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एफएम तीसरे चरण के दूसरे बैच की ई-नीलामी को दक्षिणी शहरों से कोई रिस्पांस नहीं

मुंबई: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा रखे गए ऊंचे आरक्षित मूल्य के कारण एफएम रेडियो के तीसरे चरण के चैनलों के दूसरे बैच की ई-नीलामी अभी तक निजी एफएम रेडियो खिलाड़ियों को खींचने में नाकाम रही है। लगभग 70 प्रतिशत एफएम ऑपरेटरों के बहिष्कार करने के चलते दूसरे बैच की नीलामी को दक्षिण भारत की कंपनियों से बहुत सुस्त रिस्पांस मिला है।

दक्षिण भारत के एफएम रेडियो ऑपरेटरों में से मलयाला मनोरमा कंपनी, साउथ एशिया एफएम, मालार पब्लिकेशंस, मातृभूमि प्रिटिंग एंड पब्लिशिंग कंपनी और सन ग्रुप के कल रेडियो ने ही नई नीलामी में थोड़ी दिलचस्पी दिखाई है।

कल रेडियो ने 13.3 करोड़ रुपए की बयाना राशि जमा करवाई है, जबकि साउथ एशिया एफएम लिमिटेड ने 4.4 करोड़ रुपए जमा करवाए हैं। क्लब एफएम की मालिक मातृभूमि प्रिटिंग एंड पब्लिशिंग कंपनी ने बयाना रकम के रूप में 1.7 करोड़ रुपए जमा किए हैं। वहीं, रेडियो मैंगो चलानेवाली मलयाला मनोरमा कंपनी ने 1.7 करोड़ रुपए जमा करवाए हैं।

फिर भी हैदराबाद के अलावा दक्षिण भारत के किसी भी शहर में एफएम रेडियो ऑपरेटरों ने कोई दिलचस्पी दिखाई है।  हैदराबाद के लिए भी बोलियों का आठ दौर चलने के बाद कोई बड़ा रिस्पांस नहीं मिला है। हैदराबाद में एकल फ्रीक्वेंसी के लिए सबसे ज्यादा आरक्षित मूल्य, 18 करोड़ रुपए रखा गया है।

मैसुरु (मैसूर), तिरुची, तिरुनेलवेली व तिरुपति जैसे शहरों में दो-दो फ्रीक्वेंसियां नीलामी के लिए पेश की गई हैं। लेकिन 16 दौर की बोलियों के बाद भी इन शहरों के अनंतिम विजेता मूल्य कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। मैसुरु का मूल्य 3.2 करोड़ रुपए, तिरुची का 5 करोड़ रुपए, तिरुनेलवेली का 1.26 करोड़ रुपए और तिरुपति का मूल्य 4.5 करोड़ रुपए पर अटका हुआ है।

दावणगेरे, बेल्लारी, वेल्लोर और काकीनाडा जैसे दूरदराज के शहरों में चार फ्रीक्सियां पेश की गई हैं। लेकिन उनके लिए अभी तक किसी ने भी बोली नहीं लगाई। इनका चौबीसों घंटे मूल्य का दौर 7 करोड़ रुपए से शुरू हुआ था और 16वें दौर के अंत तक इसमें कोई बदलाव नहीं देखा गया।

इतने ठंडे रिस्पांस की मुख्य वजह टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए रखे गए ऊंचे आरक्षित मूल्य को बताया जा रहा है।

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