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दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर एसटीवी व महुआ के लाइसेंस बहाल किए गए

मुंबई: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने महुआ मीडिया और एसटीवी एंटरप्राइजेज के निरस्त किए गए टीवी चैनल लाइसेंस बहाल कर दिए हैं। उसने दिल्ली हाई कोर्ट से यह आदेश मिलने के बाद ऐसा किया है जिसमें कहा गया था कि अगला आदेश आने तक इनके लाइसेंस बहाल कर दिए जाएं।

एसटीवी एंटरप्राइजेज के चार नए लाइसेंस बहाल किए गए हैं। इनमें पंजाब टुडे, एसटीवी जम्मू-कश्मीर न्यूज़, एसटीबी हरियाणा न्यूज़ और एसटीवी यूपी न्यूज़ शामिल है।

महुआ मीडिया के पांच टीवी लाइसेंस बहाल किए गए हैं। इनमें से तीन न्यूज़ और दो अन्य विषयों के चैनल लाइसेंस हैं। तीन न्यूज़ लाइसेंस उसे महुआ, महुआ न्यूज़ और फर्स्ट इंडिया के नाम से दिए गए थे, जबकि दो गैर-न्यूज़ लाइसेंस महुआ म्यूज़िक और महुआ मूवीज़ के नाम से मिले थे।

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महुआ के लाइसेंस इसी साल 3 मार्च को रद्द किए गए थे, जबकि एसटीवी एंटरप्राइजेज के लाइसेंस 21 जुलाई को रद्द हुए थे। दोनों कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने का कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सुरक्षा मंजूरी देने से इनकार करना बताया गया था।

कंपनियों ने यह दलील देते हुए लाइसेंस रद्द करने के मंत्रालय के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दे दी कि सरकार ने सुरक्षा मंजूरी न देने के लिए कारण स्पष्ट नहीं किए हैं और ऐसा करने की जो वजहें बताई भी हैं, वे कानून के सामने कहीं टिकती नहीं हैं।

महुआ की याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करते हुए जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कंपनी को उसके टीवी चैनलों को अपलिंक व डाउनलिंक करने की अनुमति दे दी।

सभी पक्षों के हितों की रक्षा करने के लिए, बेंच ने महुआ को निर्देश दिया कि वो अदालत की अनुमति के बिना अपनी शेयरधारिता या लाइसेंस या कोई भी संपत्ति किसी अन्य को ट्रांसफर न करे।

उसने यह भी साफ किया कि महुआ के ऊपर राष्ट्रीय सुरक्षा के उल्लंघन का मामला नहीं बनता और उसके ऊपर जो आपराधिक मामले हैं, वे सीबीआई अदालत में विचारधीन चल रहे हैं।

महुआ के प्रवर्तकों के ऊपर आरोप है कि उन्होंने जाली व झूठे दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से भारी मात्रा में उधार लेकर उनके साथ धोखाधड़ी की है।

एसटीवी के मामले में जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने एक तात्कालिक अंतरिम आदेश जारी किया और याचिकाकर्ता को उसके चैनल अपलिंक व डाउनलिंक करने की इजाजत दे दी।

बेंच ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जो मसला उठाया है, कंपनी का प्रथमदृष्टया उससे कोई सीधा वास्ता नहीं है और इस मसले से राष्ट्रीय सुरक्षा का कोई उल्लंघन नहीं होता।