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वैश्विक मीडिया नेटवर्क कैरेट भारत के विज्ञापन बाज़ार को लेकर इतना उत्साहित क्यों!

मुंबई: वैश्विक मीडिया नेटवर्क कैरेट के आकलन के मुताबिक, भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ता विज्ञापन बाजार बना हुआ है और साल 2017 में यह 13.9 प्रतिशत वृद्धि हासिल करने की स्थिति में है।

भारत के अलावा वियतनाम और फिलीपींस ही अन्य एशियाई बाजार हैं जहां इस साल दहाई अंकों की विकास दर हासिल की जा सकेगी। भारत में विज्ञापन खर्च 2016 में 12 प्रतिशत बढ़ जाने की उम्मीद है। यह जोश से भरा साल होगा और इस दौरान ट्वेंटी-20 क्रिकेट विश्व कप, इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के साथ-साथ राज्य चुनावों सहित कई मीडिया इवेंट्स बाज़ार में आएंगी।

इसके विपरीत चीन में काफी औसत वृद्धि की उम्मीद है। अपेक्षा है कि वहां का विज्ञापन खर्च 2016 में 5.7 प्रतिशत और 2017 में 5.5 प्रतिशत बढ़ेगा। इस दौरान असल में बाज़ार आर्थिक परिदृश्य की ‘नई सामान्य’ स्थिति को आत्मसात करेगा। हांगकांग, ताइवान और थाईलैंड जैसे सभी देश ढीलेढाले आर्थिक विकास और कमजोर मांग से जूझ रहे हैं।

कैरेट ने दुनिया भर में विज्ञापन खर्च के लिए अपना अद्यतन पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा है कि विज्ञापन खर्च की स्थिति भारत में बेहद उज्ज्वल बनी रहेगी।

भारत में विकास के प्रमुख कारक

कैरेट का मानना है कि भारत 2016 में जीडीपी में 7.5 प्रतिशत की वास्तिवक वृद्धि दर के साथ दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार रहेगा। इसके बाद साल 2017 में भी भारतीय बाज़ार को लेकर विज्ञापन का सकारात्मक नज़रिया बना रहेगा और तब विज्ञापन खर्च 13.9 प्रतिशत बढ़ जाना चाहिए। इससे अतिरिक्त मीडिया संबंधी आंकड़ो में शामिल है:

  • भारत दुनिया के ऐसे चंद बड़े बाज़ारों में शामिल है जहां सभी पारंपरिक मीडिया प्लेटफॉर्मों में अब भी धनात्मक वृद्धि हो रही है। विज्ञापन खर्च में 2016 के दौरान 38.5 प्रतिशत और 2017 में 38 प्रतिशत के सबसे बड़े हिस्से के साथ अनुमान है कि टीवी की विज्ञापन आय में 2016 के दौरान 12.3 प्रतिशत और 2017 में 12.5 प्रतिशत वृद्धि होगी। इसमें अहम योगदान एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) ब्रांडों और ई-कॉमर्स कंपनियों का होगा।
  • अखबार अभी भी भारत में दूसरे सबसे बड़े मीडिया प्रकार हैं। 2016 में इन्हें कुल विज्ञापन खर्च का 35.7 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा और इस साल अखबारों की विज्ञापन आय में 10.5 प्रतिशत और 2017 में 10.8 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है।
  • दूसरे बाज़ारों की ही तरह डिजिटल भारत में भी सबसे तेज़ी से बढ़ता (2016 में 31.5 प्रतिशत और 2017 में 39.6 प्रतिशत) मीडिया प्रकार है। लेकिन विज्ञापन खर्च में इसका हिस्सा (2016 में 8.9 प्रतिशत और 2017 में 10.9 प्रतिशत) अब भी लोगों की आदत में शुमार पारंपरिक मीडिया की तुलना में कम है।
  • भारत धीरे-धीरे मोबाइल को तरजीह देनेवाले देश से केवल मोबाइल वाले देश में बदलता जा रहा है। मोबाइल पर विज्ञापन खर्च 2016 में 27.2 प्रतिशत और 2017 में 35.1 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। कैरेट का यह भी कहना है कि 2013 से ही भारत में विज्ञापन आय लगातार बढ रही है। इसके बढ़ने की दर 2013, 2014 और 2015 में क्रमशछ 8.1 प्रतिशत, 8.7 प्रतिशत और 11 प्रतिशत रही है।

दुनिया का परिदृश्य

अमेरिका, एशिया प्रशांत और यूरोप, मध्य-पूर्व व अफ्रीका (ईएमईए) के 59 बाजारों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर, कैरेट के नवीनतम वैश्विक पूर्वानुमान में कहा गया है कि सालाना आधार पर 4.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करता हुआ विज्ञापन खर्च 2016 में 548.2 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। इसकी वजह ज्यादा अभिरुचि वाली मीडिया इवेंट्स हैं जिनमें यूएफा यूरो चैम्पियनशिप, रियो 2016 ओलंपिक और पैरालिम्पिक्स के साथ ही अमेरिका के आगामी राष्ट्रपति चुनाव शामिल हैं।

2016 के लिए कैरेट ने अधिकांश इलाकों के लिए सकारात्मक नजरिया पेश किया है। इसमें उत्तरी अमेरिका में जानदार बढ़त (5%) और रूस में मजबूत सुधार (6.2%) शामिल है। हालांकि कुछ बाज़ारों से कमजोर अपेक्षा है। अमेरिका पांच प्रतिशत तक के संशोधित पूर्वानुमान के साथ सकारात्मक बाज़ार भरोसा दिखा रहा है। अकेले अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव से 7.5 अरब डॉलर का ज्यादा विज्ञापन खर्च होने का अनुमान है।

विश्लेषण में शामिल 13 बाज़ारों में सबसे आगे रहनेवाले मीडिया प्रकार, डिजिटल के विश्वस्तर पर 2016 में 15.6 प्रतिशत और 2017 में 13.6 प्रतिशत बढ़ने का आकलन है। मोबाइल, ऑनलाइन वीडियो व सोशल मीडिया की ऊंची मांग के दम पर उम्मीद की जा रही है कि डिजिटल माध्यम का हिस्सा दुनिया के कुल मीडिया खर्च में 2016 के दौरान 27.7 प्रतिशत और 2017 के दौरान 30.2 प्रतिशत हो जाना चाहिए।

टीवी बराबर ज्यादा अभिरुचि वाली मीडिया इवेंट्स के चलते 2016 के दौरान कुल मीडिया खर्च में सबसे बड़ा 41.1 प्रतिशत का हिस्बना बनाए रखेगा। लेकिन 2017 में इसमें 2.3 प्रतिशत की अधिक सामान्य दर से विकास की उम्मीद है और तब कुल मीडिया खर्च में इसका हिस्सा घटकर 40.3 प्रतिशत पर आ जाएगा।

उम्मीद के अनुरूप पिंट पर किया जानेवाला विज्ञापन खर्च 2016 में 5.5 प्रतिशत और 2017 में 4.3 प्रतिशत घट जाने का अनुमान है। प्रिंट को छोड़ दें तो कैरेट का पूर्वानुमान अन्य सभी मीडिया प्रकारों में 2016 के दौरान सालाना वृद्धि की पुष्टि करता है। इसने सिनेमा (4.5 प्रतिशत), रेडियो (2.4 प्रतिशत) और ओओएच (3.5 प्रतिशत) में साल-दर-साल की सकारात्मक वृद्धि को रेखांकित किया है। हालांकि 2-017 के पूर्वानुमान थोड़ा-सा नीचे लाए गए हैं।