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स्लॉट बिक्री नीति को प्रोड्यूसरों की चुनौती, हाई कोर्ट ने दिया प्रसार भारती को नोटिस

मुंबई: दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रसार भारती को नोटिस जारी किया है क्योंकि प्रोडक्शन हाउसों ने सरकारी ब्रॉडकास्टर की स्लॉट बिक्री नीति को चुनौती दे दी है।

हाई कोर्ट ने सार्वजनिक ब्रॉडकास्टर को नोटिस का जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। प्रोड्यूसरों ने आरोप लगाया है कि स्लॉट बिक्री छोटी कंटेंट कंपनियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण है।

अंग्रेज़ी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, प्रोड्यूसरों ने यह तर्क देते हुए अदालत में याचिका दायर की है कि पायलट एपिसोड या प्रोडक्शन गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाना चाहिए और इस स्कीम को रद्द कर इसकी जगह नई स्कीम लानी चाहिए।

ये सभी प्रोड्यूसर पिछली स्व-वित्त कमीशन (एसएफसी) स्कीम के तहत डीडी के लिए कार्यक्रमों का निर्माण करते रहे हैं।

प्रोड्यूसरों का तर्क है कि सार्वजनिक ब्रॉडकास्टर को उनके प्रस्तावों के मूल्यांकन के बिना नीति को नहीं बदलना चाहिए था। उन्होंने यह तर्क भी दिया कि नई स्कीम बड़ी प्रोडक्शन कंपनियों के पक्ष में झुकी हुई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि हाई कोर्ट ने प्रसार भारती से कहा कि वह प्रोड्यूसरों के साथ बातचीत करे और उन्हें बताएं कि क्यों उनके प्रोडक्ट का मूल्यांकन नहीं किया गया है और उन्हें विश्वास दिलाए कि यह निर्णय मनमाना नहीं था।

इससे पहले, प्रसार भारती ने कमीशन/एसएफसी के माध्यम से कार्यक्रम प्राप्त करने की रणनीति हटाने का फैसला किया था क्योंकि इससे डीडी नेशनल के दर्शकों की संख्या में गिरावट आई थी और इसके परिणामस्वरूप आय कम हुई थी।

तदनुसार, सार्वजनिक ब्रॉडकास्टर ने गुणवत्ता के कंटेंट को स्रोत करने के लिए एक रणनीति बनाई जिसमें डीडी नेशनल पर समय स्लॉट/समय बैंड बेचने का फैसला किया।

नई नीति के तहत, वही प्रोडक्शन हाउस आवेदन करनी की पात्रता रखते हैं जिन्होंने पिछले दो सालों में हिन्दी जनरल एंटरटेनमेंट प्रोग्रामिंग के कम से कम 300 घंटे का प्रोडक्शन किया हो और पिछले तीन वित्तीय वर्षों से टेलिविज़न और फिल्म निर्माण में हों और 5 करोड़ रुपए का प्रति वर्ष न्यूनतम कारोबार किया हो।

सफल बोलीकर्ता प्रसार भारती की प्रोग्रामिंग/प्रसारण कोड के साथ मेल बिठाते हुए दूरदर्शन के लिए विभिन्न जॉनरों में ताजा सामान्य मनोरंजन के कार्यक्रमों का प्रोडक्शन करेगा।