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महिलाएं हफ्ते भर टेलिविज़न पर क्या-क्या, कब व कैसे देखती हैं

मुंबई: महिलाएं भारत में टेलिविज़न दर्शकों की संख्या का बड़ा हिस्सा हैं। टीवी देखने के उनके पैटर्न को समझना प्रसारण अधिकारियों, कंटेंट निर्माताओं, विज्ञापनदाताओं और शोधकर्ताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो गया है।

तो, महिलाएं सप्ताह के दौरान टीवी उपभोक्ताओं के रूप में कैसा बर्ताव करती हैं? वे शाम 7 बजे से रात 10 बजे के स्लॉट के दौरान भारी मात्रा में फिक्शन देखती हैं। यह इस तथ्य से भी साबित होता है कि सामान्य मनोरंजन चैनल सप्ताह के दिनों में इन स्लॉट पर सबसे अधिक निवेश करते रहे हैं। दोपहर में, महिलाएं ज़्यादातर फिल्में देखती हैं।

न्यूज़ कंटेंट सुबह के घंटों के दौरान पसंद किया जाता है। बच्चों के लिए टीवी देखने में महिला दर्शकों की संख्या की हिस्सेदारी शहरी व ग्रामीण, भारत के दोनों इलाकों में सुबह के शुरुआती स्लॉट में उच्चतम है।

women-watching-tv-coverयह नोट करना महत्वपूर्ण है कि सप्ताह के दिन महिला दर्शकों की संख्या का पैटर्न फिक्शन कार्यक्रमों में सबसे ज़्यादा समय देते हुए शहरी, ग्रामीण व मेगा शहरों में लगभग समान है।

फिक्शन कार्यक्रमों की खपत शाम 7 से रात 10 बजे के स्लॉट के दौरान सबसे अधिक है और इन तीनों बाज़ारों में इस समय के स्लॉट में दर्शकों की संख्या में इनकी हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से ऊपर है। यह हिस्सेदारी ग्रामीण इलाकों में सबसे अधिक है और उसके बाद शहरी इलाके और मेगा शहरों का नंबर आता है।

फिक्शन कंटेंट देखने में महिला दर्शकों की हिस्सेदारी सिर्फ सुबह के समय बैंड सुबह 7 बजे से 10 बजे तक के बैंड को छोड़कर अन्य समय बैंड में भी अच्छी है। इस समय खबरें, बच्चों के शो और म्यूज़िक ज़ॉनर की खासी खपत होती है। यहां तक कि इस समय बैंड में फिक्शन तीनों बाज़ारों में सबसे ऊपर है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस समय बैंड की हिस्सेदारी अन्य समय बैंड की तुलना में थोड़ी कम है।

फिक्शन कार्यक्रमों के बाद, फिल्म तीनों बाज़ारों में सप्ताह के दिनों के दौरान महिलाओं के बीच दूसरा सबसे पसंदीदा ज़ॉनर है। महिलाओं के बीच इस ज़ॉनर की खपत दोपहर 1 से 4 बजे के बीच, दिन के दूसरे भागों की तुलना में अपेक्षाकृत ज़्यादा है। फिल्मों की खपत शहरी और मेगा शहरों की तुलना में ग्रामीण बाज़ारों में अधिक है।

ये टीवी रेटिंग एजेंसी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसी) के निष्कर्ष हैं। वह विविध समय बैंड में और अलग-अलग बाज़ारों में महिला दर्शकों की संख्या पैटर्न डीकोड कर रही है।

ये डेटा 15+ महिलाओं की आयु वर्ग (सप्ताह 1 से 16 तक के लिए) के लिए है। 7 से 11.30 बजे के टाइम बैंड की रिपोर्टिंग की गई है। फिलर्स और लापता फ़ीड को, कार्यक्रम विषय टाइम टेबल में नहीं लिया गया है।

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पारंपरिक ज्ञान के विपरीत, यह लक्षित ग्रुप न्यूज़ संबंधित कंटेंट भी खूब देखता है खासकर सुबह 7 से 10 बजे के दौरान यह ज़ॉनर सबसे आगे है। रात 10 से 11.30 बजे का स्लॉट एकमात्र अन्य स्लॉट है जिसमें खबर की खपत दोहरे अंक में है। अधिकांश अन्य समय बैंड में, यह एक अंक में होती है।

फिक्शन कंटेंट का शेयर सुबह के समय बैंड में शहरी और ग्रामीण बाज़ारों में खबरों की तुलना में अधिक है, पर ये जॉनर मेगा शहरों में बराबर की हिस्सेदारी पाते हैं।

बच्चों के ज़ॉनर की खपत खासकर जल्दी वाले समय बैंड में काफी है। बच्चों में महिला दर्शकों की संख्या सुबह 7 से 10 बजे के दौरान सबसे ज़्यादा है। यह हिस्सेदारी शहरी और ग्रामीण, भारत के दोनों इलाकों में किसी भी अन्य समय बैंड की तुलना में ज़्यादा है। मेगा शहरों में टीवी देखने का पैटर्न सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक एक समान रहता है।

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क्या हिंदी भाषी बाज़ार (एचएसएम) और दक्षिण में महिला दर्शक संख्या के पैटर्न में कोई अंतर है? जब फिक्शन की बात आती है, तो वहां कोई भारी बदलाव नहीं हैं। हालांकि, न्यूज़ और फिल्म जॉनर की खपत एचएसएम की तुलना में दक्षिण में महिलाओं के बीच अधिक होती है।

शहरी, ग्रामीण व मेगा शहरों के लिए सप्ताह के दिन के समय बैंड का विश्लेषण

सुबह 7 से 10 बजे का बैंड

बीएआरसी के अध्ययन के अनुसार, न्यूज़ और गैर फिक्शन सीरीज़ का कंटेंट सुबह के समय बैंड में शहर की तरफ ज़्यादा झुका हुआ है। जबकि फिल्में और बच्चों के कार्यक्रम के प्रति झुकाव ग्रामीण भारत में ज़्यादा है। वास्तव में, शहरी, ग्रामीण और मेगा शहरों में किसी भी दिन के भाग की तुलना में सुबह के दौरान बच्चों, म्यूज़िक और न्यूज़ के कार्यक्रम सबसे ज़्यादा देखे जाते हैं।

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सुबह 10 से दोपहर 1 बजे का बैंड

फिक्शन में महिला दर्शकों की संख्या की हिस्सेदारी दिन के अन्य भागों की तुलना में दोगुनी से अधिक हो जाती है और शहरी, ग्रामीण और मेगा शहरों में न्यूज़, म्यूज़िक और बच्चों के कंटेंट की खपत में गिरावट आती है।

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दोपहर 1 से 4 बजे का बैंड

दोपहर आते-आते न्यूज़, म्यूज़िक, और बच्चों के कंटेंट के दर्शकों की संख्या में हिस्सेदारी मामूली रूप से कम होती है और शहरी, ग्रामीण और मेगा शहरों में सीरीज़ देखी जानी जारी रहती है। इस दिन के भाग के दौरान शहरी, ग्रामीण और मेगा शहरों में कंटेंट के रूप में सिनेमा की खपत सबसे अधिक है।

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दोपहर 4 से शाम 7 बजे का बैंड

शहरी भारत, ग्रामीण भारत और मेगा शहरों से भारतीय महिलाओं की फिल्म की खपत इस समय कम हो जाती है और न्यूज़, बच्चों के शो और म्यूज़िक की खपत मामूली रूप से बढ़ जाती है। यह फिल्म जैसे लंबे समय के कंटेंट के लिए टीवी देखने के समय की कम उपलब्धता का नतीजा हो सकता है।

शाम 7 से रात 10 बजे का बैंड

इस दिन के भाग के दौरान, शहरी, ग्रामीण और मेगा शहरों में भारतीय महिलाओं की हिस्सेदारी न्यूज़, म्यूज़िक, बच्चों के शो और फिल्मों में बहुत कम होकर फिक्शन सीरीज़ की खपत में खूब ज़्यादा बढ़ जाती है। यह तथ्य, पारंपरिक ज्ञान से बहुत ज्यादा मेल खाता है।

रात 10 से 11.30 बजे का बैंड

इस समय के बैंड में फिक्शन के शेयर में तेज़ गिरावट आती है, जबकि न्यूज़ की हिस्सेदारी दिन के बाकी हिस्सों से बढ़ जाती है। भारतीय महिलाओं की गैर-फिक्शन देखने में हिस्सेदारी तेज़ी से ऊपर चली जाती है।

एचएसएम बनाम दक्षिण

जहां तक फिक्शन कंटेंट की बात है हिंदी भाषी बाज़ार (एचएसएम) और दक्षिण में महिला दर्शकों की संख्या के पैटर्न में कोई भारी बदलाव नहीं हैं।

हालांकि, न्यूज़ और फिल्म जॉनर की खपत एचएसएम की तुलना में दक्षिण में महिलाओं के बीच अधिक होती है। बच्चों में महिला दर्शकों की संख्या, दक्षिण की तुलना में एचएसएम में अधिक है।

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एक ठेठ काम करने के दिन, दक्षिण में महिलाएं, टीवी पर न्यूज़ और नॉन-फिक्शन कंटेंट के साथ अपने दिन की शुरुआत करती है। जबकि एचएसएम में महिलाओं को ‘फिक्शन सीरीज़’, ‘न्यूज’ और ‘बच्चों’ के शो के साथ अपने दिन की शुरुआत करना ज़्यादा पसंद हैं।

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सप्ताह के दौरान और सप्ताहांत दोनों पर एचएसएम और दक्षिणी बाज़ार से महिलाओं की, किसी अन्य समय बैंड की तुलना में सुबह के समय बैंड में म्यूज़िक और बच्चों से संबंधित कंटेंट की अपेक्षाकृत अधिक हिस्सेदारी है।