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नोटबंदी को लेकर तृणमूल कांग्रेस का पीएम मोदी पर कटाक्ष- 'उम्मीद है कल बड़ी घोषणा करेंगे'
सीतापुर में यात्रियों से भरी बस नदी में पलटी, बचाव कार्य जारी
झारखंड में कोयला खदान के अंदर फंसे मजदूर, 10 शव निकाले गए
दिल्ली हाई कोर्ट ने शादियों के लिए बैंक खाते से 2.5 लाख रुपए निकालने के खिलाफ याचिका खारिज़ की
संसद के दोनों सदनों में नोटबंदी के खिलाफ विपक्षी दलों का हंगामा जारी
घोषित काले धन पर लगेगा 50% टैक्स, लोकसभा ने आयकर अधिनियम में संशोधन पास किया

स्पेशल रिपोर्ट

बीसीसीआई, स्टार इंडिया और नए आकार में ढलती क्रिकेट की दुनिया

किक्रेट के बिजनेस में बड़े बदलाव हो रहे हैं। नई आय संरचना में तमाम देशों के बोर्डों की क्या स्थिति रहेगी? क्या आईपीएल को तीन महीने अलग से मिलेंगे? क्या इस बिजनेस से होनेवाली आय के 80% हिस्से पर स्टार का कब्ज़ा होना अच्छी बात है? अतुल पांडे ने इस तमाम मुद्दों की पड़ताल की। उनका मानना है कि अब क्रिकेट की एक नई दुनिया आकार ले रही है।

ट्राई की नज़रों में आखिर क्यों और कैसे खटक गए कंटेंट एग्रीगेटर

ट्राई ने हर पहलू पर गौर करने के बाद पाया कि देश में शीर्ष के तीन कंटेंट एग्रीगेटरों – मीडिया प्रो, एमएसएस डिस्कवरी या इंडियाकास्ट यूटीवी, का दबदबा पे-टेलिविज़न उद्योग पर कुछ ज्यादा ही बढ़ चुका है। टेलिविज़न पोस्ट बता रहा है कि कैसे ट्राई पहुंचा इस नतीजे पर।

कंटेंट एग्रीगेटरों पर ट्राई के कायदे कैसे बदल लेंगे शक्ति संतुलन

ट्राई ने कंटेंट एग्रीगेटरों की भूमिका छोटी कर दी है। अब एमएसओ और डीटीएच सेवा सेवाप्रदाता अंदर ही अंदर खुश हो सकते हैं कि मीडिया प्रो, एमएसएस डिस्कवरी या इंडियाकास्ट यूटीवी जैसी कंपनियां अपनी ताकत के दम पर उन्हें और ज्यादा दबा नहीं पाएंगी। टेलिविज़न पोस्ट ने नज़र डाली ट्राई के नए कायदे के खास-खास पहलुओं और उनके प्रभावों पर।

एमएसओ-एलसीओ का शक्ति संतुलन टूटने की कगार पर

एमएसओ-एलसीओ का शक्ति संतुलन टूटने की कगार पर पहुंच गया है। कुछ महीने तक ऐसा होने की आशंका कम थी। लेकिन अब हैथवे केबल एंड डाटाकॉम की तरफ से बेंगलुरु में दो लाख सेट-टॉप बॉक्सों (एसटीबी) को स्विच ऑफ किए जाने के बाद यही लगता है कि यह संतुलन कभी भी टूट सकता है। टेलिविज़न पोस्ट ने पूरी स्थिति की पड़ताल की।

हिंदी जीईसी जाएंगे कैसे मिड-टियर पैकेज में!

प्रमुख ब्रॉडकास्ट नेटवर्कों ने हिंदी जीईसी को बेस पे पैक से हटाकर मिड-टियर पैकेज में ले जाने के लिए एमएसओ और डीटीएच ऑपरेटरों से बातचीत शुरू कर दी है। इससे सब्सक्रिप्शन एआरपीयू बढ़ सकता है। लेकिन इस प्रस्ताव के सामने कैरेज फीस व दर्शकों को खोने जैसी अनेक चुनौतियां हैं। टेलिविज़न पोस्ट ने पता लगाया कि ऐसे बड़े कदम के लिए अभी माकूल वक्त क्यों नहीं आया है।