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डीपीओ को पीएस चैनल सूचना व प्रसारण मंत्रालय के पास पंजीकृत कराने होंगे: ट्राई

मुंबई: डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटरों (डीपीओ) को अपने प्लेटफॉर्म सेवा (पीएस) चैनलों का पंजीकरण सूचना व प्रसारण मंत्रालय के पास कराना होगा। यह अनुशंसा की है, भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने।

वैसे तो ट्राई की सिफारिश है कि पीएस चैनलों पर कोई सालाना फीस नहीं लगाई जानी चाहिए। लेकिन उसका सुझाव है कि एक बार की पंजीकरण फीस के बतौर प्रति पीएस चैनल 1000 रुपए लिए जाने चाहिए। उसका कहना है कि सूचना व प्रसारण मंत्रालय अपनी अनुशंसित ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली में पंजीकरण फीस जमा कराने के लिए ऑनलाइन पेमेंट गेटवे की व्यवस्था कर सकता है।

ट्राई ने कहा है कि मंत्रालय को सभी डीपीओ के लिए सरल ऑनलाइन प्रणाली लानी चाहिए जिसके ज़रिए वे अपने पीएस चैनलों को उसके पास पंजीकृत करा सकें और भ्रम व अस्पष्टता की सारी स्थिति खत्म हो सके।

ट्राई ने यह भी बताया है कि क्या बुनियादी जानकारियां डीपीओ को उपलब्ध करानी पड़ सकती हैं। इनमें शामिल है – (i) इकाई का नाम; (ii) कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी) द्वारा दी गई कॉरपोरेट पहचान संख्या (सीआईएन); (iii) लाभार्थी मालिकों की पहचान; (iv) कामकाज़ का पता/जगह/क्षेत्र; (v) डीपीओ की श्रेणी और अगर वो केबल ऑपरेटर है तो डैस वाला या बिना डैस वाला; और (vi) दिखाए जानेवाले कंटेंट का स्वरूप/जॉनर।

उसने कहा है कि प्रणाली खुद-ब-खुद पीएस चैनल के पंजीकरण की पावती निकाल देगी और केवल पंजीकरण के बाद ही कोई डीपीओ पीएस चैनल शुरू कर सकता है।

लाइसेंस की अवधि के बारे में नियामक संस्था का कहना कि पीएस चैनल के पंजीकरण की वैधता डीपीओ के ऑपरेटिंग लाइसेंस/पंजीकरण के साथ चलनी चाहिए। अगर डीपीओ के पंजीकरण/अनुमति की अवधि बढ़ती है तो उसके साथ ही पंजीकृत पीएस चैनल की वैधता भी बढ़ जाएगी।

इस तरह पीएस चैनलों के पंजीकरण के नवीकरण की कोई ज़रूरत ही नहीं होगी। लेकिन ट्राई की सिफारिश है कि पीएस चैनल को बंद करने या उसके स्वरूप में किसी बदलाव से पहले डीपीओ को उस चैनल का पंजीकरण खत्म या संशोधित करवाना पड़ेगा।

इसके साथ ही उसका कहना है कि पंजीकरण के हस्तांतरण और प्लेटफॉर्म सेवाओं (पीएस) को साझा करने के लिए किसी अन्य नेटवर्क के साथ इंटरकनेक्ट करने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए।

उसका सिफारिश है कि पीएस उपलब्ध कराने के लिए किसी व्यक्ति या निकाय को भारतीय कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत एक कंपनी का स्वरूप देना होगा।

ट्राई का सुझाव है कि नए रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क के पूरे अनुपालन के अधिकतम 12 महीनों का समय दिया जाना चाहिए।

निगरानी व्यवस्था

जिन पीएस चैनलों का वितरण अखिल भारतीय स्तर पर किया जाएगा, उनकी निगरानी एजेंसी सूचना व प्रसारण मंत्रालय होगा। बाकी मामलों में डीपीओ सभी पीएस चैनल प्रोग्रामों की 90 दिनों की रिकॉर्डिंग रखेंगे। इसके साथ ही उन्हें इन प्रोग्रामों को दिखाए जाने की तारीख से लेकर एक साल तक लिखित लॉग/रजिस्टर रखना होगा।

जरूरत पड़ी तो सूचना व प्रसारण मंत्रालय द्वारा नियुक्त राज्य/ज़िला निगरानी समिति और अधिकृत अफसर रिकॉर्डिंग और रजिस्टर की जांच कर सकता है।

साथ ही इस बात के मद्देनज़र कि गैर-डैस इलाकों में कार्यरत मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों (एमएसओ) और लोकल केबल ऑपरेटरों (एलसीओ) के अलावा सारे डीपीओ सुरक्षा मंजूरी हासिल कर चुके हैं, ट्राई का कहना है कि सूचना व प्रसारण मंत्रालय को सुरक्षा मंजूरी मिलने के पहले किसी भी समय पता चलता है कि ऑनलाइन प्रणाली में पंजीकृत पीएस द्वारा दी जा रही प्रोग्रामिंग सेवा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा या जनहित के खिलाफ जाती है तो मंत्रालय डीपीओ को उस पीएस चैनल या प्रोग्रामिंग सेवा का वितरण रोकने और/या पंजीकरण रद्द करने को कह सकता है।

पेनाल्टी का प्रावधान

ट्राई का सुझाव है कि पीएस संबंधी दिशानिर्देशों के पहले उल्लंघन पर पीएस चैनल के ट्रांसमिशन पर 30 दिन की रोक लगा दी जानी चाहिए। वहीं दूसरे उल्लंघन पर यह रोक 90 दिन की कर देनी चाहिए।

लेकिन अगर तीसरी बार उल्लंघन होता है तो पीएस चैनल का पंजीकरण रद्द कर दिया जाए और उसका प्रसारण किसी भी सूरत में न होने दिया जाए। साथ ही उसके बाद संबंधित डीपीओ द्वारा दिखाए जा सकने वाले पीएस चैनलों की संख्या में उपयुक्त कमी कर दी जाए।