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निक पर ‘ओगी एंड कॉकरोचेज़’ की वापसी, चैनल और मज़बूत करेगा आधार

मुंबई: एक तरह की घर वापसी में, फ्रेंच चेज़ कॉमेडी फ्रैंचाइज़ी शो ‘ओगी एंड कॉकरोचेज़’ निक पर वापस आ गया है। हालांकि वायाकॉम18 के इस बच्चों के चैनल ने ही इस शो की सबसे पहले शुरुआत की थी। लेकिन साल 2012 से यह कार्टून नेटवर्क पर चला गया था।

यह अधिग्रहण निक की मूल कंपनी वायाकॉम द्वारा किए गए चार साल के वैश्विक करार का हिस्सा है। निक अब 1 जनवरी 2015 से ‘ओगी एंड कॉकरोचेज़’ को दिखाना शुरू कर देगा।

Nina-Elavia-Jaipuria-EVP-GM-Nickelodeon-Sonic-India-5-150x150वायाकॉम18 मीडिया की ईवीपी और बच्चों के क्लस्टर की बिजनेस हेड  नीना जयपुरिया मानती है कि इस ‘घर वापसी’ का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता था क्योंकि यह चैनल की किस्मत पलटने का दौर है।

जयपुरिया कहती हैं, “हमें ‘ओगी एंड कॉकरोचेज़’ के राइट्स मिल गए हैं और हम इसे 1 जनवरी 2015 से लॉन्च करने को लेकर खुश हैं। यह हमारे लिए बहुत बड़ा कदम है और हमें नेतृत्व की अपनी स्थिति को और सुदृढ़ करने में मदद करेगा। हमें यह एकदम सही समय पर मिल गया।”

जयपुरिया का दावा है कि यह साल निक के लिए सभी मोर्चों पर शानदार रहा है चाहे वो रेटिंग्स हो या कमाई। वे कहती हैं, “हमारा लाभ-हानि खाता जबरदस्त दिख रहा है। निक इस साल अप्रैल से नवंबर के बीच पिछले साल की तुलना में 21 प्रतिशत बढ़ा है।”

OCR_SG_Logoटैम के आंकड़ों के मुताबिक, सीएस 4-14 एबीसी संपूर्ण भारत श्रेणी में बच्चों की श्रेणी जहां 7 प्रतिशत बढ़ी है, वहीं निक के दर्शकों में 21 प्रतिशत वृद्धि हुई है। यह सब्सक्राइबरों से प्राप्त आंकडे हैं। टेलिविज़न पोस्ट स्वतंत्र रूप से भारत की इस इकलौती रेटिंग एजेंसी, टैम मीडिया रिसर्च से डेटा प्राप्त नहीं कर सका।

दर्शकों में वृद्धि का मुख्य श्रेय ‘मोटू पतलू’ और ‘निन्जा हट्टोरी’ को जाता है। अब सोनिक पर जा रहे ‘पकड़म पकड़ाई’ ने भी थोड़ा योगदान दिया।

जयपुरिया संतुष्ट हैं कि निक के दोनों स्थानीय प्रोडक्शन अच्छे चल रहे हैं। उन्होंने कहा, “बहुत ही कम समय में ‘मोटू पतलू’ ने ‘निंजा हट्टोरी’ जितना हासिल करने में कामयाब रहा। जब ‘ओगी एंड कॉकरोचेज़’ हमसे अलग हुआ तो हमारे पास ‘निन्जा हट्टोरी’ इकलौता योद्धा बन गया था।”

आय में वृद्धि

जयपुरिया बताती हैं कि दर्शकों की संख्या के साथ-साथ चैनल की विज्ञापन आय में 15 प्रतिशत और सब्सक्रिप्शन आय में 20 प्रतिशत वृद्धि हो गई। विज्ञापन आय को बढ़ाने में 12 मिनट प्रति घंटे विज्ञापन समय की सीमा और ई-कॉमर्स व मोबाइल फोन निर्माताओं जैसे नए विज्ञापनदाताओं के आने का साथ मिला।

Motu-Patlu-Logoजयपुरिया थोड़े अफसोस के साथ कहती हैं, “इस श्रेणी की विज्ञापन बिक्री बढ़ रही है, लेकिन यह अब भी व्यापक स्तर पर अंडर-इडेक्स्ड है। यह जॉनर सी एंड 4+ वर्ग के दर्शकों में 9 प्रतिशत का योगदान करता है, लेकिन टीवी पर आनेवाले कुल विज्ञापनों में इसका हिस्सा 2 प्रतिशत से भी कम है। इस सुलझाने की ज़रूरत है और हमें यकीन है कि यह विसंगति जल्दी ही ठीक कर ली जाएगी।”

उन्होंने यह भी जिक्र किया कि बच्चों के उत्पादों के विज्ञापनदाता 60 प्रतिशत विज्ञापन आय उपलब्ध कराते हैं, जबकि बच्चों से इतर वर्ग के विज्ञापनदाताओं का योगदान 40 प्रतिशत रहता है।

विविध फ्रैंचाइजी पर फोकस

जयपुरिया को ‘निन्जा हट्टोरी’, ‘मोटू पतलू’ और ‘ओगी एंड कॉकरोचेज़’ के त्रिकोण में इतना दम लगता है कि उन्हें यकीन है कि यह निक को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। इन फ्रैंचाइज़ी की मौजूदगी निक को कंटेंट की विविधता भी दिलाती है और किसी एक फ्रैंचाइजी पर निर्भरता कम करती है।

Ninja-Hattorवे जोर देकर कहती हैं, “हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी एक या दो चरित्र पर निर्भर न रहें, बल्कि दर्शकों को बांधकर रखनेवाले चरित्रों का पूरा पोर्टफोलियो बना डालें।”

साल 2015 की योजनाएं

साल 2015 में निक ‘निन्जा हट्टोरी’ और ‘मोटू पतलू’ के एकदम नए एपिसोड पेश करेगा। साथ ही वह जनवरी महीने में पांचवीं फिल्म ‘मोटी पतलू खज़ाने की रेस’ दिखाने जा रहा है। जयपुरिया बताती हैं, “हम ‘मोटू पतलू’ के इर्द-गिर्द कम से कम चार से पांच फिल्में करना चाहते हैं। यह 3डी है तो प्रोड्यूस करने में आसान है।”

किसमस के मौके पर माहौल बनाने के लिए ‘लिफ्ट योर गिफ्ट’ नाम से उपभोक्ताओं को रिझाने का विज्ञापन अभियान चलाया जाएगा। उनका कहना है, “हम फ्रैंचाइज़ी के लिए पांच साल का नज़रिया लेकर चल रहे हैं। एक फ्रैंचाइज़ी को लेकर हम साल भर में 50-70 एपिसोड और 4-5 फिल्में करते हैं।”

जयपुरिया जिक्र करती हैं कि कंटेंट के रूप में कॉमेडी दुनिया भर में अपनी लोकप्रियता की ताकत पर बिकती है। उनका कहना था, “कॉमेडी कंटेंट विश्वस्तर पर भी उपलब्ध नहीं है। एक्शन हमें बहुतायत में मिल जाता है। यही वजह है कि हमने सोनिक को लॉन्च किया क्योंकि हमें पता था कि हमें चैनल के लिए पर्याप्त कंटेंट मिल जाएगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि ज्यादा दाम पर शोज़ खरीदने के बजाय अपना आईपी (बौद्धिक संपदा) बनाने में ज्यादा समझदारी है भले ही उस पर अपेक्षाकृत ज्यादा लागत आए क्योंकि यह पहल सिंडिकेशन और एल एंड एम जैसे आय के नए स्रोत खोल देती है।