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मीडिया-मनोरंजन कंपनियों को डिजिटल सफलता के लिए मूल कंटेंट पर ध्यान देना होगा

मुंबई: डिजिटल को प्रिंट व टीवी जैसे पारंपरिक प्लेटफॉर्मों के विस्तार के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। फिक्की फ्रेम्स 2016 में ‘चेंज ऑर पैरिश: सर्वाइविंग डिजिटल डिवाइड’ इस पैनल चर्चा में अग्रणी मीडिया कंपनियों के प्रमुखों ने इस पर सहमति जताई कि मीडिया कंपनियों के लिए डिजिटल दुनिया में सफल होने के लिए खास और प्रीमियम कंटेंट पर ध्यान केंद्रित करने की ज़रूरत है।

इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी, डिस्कवरी एशिया-प्रशांत के प्रमुख और एमडी आर्थर बेस्टिंग्स, वायकॉम18 ग्रुप के सीईओ सुधांशु वत्स, डिज्नी इंडिया के एमडी सिद्धार्थ रॉय कपूर, एनडीटीवी ग्रुप के एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर व सीईओ विक्रम चंद्रा और हंगामा के सीईओ नीरज रॉय ने भी कहा कि भारत तेज़ी से डिजिटलीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है लेकिन हितधारकों के लिए डिजिटल कंटेंट का मोनेटाइजेशम अभी भी एक चुनौती है।

इस सत्र का मोडरेशन आउटस्टैंडिंग स्पीकर्स ब्यूरो के संपादकीय और नोलेज़ एडवाइज़र प्रांजल शर्मा ने किया।

पुरी ने कहा कि प्रासंगिक और गुणवत्ता वाला कंटेंट बनाने के लिए मीडिया में उपभोक्ता व्यवहार के एनालिटिक्स में सुधार की ज़रुरत है। डिजिटल के लिए अनन्य कंटेंट की ज़रुरत बनी हुई है। आज संगठनों के लिए माध्यम की व्यापकता और उपभोक्ताओं की ज़बरदस्त संख्या के कारण डिजिटल अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

बेस्टिंग्स ने कहा कि डिजिटल क्षेत्र में प्लेयर अभी भी उभरते माध्यम के विकास की ओर देख रहे हैं। बिज़नेस प्लान अभी भी विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि टेलिविज़न की खपत पैमाइश प्रणाली खराब थी और एक बेहतर और अधिक विश्वसनीय प्रणाली की ज़रुरत है। उन्होंने यह भी कहा है कि डिजिटल पर यूजर इंटरफेस, कंटेंट जितना ही समान रूप से महत्वपूर्ण है।

वत्स ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वास्तविक यूज़र की संख्या की पैमाइश करना, कंटेंट की खपत और उपभोक्ता व्यवहार के पैटर्न को ट्रैक करना, टेलिविज़न जैसे पारंपरिक मीडिया की तुलना में कहीं आसान है। उन्होंने कहा कि डिजिटल, कंपनी के लिए एक अलग कारोबार है। संयोग से, वायकॉम18 ने वीडियो ऑन डिमांड (वीओडी) सेवा वूट, शेयरिंग पर फोकस के साथ शुरू की है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के उभरते युग में बड़े परदे की प्रासंगिकता पर बोलते हुए कपूर ने कहा कि सिनेमा छोटे परदे पर देखा जा रहा है, लेकिन बड़ी स्क्रीन मौजूद रहेगी। हालांकि, कंटेंट का प्रकार महत्वपूर्ण होगा और दर्शक तय करेंगे कि फिल्म किस माध्यम पर देखनी है।

चंद्रा ने कहा कि सही मानसिकता के साथ डिजिटल कंटेंट का मोनेटाइजेशन संभव है। यह एहसास होना चाहिए कि ऑनलाइन एक अलग इकाई है। कंटेंट उपभोक्ता आदत को ध्यान में रखकर बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि मीडिया कंपनियों की डिजिटल के लिए एक अलग रणनीति होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि डिजिटल बिज़नेस से एनडीटीवी का एबिटा पारंपरिक बिज़नेस की तुलना में बेहतर था।
चंद्रा के अनुसार, सोशल मीडिया पर शेयरिंग से मुख्य प्लेटफॉर्म पर असर नहीं पड़ता। शेयरिंग कंटेंट की पहुंच का विस्तार करने में मदद करता है।

रॉय ने कहा कि डिजिटल प्लेटफार्म एक बदलाव के मुहाने पर है। यह अभिनव कंटेंट, टेक्नोलॉजी, डिस्ट्रीब्यूशन और मोनेटाइडेशन के द्वारा संचालित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि माइक्रो पेमेंट डिजिटल खपत में वृद्धि को चिह्नित करता है। वास्तव में डिजिटल पर खपत हो रही है यह बताते हुए उन्होंने कहा कि एक मोनेटाइजेशन रणनीति समय की मांग है।