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टीवी एडिटरों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से चली अशांति की लहर

मुंबई: कामागारों की अशांति ने भारतीय टेलिविज़न उद्योग पर हमला बोल दिया है। इससे पहले कई हड़तालों को रोका गया था। लेकिन अब असंतोष का एक नया दौर छा गया है। दैनिक धारावाहिकों के निर्माता अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए शोज़ के एडिटरों के साथ बातचीत कर रहे हैं।

आखिर फिल्म व टीवी एडिटरों के एसोसिएशन को हड़ताल पर जाने के लिए किस बात ने उकसाया है?

यह कांटा इसलिए चुभा है कि फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने इमप्लॉयीज़ (एफडब्ल्यूआईसीई) और निर्माताओं के एसोसिएशन के बीच नए समझौते पर हस्ताक्षर करने में अत्यधिक विलंब हो रहा है। ज़्यादा मज़दूरी और काम करने की स्थिति में सुधार के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर अभी तक हस्ताक्षर किए जाने बाकी हैं। नवीनीकरण में आठ महीने की देरी के बाद इस पर 14 अक्टूबर को हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद थी।

एडिटरों के संगठन और एफडब्ल्यूआईसीई के प्रमुख कमलेश पांडे के बीच मंगलवार को हुई बैठक विफल हो गई। पांडे की इच्छा के विपरीत जाते हुए एडिटरों के संगठन ने हड़ताल पर जाने का फैसला ले लिया।

फिल्म व टीवी एडिटरों के एसोसिएशन के एक सदस्य के मुताबिक, मांग 90 दिन की एकमुश्त राशि के भुगतान के बजाय सभी एडिटरों के लिए बुनियादी भुगतान और मासिक मज़दूरी की है। उन्होंने कहा, “समझौता ज्ञापन में भी इतने ज़्यादा देरी हो गई है। हड़ताल पर जाना अपरिहार्य हो गया था।”

प्रोड्यूसर्स कह रहे हैं कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की प्रक्रिया चालू है। एक टीवी निर्माता ने नाम न छापने की शर्त पर टेलिविज़न पोस्ट को बताया, “एडिटर हड़ताल पर चले गए हैं। किसी को भी उनकी मांगों के बारे में पता नहीं है। एफडब्ल्यूआईसीई उन्हें नियंत्रित नहीं कर पा रहा है। एडिटर ज़बरदस्ती जूनियर एडिटरों को पीछे ठेल रहे हैं; उन्होंने लोगों को पीटा है। इसलिए हमने पुलिस से शिकायत की है।”

एफडब्ल्यूआईसीई से 22 यूनियन जुड़ी हैं। एडिटर्स एसोसिएशन उनमें से एक है। मूल संगठन को इन सभी यूनियनों को संतुष्ट रखने का चुनौती भरा काम करना पड़ता है।

एक हिन्दी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल के बिजनेस हेड ने हड़ताल अभी भी जारी रहने की पुष्टि की है।

उन्होंने कहा, “काम करना बहुत मुश्किल हो रहा है। प्रोड्यूसर्स और एफडब्ल्यूआईसीई समझौता ज्ञापन पर आगे बढ़ रहे हैं। इसलिए मुझे इस हड़ताल का कारण समझ में नहीं आता। यह जारी रही तो मूल शोज़ प्रभावित होंगे।”

कुछ प्रोड्यूसरों का कहना है कि वे जहां से संभव हो वहां से एडिटरों को लाने की कोशिश करेंगे। वे एडिटिंग के लिए अन्य शहरों में जाएंगे।

हालांकि, फिल्म और टीवी एडिटरों के एसोसिएशन के एक सदस्य ने कहा कि प्रतिशोध की भावना फैलेगी और और सभी शो प्रभावित होंगे।

त्योहारी सीज़न से पहले उद्योग को एक बीच का रास्ता उभरने की उम्मीद है।