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डिजिटल न्यूज़ के ठिकाने बढ़ते जा रहे हैं भरपूर तेज़ी से

Siddharth-Varadarajanमुंबई: करीब साल भर पहले ‘द हिंदू’ अखबार के पूर्व संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने अपने साथी पत्रकारों सिद्धार्थ भाटिया (डीएनए के संस्थापक संपादकों में से एक) और एम के वेणु (द हिंदू के पूर्व कार्यकारी संपादक) के साथ मिलकर एक समाचार पोर्टल, द वायर की शुरुआत की। प्रिंट के दिग्गज पत्रकारों का यह कदम बदलाव की उस लहर की परिचायक है जिसने पारंपरिक खबर को आम जनता तक पहुंचाने का तरीका बदल दिया है।

वे दिन गए जब अखबारों की गड्डियां लगभग हर भारतीय घर में पहुंचा करती थीं। आज तो डिजिटल दुनिया के आ जाने के बाद खबर चलते-फिरते पकड़ी जा रही है। पारंपरिक प्रिंट मीडिया कंपनियों के इस बदलाव को अंगीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। परिणामस्वरूप, टाइम्स ऑफ इंडिया और एक्सप्रेस समूह जैसे उद्योग के बड़े समूह अपने संसाधनों व रणनीतियों को अपना डिजिटल न्यूज़ पोर्टफोलियो बनाने पर केंद्रित कर रहे हैं। सिलसिला ई-पेपर से शुरू होकर समर्पित न्यूज़ वेबसाइट से होते हुए अब एप्प तक जा पहुंचा है।

Anant-Goenka-150x150इंडियन एक्सप्रेस के पूर्णकालिक निदेशक और न्यूज़ मीडिया के प्रमुख, अनंत गोयनका ने फिक्की फ्रेम्स 2016 में ‘हू मूव्ड माइ न्यूज़’ विषय पर आयोजित चर्चा सत्र में कहा, “अगर आप बिजनेस में लंबे समय तक टिकना चाहते हैं तो आपको सीधे या किसी के साथ साझा करके डिजिटल में निवेश करना ही पड़ेगा।”

29 साल के अनंत गोयनका एक्सप्रेस समूह में 2012 से ही सक्रिय हुए हैं और तब से उन्होंने डिजिटल न्यूज़ पर ध्यान देकर समूह की शक्ल ही बदल दी है।

Ravi-Agarwalवरदराजन का कहना था, “डिजिटल ने संपादकीय धरातल को मौलिक स्तर पर बदल दिया है। कहानियां बताने की क्षमता अब मल्टीमीडिया और इंटरैक्टिविटी व पहुंच के चलते उन्नत हो गई है। संपादकों को भान हो गया है कि भविष्य डिजिटल हो जाने में ही है।”

सच कहें तो प्रिंट मीडिया ही नहीं, न्यूज़ ब्रॉडकास्टर भी अब डिजिटल हुए जा रहे हैं। अधिक वक्त नहीं हुआ जब प्रिंट व टीवी के पत्रकार फासला बनाकर चलते थे। लेकिन डिजिटल का समान माध्यम मिल जाने से वे खबरों में साथ टकराने लगे हैं। नहीं तो कैसे आप व्याख्या कर सकते हैं कि टाइम्स ऑफ इंडिया, एक्सप्रेस ग्रुप और एनडीटीवी को डिजिटिल दुनिया में यूनीक विजिटर्स (अपनी-अपनी बेबसाइटों के पाठक) में हिस्से के बल पर एक सिस्टम के अंतर्गत रैंक किया जा रहा है। सीएनएन इंटरनेशनल के नई दिल्ली के ब्यूरो प्रमुख रवि अग्रवाल कहते हैं, “डिजिटल न्यूज़ अब भविष्य ही नहीं, वर्तमान भी बन गया है।”

Ros-Atkinsहालात को समझते हुए मीडिया कंपनियों – प्रिंट, टीवी व ऑनलाइन सभी क्षेत्रों की कंपनियों ने खबरों को साझा करने की अहमियत समझ ली है। जब कोई प्रतिस्पर्धी नई खबर या अच्छी खबर लाता है तो दूसरे उसे पूरा श्रेय देते हुए पेश करते हैं। बीबीसी वर्ल्ड न्यूज़ टीवी के प्रस्तोता, रॉस एटकिन्स कहते हैं, “बीबीसी में हम समझते हैं कि अच्छा कंटेंट साझा किया जाना चाहिए, भले ही वो हमारी रिपोर्ट न हो। अभी जिस तरह सोशल मीडिया पर न्यूज़ ली जा रही है, उसमें अगर हम ऐसा न करें तो लोग हमारे पास नहीं आएंगे।”

एक्सटेंशिया इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉज़ी के सीईई उम्मीद कोठावाला बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि फेसबुक व ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर जिस तरह कुछ न्यूज़ खप रही है, उसे देखते हुए यह करना ज़रूरी हो जाता है।

इसी माहौल में अज़हर इकबाल जैसे कुछ आगे की सोचनेवालों ने साहस किया और न्यूज़ डाइजेस्ट एप्प लॉन्च कर दिए। न्यूज़ इन शॉर्ट खबरों को पाने और बांटने का एक एप्प है जो 60 से कम शब्दों में खबर दे देता है। अज़हर भाग्यशाली थे कि 40 लाख डॉलर की वेंचर कैपिटल फंडिंग मिल गई। वहीं पारंपरिक मीडिया कंपनियां विज्ञापन के धन पर टिकी हुई हैं और उन्हें समय बीतने के साथ सब्सक्रिप्शन आय मिल सकती है। लेकिन यह लंबी कवायत होगी।

Bhaskar-Dasज़ी मीडिया ग्रुप के सीईओ भास्कर दास का इस पर कहना था कि डिजिटल पत्रकारिता ही आगे की राह है, लेकिन “खबर की विश्वसनीयता पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।”

क्या डिजिटल न्यूज़ का कोई बिजनेस मॉडल है? गोयनका मानते हैं कि डिजिटल खुद अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है, हालांकि यह उस तरह की आय नहीं जुटा सकता जैसी आय बड़ी मीडिया कंपनियों ने अपने प्रिंट बिजनेस से कमाई है।

लेकिन वरदराजन इस बात से सहमत नहीं हैं कि डिजिटल ठिकाने अपने दम पर न्यूज़ जुटाने का वैसा खर्च जुटा सकते हैं जितना खर्त पारंपरिक मीडिया करता रहा है। उनका कहना था, “एक बिजनेस प्रस्ताव के रूप में इसे मुनाफे में लाना बहुत मुश्किल है। शुद्ध रूप से डिजिटल न्यूज़ ठिकाने के संचालक के लिए उस तरह का खर्च न्यूज़ जुटाने या न्यूज़ स्टाफ पर करना नामुमकिन है जैसा पारंपरिक मीडिया करता रहा है। हम एक नॉन-प्रॉफिट संगठन हैं।”

क्या प्रिंट कंपनियां अपनी एक्सक्लूसिव खबरें पहले डिजिटल माध्यम पर डालने को राजी हैं? गोयनका का कहना था, “हम उन्हें पहले अपने अखबारों में लाना पसंद करते हैं। अगर हमने उसे पहले अपने पोर्टल पर डाल दिया तो उसकी अनन्यता मिनटों में खत्म हो जाएगी।”

वहीं अग्रवाल का कहना था कि न्यूज़ के प्रति सीएनएन का नज़रिया हमेशा के लिए बदल गया है। उन्होंने कहा, “हम अब नहीं सोचते कि कौन से माध्यम पर पहले न्यूज़ डालनी है। हम एक संगठन के बतौर सोचते हैं कि न्यूज़ को सबसे पहले हम पेश कर दें। उसके बाद हम तय करते हैं कि उस न्यूज़ को विभिन्न डिलीवरी प्लेटफॉर्मों पर कैसे वितरित किया जाना है।”