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‘ऑरटेल का विकास साबित करता है अंतिम कड़ी के मॉडल में बढ़ते जाने का दम’

Bibhu-Prasad-Rath-insideऑरटेल कम्युनिकेशंस इसी वित्त वर्ष में 10 लाख सब्सक्राइबरों तक पहुंचने की मंज़िल हासिल करने जा रही है। इस मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर के बीते वित्त वर्ष 2015-16 में अपना 65 प्रतिशत विकास नए उभरते बाज़ारों से हासिल किया है, जबकि गृह राज्य ओडिशा का इसमें योगदान 35 प्रतिशत का है।

ऑरटेल के प्रेसिडेंट व सीईओ बिभु प्रसाद रथ कहते हैं, “हमारा विकास साबित कर देता है कि देश के अन्य भागों में भी अंतिम कड़ी के ग्राहक को पकड़ना संभव है और यह बढ़ाया जा सकनेवाला मॉडल है।”

कंपनी को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष 2016-17 की दूसरी छमाही में ही वो किसी वक्त ओडिशा के बाहर के बाज़ारों में परिचालन लाभ कमाने की स्थिति में आ जाएगी।

सिबाब्रता दास को दिए गए इस इंटरव्यू ने रथ ने अंतिम कड़ी के सब्सक्राइबर तक पहुंचने के मॉडल, उसे हासिल करने के मूल्य, कैरेज़ आय, कंटेंट लागत और रियो जैसे मसलों पर खुलकर बात की है।

सब्सक्राइबरों में कितनी मजबूत बढ़त हुई है और क्या ऑरटेल वित्त वर्ष 2016-17 के अंत तक 10 लाख सब्सक्राइबरों का लक्ष्य हासिल करने जा रहा है?

हमने बीते वित्त वर्ष 2015-16 में 1,71,081 सब्सक्राइबर जोड़े हैं जिससे कुल संख्या 7,01,192 पर पहुंच गई है। इसमें से 92 प्रतिशत अंतिम कड़ी के ग्राहक हैं जिन पर हमारा पूरा स्वामित्व है। हमने इसके अलावा केबल ऑपरेटरों से 86,797 ग्राहक खरीदने के करार पर दस्तखत कर लिए हैं और उन्हें एकीकृत करने की प्रक्रिया में हैं। इस प्रकार अपनी मौजूदा रफ्तार के आधार पर हमें आसानी से इस वित्त वर्ष में 10 लाख ग्राहकों का लक्ष्य हासिल कर लेना चाहिए।

अहम बात यह है कि यह विकास हमारे गृह आधार ओडिशा के बाहर से आ रहा है। लगभग 65 प्रतिशत विकास उभरते बाज़ारों से आया है और 35 प्रतिशत ओडिशा से। हमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना व छत्तीसगढ़ से अच्छी बढ़त मिल रही है, जबकि मध्य प्रदेश व पश्चिम बंगाल से सब्सक्राइबरों की छोटी संख्या आ रही है। हमारा विस्तार दिखाता है कि हम कुछ राज्यों में जगह बनाने के लिए क्षेत्रीय एमएसओ बनने जा रहे हैं।

ऑरटेल के लिए 10 लाख सब्सक्राइबर का लक्ष्य हासिल करना इतना अहम मील का पत्थर क्यों बना हुआ है?

यह भौगोलिक नज़रिए से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि हम ओडिशा में ही नहीं, बल्कि भारत के कुछ अन्य राज्यों में भी विकास कर सकें। हमारा विकास साबित कर देता है कि देश के अन्य भागों में भी अंतिम कड़ी के ग्राहक को पकड़ना संभव है और यह बढ़ाया जा सकनेवाला मॉडल है। इसमें फायदा यह है कि आप आय की पूरी धारा पकड़ सकते हैं और आप एक प्रभावी ब्रॉडबैंड खिलाड़ी बन सकते हैं।

‘यह भौगोलिक नज़रिए से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि हम ओडिशा में ही नहीं, बल्कि भारत के कुछ अन्य राज्यों में भी विकास कर सकें। हमारा विकास साबित कर देता है कि देश के अन्य भागों में भी अंतिम कड़ी के ग्राहक को पकड़ना संभव है और यह बढ़ाया जा सकनेवाला मॉडल है।’

कितना विकास अधिग्रहण के माध्यम से हुआ है?

हमारे विकास का बड़ा हिस्सा अधिग्रहण से आया है। हमारी बिज़नेस रणनीति स्थानीय केबल ऑपरेटरों (एलसीओ) को सिगनल देने की नहीं है। हम या तो उनके साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं या उन्हें खरीद लेते हैं। खरीदे जाने के तुरंत बाद, हम कलेक्शन भी सीधे खुद ही संभालते हैं। कमान संभालना और सब्सक्राइबरों से सब्सक्रिप्शन आय के कलेक्शन का नियंत्रण होना लंबी अवधि के लिए महत्वपूर्ण है।

अधिग्रहण की कीमतों में क्यों वृद्धि हुई है?

एक साल पहले अधिग्रहण की औसत कीमत शुद्ध स्तर स्तर करीब 2500 रुपए थी। अब यह प्रति सब्सक्राइबर करीब 2800 रुपए है। इसका बाज़ार की गतिशीलता में परिवर्तन के साथ कुछ लेना-देना नहीं है क्योंकि कोई अन्य एमएसओ अंतिम कड़ी के ऑपरेटरों को नहीं खरीद रहा है। अधिग्रहण लागत में यह थोड़ी-सी वृद्धि हमारी अधिग्रहण की इच्छा से संबंधित है। हम वित्त वर्ष 2016-17 के अंत तक 10 लाख सब्सक्राइबरों के अपने लक्ष्य तक पहुंचना चाहते हैं।

उभरते बाज़ार आर्थिक रूप से कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं?

हम ओडिशा के बाहर के बाज़ारों में निवेश के चरण में हैं। हालांकि परिचालन लाभ के स्तर पर उभरते बाज़ारों में हम घाटे में चल रहे हैं, पर वहां हमारे वित्तीय प्रदर्शन में नाटकीय सुधार हुआ है। हमने वित्त वर्ष 2015-16 में उभरते बाज़ारों में परिचालन घाटा 35 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक, कम कर लिया है। हम मुख्य रूप से पैमाना बढ़ाने की वजह से चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ब्रेक-इवेन कर पाएंगे। उभरते बाज़ारों में, हम पूरे वित्त वर्ष 2017-18 में परिचालन लाभ कमाने की स्थिति में आ जाएंगे।

‘एक साल पहलेअधिग्रहण की औसत कीमत प्रति सब्सक्राइबर करीब 2500 रुपए थी। अब यह प्रति सब्सक्राइबर करीब 2800 रुपए है। इसका बाज़ार की गतिशीलता में परिवर्तन के साथ कुछ लेना-देना नहीं है क्योंकि कोई अन्य एमएसओ अंतिम कड़ी के ऑपरेटरों को नहीं खरीद रहा है।’

शुद्ध लाभ और परिचालन लाभ चौथी तिमाही में क्यों प्रभावित हुआ है?

केबल टीवी और ब्रॉडबैंड के हमारे मुख्य बिज़नेस के साथ इसका कुछ संबंध नहीं है। हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग बिज़नेस में एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में वित्त वर्ष 16 की चौथी तिमाही में काफी कमी आई है। हमारा मानना ​​है कि आय का यह खंड नरम रहेगा। लेकिन क्योंकि हमारा सब्सक्राइबर आधार बढ़ रहा है, हमारी सब्सक्रिप्शन आय, इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग बिज़नेस में नरमी की भरपाई कर देगी।

कितने सेट-टॉप बॉक्स (एसटीबी) वित्त वर्ष 2015-16 में लगाए गए हैं और नेटवर्क का कितना प्रतिशत डिजिटल कर दिया गया है?

हमने साल के दौरान 1,07,175 एसटीबी लगाए हैं। हमारी डिजिटल पैठ का अनुपात एक साल पहले की तुलना के 22.7 प्रतिशत से वित्त वर्ष 16 में 37.1 प्रतिशत बढ़ा है।

वित्त वर्ष 2015-16 की चौथी तिमाही में कैरेज आय पिछले साल की समान अवधि और तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 15.5 प्रतिशत से 11.2 प्रतिशत तक गिर गई। वित्त वर्ष 2016-17 में क्या कैरेज आय कम होगी?

कैरेज आय एक साल पहले की तुलना के 26.4 करोड़ रुपए से वित्त वर्ष 16 में 35.6 करोड़ रुपए यानी 35 प्रतिशत बढ़ी है। पिछले दो सालों से कैरेज आय ने मज़बूत वृद्धि देखी है क्योंकि ओडिशा में नए क्षेत्रीय भाषा के चैनलों की शुरूआत हुई है। लेकिन यह लंबे समय में सतत विकास का मॉडल नहीं है। वित्त वर्ष 2016-17 में हमें कैरेज आय में 15 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है कयोंकि नए क्षेत्रीय भाषा के चैनलों के लॉन्च की अभी कोई योजना नहीं है।

‘पिछले दो सालों से कैरेज आय ने मज़बूत वृद्धि देखी है क्योंकि ओडिशा में नए क्षेत्रीय भाषा के चैनलों की शुरूआत हुई है। लेकिन यह लंबे समय में सतत विकास का मॉडल नहीं है। वित्त वर्ष 2016-17 में हमें कैरेज आय में 15 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है कयोंकि नए क्षेत्रीय भाषा के चैनलों के लॉन्च की अभी कोई योजना नहीं है।’

कंटेंट लागत गिर गई है। आपके अनुसार यह कहां तक गिरेगी?

प्रति केबल टीवी सब्सक्राइबर पे-चैनल लागत वित्त वर्ष 2015-16 में 56.82 रुपए तक गिर गई जो पिछले वित्त वर्ष में 61.14 रुपए थी। मौजूदा टैरिफ मॉडल के आधार पर हम इसे 55 से 60 रुपए की रेंज में स्थापित हो जाने की उम्मीद है। अगर हम रियो (रेफरेंस इंटरकनेक्ट ऑफर) अपनाते हैं तो परिदृश्य अलग हो सकता है।

ऑरटेल ने हाल ही में सिग्नल की आपूर्ति की बहाली के लिए और इंडियाकास्ट के साथ रियो शर्तों पर समझौते के नवीनीकरण के लिए टीडीसैट के समक्ष गुहार लगाई है। आप इंडियाकास्ट के साथ क्या एक रियो सौदा करना चाहते हैं या आप इसे सौदेबाजी के एक साधन के रूप में प्रयोग कर रहे हैं?

हमने कंटेंट सौदे को एक निश्चित शुल्क से एक रियो मॉडल पर लाने के उद्देश्य के साथ यह याचिका दायर की है। रियो मॉडल में भुगतान, चैनल को सब्सक्राइब करने वाले सब्सक्राइबरों की वास्तविक संख्या के आधार पर किया जाता है। रियो हमें प्रभावी रूप से पैकेजिंग, टियर को लागू करने में और हमारे उपभोक्ताओं के लिए अलाकार्टे चैनलों की पेशकश में मदद करेगा। यह डिजिटल युग में उपभोक्ताओं के हाथों में चुनाव देने के उद्देश्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण सकारात्मक कदम है।

आप कितने आक्रामक तरीके से ब्रॉडबैंड को प्रोत्साहित करने जा रहे हैं? आप ब्रॉडबैंड में एआरपीयू या वॉल्यूम ग्रोथ किसकी उम्मीद कर रहे हैं?

हम नए नेटवर्क के ज़रिए, आकर्षक ब्रॉडबैंड पैकेज और विभिन्न अन्य मूल्य वर्धित सेवाओं और पहल के बल पर वित्त वर्ष 2016-17 में ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबरों की संख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। हम मात्रा में महत्वपूर्ण वृद्धि देख रहे हैं।

क्या आपकी नई पूंजी जुटाने की कोई योजना है?

हमारा पूरा ध्यान और प्रयास वित्त वर्ष 2016-17 के अंत तक 10 लाख सब्सक्राइबरों तक पहुंचने का है। हमारे पास इसके लिए पहले से ही इक्विटी फंडिंग है। हम चालू वित्त वर्ष के दौरान कुछ कर्ज भी लेंगे।