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दक्षिण भारत के टीवी बाज़ार की खासियत व लटके-झटके अलग हैं हिंदी बाज़ार से

मुंबई: दक्षिण भारतीय राज्यों में आंध्र प्रदेश / तेलंगाना, तमिलनाडु / पुडुचेरी, कर्नाटक और केरल के टेलिविज़न दर्शक हिंदी भाषी बाज़ार (एचएसएम) से तुलना में पहले टीवी देखते हैं। रेटिंग एजेंसी बीएआरसी इंडिया की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार वे एचएसएम से पहले टीवी देखना बंद भी कर देते हैं।

दक्षिणी राज्यों में केवल सुबह 5 बजे से 8 बजे के बीच सुबह के घंटों के दौरान एचएसएम की तुलना में अधिक दर्शक संख्या होती है। उसके बाद, एचएसएम के दर्शकों की संख्या दिन भर में लगातार ज़्यादा होती है।

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Source : BARC

रिपोर्ट के अनुसार एचएसएम और दक्षिण के बीच का अंतर शाम 6 बजे से रात 9 बजे के दौरान मामूली रूप से कम होता है।

एचएसएम में दिन भर में पहुंच ज़्यादा रहती है जबकि दक्षिण भारत में सुबह के समय में अधिक पहुंच (5-8 बजे) रहती है। यह, ऐसा इसलिए है कि एचएसएम में दक्षिणी राज्यों की तुलना में टीवी वाले घरों की संख्या ज़्यादा है।

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Source : BARC

जॉनर के लिहाज से दर्शक संख्या हिस्सेदारी के मामले में, दक्षिण भारत में जीईसी के मुकाबले कम फिल्मे देखी जाती हैं, जबकि माना यह जाता रहा है कि दक्षिण में फिल्मों का एक बड़ा उपभोक्ता वर्ग है। दूसरी ओर, जीईसी और न्यूज़ चैनलों की उनकी हिस्सेदारी एचएसएम की तुलना में अधिक है।

जॉनर की लोकप्रियता

धारावाहिक और फिल्म आधारित कार्यक्रम, एचएसएम और दक्षिण में सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम हैं, लेकिन फिल्म आधारित प्रोग्रामिंग में एचएसएम की तुलना में दक्षिण में ज़्यादा हिस्सेदारी है।

न्यूज़/बिज़नेस, खेल/बातचीत/प्रश्नोत्तरी और विविध प्रोग्रामिंग की दक्षिण में ज़्यादा हिस्सेदारी है, जबकि धारावाहिक, खेल और म्यूज़िक की एचएसएम में ज़्यादा हिस्सेदारी है।

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केरल को छोड़कर सभी अन्य दक्षिणी राज्यों में धारावाहिकों के मुकाबले फिल्म आधारित कार्यक्रमों की ओर झुकाव है।

आंध्र प्रदेश / तेलंगाना औऱ उसके बाद तमिलनाडु / पुडुचेरी में कर्नाटक और केरल की तुलना में न्यूज़ कंटेंट के ज़्यादा दर्शक हैं। आंध्र प्रदेश / तेलंगाना में खबरों के दर्शकों की संख्या दो अंकों में है।

खेल कंटेंट के दर्शकों की संख्या लगभग एक समान है, सिर्फ कर्नाटक थोड़ा-सा आगे है।

खेल/ बातचीत/ प्रश्नोत्तरी कंटेंट की आंध्र प्रदेश/तेलंगाना और केरल में अधिक मांग है।

विविध कंटेंट की कर्नाटक और केरल में अधिक लोकप्रियता है। कंटेंट प्रकृति/पर्यटन पर आधारित है और म्यूज़िक, दक्षिण के सबसे कम लोकप्रिय जॉनरों में से है।

एटीएस बनाम ओटीएस

कार्यक्रम के विषय चार राज्यों में एक समान रहते है। धारावाहिकों का सभी चार राज्यों में एटीएस के संदर्भ में सर्वोच्च स्कोर है। ओटीएस के संदर्भ में, यह केवल फिल्म आधारित कंटेंट के बाद दूसरे नंबर पर है, केरल में इसकी अधिकतम ओटीएस है।

उच्चतम ओटीएस के बावजूद, फिल्म आधारित कंटेंट की धारावाहिकों की तुलना में कम एटीएस है।
विविध और न्यूज़/बिज़नेस आधारित कंटेंट का एटीएस और ओटीएस दोनों पर औसत दर्जे का स्कोर है। एटीएस और ओटीएस दोनों के मामले में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले कंटेंट विषयों में म्यूज़िक, प्रकृति/पर्यटन और लाइफ स्टाइल शामिल हैं। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में ओटीएस और एटीएस के मामले में अधिक समानता है, जबकि कर्नाटक और केरल एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं।

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विज्ञापन केटेगरी

फूड और बिवरेज (एफ एंड बी) दक्षिणी बाज़ार में केरल की वजह से सबसे ज़्यादा देखी जाने वाली विज्ञापित केटेगरी है। अगले बड़ी केटेगरी पर्सनल केयर/हायजीन है, जो कर्नाटक के कारण आगे है।
कुल मिलाकर सबसे कम लोकप्रिय केटेगरी में सौंदर्य प्रसाधन हैं ऑफिस ऑटोमेशन, नियुक्तियां हैं।

उदाहरण के लिए, एफ एंड बी आन्ध्र प्रदेश/तेलंगाना बाज़ार में सबसे बड़ी केटेगरी है, जबकि यह अन्य बाज़ारों में लोकप्रिय नहीं है।

पर्सनल केयर/हायजीन और बालों की देखभाल अन्य दक्षिणी राज्यों की तुलना में कर्नाटक में ज़्यादा देखी जाने वाली केटेगरी है।

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Source : BARC

यह इंगित करता है कि दक्षिणी राज्यों के बीच कर्नाटक समृद्ध कंटेंट और फैशन के प्रति झुका हुआ है।

शहरी बनाम ग्रामीण

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में दर्शकों की संख्या दिन भर में बराबर बनी रहती है, दोनों जगह दर्शक संख्या प्राइमटाइम में बढ़ जाती है। हालांकि, प्राइमटाइम में यह संख्या मुख्य रूप से ग्रामीण बाज़ारों से आती हुई प्रतीत होती है।

शहरी बाज़ारों में, विभिन्न बाज़ारों में दर्शकों की संख्या प्राइमटाइम के घंटों और गैर-प्राइमटाइम घंटो के बीच अलग-अलग है। गैर-प्राइमटाइम में, आंध्र प्रदेश/तेलंगाना में अधिकतम दर्शक संख्या है।

हालांकि, प्राइमटाइम में, यह पूरी तरह से बदल जाता है। शहरी कर्नाटक में रात 9 बजे के बाद से अधिकतम दर्शक होते हैं और वे देर रात तक बने रहते हैं।

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Source : BARC

कर्नाटक में प्राइमटाइम दर्शक संख्या ग्रामीण बाज़ारों जैसी ही है। अपेक्षाकृत छोटे बाज़ार केरल में देर रात के घंटे के दौरान सबसे ज़्यादा दर्शकों की संख्या देखने को मिलती है। इसके विपरीत, गैर-प्राइमटाइम में बड़े बाज़ारों में तमिलनाडू/ पांडिचेरी है जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों बाज़ारों में प्राइमटाइम में सबसे कम दर्शक संख्या होती है।

अंतर शाम 6 बजे के बाद से ज़्यादा बढ़ता है। प्राइमटाइम (शाम 6 से रात 10 बजे) के दौरान दक्षिण ग्रामीण बाज़ार की दक्षिण शहरी बाज़ार की तुलना में काफी अधिक पहुंच है। इसके विपरीत, रात 10 बजे के बाद दक्षिण शहरी बाज़ार की पहुंच दक्षिण ग्रामीण की तुलना में अधिक है।

एटीएस के संदर्भ में, दक्षिण शहरी और दक्षिण ग्रामीण बाज़ार एक दूसरे के लगभग बराबर रहे हैं। शहरी बाज़ार के कुछ समय बैंड में ग्रामीण के मुकाबले बहुत ही मामूली बढ़त है। केरल में दक्षिण ग्रामीण बाज़ार प्राइमटाइम में ही ऊपर होता है।

दक्षिण ग्रामीण बाज़ार प्राइमटाइम घंटों (शाम 7.30 से रात 8.30 बजे) में दक्षिण शहरी बाज़ार की तुलना में उच्च एटीएस रिपोर्ट करते हैं।

दक्षिणी चैनलों पर हिंदी में डब किया गया कंटेंट

कन्नड़ जीईसी को छोड़कर सभी दक्षिणी राज्यों के जीईसी हिंदी में डब किया गया कंटेंट प्रसारित करते हैं। प्रमुख चैनलों से लोकप्रिय शो जैसे स्टार प्लस (‘दीया और बाती हम’, ‘सिया के राम’, आदि), कलर्स (‘नागिन’, ‘ससुराल सिमर का’, ‘बालिका वधू’, आदि), ज़ी टीवी (‘गंगा’, ‘कुमकुम भाग्य’, ‘एक मुट्ठी आसमान’, आदि) और सोनी (‘सीआईडी’, ‘बड़े अच्छे लगते हैं’, आदि) के डब किए गए शो प्रारित होते हैं।

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Source : BARC

दिलचस्प है कि आन्ध्र प्रदेश / तेलंगाना बाज़ार में कोई भी चैनल पर हिंदी में डब कंटेंट के लिए दर्शक संख्या में वृद्धि नहीं दर्ज करते। अन्य दो बाज़ारों, अर्थात केरल और तमिलनाडु / पुडुचेरी में, हिंदी में डब कंटेंट पर मिश्रित प्रतिक्रिया दिखती है। यहां क्षेत्रीय भाषा में मूल कंटेंट की तुलना में कुछ चैनलों पर अधिक दर्शक संख्या दिखती है।

केरल में उच्चतम संख्या एशियानेट प्लस पर देखने को मिलती है।

इसी तरह, तमिलनाडु/ पुडुचेरी बाज़ार में अधिकतम वृद्धि पॉलिमर पर दर्ज होती है जहां हिंदी में डब कंटेंट के लिए मूल कंटेंट के मुकाबले दर्शकों की संख्या दोगुनी से भी अधिक है। ऐसा कई लोकप्रिय शो के बल पर है।