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‘खबर के लिए कोई कुछ देना नहीं चाहता’

Shafi_Saxenaइस साल मई में भारत में उतरने के बाद वैश्विक न्यूज़ सिडीकेशन एप्प, न्यूज़ रिपब्लिक देश भर में अपना जाल फैलाता जा रहा है। छह महीने के भीतर इस एप्प के पांच लाख से ज्यादा डाउनलोड हो चुके हैं, जबकि इसके लिए कोई खास मार्केटिंग नहीं की गई।

एप्प से भरी दुनिया में न्यूज़ रिपब्लिक का मकसद नई किस्म की हलचल पैदा करना है। वो हर दिन अपने 1500 से ज्यादा ‘भरोसेमंद मीडिया पार्टनरों’ से खबर, फोटोग्राफ व वीडियो लेकर 50,000 से ज्यादा लेख पेश करता है।

टेलिविज़न पोस्ट ने न्यूज़ रिपब्लिक की सैन फ्रांसिस्को में बैठनेवाली मुख्य ब्रांड अधिकारी, शफी सक्सेना के साथ उनकी हाल की भारत यात्रा के दौरान बातचीत की। सक्सेना ने कंपनी के विज़न के बारे में बताया। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें क्यों प्रतिस्पर्धा की परवाह नहीं है।

पेश हैं इस इंटरव्यू के संपादित अंश…

बाज़ार में बहुत सारे न्यूज़ एप्प हैं। ऐसे में आपको क्यों लगता है कि यूज़र न्यूज़ रिपब्लिक की तरफ आएगा?

विश्व स्तर पर औसत यूज़र महीने में 27 एप्प इस्तेमाल करता है और अपना लगभग 80 प्रतिशत समय पांच एप्स पर बिताता है। अब अगर हर समाचार संगठन एप्प बनाना शुरू कर दे, जो कि उसकी मूल ताकत नहीं है तो क्या उसे पर्याप्त यूज़र मिल जाएंगे? मैं नहीं जानती।

ज्यादा अहम बात है कि हम उनसे (न्यूज़ एप्स) प्रतिस्पर्धा नहीं करते, बल्कि उनके पूरक का काम करते हैं। हम जन्मजात मोबाइल कंपनी हैं जो कंटेंट नहीं पैदा करती। हम 1500 से ज्यादा मीडिया पार्टनरों का लाइसेंसशुदा कंटेंट भर इकट्ठा करते हैं, उन्हें अभीष्टतम बनाते हैं और उसे यूज़र के माफिक इंटरफेस पर पेश कर देते हैं। हम पक्का करते हैं कि यूज़र का अनुभव शानदार हो।

आप अन्य उपलब्ध एप्स से कैसे अलग हैं?

हम ओपन सोर्स की दुनिया में विश्वास करते हैं और न्यूज़ को जीरो-सम गेम के रूप में नहीं देखते। हमारा दिमाग अलग तरीके से चलता है। हमारे लिए, न्यूज़ का परिवेश उस ज़ीरो-सम गेम से अलग है जिसमें एक हाथ ले, दूसरे हाथ दे की स्थिति रहती है।

इसलिए, हम कंटेंट बनाने वाले नहीं हैं, और न ही हम ब्रॉडकास्ट करते हैं, हम नैनो-कास्ट हैं। आप एक बार जब हमारे यूज़र बन जाते हैं तो ताकत आपके हाथ में आ जाती है। आप लाखों उपलब्ध विषयों में से अपनी रुचि के विषयों को कस्टमाइज़ कर सकते हैं। इस तरह, हर किसी की ख़बरें उनकी दिलचस्पी के आधार पर अलग अलग होंगी।

हमारा लेआउट सरल है, लेकिन इसके पीछे शक्तिशाली एल्गोरिदम है जो कई विकल्पों के आधार पर पाठकों के सामने कंटेंट को प्रमोट करता है। एल्गोरिदम का कोई पूर्वाग्रह नहीं होता इसलिए यह सबसे निष्पक्ष तरीके से यूज़र द्वारा बिताए समय, लोकप्रियता, आदि उनकी दिलचस्पी पर निर्भर करता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात है कि हम जब क्यूरेट करते हैं तब अन्य वेबसाइटों से हम लेख नहीं उठाते। हम लाइसेंस लेते हैं और पब्लिकेशन को और हरेक स्टॉरी के पत्रकारों को उचित क्रेडिट देते हैं।

आपके साथ कोई पब्लिकेशन आखिर क्यों अपना कंटेंट साझा करे?

दो कारण हैं – पहला जैसा कि मैंने कहा, एप्लिकेशन बनाना हर किसी का मुख्य क्षेत्र नहीं है और दूसरा, हम उनके साथ आय साझा कर रहे हैं।

इसलिए, हमारा सामान्य आय शेयरिंग मॉडल है जो उद्योग के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। हम मानते हैं कि पत्रकारों के साथ-साथ न्यूज़ संगठनों को अपने कंटेंट का भुगतान मिलना चाहिए। हम मानते हैं कि कहानियां उठाना अनैतिक है।

हमारे दुनिया भर में 1500 से अधिक पार्टनर हैं। भारत में हिंदुस्तान टाइम्स, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, इंडियन एक्सप्रेस, फाइनेंशियल एक्सप्रेस, हिंदुस्तान, पत्रिका, रॉयटर, बीबीसी हिंदी, इंडिया टुडे ग्रुप, वन इंडिया, इंडिया.कॉम (India.com), आजतक और अन्य को मिलाकर हमारे कुल 217 कंटेंट पार्टनर हैं।
हम फिलहाल राघव बहल प्रवर्तित क्विंट को जोड़ने के लिए बातचीत कर रहे हैं।


विश्व स्तर पर औसत यूज़र महीने में 27 एप्प इस्तेमाल करता है और अपना लगभग 80 प्रतिशत समय पांच एप्स पर बिताता है। अब अगर हर समाचार संगठन एप्प बनाना शुरू कर दे, जो कि उसकी मूल ताकत नहीं है तो क्या उसे पर्याप्त यूज़र मिल जाएंगे? मैं नहीं जानती।’

मुद्रीकरण के बारे में बताइए?

विज्ञापन आय हमारा मुख्य स्रोत है। हालांकि, हमारा एक विज्ञापन मुक्त, सब्सक्रिप्शन-आधारित मॉडल भी है। लेकिन सच्चाई यह है कि कोई भी खबर के लिए भुगतान नहीं करना चाहता। वैश्विक स्तर पर, हमें सब्सक्रिप्शन से केवल 3 प्रतिशत आय मिलती है, बाकी विज्ञापन के विभिन्न तरीकों से आता है।

हमें कई देशों से पैसा मिल रहा है। लेकिन हम विस्तार के लिए इसे वापस निवेश कर देते हैं।

भारत के लिए विशिष्ट रूप से हमने मध्य सितंबर से विज्ञापन शुरू किए और यह उम्मीद से पहले हुआ क्योंकि चीज़ें सुचारू रूप से चल रही थीं। लेकिन मैं मानती हूं कि पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए तीन और साल लगेंगे और तब विज्ञापन के डॉलर टीवी और प्रिंट से परे डिजिटल पर आने लगेंगे।

छह महीने के भीतर आपके 5 लाख से अधिक डाउनलोड हो गए हैं। भारतीय बाज़ार से क्या सीख मिली?

भारत में लॉन्च के बाद ही हमें एहसास हुआ कि हमें यहां बहुभाषी होना पड़ेगा। तदनुसार, तीन महीने के भीतर, अंग्रेज़ी और हिन्दी के अलावा, हमने तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, मराठी, बंगाली और गुजराती जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में भी कंटेंट शुरू किया। यह इकलौता बाज़ार है जहां हमारे इतने सारे विकल्प हैं।

यही सीख हमने अन्य बाज़ारों में भी लागू की है। अक्टूबर से हमने बहुभाषी फ़ीड्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरू की है। इसलिए, यदि आप अमेरिका में भी एक सब्सक्राइबर हों तो आपको जर्मन, फ्रांसीसी या अपनी पसंद की किसी भी अन्य भाषा में अतिरिक्त फ़ीड मिल सकती है।

भारत में, बैंडविड्थ अभी भी एक मुद्दा है, इसलिए हम मुख्य रूप से धीमी गति वाले इंटरनेट से पहुंचा जा सके ऐसा एचटीएमएल कंटेंट ही पेश कर रहे हैं। हम एक ऑफ़लाइन फीचर भी प्रदान कर रहे हैं।

कुल मिलाकर आप कैसे भारतीय बाज़ार को विकसित होता देख रहे हैं?

भारत निश्चित रूप से आने वाले सालों में हमारे लिए एक प्रमुख बाज़ार होने जा रहा है। अगले महीने भारत में 40 करोड़ से अधिक इंटरनेट यूज़र हो जाएंगे जिसमें से कई मोबाइल फर्स्ट यूज़र हैं।

तो, हमें भारत में एक शानदार भविष्य दिखता है क्योंकि यहां मोबाइल यूज़र की संख्या सबसे अधिक है और सबसे बड़ी युवा आबादी है। यह संयोजन इसे एक शानदार मौका बना देता है।


कोई भी खबर के लिए भुगतान नहीं करना चाहता। वैश्विक स्तर पर, हमें सब्सक्रिप्शन से केवल 3 प्रतिशत आय मिलती है, बाकी आय विज्ञापन के विभिन्न तरीकों से आती है।’

वैश्विक परिदृश्य है?

हमारे 29 अलग-अलग भाषाओं में (भारतीय भाषाओं के अलावा) 40 संस्करण हैं। इसमें रूसी, नॉर्वेजियन अंग्रेज़ी, फ्रेंच, जर्मन, चीनी, ताइवान, रोमानियाई, अरबी, तुर्की, स्लोवाक, एच के कैंटोनीज़, बल्गेरियाई, सर्ब, बहासा, क्रोएशियाई सहित स्वीडिश, इतालवी, चेक, थाई, जापानी, डेनिश, तुर्की, स्पेनिश, मलय, वियतनामी, डच, और बर्मीज़ भाषाएं शामिल हैं।

विश्व स्तर पर, हमारे मोटे तौर पर 1.25 करोड़ मासिक सक्रिय यूज़र हैं जो प्रति दिन करीब 6 मिनट बिताते हैं। यह एक महीने में तीन घंटे का, बहुत बड़ा समय हुआ।

इसके अलावा, हमें मासिक रूप से 3 अरब व्यूज़ मिलते हैं जिसका मतलब है कि एप्प पर हर सेकंड में 1,200 व्यूज़ मिलते हैं। औसतन यूज़र एक महीने में 150 पेज पढ़ते है और जर्मनी और फ्रांस जैसे कुछ यूरोपीय बाज़ारों के लिए यह 200 पेज जितना हो जाता है। भारत में, यूज़र वर्तमान में 100 पेज पढ़ता है और हम अधिक पार्टनर जोड़ रहे हैं तो यह बढ़ेगा।

हमारा एप्प एक अक्सर उद्धृत किया गया और सम्मानित एप्प है। हम गूगल स्टोर और एप्पल स्टोर में में ‘संपादक की पसंद वाले एप्प’ में शामिल हैं। हमारा एप्प 15 देशों में शीर्ष के पांच सबसे ज्यादा डाउनलोड किए गए न्यूज़ एप्प में से एक है।

आपने बिज़नेस में कितना निवेश किया है और आपके निवेशक कौन हैं?

हमने अब तक तीन मौजूदा पीई निवेशकों इंटेल कैपिटल, क्रिएथोर वेंचर्स और एक्सएन्जे प्राइवेट इक्विटी से 1.2 करोड़ डॉलर जुटाए हैं। हम में निवेशकों का विश्वास बना हुआ है। हम विकसित बाज़ारों में धन को फिर से निवेश कर रहे हैं।

हम जल्द ही फंडिंग के चौथे दौर में धन जुटाने की उम्मीद कर रहे हैं।