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नीरज व्यास ने खोला सोनी वाह की सफलता के फॉर्मूले का राज़

मुंबई: सोनी वाह ने जून में अपने लॉन्च के बाद से ही फ्री-टू-एयर (एफटीए) हिंदी मूवी चैनलों के जॉनर में तूफान मचा रखा है।

चैनल सप्ताह-दर-सप्ताह पर ग्रामीण हिंदी भाषी बाजार (एचएसएम) में रेटिंग के चार्ट में सबसे ऊपर रहता आया है। उसने साल के 44वें सप्ताह में तो अपने ही सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (एसपीएनआई) के अग्रणी हिंदी मूवी चैनल सोनी मैक्स को सकते में डाल दिया है जो शहरी + ग्रामीण एचएसएम में पहले नंबर पर रहता आया है।

वैसे तो  तीन बड़े नेटवर्कों के एफटीए चैनलों के दर्शकों की संख्या में जबरदस्त विकास दर्ज किया गया है। लेकिन आखिर सोनी वाह में ऐसा अलग क्या है जिसने उसके चमका दिया?

एसपीएनआई के वरिष्ठ ईवीपी और हिंदी फिल्म क्लस्टर के प्रमुख नीरज व्यास के मुताबिक, चैनल की सफलता के कुछ महत्वपूर्ण कारक इस प्रकार हैं: 1) फिल्मों का अच्छा कैटलॉग, 2) सरल, लेकिन प्रभावशाली पोजिशनिंग, 3) दर्शकों के व्यवहार की समझ और 4) तदनुसार फिल्मों को पेश करने का कार्यक्रम बनाना।

neeraj-vyas-150x150व्यास मानते हैं कि कंपनी ने चैनल को एकदम सही समय पर लॉन्च किया। उनका कहना है, “हमारे कैटलॉग में ऐसी फिल्में हैं जिन्हें उस बाज़ार के दर्शकों ने पहले देखा नहीं है। दूसरे, हमने पैटर्न को समझने में बड़ी मशक्कत की है। हमने सही कंटेंट को समय के सही बैंड में पेश किया और यह बहुत असरकारी रहा।”

वे आगे कहते हैं, “लॉन्च के सप्ताह से ही हमने पीछे मुड़कर नहीं देखा है। करीब 19 हफ्तों से हम नेता बने हुए हैं और यह नेतृतव बड़े अंतर के साथ है। अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी से हमने 20-30 प्रतिशत की अच्छी बढ़त बना रखी है। हमारे दर्शकों का बड़ा हिस्सा क्रमिक रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार से आता है।”

मौजूदा एफटीए फिल्म चैनलों पर बीएआरसी के डेटा का विश्लेषण करने से पता चलता है कि फिल्म चैनलों के लिए सप्ताहांत अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ब्यास बताते हैं, “हमने भी महसूस किया कि सप्ताहांत पर भारी बढ़त पाने की गुंजाइश है। इसलिए हमने सप्ताहांत की रणनीति बनाई। अलव में हमने लॉन्च के पहले ही सप्ताहांत का एक स्लॉट बना लिया था। हम जानते थे कि सप्ताहांत और खासकर सप्ताहांत की दोपहर बहुत अहम है।”

सोनी वाह के लॉन्च से पहले दर्शकों के व्यवहार को समझने के लिए बीएआरसी के आंकड़ों में गहरा गोता लगाया गया। उन्होंने बताया, “हमने बिताए गए समय, दिन के भाग और सप्ताहांत व सप्ताह के कामकाजी दिनों के व्यवहरा की गहरी छानबीन की। इससे मिले निष्कर्षों के आधार पर, हमने समय के खास-खास बैंड में फिल्में दिखाईं। बहुत सारा वैज्ञानिक तरीका हमने इस्तेमाल किया।”

विश्लेषण से एफटीए बाज़ार के बारे में एक खास बात पता चली कि दर्शक रात 9-9.30 बजे से कम होने लगते हैं और  10-10.30 बजे एकदम डुबकी लगा जाते हैं। व्यास बताते है, “हमें अहसास हुआ कि रात 9-9.30 बजे के बाद कोई अच्छी फिल्म बरबाद नहीं करनी चाहिए। दर्शकों की संख्या की सामूहिक समझ, फिल्मों की पैकेजिंग और उनके समय-निर्धारण ने हमें अच्छी सफलता दिलाई।”

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि चैनल की सरल पोजिशनिंग ने भी उसकी चौंकानेवाली बढ़त में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, “हमारी पोजिशनिंग बहुत सरल थी। चैनल के नाम में शामिल ‘वाह’ संतुष्टि का भाव दिखाता है। यह याद रखने में आसान है और गुणवत्ता के प्रतीक सोनी के ब्रांड नाम के साथ बहुत अच्छा फबता है।”

Sony_Wah_Logoउन्होंने आगे कहा कि चैनल की टैगलाइन ‘फिल्मों का मेला’ ग्रामीण दर्शकों के साथ अच्छी तरह जुड़ जाती है। वे कहते हैं, “टैगलाइन का ‘मेला’ शब्द के देश के उस हिस्से का पर्याय है। ग्रामीण इलाके में मेला एक तरह का जमावड़ा होता है। इसलिए हम जो कहना चाहते थे, उसका दर्शन भी घरों तक बहुत सलीके से पहुंच गया।”

सोनी वाह को लॉन्च करना एसपीएनआई के सबसे जल्दी लिए गए निर्णयों में एक था। उनका कहना है, “इस संगठन में हमने जो भी फैसले लिए, यह उनमें सबसे तेज़ी से लिया गया एक फैसला था। ग्रामीण घरों को जोड़ने के बाद बीएआरसी के डेटा में दर्शकों का रुझान दिखा, उससे हम जान गए कि एफटीए चैनलों की मार काफी बड़ी होने जा रही है।”

व्यास कहते हैं कि सोनी ने दूरदर्शन के मुफ्त डीटीएच प्लेटफॉर्म, फ्रीडिश पर अपना पे हिंदी म्यूज़िक चैनल सबसे पहले लॉन्च किया। उन्होंने कहा, “तीन साल पहले सोनी मिक्स के साथ फ्रीडिश पर जानेवाले हम पहले ब्रॉडकास्टर थे। तब भी हमने इस प्लेटफॉर्म का असर देखा था। इसे नापा गया या नहीं, लेकिन हम जानते थे कि फीडिश का सच किसी दिन कमाल दिखाएगा।”

व्यास का कहना था, “बीएआरसी के डेटा में 51 प्रतिशत भार के साथ ग्रामीण बाज़ार बहुत बड़ा सेगमेंट है और हम इस बहुत बड़े सेगमेंट तक पहुंचना चाहते थे जो बहुत बिखरे हुए तरीके से फिल्में देखने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।”

कंटेंट रणनीति

सोनी वाह के पास अलग लाइब्रेरी नहीं है। ऐसे में ‘दिलवाले’, ‘बाहुबली’ या ‘थ्री इडियट्स’, जिन्होंने सोनी मैक्स पर अच्छा असर दिखाया, उन्हें सोनी वाह पर भी रेटिंग अच्छी मिली।

बहुत शहर केंद्रित फिल्मों को किनारे रखकर सोनी वाह उन फिल्मों को प्रसारित करता है जो सोनी की लाइब्रेरी में हैं।

व्यास ने कहा, “हमने फिल्मों को मिलने वाली रेटिंग में, फ्री-टू-एयर चैनल पर और पे चैनल पर में थोड़ा अंतर देखा है। कुछ फिल्में हैं जो प्लेटफॉर्म से परे सब जगह चलती हैं। भारतीय मानस एक बिंदु से आगे नहीं बदलता है। हालांकि, कुलीन सिनेमा ग्रामीण में कभी नहीं चलेगा।”

विज्ञापन मुद्रीकरण

सोनी वाह पर विज्ञापन इनवेंटरी पूरी तरह से भरी हुई है। लेकिन व्यास का मानना है कि फ्री-टू-एयर फिल्म चैनलों के लिए विज्ञापन दरों में सुधार करने की ज़रूरत है।

चैनल के पास एफएमसीजी, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार और बीएफएसआई जैसे प्रमुख श्रेणियों के कई विज्ञापनदाता हैं। इनमें हिंदुस्तान यूनिलीवर, प्रॉक्टर एंड गैम्बल, कैडबरी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीवीएस, एमआरएफ, वोडाफोन, एक्सिस बैंक और डीएचएफएल शामिल हैं।

व्यास ने कहा, “हमारी पूरी इन्वेंटरी बिक चुकी है। हम 12 मिनट के विज्ञापन का हर घंटे प्रसारण कर रहे हैं। जहां तक विज्ञापन बिक्री का सवाल है हमें अगले साल के अंत तक यथार्थवादी संख्या मिलेगी। हमें अप्रैल के आसपास मूल्य वृद्धि देखने को मिलेगी।”

उद्योग अभी भी इन जीआरपी के असली मूल्यांकन के साथ ताल मेल बिठा रहा है। हालांकि, यह फ्री टू एयर हिंदी फिल्म चैनल के लिए शुरुआती दिन हैं क्योंकि उन्होंने अभी छह महीने ही पूरे किए हैं।

विज्ञापन स्पॉट के मूल्य निर्धारण पर, व्यास का मानना है कि सभी प्रसारकों को सामूहिक परिपक्वता के साथ इस मुद्दे से निपटना चाहिए। फिल्म चैनल के दर्शकों की संख्या काफी ज़्यादा होने के बावजूद यहां ठीक से मूल्यांकन नहीं हो पाया है। यह जानकारी देते हुए व्यास ने कहा कि हिंदी फिल्म चैनल के डिस्ट्रीब्यूशन के अनुरूप दरें होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “सही कीमत एफटीए चैनलों के लिए असली परीक्षा साबित होगी। यह अगला सामूहिक निर्णय सभी प्रसारकों को लेना होगा। हमें कई साल पहले बनाए गए इस जॉनर को कम आंकने की गलती नहीं करनी चाहिए। ऐतिहासिक रूप से हमें कम आंका गया है और अब हम सही मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुधार में बहुत समय लगता है।”

डिस्ट्रीब्यूशन और रिसर्च

चैनल के अगला उद्देश्य, बाज़ार की बारीकियों और उपभोक्ताओं को समझने के लिए अनुसंधान में गहरे उतरना और डिस्ट्रीब्यूशन को बढ़ाना है।

फ्रीडिश के अलावा चैनल डेन नेटवर्क्स, इनडिजिटल, फास्टवे ट्रांसमिशन और जीटीपीएल आदि मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों पर उपलब्ध है।

उन्होंने कहा, “हम अपने डिस्ट्रीब्यूशन को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हम अपने डिस्ट्रीब्यूशन के दूसरे चरण में जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश पर हमारा फोकस है। हमने एमएसओ के साथ सौदे कर लिए हैं। पर अब प्रमोशन शुरू होगा।”