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कलर्स का ब्रांड क्षेत्रीय चैनलों में नई ताज़गी लेकर आएगा

वायाकॉम इंक को अभी भी ईटीवी के क्षेत्रीय मनोरंजन चैनलों की 50% इक्विटी खरीदने के लिए एफआईपीबी की मंज़ूरी का इंतज़ार है। लेकिन बदलाव शुरू हो चुका है। रविवार, 22 मार्च को टीवी18 ग्रुप के मराठी मनोरंजन चैनल ने ईटीबी का पुराना ब्रांड छोड़कर कलर्स मराठी का नया चोला पहन लिया। अनुज पोद्दार ने बात की दो नए जीईसी की रीब्रांडिंग और नए कंटेंट के बारे में।

‘रियो की रणनीति ने कंटेंट लागत को काबू में रखने का काम किया’

डिश टीवी के सीईओ आर सी वेंकटेश ने इस इंटरव्यू में कंपनी की बैलेंस शीट को कसने के लिए उठाए गए कदम, विकास की दो-आयामी रणनीति, बिजनेस को चढ़ाने में ज़िंग की भूमिका, अलग-अलग मूल्य रखने की योजना, रियो पर रुख, श्रीलंका में लॉन्च के कार्यक्रम और लाइसेंस के नवीकरण की स्थिति जैसे मसलों पर खुलकर बात की।

‘अगर कंटेंट का कोई सुपरमार्केट है तो वो है यूट्यूब’

गूगल में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के यूट्यूब पार्टनरशिप निदेशक अजय विद्यासागर ने बताया कि उपभोक्ताओं से लेकर कंटेंट बनानेवालों तक के लिए यूट्यूब की कितनी प्रासंगिकता व महत्ता है। उनका यह भी मानना है कि भारत में यूट्यूब और टीवी, दोनों का वजूद साथ-साथ बना रहेगा।

‘स्टार की रियो नीति एआरपीयू को बढ़ाने के लिए सकारात्मक कदम’

डिश टीवी के प्रबंध निदेशक जवाहर गोयल ने एक इंटरव्यू में डैस के तीसरे व चौथे चरण के बाज़ारों में डैस के मजबूत आधार, स्टार की रियो नीति के असर, कंटेंट सौदों, कैरेज़ आय, ट्राई की 8 प्रतिशत एजीआर सिफारिश, लाइसेंसिंग नीति, एसटीबी निर्माण और डिश टीवी की विकास योजनाओं पर भी बात की।

‘केबल टीवी की रणभूमि में मुझे अच्छा योद्धा माना जाता है’

फास्टवे ट्रांसमिशंस के संस्थापक-प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह ने इस इंटरव्यू में संयुक्त उद्यम में डिजिकेबल की इक्विटी घटने, आईपीओ की योजना, हरियाणा में सिटी केबल से संभावित तकरार, स्वैच्छिक डिजिटलीकरण के महत्व और केबल एकाधिकार पर अंकुश लगाने व डीपीओ द्वारा चलाए जा रहे लोकल केबल चैनलों की सीमा बांधने से जुड़ी ट्राई की सिफारिशों की खामियों तक पर बात की।

‘सब के क्षेत्रीय भाषा के संस्करणों का मुझे शानदार भविष्य दिखता है’

अनूज कपूर मानते हैं कि सेगमेंट के भीतर उप-सेगमेंट रखना अच्छी रणनीति है। वे कहते हैं, “मैं सब पंजाबी, मराठी, गुजराती या बंगाली चैनल का जबरदस्त भविष्य देखता हूं।” उन्होंने सोनी पल और सब के सामने मौजूद चुनौतियों और दोनों चैनलों के बारे में अपने विज़न की भी बात की।

‘स्टूडियो फॉर्मैट के शोज़ पर ज़ोर देना टीवी न्यूज़ को मार डालेगा’

भूपेंद्र चौबे का कहना है, “राजदीप, बरखा दत्त या अर्नब गोस्वामी जैसे सभी खास-म-खास ब्रांड स्टूडियो फॉर्मैट के शिकार हो गए हैं। मुझे लगता है कि यह चीज़ टेलिविज़न को मार डालेगी।” उनके मुताबिक भारत में टीवी न्यूज़ एक नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है। उनका मानना है कि पत्रकारों की अगली लहर डिजिटल मीडिया से आएगी।

‘मोदी बहुत चालाक शख्स हैं जो मीडिया के लिए एजेंडा सेट करना चाहते हैं’

राजदीप सरदेसाई ने बताया है कि किस बात ने उन्हें सबसे पहले यह किताब लिखने के लिए उकसाया और आज के पत्रकारों के आगे क्या-क्या करने को पड़ा है और उनका क्या भविष्य होने जा रहा है।

“असली काम अंश को मिलाकर समग्र का दम पैदा करना है”

ज़ी टीवी के बिजनेस हेड प्रदीप हेजमादी बात कर रहे हैं कि चैनल कैसे प्रेरणादायक कहानियों पर आधारित शोज़ बनाने पर फोकस कर रहा है। साथ ही यह कि प्राइमटाइम के घंटों को बढ़ाने की जरूरत है और ज्यादा आय के लिए दोपहर का बैंड बनाने की चुनौतियां क्या हैं।

“एमएसओ और डीटीएच ऑपरेटरों ने प्रासंगिक कंटेंट की कद्र नहीं की तो बिजनेस जाएगा उनके हाथ से”

संजीव कपूर फूडफूड चैनल के विस्तार में लगे हैं। वे क्षेत्रीय चैनल लाने के साथ इसे टीवी से बाहर भी पहुंचाना चाहते हैं। एमएसओ और डीटीएच ऑपरेटरों से बराबर जूझते हुए उन्हें लगता है कि अगर ये लोग प्रासंगिक कंटेंट के साथ नहीं आए तो इनका अंत पक्का है। उन्होंने शेफ से लेकर टीवी चैनल का मालिक बनने तक की अपनी यात्रा पर खुलकर बात की।