लाइव पोस्ट
चीन में शुरू हुआ दुनिया का सबसे ऊंचा पुल, 14.40 करोड़ डॉलर से बना
नोटबंदी को लेकर तृणमूल कांग्रेस का पीएम मोदी पर कटाक्ष- 'उम्मीद है कल बड़ी घोषणा करेंगे'
सीतापुर में यात्रियों से भरी बस नदी में पलटी, बचाव कार्य जारी
झारखंड में कोयला खदान के अंदर फंसे मजदूर, 10 शव निकाले गए
दिल्ली हाई कोर्ट ने शादियों के लिए बैंक खाते से 2.5 लाख रुपए निकालने के खिलाफ याचिका खारिज़ की
संसद के दोनों सदनों में नोटबंदी के खिलाफ विपक्षी दलों का हंगामा जारी
घोषित काले धन पर लगेगा 50% टैक्स, लोकसभा ने आयकर अधिनियम में संशोधन पास किया

अनिल अंबानी के मीडिया व मनोरंजन बिजनेस का परदा सिमटता जा रहा है

मुंबई: अनिल अंबानी के मीडिया व मनोरंजन बिजनेस का पटाक्षेप होता जा रहा है। हाल ही में उनके समूह ने अपनी टीवी आस्तियां ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ज़ेडईईएल) और एफएम रेडियो बिजनेस का 49 प्रतिशत स्वामित्व ज़ी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड (ज़ेडएमसीएल) को बेचने का निर्णय लिया है। ये दोनों ही कंपनियां सुभाष चंद्रा प्रवर्तित एस्सेल समूह की है।

Anil-Ambani-150x150ज़ी मीडिया के पास अंबानी की रेडियो कंपनी की बाकी 51 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी भी तीन साल की लॉक-इन अवधि के बाद खरीदने का विकल्प है। यह सौदा कुल 1592 करोड़ रुपए में होना तय पाया गया है।

अनिल अंबानी के टीवी ब्रॉडकास्टिंग बिजनेस में दो मनोरंजन चैनल – बिग मैजिक और बिग गंगा शामिल हैं। इन्हें 298.4 करोड़ रुपए में बेचा जा रहा है। ज़ी एंटरटेनमेंट इस सौदे के तहत विलय हो रही कंपनियों के ऋण (करीब 295 करोड़ रुपए) की अदायगी की ज़िम्मेदारी लेगी और तीन साल के भीतर रिडीम किए जानेवाले 6 प्रतिशत अनलिस्टेड प्रेफरेंस शेयर जारी (कुल 3.95 करोड़ रुपए) करेगी। रिलायंस के टीवी बिजनेस का संचित घाटा 31 मार्च 2016 तक 650 करोड़ रुपए पर पहुंच चुका था।

Sam-Ghoshसौदे से मिली रकम का इस्तेमाल अनिल अंबानी का समूह ऋण का बोझ उतारने में करेगा। रिलायंस कैपिटल के कार्यपालक निदेशक और ग्रुप सीईओ सैम घोष का कहना, “हम अपना शत-प्रतिशत सामान्य मनोरंजन टीवी बिजनेस ज़ी एंटरटेनमेंट को सौंपकर खुश हैं। यह सौदा मूल बिजनेस से इतर धंधों से बाहर निकलने की हमारी रणनीति का हिस्सा है और इससे रिलायंस कैपिटल के ऋण को कम करने में मदद मिलेगी।”

दरअसल, भारी ऋणों के बोझ से दबा रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (आर-एडीएजी) मीडिया जैसे अपने परिधि के बिजनेसों से निकलने की कोशिश में लगा हुआ है। वो रिलायंस एंटरटेनमेंट के अंतर्गत चलाए जा रहे फिल्म प्रोडक्शन बिजनेस से पहले ही निकल चुका है।

समूह की दूरसंचार इकाई रिलायंस कम्युनिकेशंस अपने डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) बिज़नेस रिलायंस डिजिटल टीवी को भी निकालने में लगी हुई है। इसके सब्सक्राइबरों में लगातार तीन तिमाहियों से कोई इजाफा नहीं देखा गया है। रिलायंस डिजिटल टीवी का सब्सक्राइबर आधार 50 लाख पर अटक कर रह गया है।

इस टीवी प्रसारण कारोबार को अपना पहला गंभीर झटका तब लगा था, जब विदेशी भागीदारों सीबीएस और आरटीएल कंपनी ने उसके साथ 2015 में अपने-अपने संयुक्त उपक्रम बंद किए थे।

पहले अमेरिकी प्रसारण नेटवर्क सीबीएस जनवरी 2014 में आरबीएनएल के साथ बराबर हिस्सेदारी वाली जेवी से बाहर निकल गया और उसके बाद यूरोप का आरटीएल उसी वर्ष जुलाई में बिग आरटीएल जेवी से बाहर निकल गया।

सीबीएस के साथ संयुक्त उद्यम के तहत संचालित चैनलों को बंद कर दिया गया है, जबकि आरटीएल को पुरुष केंद्रित युवाओं के चैनल बिग थ्रिल के रूप में रीब्रांड किया गया था।

बिग सीबीएस जेवी के अंत के बाद, रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क लिमिटेड स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्ट हो गया।

समूह का मीडिया और मनोरंजन कारोबार फिल्म और टीवी के लिए प्रोडक्शन, गेम्स और नए मीडिया/इंटरनेट तक सीमित है।

रिलायंस एक न्यूज़ और समसामयिक मामलों का चैनल, बीटीवीआई भी चलाता है जो ज़ी के साथ हुए लेनदेन का हिस्सा नहीं है। अंबानी इस कंपनी में हिस्सेदारी कम करने की कोशिश में लगे हुए हैं।

अन्य कंपनियों में फिल्मों और मनोरंजन सेवाओं की कंपनी रिलायंस मीडिया वर्क्स, गेम डेवलपर रिलायंस गेम्स और फिल्म निर्माण कंपनी रिलायंस एंटरटेनमेंट शामिल हैं।

फिल्मों में, रिलायंस एंटरटेनमेंट ने फैंटम फिल्म्स के साथ एक बराबर की हिस्सेदारी वाले जेवी का गठन किया है। अंतर्राष्ट्रीय फिल्म बिज़नेस के लिए, इसने हॉलीवुड निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग की ड्रीमवर्क्स से भागीदारी कर एम्ब्लिन पार्टनर्स का गठन किया है जो फिल्म, टीवी और डिजिटल कंटेंट के निर्माण में है।

फिल्म और मीडिया सेवाओं में रिलायंस मीडिया वर्क्स ने प्राइम फोकस लिमिटेड (पीएफएल) के साथ हाथ मिलाया है ताकि फिल्म, विज्ञापन और टेलिविज़न उद्योग के पार विज़्युअल इफैक्ट्स, स्टीरियो 3 डी रूपांतरण, एनीमेशन और क्लाउड-आधारित डिजिटल सोल्यूशन देने के लिए दुनिया के सबसे बड़े और सबसे एकीकृत मीडिया सर्विस ग्रुप बनाया जा सके जिसके 20 जगहों पर 5500 से अधिक प्रोफेशनल हों।

सितंबर 2015 में, रिलायंस गेम्स ने अपनी मोबाइल गेमिंग कंपनी झपाक मोबाइल गेम्स की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी को 1.5 करोड़ में लीड इस्टर्न ग्रुप ऑफ चाइना को बेच दिया।

दूसरी तरफ उसने लीड इस्टर्न ग्रुप ऑफ चाइना और क्रिएटिव कल्चरल ऑफ हांगकांग के साथ एक संयुक्त उद्यम का गठन किया जिसके तहत वह झपाक द्वारा खरीदी गई और मालिकाना हक वाली इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के आधार पर मोबाइल गेम्स को क्रिएट करने, चलाने और मार्केट करने का काम करेगी।

रिलायंस एंटरटेनमेंट ने हाल ही में एक नई डिजिटल मीडिया कंपनी में निवेश किया है। फनोंगो नामक इस कंपनी ने अपने एक में ही सारा मनोरंजन वाला पहला बहुभाषी ऐप ‘चिलैक्स’ का लॉन्च किया है। यह एक सब्सक्रिप्शन आधारित फिल्म स्ट्रीमिंग सेवा बिग फ्लिक्स का भी मालिक है।