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बीएआरसी ने खुद नई रेटिंग प्रणाली की परख की, नतीजे कुछ हफ्ते में

मुंबई: ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसी) इंडिया ने ब्रॉडकास्ट इंडिया यूनिवर्स एस्टीमेशन स्टडी को पूरा कर लिया है और वो जल्द ही शोध के निष्कर्षों को जारी करेगा। फिक्की फ्रेम्स 2016 में  बीएआरसी के सीईओ पार्थो दासगुप्ता ने यह जानकारी दी।

दासगुप्ता ने ‘लॉर्ड ऑफ रेटिंग्स: बीएआरसी ऑर्डर’ इस एक पैनल चर्चा के दौरान कहा, “यह अपनी तरह का सबसे बड़ा सर्वे है जिसमें 3,00,000 घरों को कवर किया गया। हमने इसे छह महीनों में पूरा किया, जिससे यह इस तरह का सबसे तेज़ गति से पूरा होने वाला सर्वे बन गया है। हमें पहले परिणाम सिर्फ तीन दिन पहले ही मिले हैं। निष्कर्षों को अब से कुछ ही हफ्तों में सबसे सामने रख दिया जाएगा।”

Partho-150x150सितंबर 2015 में, बीएआरसी ने टेलिविजन स्वामित्व और देखने की आदतों पर एक अध्ययन का संचालन करने के लिए नीलसन को नियुक्त किया था। बीएआरसी ने कहा था कि निष्कर्षों का पहला दौर 2016 की शुरुआत में आ जाएगा।

सरवे के प्रभाव के बारे में बात करते हुए दासगुप्ता के सह-पैनलिस्ट और बीएआरसी तकनीकी समिति के प्रमुख शशि सिन्हा ने कहा कि बीएआरसी पैनल घरों को सरवे के आधार पर लिया जाएगा। टीवी चैनलों के सकल इम्प्रेशंस की संख्या भी इस सरवे पर निर्भर करेगी।

अध्ययन से उद्योग को देश में टेलिविज़न परिवारों की संरचना और संख्या की इनसाइट मिलेगी। साथ ही उद्योग की करेंसी की तरह इसकी संख्या में अपडेट होगा और प्रति घर टीवी की संख्या, दर्शकों की संख्या और देखने की आदतों का भी खुलासा किया जाएगा। यह छोटे शहरों और ग्रामीण भारत में टीवी वाले घरों का डेटा भी इकट्ठा करेगा।

सरवे में डिजिटल माध्यमों जैसे स्मार्टफोन, टैबलेट, पीसी, आदि बनाम टेलीविज़न सेट जैसे लिनियर माध्यमों के बीच कंटेंट देखने में बदलाव को भी कवर किया जाएगा।

चर्चा शुरू करते हुए सिन्हा ने कहा कि बीएआरसी को देश के अंदर की बजाए बाहर से अधिक प्रशंसा मिली है। सिन्हा ने कहा, “कहीं भी इस पैमाने की एक पैमाइश प्रणाली इतने कम समय में नहीं बना ली गई है।”

पैनल मॉडरेटर इंडिया टीवी के सीईओ पारितोष जोशी द्वारा डेटा में अस्थिरता के बारे में हितधारकों से शिकायतों के बारे में एक प्रश्न पूछे जाने पर, दासगुप्ता ने कहा कि दर्शक हर दिन एक जैसा व्यवहार नहीं करते, इसलिए इसका अस्थिर होना स्वाभाविक है। बीएआरसी किसी भी बदलाव के बिना यूज़र के लिए डेटा प्रदान करता है।

Raj-Nayak-CEO-COLORS-150x150उतार-चढ़ाव के बारे में दासगुप्ता की बात से सहमति जताते हुए कलर्स के सीईओ राज नायक ने कहा कि ब्रॉडकास्टरों को भी दर्शकों की संख्या में बड़े बदलाव का कारण समझ में आता है। उन्होंने कहा जीईसी की दर्शक संख्या हमेशा क्रिकेट मैच के समय कम हो जाती है।

नायक ने सुझाव दिया है कि आला चैनलों के लिए डेटा चार सप्ताह के औसत में होना चाहिए क्योंकि इसका कुल क्षेत्र बहुत छोटा है और इसलिए त्रुटि का मार्जिन बहुत अधिक बढ़ जाता है। दासगुप्ता ने कहा कि वे भी उसी के पक्ष में हैं। हालांकि, बीएआरसी बोर्ड द्वारा इस पर विचार नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि त्रुटि, आंकड़ों का हिस्सा है।

बीएआरसी क्या टीवी तक खुद को सीमित रखने के बजाय अन्य माध्यमों की पैमाइश भी कर सकता है, इस सवाल पर सिन्हा ने कहा कि यह संभव है, लेकिन हितधारकों की मानसिकता बदलनी होगी।

Shashi-Sinhaसिन्हा ने कहा, “एक टेक्नोलॉजी के दृष्टिकोण से, हम अच्छी स्थिति में हैं। कई मुद्दे हैं। प्रत्येक हितधारक की अपनी रुचि है। हम विभिन्न प्रणालियों में सामंजस्य स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। पैमाइश पारिस्थितिकी तंत्र की बुनियाद में एक जगह होनी चाहिए जहां प्रत्येक हितधारक को अपने हिस्से का प्रबंधन करने को मिले।” उन्होंने बताया कि डिजिटल पैमाइश साल के अंत तक तैयार हो जाएगी।

सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि विभिन्न हितों का मेल रहे। नायक ने सहमति जताते हुए कहा कि कोई वजह नहीं कि बीएआरसी के साथ एक भारतीय मीडिया फाउंडेशन भी प्रिंट और रेडियो की पैमाइश न करे। उन्होंने हालांकि कहा कि यह आसान काम नहीं है।

दासगुप्ता ने कहा कि बीएआरसी क्रॉस प्लेटफॉर्म पैमाइश की ओर जाएगा। दर्शकों की संख्या भी मीट्रिक से इम्प्रेशंस में बदल गई है।

चर्चा आंकड़ों की विश्वसनीयता के मुद्दे की ओर मुड़ गई। सिन्हा और दासगुप्ता ने कहा कि बीएआरसी ने गलत काम के मामलों की जांच के लिए सतर्कता दस्तों का गठन किया है।

सिन्हा ने हैदराबाद के एक उदाहरण का उल्लेख किया जिसमें एक अंग्रेज़ी बिज़नेस न्यूज़ चैनल को एक दिन में बेरोक-टोक लगातार 12 घंटे देखा गया। जब बीएआरसी टीम ने पाया है कि कुछ गलत हो रहा है तो उस घर को अलग कर दिया गया और वहां के मीटर से डेटा रिपोर्टिंग बंद कर दी।

सिन्हा ने कानूनी कारणों से ब्रॉडकास्टर का नाम नहीं लिया। उन्होंने यह भी बताया कि बीएआरसी ने अनैतिक आचरण की वजह से एक चैनल की रेटिंग बंद कर दी है।

दासगुप्ता ने कहा कि समझौते में एक खंड के तहत बीएआरसी को छह महीने तक किसी आरोपी चैनल के खिलाफ मामला साबित होने पर रेटिंग रोक देने का अधिकार है।

दासगुप्ता ने विस्तार से बताया, “हम बैकएंड में डेटा को देखते हैं। एल्गोरिथम किसी भी असामान्य डेटा को पकड़ लेता है। बेशक, क्या असामान्य है इसे परिभाषित करने के अलग अलग तरीके हैं। जब हम उन असामान्य घरों को पकड़ते हैं तो हम जांचते हैं कि असामान्य व्यवहार कंटेंट की वजह से है या यह सामान्य व्यवहार है। अगर लगातार असामान्य व्यवहार हो रहा होता है तो हम उसको अलग कर देते हैं। हम इस डेटा का उपयोग नहीं करते।”

उन्होंने कहा कि बीएआरसी बहुत सारे जासूसी कैमेरा और वीडियो के द्वारा संदिग्ध घरों की असामान्य गतिविधि को ट्रैक करता है।

नायक ने सुझाव दिया है कि बीएआरसी को पे चैनलों और फ्री टू एयर (एफटीए) चैनलों के डेटा की रिपोर्टिंग अलग-अलग करनी चाहिए। पे चैनल मूल कंटेंट प्रदान करते हैं जबकि एफटीए चैनल पुराने शो फिर से चलाते हैं।

अब जब कि बीएआरसी ने ग्रामीण डाटा रिपोर्टिंग शुरू कर दी है, नायक ने शहरी और ग्रामीण बाज़ारों को अलग से बेचने के बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि कलर्स, डीटीएच पर अलग मोनेटाइजेशन करता है।

उन्होंने कहा, “हम अधिकतम आय कमाने की कोशिश करते हैं – कभी पैकेज के ज़रिए, कभी अनबंडल करके यह काम करते हैं।”

बीएआरसी के बारे में केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद की आलोचना पर सिन्हा ने कहा कि बीएआरसी ट्राई के दिशा-निर्देशों के तहत काम कर रहा है। पैनल घरों का कवरेज क्षेत्र विनियामक द्वारा निर्दिष्ट किया गया था और उस पर पूरी तरह से अमल हो रहा है।

दासगुप्ता ने कहा कि बीएआरसी स्प्लिट बीम्स की पैमाइश शुरू करेगा। नायक ने कहा कि अधिक से अधिक बारीक डेटा प्रदान किया जाना चाहिए जबकि सिन्हा ने कहा कि वे एक समृद्ध पैनल लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं।