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एमआरयूसी ने आईआरएस को सही माना, आरएससीआई पर डाला फैसले का जिम्मा

मुंबई: मीडिया रिसर्च यूज़र्स काउंसिल (एमआरयूसी) ने 24 घंटे के भीतर  इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस) 2013 के नतीजों को वापस लेने के अल्टीमेटम की परवाह न करते हुए सर्वे की डिजाइन, पद्धति और उसे व्यवहार में उतारने को सही ठहराया है। पत्र-पत्रिकाओं के शीर्ष संगठन इंडियन न्यूज़पेपर सोसायटी (आईएनएस) ने सोमवार को उसे अल्टीमेटम दिया था कि वह आईआरएस के ताज़ा नतीजों को 24 घंटे में वापस ले ले, नहीं तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।

इसके बाद मंगलवार को एमआरयूसी के बोर्ड की आपात बैठक हुई। इस बैठक के बाद एमआरयूसी ने कहा कि सर्वे के संचालन का जिम्मा रीडरशिप स्टडीज़ काउंसिल ऑफ इंडिया (आरएससीआई) के पास है और एमआरयूसी अगले कदम का एकतरफा फैसला करने की स्थिति में नहीं है खासकर तब, जब स्थिति इतनी कलहपूर्ण व विवादास्पद बन चुकी है।

अब आरएससीआई ने 19 फरवरी को एक बैठक बुलाई है जिसमें अध्ययन के सभी पहलुओं को पेश किया जाएगा। बैठक का ध्येय है अध्ययन की ‘मजबूती व ईमानदारी’ के बारे में “पक्षकारों के व्यापक समुदाय को यकीन दिलाने में मदद करना।“

गौरतलब है कि आईआरएस 2013 के आंकड़े 28 जनवरी को जारी किए गए और टाइम्स समूह, दैनिक भास्कर, जागरण प्रकाशन व हिंदू जैसे तमाम प्रकाशकों ने सार्वजनिक तौर पर इसके नतीजों की निंदा की है।

सोमवार को आईएनएस ने हालात पर गौर करने और अगला रास्ता निकालने के लिए एमआरयूसी के साथ बैठक की थी जिसके बाद उसने एमआरयूसी को 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया। उस बैठक के बाद एमआरयूसी के चेयरमैन ने मंगलवार को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की आपात बैठक की ताकि काउंसिल के दृष्टिकोण को ठोस किया जा सके।

इस बैठक के बाद जारी अपने बयान में एमआरयूसी ने कहा, “काउंसिल दृढ़ता से मानती है कि अध्ययन की डिज़ाइन, पद्धति और व्यवहार में अमल बेहद उच्चतम मानकों के अनुरूप था। इस काम में ऑटोमेटेड मिलान व सारणीकरण के जरिए डीएस-सीएपीआई से लेकर एकदम नए यूआई (यूज़र इंटरफेस) के साथ ऑन-बोर्ड एनालिटिक्स के समग्र सेट की टेक्नोलॉज़ी के वृहद एकीकरण ने अहम भूमिका निभाई है। काउंसिल एक ऐसा अध्ययन पेश करना चाहती थी ती जो वैधानिक तौर पर ‘स्वर्ण मानक’ का ओहदा हासिल कर सके। वह संतुष्ट है कि अध्ययन इस दिशा में कई कदम आगे बढ़ा है।”