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‘ऊंचे स्तर का कंटेंट बनाने के लिए लोकल फिल्मकारों व संस्थानों के साथ काम करेंगे’

Swati-Mohanफॉक्स नेटवर्क्स ग्रुप में भारत की बिजनेस हेड, स्वाति मोहन ने टेलिविज़न पोस्ट के आश्विन पिंटों को दिए गए इस इंटरव्यू में रीब्रांडिंग, एनसीजी नेटवर्क्स इंडिया के स्तंभों और स्थानीय कंटेंट का पैमाना बढ़ाने के बारे में खुलकर बात की है।

एनजीसी नेटवर्क्स इंडिया के तीन स्तंभों को आगे कैसे बढ़ावा मिलने जा रहा है?

हम चार पहलुओं पर काम कर रहे हैं। पहला है लुक व अहसास। नई पैकेजिंग में लुक और अहसास को परिष्कृत किया गया है। यह प्रीमियम स्तर का है और हमारी प्रोग्रामिंग रणनीति के साथ मेल भी खाता है जो उसी दिशा में बढ रही है।

दसरा है कंटेंट व प्रोग्रामिंग। यह बाज़ार में विश्वस्तर के किस्सागो के रूप में हमारे नेतृत्व को और ठोस कर देगा। कंटेंट की गहराई एक साथ भिन्न स्तर और मकसद तक पहुंच जाएगी।

हम फॉर्मैट व शैली के साथ प्रयोग करेंगे और स्क्रिप्टेड कंटेंट में भी हम छलांग लगाने जा रहे हैं। अगर आप ‘मार्स’ पर गौर करें तो यह एक उदाहरण है कि हम वास्तव में विषय, किस्सा कहने के अंदाज़ और प्रतिभाओं के स्तर में कितना आगे जा चुके हैं। हमने इसमें ब्रायन ग्रेज़र और रॉन हॉवर्ड जैसे ऑस्कर जीतनेवाले निर्देशकों व फिल्मकारों को लिया है जिन्होंने वाकई आगे बढ़कर यह शानदार शो बनाया है।

तीसरा पहलू प्रतिभाओं को लाने का है। इस साल पहले हम मॉर्गन फ्रीमैन या लियोनार्डो डिकैप्रियो जैसी प्रतिभाओं को ‘बिफोर द फ्लड’ जैसे शो में ऑन-एयर ला चुके हैं; हमने परदे के पीछे की डैरेन एरोनोफस्की, सेबास्तिन हंगर, रिडले स्कॉट जैसी तमाम प्रतिभाओं को साथ लिया है। वे हमारे लिए ढेर सारा कंटेंट बनाएंगे।

चौथा व आखिरी पहलू है कंटेंट की गहराई व मकसद। कंटेंट जो आसपास की दुनिया के बारे में हमारी जागरूकता को आगे ले जाएगा, ऐसे मुद्दों पर रौशनी डालेगा जिन पर हमें बहुत गंभीरता से गौर करना चाहिए और साथ ही हम ऐसे नवाचारों को उजागर करेंगे जो हमारे इर्दगिर्द हो रखे हैं। ये हमारे और आगे बढ़ने के मजबूत पहलू हैं।

एनजीसी की यह रीब्रांडिंग कितनी लंबी चलेगी?

यह काम वन नेशनल ज्योग्राफिक की धारणा को परिभाषित करता है। रीब्रांडिंग की प्रक्रिया करीब-करीब एक साल से चल रही है। हमने इसमें ‘फरदर’ शब्द का इस्तेमाल किया है जो हमारी धारणा को सबसे बेहतर तरीके से अभिव्यक्त करता है। यह ब्रांड की मूल भावना में है। जहां हमारी प्रीमियम पोजिशनिंग को रेखांकित करने की ज़रूरत है, वहीं हमें पैकेजिंग, लुक व अहसास पर भी ध्यान देना था जो हम जो करते हैं, उसे अच्छी तरह दर्शाए। नाम से ‘चैनल’ हटा देने का कारण एकरूपता लाना और ‘वन नेशनल ज्योग्राफिक’ जैसा बर्ताव करना था।

‘हम गहरा, उच्च स्तर का कंटेंट बनाने के लिए स्थानीय फिल्मकारों और संस्थानों के साथ मिलकर काम करेंगे। ऐसा कंटेंट आप आनेवाले सालों में सामने आता देखेंगे।’

क्या आप अभी जो एकरूपता आ रही है, उसका कोई उदाहरण दे सकती है?

नवंबर में पत्रिका कवर वही है जो ‘मार्स’ का था और इस तरह एक एकीकृत आस्ति को शोकेस किया गया। मार्स पर एक किताब भी है जो अतीत की तुलना में बहुत-बहुत बड़ा बदलाव है।

लक्ष्य यह है कि एक ही ब्रांडिंग, एक ही लोगो व लुक के साथ विभिन्न आस्तियां आपस में एक-दूसरे के साथ संवाद व मेलजोल करें। यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और यह एक ऐसी चीज़ है जो अभी तक कभी नहीं हुई। हमारी प्राथमिकताओं पर अमल सभी आस्तियों तक जाएगा। पिछले साल ट्वेंटीफर्स्ट सेंचुरी फॉक्स और नेशनल ज्योग्राफिक संयुक्त विज़न बनाने के लिए एक साथ आ गए जहां हमने डिजिटल उत्पादों व ट्रैवेल बिजनेस जैसी अन्य आस्तियों को भी समेट लिया। ‘वन नेशनल ज्योग्राफिक’ की धारणा को उभारना महत्वपूर्ण था। इसलिए हमने एक लोगो, एक ब्रांड और एक टैगलाइन बनाई जो हमें एक साथ संयुक्त कर देती है। ‘फरदर’ असल में ब्रांड की उस भावना को पकड़ने का प्रयास है जिसने हमेशा आसपास की दुनिया की गहरी व बेहतर समझ का झंडा बुलंद किया है। ब्रांड और चैनल ने अपनी सभी आस्तियों में हमेशा इस विज़न को पकड़ा है। यह सभी आस्तियों को साथ ले आता है। यह ब्रांड को मकसद के साथ जोड़ता है और जिज्ञासा के उस जीन को शांत करता है जो हमेशा से हम सबसे में रहा है, हम नए क्षितिज खोजना चाहते हैं और नए उत्तर पाने के लिए सतह के पार जाना चाहते हैं।

चैनल के स्वरूप में, जब उसका फोकस स्मार्ट टीवी पर था, तब से कितना अंतर आ गया है?

कंटेंट मिक्स के लिहाज़ से स्मार्ट मनोरंजन कहीं दूर नहीं जा रहा। कंटेंट के मिश्रण में वो हमेशा हमारी राह खोलता रहेगा। हां, स्मार्ट मनोरंजन को अब कंटेंट के ऐसे स्तर व पैमाने से संतुलित किया जाएगा जो अभी तक कभी नहीं रहा। रीब्रांडिंग हितधारकों, कर्मचारियों के लिए एक ब्रांड और एक भावनात्मक ज़रूरत, दोनों ही है। यह वन नेशनल ज्योग्राफिक होने के बिजनेस मकसद को एक साथ ले आती है।

स्क्रिप्टेड या पटकथा वाला कंटेंट कितना रहेगा?

यह एक जॉनर है जो निश्चित रूप से कामयाब रहेगा। चैनल पर पटकथा और बिना पटकथा वाले कंटेंट के बीच संतुलन होगा। पटकथा के लिए लॉस एंजेल्स में एक प्रमुख को नियुक्त किया गया है जो विश्व स्तर पर पटकथा कंटेंट पर काम करेगा।

क्या स्थानीय प्रोडक्शन में कुछ पटकथा वाला कंटेंट शामिल होगा?

उद्देश्य गहन व काफी ऊंचे पैमाने वाला कंटेंट बनाने का है और इसमें स्थानीय फिक्शन कंटेंट शामिल किया जा सकता है। हम चीजों को आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं। काम जारी है।

क्या आप एनजीसी नेटवर्क्स इंडिया के तीन स्तंभों वाले पुनर्गठन के बारे में बताएंगे?

हमने अपनी प्रोडक्ट टीम का पुनर्गठन किया है। यह तीन खंभों के तहत है – ऑन एयर रूप-रंग और रचनात्मकता, ब्रांड रणनीति जो सुनिश्चित करती है कि हम मीडिया में अपने ग्राहकों के लिए प्रोग्रामिंग, उनसे कम्यूनिकेशन और तालमेल कर रहे हैं और स्पष्ट रूप से तीसरा खंभा स्थानीय भारतीय कंटेंट का है। हमने यह सुनिश्चित किया है कि हम उच्च गुणवत्ता वाले कंटेंट का, दुनिया भर में नेशनल ज्योग्राफिक के बाज़ारों में हमारे सभी प्लेटफार्मों पर प्रसारण करते रहें और हमने इस रणनीति के तहत भविष्य के लिए हमारे टीमों में तालमेल किया है। अब फोकस एक सामूहिक टीम के तहत नेटवर्क को मज़बूत बनाना और आने वाले सालों में इस रणनीति के आधार पर काम करना है।

क्या आप ताल मिलाने वाले कंटेंट के महत्व के बारे में बात कर सकते हैं?

कंटेंट के खेल के संदर्भ में यह लग सकता है कि यह अंतरराष्ट्रीय है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि ‘बिफोर द फ्लड’ को भारत से 12 प्रतिशत दर्शक संख्या मिली है। हम हमेशा से एक वैश्विक ब्रांड रहे हैं और यह परिभाषित करना और इसे अपनाते रहना भी पूरी तरह से महत्वपूर्ण है। हम वैश्विक कंटेंट डालने से कभी भी दूर नहीं भागेंगे। इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिलती है, यह बना रहेगा और बेहतर ही होगा। है। यही रणनीति भारत में भी स्थानीय तौर पर पैर जमाएगी और हम स्थानीय फिल्म निर्माताओं और संस्थानों के साथ काम करेंगे ताकि गहन और बड़ा कंटेंट ला सके जिसे आप आने वाले सालों में देखेंगे।

‘यात्रा, उपभोक्ता उत्पाद व डिजिटल जैसे कारोबारों को खोलने का अवसर ऐसी चीज़ है जिसका हम वाकई इंतज़ार कर रहे हैं। इनमें से कुछ कारोबारों का तंत्र अभी भारत में है ही नहीं, लेकिन हम उन्हें लाभप्रद बिजनेस के रूप में बदलने की संभावना देख रहे हैं। आप अगले कुछ सालों में हमारी सक्रियता देखेंगे।’

कंटेंट के निर्माण की प्रक्रिया न सिर्फ उपभोक्ताओं के साथ, बल्कि ब्रांड के साथ भी तालमेल में होनी चाहिए। इसे प्लेटफार्मों भर में अच्छी प्रतिक्रिया मिलनी चाहिए और हमने देखा कि ‘बिफॉर द फ्लड’ को वास्तव में मिली है।

सूचना व मनोरंजन जॉनर कैसे आगे बढ़ रहा है?

अगर हम टैम और बीएआरसी के आंकड़ों की ओर देखें तो पता चलता है कि यह जॉनर बना रहेगा। कुल मिलाकर एक वर्ग के रूप में, सूचना और मनोरंजन जॉनर वास्तव में पिछले चार सालों में काफी बढ़ा है, जबकि हमने देखा है कि अन्य जॉनर की हिस्सेदारी के स्तर घटे हैं। इसमें, काफी हद तक नेट जियो दर्शकसंख्या में अग्रणी रहा है। हम जो कंटेंट रख रहे हैं, उससे दर्शकों का तालमेल बैठ रहा है। गहन और बड़े पैमाने के कंटेंट, प्रतिभा के बेहतर उपयोग और बदलाव के लिए उठाए गए नए कदम इस मिशन और ब्रांड को कुल मिलाकर एक अलग ही ऊंचे स्तर पर ले जाएंगे।

क्या आप फॉक्स लाइफ और नेट जियो वाइल्ड जैसे अन्य चैनलों को रीब्रांड करेंगे?

इस समय अन्य चैनलों को रीब्रांड करने की कोई योजना नहीं है। ध्यान अभी मुख्य चैनल और इसके साथ के एसैट्स को अपनाना है। इसका मतलब यह नहीं कि एक्शन या फोकस अन्य चैनलों पर नहीं पड़ेगा। ये भी महत्वपूर्ण रेटिंग और विज्ञापन खींचते हैं।

ट्वेंटीफर्स्ट सेंचुरी फॉक्स द्वारा नेशनल ज्योग्राफिक में बहुमत हिस्सेदारी लेकर संबंधों को बढ़ाने से भारत के बिज़नेस को क्या लाभ मिलेंगे?

पिछले साल ट्वेंटीफर्स्ट सेंचुरी फॉक्स ने बहुमत हिस्सेदारी लेकर नेशनल ज्योग्राफिक के साथ अपने संबंधों को बढ़ाया है। इस इकाई को अब नेशनल ज्योग्राफिक पार्टनर्स कहा जाता है। दो कंपनियों का एक साथ आने का मतलब है कि कुछ चीजें बढ़ रही हैं, लेकिन कुछ चीजें नहीं बदल रही हैं। कुछ बातें हमारे लिए कभी नहीं बदलने वाली, जैसे नेशनल ज्योग्राफिक सोसायटी के प्रति हमारी प्रतिबद्धता, उद्देश्य और माइने कभी नहीं बदलेंगे। हम भारत सहित विश्व स्तर पर जो बनाते हैं उससे मिलनेवाली आय का 27 प्रतिशत हिस्सा देने की प्रतिबद्धता नहीं बदलेगी। जो काम साथ मिलकर खूबसूरती से होगा, वह यह कि अब सारी एसैट्स के एक छत के नीचे आ जाने के साथ, हम एकीकृत प्रॉपर्टी बना सकते हैं और ब्रांड की असीम संभावनएं खोल सकते हैं जिन्हें भारत जैसे देश में इतना कुछ कहना और करना है। अब तक हमारे पास केवल चैनल और पत्रिका ही थी।

अब यात्रा, उपभोक्ता उत्पाद व डिजिटल जैसे कारोबारों को खोलने का अवसर ऐसी चीज़ है जिसका हम वाकई इंतज़ार कर रहे हैं। इनमें से कुछ कारोबारों का तंत्र अभी भारत में है ही नहीं, लेकिन हम उन्हें लाभप्रद बिजनेस के रूप में बदलने की संभावना देख रहे हैं। आप अगले कुछ सालों में हमारी सक्रियता देखेंगे।