लाइव पोस्ट
चीन में शुरू हुआ दुनिया का सबसे ऊंचा पुल, 14.40 करोड़ डॉलर से बना
नोटबंदी को लेकर तृणमूल कांग्रेस का पीएम मोदी पर कटाक्ष- 'उम्मीद है कल बड़ी घोषणा करेंगे'
सीतापुर में यात्रियों से भरी बस नदी में पलटी, बचाव कार्य जारी
झारखंड में कोयला खदान के अंदर फंसे मजदूर, 10 शव निकाले गए
दिल्ली हाई कोर्ट ने शादियों के लिए बैंक खाते से 2.5 लाख रुपए निकालने के खिलाफ याचिका खारिज़ की
संसद के दोनों सदनों में नोटबंदी के खिलाफ विपक्षी दलों का हंगामा जारी
घोषित काले धन पर लगेगा 50% टैक्स, लोकसभा ने आयकर अधिनियम में संशोधन पास किया

भारत में 85% कनेक्टेड ग्राहक हर हफ्ते ऑनलाइन वीडियो कंटेंट देखते हैं: कानटार

मुंबई: मीडिया पर नज़र रखनेवाली एजेंसी कानटार टीएनएस के अध्ययन के मुताबिक, ऑनलाइन वीडियो अब भारत में 85 प्रतिशत कनेक्टेड ग्राहकों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है। वे हफ्ते में कम से कम एक बार ऑनलाइन वीडियो ज़रूर देखते हैं। कानटार टीएनएस ने दुनिया भर के इंटरनेट यूजर्स के व्यवहार पर तैयार अध्ययन रिपोर्ट ‘कनेक्टेड लाइफ’ में यह निष्कर्ष पेश किया है।

अध्ययन से पता चलता है कि भारत में लोग विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर ऑनलाइन वीडियो देख रहे हैं। इनमें उनके सोशल फ़ीड पर आनेवाला वीडियो कंटेंट और कुछ पेड ऑनलाइन टीवी सब्सक्रिप्शन सेवाओं के साथ ही यूट्यूब जैसे मुफ्त प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

हालांकि, अन्य देशों में जहां साप्ताहिक रुझान रोज़ानी की ऑनलाइन वीडियो की खपत में भी (वैश्विक औसत 65 प्रतिशत) झलकता है, वहीं भारत में स्थिति अलग है। यह साप्ताहिक ऑनलाइन यूजर्स के आधे से भी कम दर्शक (39 प्रतिशत) ही दैनिक वीडियो देखते हैं।

Kantar-TNS-India-executive-director-Anusheel-Shrivastavaभारत में ऑनलाइन वीडियो को रोज़ाना की आदत का मुख्य हिस्सा बनने में मुख्य बाधा डेटा के मंहगे दाम और खराब कनेक्टिविटी है।

कानटार टीएनएस इंडिया के कार्यपालक निदेशक अनुशील श्रीवास्तव का कहना है, “जियो के लॉन्च के साथ डेटा की दरें तो नीचे आ गई हैं; इसके साथ सार्वजनिक वाई-फाई की बेहतर उपलब्धता से बाधाओं को कम करने में मदद मिलेगी। भारत में ऑनलाइन वीडियो परिदृश्य के बदलने में अब ज्यादा वक्त नहीं लगना चाहिए।”

डिजिटल चैनल तीन में से एक कनेक्टेड (32 प्रतिशत) ग्राहक को ही ऑन-डिमांड चैनल तक पहुंचने का मौका दे रहे हैं जिससे वे ब्रॉडकास्ट टीवी कंटेंट तक ऑनलाइन पहुंचते हैं। कुछ लोग नेटफ्लिक्स जैसे पेड-फॉर सब्सक्रिप्शन सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन्हें एशियाई क्षेत्र में 11 प्रतिशत रोज़ाना देखते हैं।

लोगों द्वारा खोजे जानेवाले कंटेंट का स्वरूप भी बदल रहा है। लोकप्रिय वीडियो कंटेंट के लिए ज़रूरी नहीं है कि उसे प्रोफेशनल स्तर पर प्रोड्यूस किया गया हो। तीन में से एक (33 प्रतिशत) कनेक्टेड ग्राहक ही कहते हैं कि उनके द्वारा देखा जानेवाला अधिकांश ऑनलाइन ‘उनके जैसे लोगों’ या सेलिब्री द्वारा बनाया Zoe-Lawrenceगया होता है। लोग ब्रांडों के भी वीडियो कंटेंट के लिए राज़ी हैं। 27 प्रतिशत कनेक्टेड ग्राहक साप्ताहिक आधार पर ऐसा कंटेंट देखते हैं।

कानटार टीएनएस में एशिया प्रशांत की डिजिटल निदेशक, जॉय लॉरेंस कहती हैं, “समूचे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ऑनलाइन ऑन-डिमांड वीडियो की खपत में धमाका हुआ है। इससे ऐसे नए मीडिया क्षण बने हैं जो पारंपरिक मार्केटिंग जगत में पहले थे ही नहीं। अगर कंटेंट पर्याप्त रूप से अच्छा है तो लोग उसे देखेंगे। ब्रांड अब जानते हैं कि उनके टीवीसी को ऑनलाइन रख भर देने से काम नहीं चलनेवाला; उन्हें ऐसा कंटेंट विकसित करना होगा जो उस ऑनलाइन चैनल के संदर्भ में अच्छा चले जिसे वे इस्तेमाल कर रहे हैं।”