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एनडीटीवी ने टीवी बिजनेस का घाटा कम किया, डिजिटल व ई-कॉमर्स से उत्साहित

मुंबई: न्यूज़ ब्रॉडकास्टर कंपनी, एनडीटीवी लिमिटेड जहां एक तरफ कम विज्ञापन मिलने और ज्यादा कैरेज़ लागत के बावजूद समाचारों के अपने मूल बिजनेस का कायाकल्प करने में लगी है, वहीं वो अब डिजिटल व ई-कॉमर्स क्षेत्र में पैर जमाने पर फोकस कर रही है।

एनडीटीवी चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मुख्यतः आय में वृद्धि और परिचालन व प्रशासनिक खर्च पर कड़े नियंत्रण के दम पर समेकित और स्टैंडएलोन, दोनों ही स्तर पर अपना शुद्ध घाटा कम करने में कामयाब रही है।

30 सितंबर 2015 को समाप्त तिमाही में उसका शुद्ध घाटा (टैक्स, अल्पमत हित व सहयोगी के हिस्से के बाद) 17.19 करोड़ रुपए रहा है, जबकि साल भर पहले की समान अवधि में उसका शुद्ध घाटा 26.89 करोड़ रुपए रहा था।

एनडीटीवी के बिजनेस पर एक नज़र

Chandra-Vikramकंपनी के दूसरी तिमाही के वित्तीय प्रदर्शन के बारे में बात करते हुए एनडीटीवी समूह के सीईओ विक्रम चंद्रा ने टेलिविज़न पोस्ट के बताया कि एनडीटीवी अब डिजिटल और ई-कॉमर्स में भी उतर चुकी है।

इसलिए ज़रूरी है कि टेलिविज़न, डिजिटल कंटेंट और ई-कॉमर्स के तीन कारोबारों को अलग-अलग देखा जाए क्योंकि इनमें से हर किसी का पैमाना अलग है। चंद्रा ने कहा, “आप इन तीनों को मिला नहीं सकते। टीवी के मामले में पैमाना परिचालन लाभप्रदता को देखना है, जबकि डिजिटल कंटेंट में पैमाना आय बनेगी। वहीं, ई-कॉमर्स में हम स्वाभाविक रूप से कुछ समय तक घाटे की उम्मीद करेंगे। लेकिन वहां जीएमवी (ग्रॉस मर्कैडाइज़ वैल्यू) और फंडिंग हासिल करना वगैरह ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।”

उन्होंने आगे कहा कि टीवी के साथ-साथ डिजिटल कंटेंट के भी मामले में कंपनी ने मुनाफे को बनाए रखने की कोशिश की है और पहली दो तिमाहियों के बावजूद, टीवी और सहायक व्यवसाय परिचालन के स्तर पर लाभदायक हैं।

दूसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा के मौके पर कंपनी की तरफ से बताया गया है, “एनडीटीवी समूह (ई-कॉमर्स को छोड़कर) को 2 करोड़ रुपए का परिचालन लाभ हुआ है, जबकि साल भर पहले की समान अवधि में उसे 8.5 करोड़ रुपए का परिचालन घाटा लगा था।”

एनडीटीवी के टेलिविज़न व संबद्ध बिजनेस की आय सितंबर 2015 की तिमाही में साल भर पहली की तुलना में 16.5 प्रतिशत बढ़ी है। इस दौरान डिजिटल बिजनेस व ई-कॉमर्स की आय में हुई वृद्धि की मदद से कंपनी की परिचालन आय  15.6 प्रतिशत बढ़कर 127.60 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में यह 110.38 करोड़ रुपए रही थी।

लेकिन कैरेज़ फीस व मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और प्रमोशनल खर्चों ने कंपनी की चुभन बनाए रखी है। आलोच्य तिमाही में उसका यह खर्च साल भर पहले के 24.96 करोड़ रुपए से 21.3 प्रतिशत बढ़कर 30.28 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

इस बीच एनडीटीवी कन्वर्जेंस की परिचालन आय साल भर पहले की समान अवधि की तुलना में 32 प्रतिशत बढ़ गई है। साथ ही उसके खर्च भी साल भर पहले के 132.43 करोड़ रुपए से 12.34 प्रतिशत बढ़कर 148.77 करोड़ रुपए पर पहुंच गए।

इस दौरान उसका परिचालन से हुआ घाटा (अन्य आय, वित्तीय ल गत व अतिरिक्त मदों को छोड़कर) 21.17 करोड़ रुपए रहा है। यह साल भर पहले की समान अवधि के परिचालन घाटे 22.05 करोड़ रुपए से ज़रा-सा कम है।

वहीं, साल भर पहले की तुलना में उसकी प्रोडक्शन लागत 21.64 करोड़ रुपए से 26.7 प्रतिशत बढ़कर 27.41 करोड़ रुपए हो गई, जबकि कर्मचारियों पर किया गया खर्च 45.65 करोड़ रुपए से बढ़कर 47.63 करोड़ रुपए पर जा पहुंचा।

NDTV-Q2-FY16

स्टैंडएलोन बिजनेस

एनडीटीवी के न्यूज़ चैनल बिजनेस (एनडीटीवी 24×7, एनडीटीवी इंडिया और हाइब्रिड चैनल एनडीटीवी प्रॉफिटt/ प्राइम को मिलाकर स्टैंडएलोन न्यूज़ बिजनेस) को सितंबर 2015 की तिमाही में 7.11 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ है। साल भर पहले उसका घाटा 20.18 करोड़ रुपए रहा था।

इस दौरान उसकी आय साल भर पहले के 79.13 करोड़ रुपए से बढ़कर 97.53 करोड़ रुपए पर पहुंच गई।

चंद्रा कहते हैं, “घाटा कम हो रहा है। आगे की बात करें तो तीसरी व चौथी तिमाही में स्टैंडएलोन न्यूज़ बिजनेस में सुधार आएगा। साथ ही न्यूज़ बिजनेस में बाहरी माहौल चीजों को बदल दिया करता है। हम अब भी डिजिटलीकरण के असर के सामने आने का इंतज़ार कर रहे हैं। और, हम उचित रेटिंग सिस्टम के भी असर दिखाने का इंतज़ार कर रहे हैं।”

कंपनी को न्यूज़ के कामकाज़ से अन्य आय, वित्तीय लागत व अतिरिक्त मदों को किनारे रखने पर 3.96 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। साल भर पहले की समान अवधि में यह घाटा 15.65 करोड़ रुपए रहा था।

कन्वर्जेंस बिजनेस में मजबूती

एनडीटीवी ने कहा है कि उसके कन्वर्जेंस बिजनेस ने साल भर पहली तुलना में 32 प्रतिशत वृद्धि हासिल की है।

हालांकि कंपनी को इस बार कन्वर्जेंस से 1 करोड़ रुपए का परिचालन लाभ (ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास व अमोर्टिजेशन से पूर्व लाभ) हुआ, जबकि साल भर पहले की समान अवधि में यह 3 करोड़ रुपए रहा था। आलोच्य तिमाही में उसे इस बिजनेस के कोई लाभ या नुकसान नहीं हुआ है।

वैसे, चंद्रा हाल ही में जारी की गई अप्रैल से जून 2015 तक टेलिवेब सिस्टम मीट्रिक से काफी उत्साहित हैं। इसमें फेसबुक और यूट्यूब के ठीक बाद मोबाइल साइटों के बीच एनडीटीवी.कॉम (ndtv.com) का तीसरा स्थान है।

चंद्रा कहते हैं, “साफ कहूं तो इससे हमें भी आश्चर्य हुआ कि ndtv.com मोबाइल पर तीसरी सबसे ज्यादा देखी गई वेबसाइट है। यह बहुत अहम बात है और हम डिजिटल ताकत का फायदा उठाना जारी रखेंगे।”

तिमाही के दौरान एनडीटीवी कन्वर्जेंस ने ताबूला (Taboola) के साथ तीन साल के डिजिटल आय सौदे पर दस्तखत किए। उसे सौदे की अवधि में कुल 90-100 करोड़ रुपए की आय हासिल करने की उम्मीद है।

ई-कॉमर्स उद्यम

कंपनी का ई-कॉमर्स उद्यम अभी भी घाटे का बिजनेस बना हुआ है। ऐसे में उसने अपने गैजेट व ई-कॉमर्स बिजनेस के लिए लगभग 8 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटा ली है।

एनडीटीवी के ई-कॉमर्स बिजनेस को दूसरी तिमाही में 13 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है, जबकि साल भर पहले की समान अवधि में उसका घाटा 4 करोड़ रुपए रहा था।

हालांकि इस दौरान इस बिजनेस से उसकी आय साल भर पहले के दो करोड़ रुपए से दोगुनी होकर चार करोड़ रुपए पर पहुंच गई।