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ज़ी मीडिया अनिल अंबानी के बिग एफएम का 49% हिस्सा लेकर रेडियो बिजनेस में

मुंबई: सुभाष चंद्रा प्रवर्तित एस्सेल समूह अनिल अंबानी की कंपनी रेडियो में 49 प्रतिशत मालिकाना खरीदकर एफएम रेडियो बिजनेस में उतर रहा है और उसके पास बाकी 51 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी भी तीन साल की लॉक-इन अवधि के बाद खरीदने का विकल्प है।

एफएम रेडियो बिजनेस (92.7 बिग एफएम) में स्वामित्व का हिस्सा एस्सेल समूह की टीवी न्यूज़ ब्रॉडकास्ट कंपनी, ज़ी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड (ज़ेडएमसीएल) के जरिए खरीदा जाएगा, न कि समूह का मनोरंजन बिजनेस चला रही कंपनी ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ज़ेडईईल) के जरिए। ऐसा एफएम रेडियो में 49 प्रतिशत की एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) सीमा के चलते किया जा रहा है।

कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “ज़ेडईईएल एफडीआई सीमा के कारण रेडियो बिजनेस का अधिग्रहण नहीं कर सकती थी। न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग कंपनी होने के नाते, ज़ेडएमसीएल एफडीआई नियमों के अधीन आती है और आसानी से रेडियो बिजनेस को अपने अंदर सोख सकती है।”

रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क लिमिटेड (आरबीएनएल) अपने 45 कार्यरत और 14 नए लाइसेंस विशेष मकसद से बनाई गई दो इकाइयों (एसपीवी) – वृश्विक एंटरटेनमेंट प्रा. लिमिटेड (वीईपीएल) और अज़ालिया मीडिया सर्विसेज़ प्रा. लिमिटेड (एएमएसपीएल) को बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट (बीटीए) के तहत दे देगी। फिर ज़ेडएमसीएल इन दोनों का ही 49-49 प्रतिशत मालिकाना खरीद लेगी।

दोनों एसपीवी में 51 प्रतिशत स्वामित्व रखनेवाली रिलायंस लैंड प्रा. लिमिटेड (आरएलपीएल) और ज़ेडएमसीएल के बीच कॉल व पुट समझौता होगा जिसके तहत वे लॉक-इन अवधि की समाप्ति के बाद इन इकाइयों का बाकी 51 प्रतिशत हिस्सा भी क्रमशः बेच या खरीद सकती हैं। कॉल/पुट विकल्प अप्रैल 2018 से 2020 के बीच अपनाया जा सकता है।

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कंपनियों को उक्त सौदे के लिए सूचना व प्रसारण मंत्रालय के अनुमोदन की ज़रूरत होगा। सौदे के कैलेंडर वर्ष 2017 की दूसरी छमाही में संपन्न हो जाने का अनुमान है।

कुल खरीद 1592 करोड़ रुपए में

यह सौदा कुल 1592 करोड़ रुपए का है। इसमें से आरबीएनएल व वीईपीएल के बीच बीटीए का मूल्य ही 1420 करोड़ रुपए आंका गया है, जबकि आरबीएनएल व एएमएसपीएल के बीटीए का मूल्य 150 रुपए है। वीईपीएल और एएमएसपीएल में 49 प्रतिशत स्वामित्व का एसपीए 10 करोड़ रुपए का है। इसी तरह दोनों एसपीए में कॉल/पुट विकल्प का मूल्य 12 करोड़ रुपए है।

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वीईपीएल को ट्रांसफर किए जानेवाले 45 कार्यरत लाइसेंसों की लॉक-इन अवधि 31 मार्च 2018 को समाप्त हो जाएगी, जबकि 14 नए लाइसेंसों की लॉक-इन अवधि मार्च 2020 में खत्म होने की उम्मीद है। इसका मतलब कि लाइसेंस अगले साल सक्रिय किए जाएंगे।

आय में होनेवाले फायदे

ज़ेडएमसीएल इस अधिग्रहण के ज़रिए फौरन अपनी आय बढ़ा लेगी। लक्ष्य जल्दी ही 1000 करोड़ रुपए की आय का स्तर छू लेने का होगा।

पिछले वित्त वर्ष 2015-16 में ज़ेडएमसीएल और बिग एफएम की सम्मिलित आय 740 करोड़ रुपए रही है। जहां बिग एफएम की आय 305 करोड़ रुपए रही थी, वहीं ज़ेडएमसीएल की आय 435 करोड़ रुपए दर्ज की गई थी।

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चालू वित्त वर्ष 2016-17 की पहली छमाही में दोनों की सम्मिलित आय 347 करोड़ रुपए पर पहुंच चुकी है।

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बीते वित्त वर्ष 2015-16 में ज़ेडएमसीएल और बिग एफएम का सम्मिलित परिचालन लाभ (ब्याज, टैक्स, मूल्यह्रास व अमोर्टाइजेशन से पूर्व लाभ) 194 करोड़ रुपए रहा था।

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जहां बिग एफएम का परिचालन लाभ 116 करोड़ रुपए था, वहीं ज़ेडएमसीएल का परिचालन लाभ 78 करोड़ रुपए ही रहा था।

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चालू वित्त वर्ष 2016-17 की पहली छमाही में दोनों का सम्मिलित परिचालन लाभ 98 करोड़ रुपए रहा है।

सौदे के दूसरे फायदे

ज़ेडएमसीएल का मूल बिजनेस अभी तक न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग का है। इस अधिग्रहण से वह दूसरे बिजनेस में भी पहुंच जाएगी।  एफएम रेडियो के जुड़ जाने से उसकी पूरक व संपूरक दर्शक पहुंच बढ़ जाएगी। इससे वह राष्ट्रीय और स्थानीय दोनों ही स्तरों पर विज्ञापनदाताओं को ज्यादा अच्छी तरह से पकड़ पाएगी।

साथ ही कंपनी को पहले से तैयार बड़ा रेडियो नेटवर्क मिल जाएगा। इससे एकदम नए सिरे से शुरू करने में खर्च होनेवाला उसका समय बच जाएगा। बिग एफएम दूसरे चरण में हासिल 45 स्टेशनों और तीसरे चरण में प्राप्त 14 स्टेशनों के साथ भारत का सबसे बड़ा रेडियो नेटवर्क ऑपरेटर है। वो 1200 से ज्यादा शहरों और 52,000 से ज्यादा गांवों को कवर करता है। प्रति सप्ताह वो 4.3 करोड़ श्रोताओं तक पहुंचता है। हर महीने वो 1600 ब्रांडों को अपने मंच पर पेश करता है।

इस अधिग्रहण से न्यूज़ ब्रॉडकास्टर कंपनी का क्षेत्रीय आधार भी बढ़ जाने की उम्मीद है। इससे कंटेंट बनाने से लेकर विज्ञापन बिक्री तक में उसे फायादा मिल सकता है। साथ ही एफएम रेडियो का ऊंचा परिचालन मार्जिन कंपनी की बैलेस शीट को चमका देगा।

ज़ेडएमसीएल का हिस्सा वित्त वर्ष 2017-18 में 92.7 बिग एफएम की संचालक कंपनियों वीईपीएल और एएमएसपीएल में मालिकाने के हिसाब से 49 प्रतिशत रहेगा। लेकिन इसके अगले वित्त वर्ष 2019-20 में (कॉल/पुट विकल्प पर अमल के बाद) 100 प्रतिशत हो जाएगा, बशर्ते उसे नियामक मंज़ूरियां मिल जाएं।

ZMCL-COO-Rajiv-Singhबिग एफएम में मालिकाना खरीदने के बाबत ज़ेडएमसीएल के सीओओ राजीव सिंह का कहना था, “यह अधिग्रहण न केवल हमारे मौजूदा बिज़नेस का पूरक होगा, बल्कि उसमें तेज़ी से विकास भी करेगा।

फिलहाल हम सफलतापूर्वक 11 न्यूज़ व करेंट अफेयर्स के चैनलों का बुके चला रहे हैं और हमारे पास 59 रेडियो लाइसेंस भी हैं। इसके साथ हम एक बहुत बड़े दर्शक आधार तक पहुंचेंगे और उन्हें विभिन्न मीडिया प्लेटफार्म पर जोड़े रखेंगे। यह अधिग्रहण वांछित बिज़नेस विविधता लाएगा और तेज़ गति से मज़बूत वित्तीय उद्देश्यों को प्राप्त करने में हमें मदद मिलेगी। हमें विश्वास है कि इस निवेश से सभी हितधारकों के लिए मूल्य बढ़ेगा और हम अगले स्तर तक कंपनी को ले जाने के लिए इस रोमांचक यात्रा के लिए तत्पर हैं।”

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यह ज़ी मीडिया का दूसरा बिजनेस विविधीकरण है। इससे पहले कंपनी इंडिया टुडे समूह की घाटे में चल रही ई-कॉमर्स और टीवी शॉपिंग इकाइयों का 80 प्रतिशत स्वामित्व चार सालों में चरणबद्ध तरीके से 165.78 करोड़ रुपए में खरीद कर टीवी शॉपिंग व ई-कॉमर्स के धंधे में उतर चुकी है। कंपनी एक होम-शॉपिंग चैनल लॉन्च करने की योजना बना रही है।

नोट करने की बात यह है कि जहां कंपनी दूसरे क्षेत्रों में उतर रही है, वहीं वो अंग्रेज़ी अखबार डीएनए को चला रहा प्रिंट बिजनेस अलग कर रही है जिसे उसका इरादा शेयर बाज़ार में अलग से लिस्ट कराने का है।

ज़ेडएमसीएस के टीवी बिजनेस में 10 न्यूज़ चैनल हैं। इसमें से तीन राष्ट्रीय और सात क्षेत्री चैनल हैं। इनकी अनुमानित पहुंच 28.17 करोड़ दर्शकों तक है।