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टीवी पर स्पोर्ट्स देखने वालों की संख्या और स्पॉन्सरशिप भारत में बढ़ी है जमकर

मुंबई: रियो ओलम्पिक में निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद भारतीय खेलों के क्षेत्र में दर्शकों की संख्या, स्पॉन्सरशिप व भागीदारी के मामले में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, अन्य खेलों भी बढ़त का रुझान देखा जा रहा है।

केपीएमजी-सीआईआई की ताज़ा रिपोर्ट ‘खेल के बिज़नेस’ के अनुसार 2015 में, भारतीय खेल स्पॉन्सरशिप बाज़ार पिछले साल से 12.6 प्रतिशत बढ़कर 5190 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

ऑन एयर स्पॉन्सरशिप बाज़ार के 52 प्रतिशत हिस्से के लिए ज़िम्मेदार है और प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) और इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) जैसे नए फॉर्मैट से मज़बूत वृद्धि देखने को मिली।

रिपोर्ट में बताया गया है कि टेलिविज़न खेल दर्शकों की संख्या 2014 और 2015 के बीच 30 प्रतिशत बढ़ी। ग्रामीण दर्शकों ने मज़बूत वृद्धि दर्ज की है। रणबीर सिंह और अभिषेक बच्चन जैसे टीम मालिक और मशहूर हस्तियों द्वारा इस वृद्धि में मदद मिली। महिला दर्शकों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।

भारतीय खेल क्षेत्र सरकार, निजी क्षेत्र और गैर सरकारी संगठनों द्वारा किए जा रहे चौतरफा विकास से बड़े परिवर्तन की कगार पर है। दर्शकों की संख्या बढ़ाना, स्पॉन्सरशिप और क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में भागीदारी, खेल स्टार्ट-अप की बढ़ती संख्या और ग्रामीण दर्शकों की संख्या में वृद्धि, ये सब भारत में इस क्षेत्र के विकास के कारकों के ट्रैंड्स हैं।

खेल बिज़नेस और मनोरंजन के चेयरमैन और डेम्पो शिप-बिल्डिंग और इंजीनियरिंग के सीएमडी श्रीनिवास डेम्पो ने सीआईआई सम्मेलन में कहा, “पिछले 5 से 7 साल कुछ बुनियादी बदलाव के साथ भारत में खेल उद्योग के लिए सबसे गतिशील रहे हैं। खेल न केवल निवेशकों को सक्रिय ब्रांडिंग और मार्केटिंग अवसर प्रदान करता है, बल्कि प्रशंसकों के लिए मूल्य भी पैदा करता है। भारत में विभिन्न खेल लीग की उपस्थिति ने कॉरपोरेट सेक्टर से ज़बरदस्त समर्थन को आमंत्रित किया है। इस पृष्ठभूमि में, सीआईआई मुंबई में खेल बिज़नेस और मनोरंजन पर सम्मेलन का आयोजन करने पर गर्व महसूस कर रहा है।”

कई खेल में लीग-आधारित इवेंट्स के द्वारा प्राप्त शुरुआती सफलता से महत्वपूर्ण संकेत मिलते हैं कि भारतीय क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों के उपभोग की संभावना बढ़ी है। भारत में लीग फॉर्मैट की इस तरह की बढ़ी लोकप्रियता को रिपोर्ट में जगह मिली है। लीग संस्कृति अमेरिका और यूरोप की तुलना में भारत में अपनी नवजात अवस्था में है। आईपीएल ने भारत में एक लीग की पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए एक सफल मॉडल की स्थापना की है। 2014 के साल में पीकेएल, आइएसएल, आईपीटीएल और सीटीएल जैसी कुछ संभावित सफल लीग का उदय हुआ।

ये खेल के भविष्य के लिए उत्साहजनक ट्रैंड्स हैं। हालांकि, लीग के बिज़नेस में ऊंचे निवेश की ज़रुरत होती है और लाभ हासिल करने में लंबा समय लगता है। रिपोर्ट में लीग में टीम की सफलता के लिए, खेल के मैदान में अच्छे प्रदर्शन के अलावा प्रशंसक सगाई और मार्केटिंग, सेलिब्रिटी प्रभाव, भौगोलिक स्थिति और बेहतर समग्र प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया गया है।

केपीएमजी इंडिया के पार्टनर और परिवहन, अवकाश और खेल के हेड जयदीप घोष ने कहा, “देश में खेल क्षेत्र एक महत्वपूर्ण संक्रमण से गुज़र रहा है। फ़रवरी 2016 में, सरकार ने खेल के बुनियादी ढांचे को एक उद्योग का दर्जा दिया है, जिससे निजी क्षेत्र से निवेश आकर्षित करने की उम्मीद है। अब इसकी भूमिका सिर्फ कॉरपोरेट सामाजिक ज़िम्मेदारी (सीएसआर) वाली गतिविधियों और गैर सरकारी संगठनों तक ही सीमित नहीं है।”

रिपोर्ट में प्रशासन, खेल की इवेंट्स और अन्य के बीच में बुनियादी ढांचे के विकास के क्षेत्रों में भारत में खेल पारिस्थितिकी तंत्र की समस्याओं की पहचान की गई है और उससे निपटने के लिए सिफारिशें भी पेश की गई हैं। यह प्रमुख शासी संस्थाओं की भूमिकाएं और जिम्मेदारियों के साथ, भारत में खेलों की प्रशासन संरचना का एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

घोष ने कहा, “खेल की दुनिया में एक गंभीर प्लेयर के रूप में उभरे, इससे पहले भी भारत को एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है। 2016 रियो ओलंपिक में प्रदर्शन के बाद, देश को हकीकत का सामना करना पड़ रहा है। भारत में खेलों के विकास के लिए एक मज़बूत नींव शुरू करने के लिए, देश को तीन प्रमुख कारकों पर ध्यान देने की ज़रुरत है – प्रशासन और बुनियादी ढांचे के पहलुओं में सुधार, एक खेल संस्कृति का निर्माण और मेडल जीतने पर फोकस दृष्टिकोण।”

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया कि खेलों में कॉरपोरेट निवेश भारत में विकास के लिए ज़रूरी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि खेल सभी पैमानों पर एक ध्यान देने योग्य क्षेत्र के रूप में पिछले कुछ सालों में विकसित हुआ है, साथ ही यह कई तरह के करियर और बिज़नेस के अवसरों को भी पेश करता है। इसके अलावा, खेल समग्र स्वास्थ्य और देश की भलाई में सुधार की दिशा में काफी योगदान करता है।

रिपोर्ट में भारत में खेल परिदृश्य के इन प्रोत्साहनकारी पहलुओं को हाइलाइट किया गया है:

  • भारतीय खेलों में दर्शकों की संख्या (टीवी) 2014 और 2015 के बीच दो साल के समय में 30 प्रतिशत बढ़ी।
  • 2015 में, भारतीय खेल स्पॉन्सरशिप बाज़ार साल-दर-साल 7 प्रतिशत से बढ़कर 5,190 करोड़ रुपए हुआ।
  • भारत में खेल की खपत लीग के रूप में और अंतरराष्ट्रीय खेल को कई प्लेटफार्मों पर मज़बूत समर्थन मिलने के साथ बढ़ रही है। भारत, लीग की अवधारणा अपनाने में देर से आने वाला देश रहा है, पर यह तेज़ी से बढ़ रहा है। चल रही 11 लीग में से नौ 2013 से 16 के दौरान शुरू की गई थी और दो और की योजना 2016 में बनाई गई है।
  • क्षेत्रीय खेल दिलचस्प लीग फॉर्मैट में, पैकेज खेल के रूप में ग्रामीण दर्शकों की अच्छी संख्या जुटाने में सफल रहे हैं।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि बुनियादी ढांचा, इवेंट्स, प्रशिक्षण और मेन्यूफैक्चरिंग और खेल के सामान के रिटेल बाज़ार से बना वैश्विक खेल बाज़ार 8-44.2 अरब रुपए होने का अनुमान है जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1 प्रतिशत आंका गया है।

रिपोर्ट में हाइलाइट किए गए वैश्विक खेल के क्षेत्र को चलाने वाले कुछ दिलचस्प ट्रैंड्स ये हैं:

  • टेक्नोलॉजी ने धीरे-धीरे अपनी उपस्थिति खेल बिज़नेस के पूरी मूल्य श्रृंखला में एप्लिकेशन के माध्यम से दर्ज कराई है।
  • अन्य उद्योगों की तरह सोशल मीडिया खेल के क्षेत्र में भी एक खेल परिवर्तक के रूप में काम कर रहा है। खिलाड़ियों की एक बड़ी संख्या भी अपने प्रशंसकों के साथ कनेक्ट होने के लिए और उनके ब्रांड एंडोर्समेंट का समर्थन करने के लिए इस माध्यम का उपयोग कर रही हैं।
  • खेल के प्रति समर्पित उत्साहियों में से विश्व स्तर पर, 45 प्रतिशत ऑनलाइन खेल कंटेंट को देखने पसंद करते हैं।

खेल इवेंट्स को देखने में विश्व स्तर पर महिला दर्शकों की संख्या में वृद्धि हुई है। भारत में भी महिलाएं तेज़ी से दर्शक संख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं।