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एनडीटीवी: न्यूज़ बिजनेस को हुआ वित्त वर्ष 2015 में परिचालन लाभ

मुंबई: एनडीटीवी का न्यूज़ बिजनेस 31 मार्च 2015 को खत्म वित्त वर्ष 2014-15 में परिचालन के स्तर पर मुनाफे में आ गया है। कंपनी के इन बिजनेस में अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनल (एनडीटीवी 24×7), हिंदी न्यूज़ चैनल (एनडीटीवी इंडिया) और मिश्रित चैनल एनडीटीटी प्रॉफिट/प्राइम शामिल है।

एनडीटीवी के न्यूज़ बिजनेस ने स्टैंडएलोन आधार पर वित्त वर्ष 2014-15 में अन्य आय, वित्तीय लागत व असामान्य मदों को हटा दें तो 9.64 करोड़ रुपए का लाभ कमाया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2013-14 में उसे 46.96 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था।

कंपनी का न्यूज़ बिज़नेस से शुद्ध घाटा अब कम होकर 25.58 करोड़ रुपए पर आ गया है, जबकि साल भर पहले यहग 53.56 करोड़ रुपए था। इसमें से भी अगर हम डूबत आय के प्रावधानों को हटा दें तो घाटा कम होकर 6.58 करोड़ रुपए पर आ जाता है।

Chandra-Vikramएनडीटीवी ग्रुप के सीईओ विक्रम चंद्रा ने टेलिविज़न पोस्ट को बताया, “इस वित्त वर्ष में हमें अपने चैनलों पर काफी ज्यादा ध्यान लगाया। एनडीटीवी 24×7 तो हमेशा से लाभ में था, एनडीटीवी इंडिया नहीं था और एनडीटीवी प्रॉफिट को काफी ज्यादा नुकसान हो रहा था। इस वित्त वर्ष में 24×7 तो मुनाफे में रहा ही। साथ में हमने एनडीटीवी प्रॉफिट/प्राइम में परिचालन लाभ (ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास व अमोर्टिजेशन) के स्तर पर ब्रेकइवेन हासिल कर लिया है और एनडीटीवी प्रॉफिट परिचालन के स्तर पर लाभ में आ गया है।”

विक्रम चंद्रा ने कहा, “खासतौर पर टेलिविज़न के लिहाज़ से इस साल परिचालन के पहलुओं में बड़ा कायाकल्प हुआ है।”

एनडीटीवी प्रॉफिट/प्राइम लगातार तीसरी तिमाही में एबिट्डा या परिचालन लाभ के मायने में ब्रेकइवेन की स्थिति में रहा है। एनडीटीवी प्राइम को युवा दर्शकों के चैनल के रूप में पेश करने और जॉनर-विशेष के शो बैंड की वजह से एनडीटीवी प्रॉफिट/प्राइम की विज्ञापन आय बढ़ी है। नए व शो से एकदम जुड़े स्पांसरों को खींचने की बदौलत चैनल साल भर पहले की तुलना में 66 प्रतिशत बढ़ा है। कंपनी का कहना है कि मिश्रित चैनल बनने से पहले एनडीटीवी प्रॉफिट को तीन सालों से हर साल औसतन 40 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा था।

इस बीच, पिछले वित्त वर्ष में परिचालन के स्तर पर ब्रेकइवेन हासिल करनेवाले हिंदी न्यूज़ चैनल, एनडीटीवी इंडिया ने लगातार दूसरे साल आय का नया रिकॉर्ड बनाया है। वित्त वर्ष 2014-15 में चैनल ने 106 करोड़ रुपए की आय हासिल की है।

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लेकिन 20.15 करोड़ रुपए की वित्तीय लागत के साथ-साथ जयप्रकाश पावर के निवेश पर 7.8 करोड़ रुपए के नुकसान और  11.2 करोड़ रुपए के आस्थगित टैक्स के वाजिब प्रावधान से चैनल के लिए शुद्ध लाभ की स्थिति नहीं बन पाई।

चंद्रा बताते हैं, “कुछ एक ही बार के राइट-ऑफ हैं जिन्हें हमने इस साल लिया है। चूंकि यह अच्छा साल था। इसलिए हमने सोचा कि जो राइट-ऑफ करने हैं, वे कर लिए जाएं। इसलिए हमने जयप्रकाश पावर के निवेश और टैक्स आस्तियों को रफा-दफा कर दिया। टैक्स आस्तियां शायद आनेवाले सालों से फिर राइट-बैक कर ली जाएंगी।

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कंपनी के न्यूज़ बिजनेस की आय 2014-15 में 22.74 प्रतिशत बढ़कर 429.30 करोड़ रुपए हो गई है। पिछले वित्त वर्ष में न्यूज़ बिजनेस से उसे 349.77 करोड़ रुपए की आय हुई थी।

खर्चों का हिसाब-किताब

2014-15 में कंपनी के खर्च 5.8 प्रतिशत बढ़कर 419.66 करोड़ रुपए पर पहुंच गए। पिछले वित्त वर्ष में उसका खर्च 396.73 करोड़ रुपए रहा था। इस बार उसका ज्यादा खर्च प्रोडक्शन पर हुआ है। यह वित्त वर्ष 2013-14 में 56.83 करोड़ रुपए था, जबकि इस साल 41.7 प्रतिशत बढ़कर 80.51 करोड़ रुपए हो गया।

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इस बार उसकी कर्मचारी लागत पिछले साल के 135.52 करोड़ रुपए से मात्र 1.2 प्रतिशत बढ़कर 138.11 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। वहीं, मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन व प्रमोशनल खर्च 78.31 करोड़ रुपए से 4.2 प्रतिशत बढ़कर 81.61 करोड़ रुपए हो गया।

स्टैंडएलोन ऋण

स्टैंडएलोन रूप से कंपनी का सकल ऋण अभी 161.95 करोड़ रुपए है, जबकि उसके पास कैश व कैश समतुल्य रकम 19.26 करोड़ रुपए की है। इस तरह उसका स्टैंडएलोन शुद्ध ऋण 31 मार्च 2015 तक की स्थिति के अनुसार 142.69 करोड़ रुपए का है।

चौथी तिमाही का प्रदर्शन

31 मार्च 2015 को समाप्त तिमाही में न्यूज़ बिजनेस से एनडीटीवी की आय 33.39 प्रतिशत बढ़कर 120.34 करोड़ रुपए हो गई। साल भर पहले की समान अवधि में यह 90.22 करोड़ रुपए रही थी। दूसरी तरफ मार्च तिमाही में उसके खर्चों में मात्र 3.75 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

इसमें भी सबसे ज्यादा 38 प्रतिशत की वृद्धि प्रोडक्शन खर्च में हुई है जो 23.92 करोड़ रुपए पर पहुंच गए। इस दौरान कंपनी के न्यूज़ बिजनेस में कर्मचारी लागत 5 प्रतिशत बढ़कर 33.99 करोड़ रुपए हो गई।

नोट करने की बात यह है कि मार्च तिमाही के दौरान उसका मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन व प्रमोशनल खर्च 2.6 प्रतिशत और प्रशासनिक खर्च  11.04 प्रतिशत घटा है।

चौथी तिमाही में इस सेगमेंट का शुद्ध घाटा 10.69 करोड़ रुपए रहा है जिसमें कुछ असामान्य राइट-ऑफ शामिल हैं।

लेकिन परिचालन के स्तर पर कंपनी का स्टैंडएलोन रूप से 12.13 करोड़ रुपए (अन्य आय, वित्तीय लागत व असामान्य मदों को छोड़कर) का शुद्ध लाभ हुआ है, जबकि साल भर पहले की समान तिमाही में उसे 14.07 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ था।

समेकित बिजनेस का हाल

समेकित आधार पर ई-कॉमर्स बिजनेस ने एनडीटीवी के शुद्ध लाभ में सेंध लगाना जारी रखा है।

एनडीटीवी को 31 मार्च 2015 को समाप्त वित्त वर्ष 2014-15 में 44.03 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा लगा है। पिछले साल उसका समेकित घाटा 81.18 करोड़ रुपए रहा था।

इसमें से अकेले ई-कॉमर्स बिजनेस का शुद्ध घाटा 26 करोड़ रुपए रहा है। वैसे, इसमें जैसा कि पहले बताया जा चुका है, 19 करोड़ रुपए का राइट-ऑफ शामिल है।

चंद्रा से साफ किया कि अगर असामान्य मदों और ई-कॉमर्स को किनारे रखे दें तो एनडीटीवी परिचालन और टैक्स-बाद, दोनों ही रूप से फायदे में है।

चंद्रा का कहना था, “हमारे तीन बिजनेस है – टीवी, डिजिटल (एनडीटीवी कन्वर्जेंस), और ई-कॉमर्स जिसे हमने दो साल पहले शुरू किया। टेलिविज़न बिजनेस का इस साल कायाकल्प हो गया, जबकि डिजिटल बिजनेस में शानदार वृद्धि हुई है और उसकी आय अब तक सबसे ज्यादा स्तर, 107 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। ई-कॉमर्स में तो शुरुआती सालों में घाटा होता ही है, लेकिन बिजनेस ऐसा है कि उससे मूल्यांकन बढ़ जाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “एकाउंटिंग नियमों के मुताबिक, हमें अपने नतीजों में समेकित आधार पर आंकड़ों को मिलाकर पेश करना पड़ता है। इसलिए ई-कॉमर्स बिजनेस के 26 करोड़ रुपए घाटे के चलते हमें 44.03 करोड़ रुपए का घाटा लगा है। लेकिन हम ई-कॉमर्स बिजनेस पर मेहनत करना छोड़ नहीं रहे हैं। अगर आप कुल मिलाकर देखें तो हमने इस वित्त वर्ष में असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है।”

Con-EBITDAएनडीटीवी को समेकित रूप से वित्त वर्ष 2014-15 में 33 करोड़ रुपए का परिचालन लाभ हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2013-14 में उसे 29 करोड़ रुपए का परिचालन घाटा हुआ था। उसका यह भी कहना है कि ई-कॉमर्स बिजनेस को छोड़ दें तो कंपनी का समेकित परिचालन लाभ 2014-15 में 64 करोड़ रुपए रहा है, जबकि पिछले साल उसे 6 करोड़ रुपए का परिचालन घाटा हुआ था।

पिछले वित्त वर्ष में कंपनी के ई-कॉमर्स बिजनेस का परिचालन घाटा 24 करोड़ रुपए रहा था।

इस साल कंपनी की समेकित आय 24.33 प्रतिशत बढ़कर 571.28 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। पिछले वित्त वर्ष में यह 459.48 करोड़ रुपए रही थी। इस साल उसका खर्च पिछले साल के 550.91 करोड़ रुपए से 5 प्रतिशत से कम बढ़कर 577.89 करोड़ रुपए रहा है।

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इस दौरान उसका प्रोडक्शन खर्च साल भर पहले के 101.61 करोड़ रुपए से 18.35 प्रतिशत बढ़कर 120.25 करोड़ रुपए हो गया। वहीं कर्मचारी लागत 4.1 प्रतिशत बढ़कर 183.55 करोड़ रुपए हो गई, जबकि मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन व प्रमोशनल खर्च 5.6 प्रतिशत बढ़कर 106.57 करोड़ रुपए पर पहुंच गए।

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इस बीच कंपनी ने तीन अलग-अलग शाखाओं के नतीजे पेश किए। इसमें टेलिविज़न व संबद्ध बिजनेस (सभी चैनल व नॉन-डिजिटल और ई-कॉमर्स इतर बिजनेस), डिजिटल बिजनेस (एनडीटीवी कन्वर्जेंस) और ई-कॉमर्स (इंडियनरूट्स.कॉम) शामिल है।

टेलिविज़न व संबद्ध बिजनेस

इस साल कंपनी के टेलिविज़न व संबद्ध बिजनेस का पूरी तरह कायाकल्प हो गया है। पिछले वित्त वर्ष 2013-14 में उसे इससे 18 करोड़ रुपए का परिचालन घाटा हुआ था, जबकि इस बार 2014-15 में उसे 42 करोड़ रुपए का परिचालन लाभ हुआ है। असामान्य मदों को छोड़कर इस बार उसका शुद्ध लाभ 4 करोड़ रुपए रहा है, जबकि साल भर पहले उसे 64 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा लगा था।

डिजिटल: एनडीटीवी कन्वर्जेंस

एनडीटीवी का कहना है कि डिजिटल माध्यम पर आय की उसकी सभी धाराओं – वेब, वास (मूल्य-वर्धित सेवा) और एप्प, ने अच्छा प्रदर्शन किया है और कंपनी की आंतरिक अपेक्षा से भी ज्यादा आय हासिल की है।

वित्त वर्ष 2014-15 में एनडीटीवी कन्वर्जेंस की आय 47 प्रतिशत बढ़कर 107 करोड़ रुपए हो गई, जबकि इस बिजनेस से उसका परिचालन लाभ 22 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 11 करोड़ रुपए रहा है।

ई-कॉमर्स की स्थिति

एनडीटीवी का कहना है कि उसकी ई-कॉमर्स इकाई, इंडियनरूट्स.कॉम (IndianRoots.com) ने पिछले साल के 8 करोड़ रुपए की तुलना में इस साल 61 करोड़ रुपए का आठ गुना सकल मर्कैंटाइल मूल्य (जीएमवी) हासिल किया है।

सौदों की संख्या इस बार पिछले साल की तुलना में पांच गुना बढ़ गई। पिछले साल औसत ऑर्डर मूल्य (एओवी) 9000 रुपए था, जबकि इस साल 17,000 रुपए हो गया।

कंपनी को ई-कॉमर्स बिजनेस से इस साल 19 करोड़ रुपए की शुद्ध आय हुई है।

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समेकित ऋण की स्थिति

31 मार्च 2015 तक की स्थिति के अनुसार कंपनी का सकल समेकित ऋण 167.43 करोड़ रुपए है, जबकि उसकी कैश व कैश समतुल्य रकम 129.29 करोड़ रुपए है। इस दौरान उसका शुद्ध समेकित ऋण 38.14 करोड़ रुपए रहा है।

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