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नए रीडरशिप सर्वे के आंकड़ों को 31 मार्च तक ठंडे बस्ते में डाला गया

मुंबई: प्रिट मीडिया कंपनियों के भारी विरोध को देखते हुए आरएससीआई (रीडरशिप स्टडीज़ काउंसिल ऑफ इंडिया) ने नए इंडियन रीडरशिप सर्वे (आईआरएस) के आंकड़ों को 31 मार्च तक मुअत्तल कर दिया है। आईआरएस-2013 का डेटा 28 जनवरी को जारी किया गया था।

गौरतलब है कि 18 प्रमुख अखबारों, इंडियन न्यूज़पेपर सोसायटी (आईएनएस) और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैमज़ीन्स ने इसके नतीजों को ‘बेतुका’ और ‘खामियों’ से भरा बताए हुए ठुकरा दिया है।

आईएनएस ने तो इंडियन रीडरशिप सर्वे की मुख्य संचालक संस्था, मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल (एमआरयूसी) को यह सर्वे वापस लेने के लिए 24 घंटे की अल्टीमेटम दिया था। लेकिन एमआरयूसी ने 4 फरवरी को अपनी आपात बैठक के बाद कहा कि इस सर्वे की देखरेख व निगरानी का जिम्मा आरएससीआई का है और वह खुद कोई एकतरफा फैसला नहीं ले सकती।

लेकिन उद्योग के सूत्रों ने टेलिविज़न पोस्ट को बताया कि आरएससीआई ने अब एमआरयूसी से कहा है कि वह अगले महीने के भीतर आईआरएस के डेटा की सत्यतता की पुष्टि कर ले। तब तक ये आंकड़े निलंबित रहेंगे।

सर्वे/अध्ययन की सत्यतता जांचने की प्रक्रिया बनाई जा रही है और इसे 24 फरवरी तक अंतिम रूप से दे दिया जाएगा। सारी प्रक्रिया 31 मार्च तक पूरी कर लेनी है।

इससे मिले तथ्यों व सिफारिशों को आरएससीआई के सामने अप्रैल में रखा जाएगा। इनमें से जो भी सिफारिशें मान ली जाएंगी, उन्हें आईआरएस की भावी संरचना में शामिल कर लिया जाएगा।

बताया जा रहा है कि आरएससीआई, एमआरयूसी और ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन (एबीसी) आईआरएस 2013 के नतीजों के बारे में फौरन सभी सब्सक्राइबरों व सदस्यों से संपर्क करनेवाले हैं। वे उनसे कहेंगे कि वे तब तक इन आंकड़ों का इस्तेमाल न करें जब तक बाकायदा इनका सत्यापन पूरा नहीं कर लिया जाता।