देता है। हम पैमाइश पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि आपको पैमाइश नहीं मिल सकती। बात यह है कि आपको टीवी और ऑनलाइन के बीच तुलना करने की ज़रुरत है।

आखिरी सवाल, एजेंसियों और विज्ञापनदाताओं के साथ संबंधों के निर्माण के संदर्भ में आप स्टार, सोनी, ज़ी और वायकॉम18 जैसे नेटवर्क की एकदूसरे के साथ कैसे तुलना करेंगे?

हमारे इन सभी नेटवर्क के साथ शानदार रिश्ते हैं। तुलना अप्रासंगिक हैं।