लाइव पोस्ट
चीन में शुरू हुआ दुनिया का सबसे ऊंचा पुल, 14.40 करोड़ डॉलर से बना
नोटबंदी को लेकर तृणमूल कांग्रेस का पीएम मोदी पर कटाक्ष- 'उम्मीद है कल बड़ी घोषणा करेंगे'
सीतापुर में यात्रियों से भरी बस नदी में पलटी, बचाव कार्य जारी
झारखंड में कोयला खदान के अंदर फंसे मजदूर, 10 शव निकाले गए
दिल्ली हाई कोर्ट ने शादियों के लिए बैंक खाते से 2.5 लाख रुपए निकालने के खिलाफ याचिका खारिज़ की
संसद के दोनों सदनों में नोटबंदी के खिलाफ विपक्षी दलों का हंगामा जारी
घोषित काले धन पर लगेगा 50% टैक्स, लोकसभा ने आयकर अधिनियम में संशोधन पास किया

डैस: बिलिंग में गड़बड़ी पर एमएसओ व एलसीओ पर जुर्माना लगा सकता है ट्राई

मुंबई: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) उन मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) और स्थानीय केबल ऑपरेटरों (एलसीओ) पर पेनाल्टी लगाने पर विचार कर रहा है जो डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (डैस) के क्वालिटी ऑफ सर्विस (क्यूओएस) रेग्युलेशन में निर्धारित उपभोक्ता बिलिंग के प्रावधानों का पालन नहीं कर रहे हैं।

उपभोक्ता बिलिंग का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्राधिकरण ने मौजूदा क्यूओएस रेग्युलेशन में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। संशोधन में इनका पालन न करने पर एमएसओ और एलसीओ पर वित्तीय जुर्माना लगाने का प्रावधान किया जाएगा। प्राधिकरण ने 8 सितंबर तक इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों या हितधारकों से राय मांगी हैं।

रेग्युलेशन 15(1) या 15(5) का पालन न करने पर ट्राई ने एमएसओ और/या उससे संबद्ध एलसीओ पर पहले उल्लंघन के लिए प्रति सब्सक्राइबर 20 रुपए जुर्माना लगाने का प्रस्ताव किया है।

एमएसओ और/या उससे संबद्ध एलसीओ अगर दूसरी बार (या कितने भी बार) उसी सब्सक्राइबर को लेकर इन कायदों का उल्लंघन करते हैं तो हर उल्लंघन पर एमएसओ और/या उससे संबद्ध एलसीओ से प्रति सब्सक्राइबर 50 रुपए तक का जुर्माना लिया जाएगा।

अगर नियामक संस्था को रेग्युलेशन 16(2) में निर्धारित कायदों के किसी भी तरह उल्लंघन का पता चलता है तो हर उल्लंघन के लिए एमएसओ पर 100 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।

लेकिन ट्राई ने कहा है कि कायदों के उल्लंघन के नतीजे पर पहुंचने और जुर्माना लगाने से पहले संबंधित एमएससी या एलसीओ को अपना पक्ष रखने का वाजिब मौका दिया जाएगा।

ट्राई क्यों करना चाहता है वित्तीय हतोत्साहन

प्राधिकरण ने कहा कि वो वित्तीय हतोत्साहन का प्रावधान इसलिए कर रहा है ताकि ग्राहकों के हितों की रक्षा हो सके, केबल टीवी सेवाओं में दक्षता को बढ़ाने के पारदर्शी बिजनेस व्यवहार को मजबूत किया जा सके और सरकार के राजस्व का जमा कराया जाना सुनश्चित हो सके।

ट्राई केबल टीवी क्षेत्र को टेलिकॉम के बराबर लाना चाहता है। इस सिलसिले में उसका कहना है कि वह टेलिकॉम सेवाप्रदातोँ से नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना लेता रहा है। इससे नियम-कायदों के पालन के स्तर रक काफी सकारात्मक असर पड़ा है।

रेग्युलेशन के मुताबिक, बिल निकालने और भुगतान की उचित रसीद देने की जिम्मेदारी एमएसओ की है। लेकिन एमएसओ वो बिल और रसीद सब्सक्राइबरों को या सीधे या अपने संबंद्ध एलसीओ के जरिए दे सकता है। कैसे देगा, यह दोनों के बीच हुए लिखित समझौते पर निर्भर है।

इसलिए, ट्राई का कहना है कि उनके बीच के समझौते के आधार पर निर्धारित दरों पर जुर्माना या तो केवल एमएसओ या दोनों यानी, एमएसओ व उससे संबद्ध केबल ऑपरेटर पर लगाया जाएगा।

नियामक संस्था ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर एमएसओ ने अपने से जुड़े एलसीओ के साथ बिलों की डिलीवरी का समझौता कर रखा है और वे रेग्युलेशन तोड़ते हैं तो निर्धारित जुर्माना एमएसओ और उसके संबद्ध एलसीओ दोनों पर अलग-अलग लगाया जाएगा।

लेकिन अगर एमएसओ का अपने से जुड़े एलसीओ के साथ बिलों की डिलीवरी का करार नहीं है और वो रेग्युलेशन का पालन नहीं करता तो निर्धारित जुर्माता केवल उसी से लिया जाएगा।

उसने कहा है कि इसी तरह जुर्माना लगाने का नियम रेग्युलेशन 15(5) के उल्लंघन पर भी बनाया जाएगा।

प्री-पेड विकल्प पर ट्राई की व्याख्या

ट्राई ने कहा है कि उसने रेग्युलेशन 14(1) के बाद एक व्याख्या जोड़ दी है। यह स्पष्ट करती है कि रेग्युलेशन में उल्लेख किए गए प्री-पे भुगतान के विकल्प पर अमल इलेक्ट्रॉनिक प्री-पेड तरीकों से किया जाना चाहिए। ये तरीके मोबाइल और डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) ऑपरेटरों द्वारा धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

कोई एमएसओ सब्सक्राइबरों की सहूलियत और अपने बिजनेस मॉडल के अनुरूप सब्सक्राइबर खाते को रीचार्ज करने के अनेक तरीके और स्कीमें पेश कर सकता है। लेकिन सब्सक्राइबर आमतौर पर केबल टीवी का शुल्क महीने के महीने देते हैं। इसलिए अपेक्षा की जाती है कि एमएसओ अपने सब्सक्राइबरों को महीने के रीचार्ज की स्कीम एक विकल्प के बतौर उपलब्ध कराएंगे।

प्राधिकरण ने यह सुनिश्चित करने के लिए रेग्युलेशन 15(2) में भी संशोधन का प्रस्ताव रखा है ताकि बिल में एमएसओ या उससे संबद्ध एलसीओ का सर्विस टैक्स रजिस्ट्रेशन नंबर और मनोरंजन टैक्स रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज होना चाहिए। यह संबंधित टैक्स कानून और अगर उस पर कोई अगला आदेश आया हो तो उसके हिसाब से होना चाहिए। साथ ही दोनों के बीच हुए इंटरकनेक्ट समझौते के अनुरूप किया जाना चाहिए।

नियामक संस्था ने आगे कहा कि रेग्युलेशन 15(50 में संशोधन का मकसद यह सुगम करना है कि बिल में चुकाई गई रकम जैसे विवरण एसएमएम में दर्ज कर लिए जाएं जिससे भुगतान की उचित एकाउंटिंग सुनिश्चित हो; सब्सक्राइबरों के टीवी सिग्नल का यूं ही डिस्कनेक्शन न हों; वाजिब टैक्स राजस्व सरकार को मिले; और भुगतान न करने के झगड़ों को कम से कम किया जा सके।

मुद्दा बिलिंग पर ग्राहकों की शिकायत का

प्राधिकरण ने कहा है कि उसे ग्राहकों से बहुतेरी शिकायतें मिली थीं कि उन्हें सब्सक्राइब की गई केबल टीवी सेवाओं या उनके द्वारा किए गए भुगतान या दोनों को समुचित रसीद नहीं मिल रही है।

इसके बाद निर्देशों और रेग्युलेशन के प्रावधानों के अनुपालन का पता लगाने के लिए उसने ब्रॉडकास्ट इंजीनियर्स कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (बेसिल) के प्रतिनिधियों के साथ संयुक्त टीम बना दी। इस टीम को दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में केबल टीवी सेवाओं दे रहे एमएसओ के सब्सक्राइबर मैनेजमेंट सिस्टम और हेड-एंड का निरीक्षण और ऑडिट का काम सौंपा गया।

ट्राई को कहना है कि उसने डैस के अधिसूचित इलाकों में काम कर रहे तमाम केबल ऑपरेटरों के साथ डैस के अमल से संबंधित मुद्दों पर अनेक बैठकें कीं।

उक्त निरीक्षण और बैठकों के बाद नियामक संस्था ने पाया कि या तो कुछ केबल ऑपरेटर सब्सक्राइबर को भुगतान का प्री-पेड विकल्प ही नहीं दे रहे या जो केबल ऑपरेटर ऐसा विकल्प दे रहे हैं, वे ऐसा इलेक्ट्रॉनिक प्री-पेड सिस्टम से नहीं कर रहे।

ट्राई ने यह भी पाया कि उक्त निर्धारित मानकों का पालन एमएसओ और उनसे संबद्ध एलसीओ द्वारा नहीं किया जा रहा है।

उसका कहना है कि चूंकि बिलों और रसीद की डिलीवरी क्यूओएस रेग्युलेशन में निर्धारित कायदे से नहीं हो रहा है, इसलिए वास्तविक सब्सक्रिप्शन के अनुरूप भुगतान का विवरण एमएसओ के सब्सक्राइबर मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) में नहीं डाला जा रहा है।

नतीजतन, ऑपरेटरों के बीच सौदे और वित्तीय लेनदेन पारदर्शी मानकों के आधार पर नहीं किए जा रहे हैं। नियामक संस्था का कहना है कि यह इस क्षेत्र में पारदर्शी बिजनेस व्यवहार को विकसित करने की राह का प्रमुख रोड़ा साबित हुआ है। इससे एमएसओ और उनके संबद्ध एलसीओ में विवाद पैदा हो गए हैं। साथ ही कानून द्वारा तय डैस के सरस अमल पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।