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ब्रॉडकास्टरों को राहत, ब्रेक में ही विज्ञापन पर लोढ़ा समिति की सिफारिश नामंज़ूर

मुंबई: खेल ब्रॉडकास्टरों के लिए एक बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति की, एक को छोड़कर बाकी सारी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। मंजूर न की गई सिफारिश में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को प्रसारण अधिकार करार को संशोधित कर यह सुनिश्चित करना था कि विज्ञापन केवल ब्रेक के दौरान ही दिखाएं जाएं।

इस एक सिफारिश से संभावित रूप से खेल ब्रॉडकास्टरों का बिज़नेस मॉडल पूरी तरह से गड़बड़ा जाता क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा विज्ञापन से ही आता है। आय में सब्सक्रिप्शन आय भी शामिल है, लेकिन उसका योगदान अधिक नहीं है।

bcciचीफ जस्टिस टी एस ठाकुर और जस्टिस इब्राहिम कलीफुल्ला की पीठ ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को उसकी प्रसारण नीति और मौजूदा करारों पर नियंत्रण की अनुमति दी।

सुप्रीम कोर्ट को अपनी सिफारिशों में, लोढ़ा पैनल ने सिफारिश की थी कि अंतरराष्ट्रीय टेस्ट और वन-डे मैच वाले सभी मौजूदा करारों को संशोधित कर नए कारार किए जाएं जिससे यह सुनिश्चित हो कि केवल ड्रिंक्स, दोपहर का भोजन और चाय के समय दोनों टीमों द्वारा लिए गए ब्रेक के समय ही और विज्ञापनों को दिखाया जाए, जैसा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होता है।

पैनल ने यह भी सिफारिश की है कि प्रसारण के दौरान स्क्रीन का पूरा हिस्सा खेल के लिए ही समर्पित रहे, सिवाय स्पॉन्सर के एक छोटे से लोगो या साइन को छोड़कर।

पैनल ने इशारा किया था कि बीसीसीआई के द्वारा टीवी अधिकार बेचने के उद्देश्य के पीछे सिर्फ खेल के महत्वपूर्ण क्षणों में विज्ञापन डालने से आय को अधिकतम बनाना और उस समय सभी स्तरों पर असहमति की आवाज़ को दबाना है।

पैनल ने यह भी कहा था कि वाणिज्य ने खेल के आनंद को पीछे छोड़ दिया है और विज्ञापन कई बार आते हैं, कभी तो पहली ही गेंद के बाद आते हैं और फिर अंतिम गेंद के बाद भी जारी रहते हैं, जिससे खेल का पूर्ण और उचित प्रसारण बाधित होता है।

लोढ़ा पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि विकेट गिरा हो, चाहे शतक लगाया गया हो या अन्य महत्वपूर्ण क्षण हों, ब्रॉडकास्टर को ज़्यादा से ज़्यादा आय कमाने के लिए पूरी स्वतंत्रता दी जाती है कि वह एक कमर्शियल के लिए उस क्षण को काट डालते हैं और इस प्रकार खेल की सबसे आकर्षक गुण – भावनाओं को खत्म कर देते हैं।

केवल ब्रेक के दौरान विज्ञापनों के प्रसारण की सिफारिश का बीसीसीआई द्वारा ज़ोरदार विरोध होने कारण यह मुद्दा गर्मा गया था।

बीसीसीआई के प्रमुख पद पर कार्यभार संभालने के तुरंत बाद अनुराग ठाकुर ने क्रिकेट मैचों के लाइव प्रसारण के दौरान विज्ञापन प्रतिबंधों की लोढ़ा पैनल की सिफारिशों पर चिंता जताई थी।

इंडियन एक्सप्रेस ने ठाकुर को यह कहते हुए उद्धृत किया था, “पूर्व क्रिकेटरों को किए गए एकबारगी भुगतान या मासिक आधार पर किए जा रहे भुगतान की ओर देखिए। कहां से वो पैसा आया है? ये पैसा इनसे (विज्ञापन) ही आता है। आप इसे अगर ब्लॉक कर दोगे को किसको भुगतना पड़ेगा? क्या केवल ठाकुर और शिर्के को ही भुगतना पड़ेगा? नहीं, राज्य के एसोसिएशन, पूर्व क्रिकेटर, वर्तमान क्रिकेटरों और आगामी क्रिकेटरों को भुगतना पड़ेगा। कुल मिलाकर पूरे क्रिकेट को इस वजह से नुकसान होगा।”

ब्रॉडकास्टरों ने भी खतरे की घंटियां बजाई थीं। स्टार इंडिया के सीईओ उदय शंकर और सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया के सीईओ एन पी सिंह ने कहा था कि अगर लोढ़ा समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया जाता है तो क्रिकेट के अधिकार मूल्य पर असर पड़ेगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए शंकर ने कहा था कि अगर विज्ञापनों पर सिफारिशें बाध्यकारी हो जाती हैं तो ब्रॉडकास्टर बीसीसीआई के साथ करार पर फिर से बातचीत करेंगे।

उन्होंने कहा था, “अगर सिफारिशें लागू की जाती हैं, तो आय की हिस्सेदारी नाटकीय रूप से नीचे की तरफ संशोधित करनी होगी, और बीसीसीआई को कम मूल्य के साथ रहने के लिए तैयार होना होगा। अगर दरें नीचे जाती हैं, हम बीसीसीआई के साथ करार पर फिर से बातचीत करेंगे।”

यह माना गया कि चूंकि सिफारिशें केवल बीसीसीआई आयोजित इवेंट्स के लिए ही बाध्यकारी होंगी तो ऐसी स्थिति में ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और आईसीसी जैसे अन्य बोर्डों के टीवी अधिकार का मूल्य काफी बढ़ जाएगा।

उन्होंने कहा था, “इसका क्रिकेट के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर भारी असर होगा। हमें क्रिकेट से इतना प्यार है, पर हम ध्यान रखें कि कोई इसके लिए भुगतान करता है। किसी को यह पसंद हो या नहीं, आज क्रिकेट का अर्थशास्त्र भारत द्वारा समर्थित है चाहे वह दर्शकों की संख्या या खेल के वित्तीय पहलू के माध्यम से हो रहा है। और अगर यह बदलता है, तो खेल का पूरा अर्थशास्त्र बदल जाएगा।”

इस डर से कि पैनल की सिफारिशों को उनकी गाढ़ी कमाई वाले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) पर भी लागू किया जा सकता है, एसपीएनआई के सीईओ एन पी सिंह ने कहा था कि आईपीएल का मूल्य गिरेगा क्योंकि खेल प्रॉपर्टी और ब्रॉडकास्टर द्वारा कमाई जाने वाली विज्ञापन आय के बीच सीधा संबंध है।

सिंह ने कहा था, “वर्तमान डिस्ट्रीब्यूशन परिदृश्य देखते हुए जहां कोई एड्रैसेबिलिटी नहीं है, किसी भी तरह की इनवेंटरी में कमी से प्रॉपर्टी के मूल्य में कमी आएगी। अगर सिफारिशें लागू होती हैं, तो हम अगली बार प्रॉप्रटी की बोली लगाते समय ध्यान रखेंगे।”

जनवरी 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के कामकाज की जांच-पड़ताल के लिए और अधिक पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से संरचनात्मक परिवर्तन करने के लिए सुझाव देने के लिए जस्टिस आरएम लोढ़ा की नियुक्ति की थी।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति की अन्य प्रमुख सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। जैसे बीसीसीआई के सदस्यों में मंत्री नहीं शामिल हो सकते, बीसीसीआई में 70 वर्ष से ज़्यादा उम्र के व्यक्ति पद पर नहीं रह सकते, एक राज्य का केवल एक वोट होगा और बीसीसीआई में ऑडिटिंग के लिए कम्प्ट्रॉलर एंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) का एक उम्मीदवार होगा। बीसीसीआई को आरटीआई के दायरे में लाने के लिए और सट्टेबाजी को वैध बनाने का निर्णय सरकार पर छोड़ दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को इन परिवर्तनों को लागू करने के लिए छह महीने का समय दिया है।