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एयरटेल डिजिटल टीवी ने दूसरी तिमाही में जोड़े चार साल के सबसे ज्यादा ग्राहक

तिमाही के दौरान एयरटेल डिजिटल टीवी की एआरपीयू ठीक पिछली के 233 रुपए से घटकर 232 रुपए पर आ गई। उसने दूसरी तिमाही के दौरान शुद्ध स्तर पर 2.56 लाख सब्सक्राइबर जोड़े हैं। यह कंपनी द्वारा पिछली 17 तिमाहियों या लगभग चार साल में दूसरी तिमाही में जोड़े गए सबसे ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।

वित्त वर्ष 2016-17 में डिश टीवी की एआरपीयू, सब्सक्राइबरों में वृद्धि और पूंजीगत खर्च की स्थिति

डिश टीवी ने पहली तिमाही में एआरपीयू के ठहरे रहने के बावजूद पूरे वित्त वर्ष 2016-17 में इसके 3-4% बढ़ जाने का पहले का आकलन बनाए रखा है। शुद्ध सब्सक्राइबर जोड़ने का लक्ष्य 15 लाख का है जो डैश चौथे चरण के दम पर 19 लाख तक जा सकता है। पूंजीगत खर्च 850 से 900 करोड़ रुपए रहेगा।

एयरटेल डिजिटल टीवी ने जोड़े चार साल के सर्वाधिक ग्राहक, तिमाही नफा 9.5% बढ़ा

एयरटेल डिजिटल टीवी ने चालू वित्त वर्ष 2016-17 की पहली तिमाही में पिछले चार सालों के सबसे ज्यादा सब्सक्राइबर जोड़े हैं। उसका परिचालन लाभ तिमाही आधार पर 9.49% बढ़ गया है, जबकि एआरपीयू इस दौरान ठीक पिछली तिमाही से 1.7% बढ़ गई है।

डिश टीवी ने निर्धारित कीं चालू वित्त वर्ष 2016-17 की विकास योजनाएं

डिश टीवी का पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 2016-17 में 850 करोड़ रुपए रह सकता है क्योंकि कंपनी ने इस बार पिछले वित्त वर्ष की तुलना में अधिक एचडी सब्सक्राइबर जोड़ने का लक्ष्य रखा है। वो एक हाइब्रिड एसटीबी भी लाने की योजना बना रही है जिससे उपभोक्ता इंटरनेट से भी जुड़ सकता है।

एयरटेल डिजिटल टीवी को वित्त वर्ष 2015-16 में ब्याज व टैक्स पूर्व लाभ, जोड़े चौथी तिमाही में रिकॉर्ड ग्राहक

एयरटेल डिजिटल टीवी ने दो बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। एक तो कंपनी पूरे वित्त वर्ष 2015-16 में ब्याज व टैक्स-पूर्व लाभ में आ गई है। दूसरे, 31 मार्च 2016 को समाप्त तिमाही में उसने शुद्ध स्तर पर पिछली 20 तिमाहियों के सबसे ज्यादा सब्सक्राइबर जोड़े हैं।

एयरटेल डिजिटल ने तिमाही में 5.30 लाख सब्सक्राइबर जोड़े, परिचालन लाभ 247 करोड़

एयरटेल डिजिटल टीवी ने तीसरी तिमाही में शुद्ध रूप से 5.30 लाख सब्सक्राइबर जोड़े हैं। यह पिछली 18 तिमाहियों की सबसे बड़ी संख्या है। वहीं उसका एआरपीयू ज़रा-सा बढ़कर 229 रुपए हो गया। लेकिन इस दौरान उसका परिचालन लाभ साल भर पहले से 45% बढ़ा है।

टाटा स्काई की प्रोग्रामिंग लागत वित्त वर्ष 2014-15 में 16 प्रतिशत बढ़ी

टाटा स्काई की कंटेंट लागत वित्त वर्ष 2014-15 में 15.96% बढ़ गई। उसने ब्रॉडकास्टरों को प्रोग्रामिंग फीस के रूप में 1046.83 करोड़ रुपए चुकाए हैं, जबकि एक साल पहले यह रकम 902.73 करोड़ रुपए रही थी। लेकिन आय के हिस्से के रूप में उसकी कंटेंट लागत घटकर 28.1% पर आ गई। चालू वित्त वर्ष में उसकी कंटेंट लागत बढ़ सकती है।

‘आगे का विस्तार हम संयुक्त उद्यमों के ज़रिए नहीं करेंगे’

इंटरव्यू के इस दूसरे हिस्से में जगदीश कुमार ने हैथवे के संयुक्त उद्यम पार्टनरों, जीटीपीएल, समेकन की ज़रूरत, तीसरे चरण, कंटेंट सौदों, कैरेज़ आय, एचडी बुक़े को बढ़ाने और कंपनी की पूंजी निवेश योजनाओं पर खास बात की है।