लाइव पोस्ट
चीन में शुरू हुआ दुनिया का सबसे ऊंचा पुल, 14.40 करोड़ डॉलर से बना
नोटबंदी को लेकर तृणमूल कांग्रेस का पीएम मोदी पर कटाक्ष- 'उम्मीद है कल बड़ी घोषणा करेंगे'
सीतापुर में यात्रियों से भरी बस नदी में पलटी, बचाव कार्य जारी
झारखंड में कोयला खदान के अंदर फंसे मजदूर, 10 शव निकाले गए
दिल्ली हाई कोर्ट ने शादियों के लिए बैंक खाते से 2.5 लाख रुपए निकालने के खिलाफ याचिका खारिज़ की
संसद के दोनों सदनों में नोटबंदी के खिलाफ विपक्षी दलों का हंगामा जारी
घोषित काले धन पर लगेगा 50% टैक्स, लोकसभा ने आयकर अधिनियम में संशोधन पास किया

स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग में आ रहा है दो का दौर, सोनी खरीदने जा रहा है ज़ी का टेन स्पोर्ट्स

मुंबई: भारत में स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग दो बड़े दिग्गजों का मैदान बनने के नए दौर में पहुंचने जा रही है क्योंकि सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स ने भारतीय बाज़ार ने अपने सबसे बड़े अधिग्रहण सौदे पर दस्तखत करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।

इस सौदे में सोनी, टेन स्पोर्ट्स के तहत चलाए जाने ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ज़ेडईईएल) के स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग बिजनेस को निगलने जा रहा है। ज़ी एंटरटेनमेंट को यह सौदा लगभग 2500 करोड़ रुपए में हो जाने की अपेक्षा है।

इसके हो जाने के बाद ज़ी एंटरटेनमेंट पूरी तरह स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग से बाहर हो जाएगा और क्रिकेट से लेकर फुटबॉल व अन्य खेलों के प्रसारण अधिकारों की सारी लड़ाई  स्टार इंडिया और सोनी के बीच सिमट जाएगी। हालांकि निम्बस के स्वामित्व वाला नियो स्पोर्ट्स तीसरा खिलाड़ी ज़रूर है। लेकिन नकदी की किल्लत में फंसा नियो स्पोर्ट्स लगभग अदृश्य है और बड़े खेलों से दूर ही रहेगा।

SONY-PICTURES-NETWORKS_coverसारे विकासक्रम से वाकिफ एक सूत्र ने बताया, “ज़ेडईईएल सोनी को टेन स्पोर्ट्स करीब 2500 करोड़ रुपए में बेचने की सोच रहा है। सौदा अंतिम चरण में पहुंच चुका है। कितने समय तक आपस में होड़ नहीं करनी है, इस तरह के ही कुछ मुद्दों को सुलझाना बाकी है।”

गैर-प्रतिस्पर्धी उपबंध सुभाष चंद्री प्रवर्तित ज़ेडईईएल को स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग से नियत अवधि तक बाहर कर देगा। सूत्र ने बताया कि यह अवधि तीन से छह साल के बीच हो सकती है।

ज़ेडईईएल ने सोमवार को स्वीकार किया कि वो अपने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग बिजनेस के लिए संभावित खरीदार पकड़ने की वार्ता में काफी आगे पहुंच चुकी है। हालांकि स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई सूचना में कंपनी ने गोपनीयता की वजहों से सौदे का कोई खास ब्यौरा या समय नहीं बताया है।

सांध्य दैनिक, मुंबई मिरर ने सबसे पहले खबर दी थी कि सोनी करीब 3000 करोड़ रुपए में टेन स्पोर्ट्स को खरीदने जा रहा है। फिर इकनॉमिक टाइम्स ने खबर दी कि सोनी 2000 करोड़ रुपए में टेन स्पोर्ट्स को खरीदने के करीब पहुंच चुका है। सोमवार को सीएनबीसी-टीवी 18 ने खबर चलाई कि सौदे की घोषणा इसी हफ्ते की जा सकती है।

आखिर, ज़ेडईईएल क्यों स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग का दरवाज़ा बंद करने जा रही है? चालू वित्त वर्ष 2016-17 में स्पोर्ट्स बिजनेस से उसका नुकसान 100 करोड़ रुपए से कम रहने की उम्मीद है। जिस कंपनी ने वित्त वर्ष 2015-16 में 1509.6 करोड़ रुपए का परिचालन लाभ और 1028.9 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया हो, वो स्पोर्ट्स बिजनेस के घाटे को आसानी से पचा सकती है। फिर वो क्यों ऐसी आस्ति अपने हाथ से जाने दे रही है जिसका रणनीतिक मूल्य हो सकता है?

पुनीत गोयनका, जो सुभाष चंद्रा के बेटे और ज़ेडईईएल के प्रबंध निदेशक व सीईओ हैं, साफ तौर पर मानते हैं कि प्रमुख स्पोर्टिंग प्रॉपर्टीज़ के प्रसारण अधिकारों का दाम आगे बढ़ना ही है। अभी तक की तीन घोड़ों की दौड़ में ज़ेडईईएल ने बहुत भागमभाग नहीं दिखाई और सचेत निर्णय लिया कि उसे स्पोर्ट्स बिजनेस के सालाना नुकसान को 100 करोड़ रुपए की रेंज में रखना है।

उसने खुद को दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, पाकिस्तान, वेस्टइंडीज व जिम्बाब्वे के पांच क्रिकेट बोर्डों और डब्ल्यूडब्ल्यूई के प्रसारण अधिकारों तक सीमित रखा और महंगी बोलियों के चक्कर में नहीं पड़ी। फोकस इस पर था कि जो अधिकार उसने हासिल कर रखे हैं, उन्हें बनाए रखा जाए।

Ten-sports-network-coverज़ी ने साल 2006 में जब दुबई आधारित अब्दुल रहमान बुखातिर के ताज ग्रुप का 50 प्रतिशत मालिकाना खरीदा तो उसने 5.7 करोड़ डॉलर (2006 की विनिमय दर पर 2.6 अरब रुपए) अदा किए। इसके ऊपर से उसका 45 प्रतिशत मालिकाना उसने साल 2010 में 4.4145 करोड़ डॉलर (2.1 अरब रुपए) में खरीदा। बाकी बचा 5 प्रतिशत मालिकाना उसने 2011 में 20 करोड़ रुपए में खरीद लिया। पिछले दस सालों में ज़ी एंटरटेनमेंट को स्पोर्ट्स बिजनेस से कुल मिलाकर 640 करोड़ रुपए का परिचालन घाटा (ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास व अमोर्टिजेशन से पूर्व) हुआ है।

ज़ेडईईएल के टॉप बॉसों को अहसास हुआ कि तीन घोड़ों की दौड़ में इस घाटे की छाया बनी रहेगी। समेकन के बिना, खेल संपत्तियों को हासिल करने की कीमत बढ़ती जाएगी और स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग शायद लाभदायक नहीं बन पाएगा।

बड़ा दांव लगा चुके सोनी और स्टार इंडिया अपने स्पोर्ट्स बिजनेस को हाथ से जाने नहीं देंगे। इसलिए क्यों न ज़ी इस मैदान से हट जाए, उसी तरह जैसे ईएसपीएन ने 2012 में ईएसपीएन स्टार स्पोर्ट्स में अपना 50 प्रतिशत इक्विटी हिस्सा संयुक्त उद्यम पार्टनर स्टार को बेचकर निकल गया था?

तीन बड़े खिलाड़ियों के दौर में महत्वपूर्ण खेल संपत्तियों के प्रसारण अधिकारों में कोई मंदी नहीं दिखी। केवल स्टार इंडिया द्वारा हासिल, इंग्लिश प्रीमियर लीग (ईपीएल) के दाम तीन सालों के पिछले चक्र के 14.5 करोड़ डॉलर से घटकर नए चक्र में लगभग 9.9 करोड़ डॉलर पर आ गए।

यूरोस्पोर्ट को हासिल करने के बाद डिस्कवरी इंडिया उसे भारत लाने की सोच रहा था। लेकिन उसे लगा कि अभी बाजार की जैसी संरचना है, उसमें नए खिलाड़ी के लिए स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग से पैसे नहीं बनाए जा सकते तो उसने यूरोस्पोर्ट को भारत में लॉन्च करने की योजना रोक दी।

भारत में स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग में तीन बड़े खिलाड़ियों का ही राज चलता रहा। सोनी के पास आईपीएल के अधिकार, स्टार इंडिया के पास बीसीसीआई के अधिकार और ज़ी के पास पांच क्रिकेट बोर्डों व डब्ल्यूडब्ल्यूई के अधिकार बने रहे। स्थानीय लीग के बीच, प्रो कबड्डी लीग स्टार के तहत एक बढ़ती संपत्ति बन गया।

आईपीएल अधिकारों के नए चक्र पर सोनी और स्टार के बीच भयंकर जंग होने जा रही है। इससे पुरानी व्यवस्था दरक रही है। इस तरह की अटकलें हैं कि आईपीएल के प्रसारण अधिकारों की कीमत पहले से दोगुनी हो सकती है। ऐसे में सोनी टेन स्पोर्ट्स को खरीद कर बाजार को सुदृढ़ करना चाहता है। इस सौदे से जहां उसका पैमाना बढ़ जाएगा, वहीं सोनी आईपीएल को गंवाने के किसी भी आशंका के जोखिम को संतुलित करने की स्थिति में आ जाएगा।

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के सीईओ एन पी सिंह की मुख्य दौड़ आईपीएल को पकड़ने रखने की है, जो दुनिया की सबसे आकर्षक क्रिकेट संपत्ति बन गई है। वे फिर से आईपीएल को सोनी के लॉकर में ही रखना चाहेंगे।

किसी को इसे सस्ता होने की उम्मीद है। लेकिन इसकी कीमत अगर समझदारी से परे चली जाती है तो सिंह इसे हाथ से जाने देने के लिए तैयार है। उनके पास पहले इनकार का अधिकार है और किसी भी प्रतिस्पर्धी की बोली के बराबर बोली लगाने का अधिकार है। ऐसे में वे आईपीएल पर अंतिम फैसला लेने से पहले सभी कारकों पर निश्चित रूप से गौर करेंगे।

एक मीडिया विश्लेषक ने कहा, “टेन स्पोर्ट्स और आईपीएल के अधिकारों का अधिग्रहण एक साथ चल सकता हैं। सोनी आक्रामक खेल खेल सकता हैं और समेकित बाजार में दोनों को हासिल कर सकता है। यह सब इस पर निर्भर करता है कि उसकी भूख कितना बड़ी है।”

टेन स्पोर्ट्स के अधिग्रहण से सोनी की स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग में बढ़ती ताकत में इजाफा होगा जो उसने सालोंसाल से नकदी-संपन्न आईपीएल के इर्दगिर्द बनाई है। सोनी अब अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल का ठौर बन चुका है और उसके पास बास्केटबॉल, फाइट स्पोर्ट्स व टेनिस जैसे अन्य खेलों के प्रसारण अधिकार हैं। वहीं, ज़ी के खेल नेटवर्क में टेन 1, टेन 2, टेन 3, टेन 1 एचडी और टेन गोल्फ एचडी जैसे चैनल शामिल हैं।

इस सौदे से सोनी को फुटबॉल में फीफा व यूएफा जैसे बड़े टूर्नामेंटों के साथ यूएफा चैम्पियंस लीग को जोड़ने में मदद मिल जाएगी। टेन स्पोर्ट्स के पास बार्का टीवी, चेल्सी टीवी और आर्सेनल टीवी जैसी क्लब टीवी प्रोग्रामिंग भी है। टेन स्पोर्ट्स के सीईओ राजेश सेठी ने टेलिविज़न पोस्ट के पहले एक बातचीत में बताया था “हमारे पास साल भर में फैले 900 से ज्यादा मैच हैं।”

सोनी के पास अभी यूएफसी व टीएनए जैसे फाइट स्पोर्ट्स प्रॉपर्टीज़ है। अगर यह सौदा होता है तो उसे टेन स्पोर्ट्स से डब्ल्यूडब्ल्यूई भी मिल जाएगी।

सोनी को उम्मीद है कि टेन स्पोर्ट्स के आने से उसकी आय बढ़ जाएगी। साथ ही टेन स्पोर्ट्स का घाटा समेकन के फायदों के चलते मिट सकता है। बीते वित्त वर्ष 2015-16 में ज़ेडईईएल को अपने स्पोर्ट्स बिजनेस से 631.2 करोड़ रुपए की आय पर 34.9 करोड़ रुपए का परिचालन घाटा हुआ था।

मीडिया विश्लेषक का कहना है, “टेन स्पोर्ट्स को हासिल कर लेने से सोनी के पास डब्ल्यूडब्ल्यूई समेत जमकर साल भर चलनेवाला स्पोर्ट्स बिजनेस हो जाएगा। उसे स्तर बढ़ाने का भी फायदा मिलेगा।”

टेन स्पोर्ट्स के चैनलों के सोनी के अंतर्गत आ जाने से सब्सक्रिप्शन आय बढ़ जाएगी। एक ब्रॉडकास्टिंग कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने पहचान न जाहिर करने की शर्त पर कहा, “सोनी को टेन स्पोर्ट्स की मौजूदा वितरण आय ही नहीं मिलेगी, बल्कि चैनलों के मेल से उसकी संभावित पे-टीनी आय भी बढ़ जाएगी।”

दो खिलाड़ियों का मैदान हो जाने से स्टार और सोनी, दोनों को कंटेंट की लागत पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलेगी। उक्त अधिकारी का कहना है, “भारत में समेकन से दो स्पोर्ट्स राइट्स खरीदार हो जाने से लंबे समय में कंटेंट के महंगा होने की दर घट जानी चाहिए। प्रतिस्पर्धा जब दो तक सिमट जाएगी तो भारतीय स्पोर्ट्स बाज़ार में भावुकता का तत्व कम हो सकता है।”