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साल 2015: नए खिलाड़ी फटाफट कूद पड़े इन्फोटेनमेंट की दुनिया में

मुंबई: गुजरते साल 2015 में नए खिलाड़ियों ने सूचना-मनोरंजन और लाइफस्टाइल जॉनर में अपनी जगह बनाने की कोशिश की। जहां, सुभाष चंद्रा प्रवर्तित एस्सेल समूह ‘लिविंग ब्रांड’ के ज़रिए तथ्यात्मक मनोरंजन के धंधे में उतरा, वहीं सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स (एसपीएन) इंडिया ने बीबीसी अर्थ लॉन्च करने के लिए बीबीसी वर्ल्डवाइड के साथ संयुक्त संयुक्त उद्यम बना डाला।

इसके साथ ही कार्तिकेय शर्मा के आईटीवी नेटवर्क ने नीदरलैंड के टेलिविज़न एंटरटेनमेंट रियलिटी नेटवर्क (टेर्न) के साथ हाथ मिला लिया। उन्होंने भारत में इनसाइट नाम का एक अल्ट्रा-हाई डेफिनिशन (यूएचडी) तथ्यात्मक मनोरंजन चैनल लॉन्च करने के लिए पार्टनरशिप की है।

चंद्रा की लाइफस्टाइल और इन्फोटेनमेंट पहल

एस्सेल समूह की सब्सिडियरी कंपनी लिविंग एंटरटेनमेंट के तहत लाए जानेवाले चैनलों की पहली कड़ी फूड व लाइफस्टाइल चैनल, लिविंग फूड्ज़ के रूप में सामने आई है। ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ज़ेईईएल) ने पहले का चैनल ज़ी खाना खज़ाना बंद कर दिया है। वहीं उम्मीद है कि लिविंग एंटरटेनेंट साल 2016 में चार और चैनल लाने जा रही है।

कंपनी को अपेक्षा है कि अगले चार से पांच साल में नए बिजनेस से उसके सालाना 1000 करोड़ रुपए की आय होने लगेगी।

सुभाष चंद्रा ने पहले इसी साल कहा था, “कंपनी (लिविंग नेटवर्क) जो इस (ज़ी लिविंग) की मालिक है, उसकी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से आय मोटामोटी लगभग 80 करोड़ रुपए है और अगले 6-8 महीनों में वो भारत से 50 करोड़ हासिल करने लगेगी। इस तरह अगले 12 महीनों में इसकी आय 100 करोड़ रुपए से ज्यादा होगी। मुझे लगता है कि यह बिजनेस अगले 4-5 साल में 1000 करोड़ रुपए सालाना का हो जाएगा।”

उन्होंने यह भी कहा था कि भारत में ‘लिविंग’ ब्रांड का लॉन्च एस्सेल के मीडिया बिजनेस का 2.0 संस्करण है। उसका मीडिया बिजनेस मोटीमोटी अभी मनोरंजन व न्यूज़ तक सीमित है।

भारत में लिविंग एंटरटेनमेंट, समूह के लिविंग नेटवर्क का विस्तार होगा जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ज़ी लिविंग के नाम से एक हेल्थ व लाइफस्टाइल चैनल चलाता है। इसका लाभ-हानि खाता अलग होगा और इन चैनलों का संचालन स्वतंत्र रूप से किया जाएगा।

Piyush-Sharmaज़ी लिविंग इंडिया में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सीईओ पीयूष शर्मा का कहना है कि इन्फोटेनमेंट व लाइफस्टाइल क्षेत्र में एस्सेल का प्रवेश संगठन की लाइफस्टाइल के विकास से जुड़ा हुआ है। इसका लक्ष्य एसईसी (सामाजिक आर्थिक वर्ग) ए, ए+ और बी+ तक हो सकता है। चैनल की पहुंच समूचे भारत में होगी। लेकिन इसका फोकस प्रमुख व मिनी मेट्रो के साथ ही बड़े शहरों पर होगा। उनका कहना था, “हमारी मौजूदगी न्यूज़, स्पोर्ट्स व मनोरंजन के बाद अब इन्फोटेनमेंट में हो गई है। यह बड़ा तार्किक कदम था। हालांकि समग्र बिजनेस में दर्शकों के हिस्से व आय के योगदान, दोनों ही लिहाज़ से इसका आकार अब भी काफी छोटा है। यह 1-2 प्रतिशत के स्तर पर है। लेकिन इस सेगमेंट के बढ़ने की उम्मीद है।”

उन्होंने कहा कि गतिशील बाज़ार में बदलाव बराबर होते रहते हैं। उनके शब्दों में, “कुछ उत्पाद देर-सबेर परिपक्वता पर पहुंच जाएंगे। मनोरंजन चैनलों की दुनिया में कई सारे चैनल हैं तो दर्शक किसी से बंधे बिना इधर-उधर होता रहता है। लेकिन कुछ सेगमेंट हैं जिसका अभी तक पूरा दोहन नहीं हुआ है जिन्हें अगर सही से चलाया और पोजिशन किया गया तो काफी फायदा मिल सकता है। आनेवाले समय में इन्फोटेनमेंट और लाइलस्टाइल जॉनर के बढ़ने की अपेक्षा है।”

उन्होंने आगे कहा, “आज दर्शक विविध प्लेटफॉर्म पर पहुंच गया है और वो जहां भी कही है और जिस तरह वो कंटेंट लेना चाहता, वहां उस तरीके से आपको पहुंचना है। तब आप दर्शकों के कंटेंट से जुड़ने को मोनेटाइज़ कर सकते हैं। आप उपभोक्ता जुटाते हो, उनसे जुड़ते हो और तब मोनेटाइज़ करते हो। यह दमदार उत्पाद पेशकश, अलग तरह के कंटेंट की पेशकश और इसके साथ ही ब्रांड निर्माण में भारी निवेश के दम पर होता है।”

इन्फोटेनमेंट व लाइफस्टाइल को लिविंग ब्रांड के अंतर्गत रखने की वजह यह है कि कंपनी अलग ब्रांड श्रेणी बनाना चाहती है। मनोरंजन ज़ी टीवी के तहत है। फिर एंड टीवी भी आ गया है। स्पोर्ट्स टेन स्पोर्ट्स के अंतर्गत है। इसी तरह तथ्यात्मक मनोरंजन में एक जाना-पहचाना नाम बनाने का मकसद है।

शर्मा अपनी बात साफ करते हुए कहते हैं, “किसी ब्रांड को आप कितना खींच सकते हैं, इसकी एक सीमा होती है। तथ्यात्मक मनोरंजन डोमेन में हम लिविंग के दर्शन के अनुरूप और समग्र लिविंग जगत में ज्यादा पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि नाम में लिविंग का होना इन चैनलों के सार को ज्यादा गहराई से पकड़ता है।”

लिविंग फूड्स की भिन्न रणनीति के बारे में बात करते हुए उनका कहना है, “यहां इन-स्टूडियो प्रोग्रामिंग से लेकर आउट-ऑफ-द-स्टूडियो प्रोग्रामिंग तक है जहां आप फूड व ट्रैवल, फूड व फैशन और फूड व कला देख सकते हैं। आज फूड सबसे ज्यादा ट्रेन्डिंग वस्तु है। फूड के साथ ही आपको एक अलग स्तर पर समाज को सुनाने का हुनर मिलता है।”

ज़ी खाना खज़ाना का फोकस एक खास किस्म की प्रोग्रामिंग पर था और उस ब्रांड का खास तरह का उद्देश्य था जो उनके मुताबिक अब अपना जीवन-चक्र पूरा कर चुका है। उनका ज़माना अब लद चुका है। दोनों चैनलों के बीच मुख्य अंतर यह है कि लिविंग फूड्ज़ ज्यादा तरोताज़ा व सम-सामयिक है और उसका फोकस आउटडोर पर ज्यादा है।

चैनल ने प्रसारण के लिए दो बैंड, सुबह और शाम की पहचान की है। दोपहर के बैंड का नाम गोल्डमे टाइम रखा गया है, जबकि शाम के बैंड को सनडाउन स्पेशल कहा गया है। सनडाउन स्पेशल में लाइफस्टाइल प्रोग्रामिंग है और इसमें फूड प्रोग्राम का भी कुछ तड़का है। इन शोज़ को इन-हाउस प्रोड्यूस किया जाता है।

समय बीतने क साथ चैनल तमिल व तेलुगू जैसे क्षेत्रीय बाज़ारों तक भी पहुंचने पर गौर करेगा। उनका कहना है, “उचित समय पर हम इस सेगमेंट तक भी पहुंचना चाहेंगे।” हो सकता है कि इसके लिए अलग चैनल ही लॉन्च कर दिए जाएं।

शर्मा के मुताबिक, इस समय लाइफस्टाइल जॉनर में फूड पर काफी ज्यादा फोकस है। बाजार में फूड का हिस्सा कुछ ज्यादा ही गैर-अनुपाती हो गया है। दूसरे क्षेत्रों में ज्यादा निवेश नहीं हुआ है। वे कहते हैं, “हो सकता है कि आगे किसी को उस क्षेत्र में निवेश करना पड़े। हमारा लक्ष्य इस मामले में अग्रणी बनन है।”

इसलिए लाइफस्टाइल जॉनर के अन्य पहलुओं को नए चैनलों के साथ आजमाने की संभावना है। एक चैनल जो लिविंग ब्रांड के तहत लॉन्च किया जाएगा, वो है लिविंग ज़ेन। यह स्वास्थ्य व प्रसन्नता पर केंद्रित होगा। अन्य चैनल है लिविंग ट्रैवल, लिविंग होम्स और लिविंग रूट्ज़। इस कड़ी का आखिरी चैनल एक इन्फोटेनमेंट चैनल होगा जो भारत पर विशेष फोकस के साथ इतिहास व संस्कृति की जानकारी देगा।

इका यह इतना बड़ा बाज़ार है कि उसे इस तरह बारीक हिस्सों में बांटा जा सकता है? शर्मा का जवाब है, “हो सकता है कि यह आज इतना बड़ा न हो। लेकिन भविष्य में इस बाज़ार को बढ़ना ही बढ़ना है। लेकिन एक आकार सभी पर फिट नहीं बैठता। हमें भिन्न किस्म के समझदार उपभोक्ता तक पहुंचना है। हमें तेज़, साफ व अलग किस्म की पेशकश लानी होगी।”

चैनल का ज्यादातर कंटेंट इन-हाउस बनाना जा रहा है और कुछ हिस्से ही बाहर से खरीदे जा रहे हैं।

लिविंग फूड्ज़ इस समय एशिया प्रशांत क्षेत्र के छह देशों – ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, मालदीव, इंडोनेशिया, और ताइवान में मौजूद है। यह भी कुछ अफ्रीकी देशों में मौजूद है। शर्मा बताते हैं, “लगभग एक साल में सभी लिविंग चैनल दुनिया के कम से कम 25 देशों में उपलब्ध हो जाएंगे। यहां वैश्विक दर्शकों के लिए वैश्विक कंटेंट परोसा जा रहा है। कंटेंट को सिर्फ भारत पर केंद्रित करने नहीं बनाया जा रहा है।”

अलग-अलग इलाकों की फीड अलग-अलग होगी। उनकी टीमें भी अलग होंगी। इनकी शेड्यूलिंग क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगी।

लिविंग तमाम प्लेटफॉर्मों की व्यहार्यता व अहमियत पर भी गौर कर रहा है। उनका कहना है, “हमारे लिए सभी प्लेटफॉर्मों पर मौजूदा रहना महत्वपूर्ण है। इसलिए हम livingfoodz.com लेकर आए हैं। हम कुछ महीनों में फूड एप्प भी लॉन्च करेंगे। हर प्लेटफॉर्म अपने अलग बिजनेस मॉडल का पालन करेगा।”

एस्सेल समूह के मुखिया सुभाष चंद्रा का मानना है कि तथ्यात्मक मनोरंजन विश्व स्तर पर एक बड़ा बाज़ार है जिसका फायदा उठाने की ज़रूरत है। लाइफ स्टाइल और तथ्यात्मक मनोरंजन के दर्शकों की संख्या वैश्विक स्तर पर कुल टेलिविज़न दर्शकों की 12 से 13 प्रतिशत है और इससे आय का हिस्सा 18 से 20 प्रतिशत है। कुल बाज़ार का आकार एक लाख करोड़ रुपए का है।

सोनी और बीबीसी वर्ल्डवाइड का संयुक्त उद्यम

उनके डिस्ट्रीब्यूशन संयुक्त उद्यम (जेवी) के बंद होने के छह महीने के भीतर एमएसएम डिस्कवरी (एमएसएमडी) और एसपीएन इंडिया ने तथ्यात्मक मनोरंजन चैनलों की खाई को भरने के लिए डिस्ट्रीब्यूशन में रुचि दिखाई।

MSM-BBC-logoअप्रैल में, एसपीएन इंडिया ने बीबीसी की व्यावसायिक शाखा बीबीसी वर्ल्डवाइड के साथ एक रणनीतिक साझेदारी का अपना इरादा ज़ाहिर किया। इसके तहत प्रीमियम तथ्यात्मक टेलिविज़न चैनल बीबीसी अर्थ को भारत में लाया जाना है। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच वार्ता में कई महीने लग गए। संयुक्त उद्यम की आधिकारिक घोषणा दोनों कंपनियों ने सितंबर में की।

एसपीएन इंडिया की जेवी में बहुमत हिस्सेदारी होगी। चैनल एचडी में प्रसारित किया जाएगा और भारत भर में तमिल, अंग्रेज़ी और हिंदी में उपलब्ध होगा। एसपीएन इंडिया के अंग्रेज़ी चैनल के बिज़नेस हेड सौरभ याग्निक इस नए चैनल का काम भी देखेंगे।

चैनल तथ्यात्मक फिल्म निर्माताओं के काम सहित ब्रह्मांड के आश्चर्य पेश करेगा। यह शो अंतरिक्ष के असीम विस्तार में खुर्दबीन से ही दिखने वाले सबसे छोटे जीव से लेकर विभिन्न विषयों को कवर करेगा।

बीबीसी वर्ल्डवाइड के एशिया के ईवीपी डेविड वाइलैंड ने उल्लेख किया, “भारत में हमारा एक ब्रांड बीबीसी वर्ल्ड न्यूज़ है। हम भारत में और अधिक ब्रांडों को लाने के तरीके ढूंढ रहे थे। हमने फैसला किया कि हम अपने दम पर करने के बजाय इसे साझेदारी में करेंगे। हमारे पास बीबीसी अर्थ ब्रांड है और कंटेंट बनाने में विशेषज्ञता हासिल है। सोनी पिक्चर्स नेटवर्स इंडिया के पास बुनियादी ढांचा है। इससे साथ जुड़ना तर्क संगत है।”

BBC_Earth_logo (1)बीबीसी अर्थ का कंटेंट प्रीमियम तथ्यात्मक कंटेंट है। वाइलैंड ने समझाया, “हम विभिन्न जॉनर डॉक्यूमेंटरी, प्राकृतिक विज्ञान, विज्ञान, एडवेंचर और यात्रा को कवर करेंगे। हमारा कंटेंट निवेश, टेक्नोलॉजी और कहानी कहने का ढंग दुनिया भर में मौजूद तथ्यात्मक चैनलों से काफी अलग है। वे व्यक्तित्व और वास्तविकता पर अधिक ज़ोर देते हैं। हम दुनिया भर हो रही अद्भुत चीज़ों के प्रति लोगों की आंखें खोलना चाहते हैं। हमारे कार्यक्रमों के बजट किसी ड्रामा बजट के बराबर होते हैं। ये करोड़ों डॉलर के होते हैं। ये शो दुनिया भर में कई जगहों पर तीन से चार साल में फिल्माए जाते हैं।”

उन्होंने सर डेविड एटनबरो द्वारा बनाई गई डॉक्यूमेंटरी सीरीज़ ‘द हंट’ का नाम लिया। मानवों के बारे में, शार्क आदि के बारे में भी डॉक्यूमेंटरी सीरीज़ हैं। उन्होंने कहा, “हम ऐसा व्यापक कंटेंट लाते हैं जो लोगों के बीच प्रतिध्वनित करता है।”

वाइलैंड ने उल्लेख किया कि पे टीवी की दोहरी आय स्ट्रीम है। उन्होंने बताया, “आप कंटेंट में निवेश करते हैं। आपको पे टीवी ऑपरेटरों से सब्सक्रिप्शन शुल्क मिलता है और विज्ञापन आय मिलती है। भारत में स्थिति थोड़ी अलग है, यहां कैरेज शुल्क की तीसरी लागत है।”

उन्होंने कहा कि बेहतर होता हमने 2007 में ही पार्टनरशीप की होती। आखिरकार दो चैनलों के डिस्ट्रीब्यूशन का काम कठिन है और उसकी तुलना में एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा होना आसान है। उन्होंने कहा, “क्या हमें पहले ही साझेदारी करनी चाहिए थी? शायद। क्या पार्टनर बात-चीत के लिए तैयार थे? शायद नहीं। यह माहौल पर निर्भर होता है। एक बात है कि चैनल क्षेत्र आज और अधिक जीवंत है। अधिक चैनल आ रहे हैं। तीन या चार साल पहले बाज़ार किस तरफ जा रहा था इसके बारे में ज़्यादा अनिश्चितता बनी हुई थी।”

जब बीबीसी अर्थ स्थापित किया गया था, तब कंपनी ने विभिन्न बाज़ारों में प्रवेश करने की रणनीतियों के बारे में सोचा। वाइलैंड ने कहा, “हमें लगा कि भारत में हमें एक पार्टनर की ज़रूरत है। इसलिए हमने कई लोगों से बात की। एसपीएन के साथ पहले से ही बात चल रही थी।”

उन्होंने कहा कि शोध के अनुसार खबर के साथ बीबीसी अर्थ अन्य बीबीसी ब्रांड था जो सबसे ज़्यादा दर्शकों के साथ प्रतिध्वनित करता है। उन्होंने कहा, “हम एक कॉमेडी या एक खेल चैनल शुरू कर सकते थे। लेकिन जब हम ब्रांड लेकर आते हैं, तब हम दुनिया भर में उपभोक्ता क्या चाहते हैं इसका पता लगाते हैं। प्रीमियम तथ्यात्मक कंटेंट की सार्वभौमिक मांग है।”

आईटीवी नेटवर्क के ज़रिए भारत में इनसाइट

इस साल, नीदरलैंड स्थित टेलिविज़न एंटरटेनमेंट रियलिटी नेटवर्क (टेर्न) ने भारत में इनसाइट नामक एक यूएचडी तथ्यात्मक मनोरंजन चैनल लॉन्च करने के लिए कार्तिकेय शर्मा के आईटीवी नेटवर्क के साथ साझेदारी की है।

आईटीवी नेटवर्क टेर्न की ओर से भारत में चैनल का परिचालन करेगा। चैनल के लिए लाइसेंस आईटीवी के पास रहेगा। यह ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन और चैनल की विज्ञापन बिक्री का कामकाज देखेगा। इसने ट्रायोलॉजिक को चैनल का कामकाज देखने के लिए लिया है।

टेर्न ने ज़ोडियाक मीडिया, किएम और स्ट्रीक्स जैसे प्रोडक्शन हाउसेज़ के साथ मिलकर चैनल के लिए 200 घंटे का विशेष कंटेंट का सह-निर्माण किया है। टेर्न, जनरल सैटेलाइट नाम की एक ब्रिटेन स्थित कंपनी के स्वामित्व में है जो पे-टीवी प्लेटफॉर्मों के लिए टेक्नोलॉजी सोल्यूशन देती है।

इससे पहले इस साल, टर्न के सीएफओ एंड्रयू स्प्रीग्स ने टेलिविज़न पोस्ट को बताया था कि आईटीवी नेटवर्क चैनल के प्लेआउट और प्रसारण के लिए स्थानीय साझेदार है। उन्होंने कहा था, “कंटेंट हमारे स्वामित्व में है और आईटीवी हमारी ओर से चैनल चलाएगा। चैनल के लिए लाइसेंस उनके पास रहेगा।”

दोनों कंपनियां आय में हिस्सेदारी के मॉडल पर काम कर रही हैं। यह साझेदारी लिनियर प्लेटफार्म तक सीमित है। गैर लिनियर प्लेटफार्मों के लिए, टर्न एक स्वतंत्र रणनीति तैयार करेगा।

भविष्य में संयुक्त उद्यम रास्ते से इनकार किए बिना स्प्रीग्स ने स्पष्ट किया कि इस साझेदारी में कोई संयुक्त उद्यम या इक्विटी कम्पोनेंट नहीं है।

उन्होंने कहा, “फिलहाल, कोई जेवी या इक्विटी भागीदारी नहीं है। हम उन लोगों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और भविष्य में हमारी बातचीत उस दिशा में जा सकती है। लेकिन इस समय मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता।”

इस बीच यह नोट करना दिलचस्प होगा कि हाल ही में आई आईएचएस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में यूएचडी टीवी सेट का प्रवेश 2019 तक सिर्फ दो प्रतिशत होगा। इस बीच, सभी लिनियर चैनलों के विपरीत, इनसाइट पर इंटरएक्टीविटी का तत्व जुड़ा रहेगा जिससे दर्शक सोशल मीडिया पर बातचीत कर सकते हैं।

भारत में दोनों पार्टनर विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन आय का मॉडल अपनाएंगे। डिस्ट्रीब्यूशन के मोर्चे पर, टर्न एक आय में हिस्सेदारी का मॉडल पसंद करता है जिससे हर किसी को निवेश में सफलता मिले। उन्होंने कहा, “बिज़नेस मॉडल प्रभावी ढंग से पे टीवी सब्सक्रिप्शन मॉडल होने जा रहा है जिसका हम विज्ञापनदाताओं के साथ जुड़ने के लिए उपयोग करेंगे। यूएचडी में आप कम से कम आप बारीकी से दर्शकों को जोड़ सकते हैं और सोशल मीडिया एप्स का उपयोग कर सकते हैं।”

टीवी के अलावा टर्न की गैर-लीनियर प्लेटफॉर्मों पर अपना कंटेंट बेचने की योजना है। स्प्रीग्स ने कहा, “हम से ऑवर द टॉप (ओटीटी) और वीडियो-ऑन-डिमांड (वीओडी) प्लेटफॉर्म पर हमारे कंटेंट की पेशकश करेंगे।”

कंटेंट के मोर्चे पर, चैनल पर रियलिटी शो, डॉक्यूमेंटरी फॉर्मैट और 18 से 45 साल के पुरुषों को लक्षित खेल कंटेंट होगा। भविष्य में उद्देश्य यह है कि भारतीय उपमहाद्वीप में लोगों को अपील करते खेल में प्रवेश किया जाए।

उन्होंने कहा, “पहला कदम अंग्रेज़ी में वैश्विक दर्शकों के लिए प्रोग्रामिंग है। स्थानीयकृत प्रोग्रामिंग का विकास सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है। इसीलिए हमने भारत में आईटीवी नेटवर्क जैसे पार्टनर के साथ गठबंधन किया है।”

स्प्रीग्स को उम्मीद है कि चैनल 18 से 24 महीनों में आर्थिक रूप से मज़बूत स्थिति में होगा। चैनल बाद में विश्व स्तर पर अन्य बाज़ारों में शुरू किया जाएगा।

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